रामटहल चौधरी महाविद्यालय में झारखंड की क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं के संरक्षण पर एक दिवसीय कार्यशाला 26 अक्टूबर कोरामटहल चौधरी महाविद्यालय में झारखंड की क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं के संरक्षण पर एक दिवसीय कार्यशाला 26 अक्टूबर को

रांची: झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और भाषाई विविधता को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से रांची जिले के ओरमांझी स्थित रामटहल चौधरी महाविद्यालय (RTC College) में एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल की जा रही है। महाविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग (TRL Department) के तत्वावधान में “झारखंड की क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम महाविद्यालय परिवार एवं रांची विश्वविद्यालय के सहयोग से महाविद्यालय परिसर में संपन्न होगा।

आयोजकों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्यशाला 26 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम का समय प्रातः 10:00 बजे से संध्या 5:00 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस दौरान विभिन्न सत्रों में भाषाविदों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा राज्य की समृद्ध भाषाई विरासत और उसके भविष्य पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।

भाषाई विविधता और सांस्कृतिक पहचान पर केंद्रित आयोजन

झारखंड राज्य की पहचान यहाँ की विविध जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़ी है। इस कार्यशाला का मुख्य ध्येय राज्य की क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं के अस्तित्व, उनके संरक्षण, संवर्धन तथा भावी दिशा पर गंभीर चिंतन करना है।

कार्यक्रम का मूल संदेश है— “भाषा हैं पहचान, संरक्षण हैं भविष्य”। आधुनिकता और वैश्विक बदलावों के इस दौर में स्थानीय भाषाओं के समक्ष उपस्थित चुनौतियों से निपटने और उनके संवर्धन के लिए इस प्रकार के शैक्षणिक विमर्श अत्यंत आवश्यक और प्रासंगिक माने जा रहे हैं।

कार्यशाला के प्रमुख विचारणीय विषय

कार्यशाला को व्यावहारिक, शोधपरक और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से पाँच प्रमुख विषयों (Themes) का निर्धारण किया गया है:

  1. संरक्षण और संवर्धन: झारखंड की क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की नीतियां एवं रणनीतियां।
  2. साहित्य और लोकसंस्कृति: झारखंडी भाषाओं का साहित्य, लोकगीत एवं लोकसंस्कृति का गहन अध्ययन एवं प्रलेखन।
  3. मातृभाषा में शिक्षा और रोजगार: मातृभाषा में शिक्षा का महत्व, नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत प्रावधान और भाषा के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं।
  4. व्याकरण और भाषाई पहचान: झारखंडी भाषाओं की लिपि, व्याकरण तथा उनकी विशिष्ट भाषाई पहचान को सुदृढ़ करना।
  5. डिजिटल तकनीक और भविष्य: झारखंडी भाषाओं का भविष्य, डिजिटल तकनीक का उपयोग, आधुनिक शोध एवं भाषा नीति का समावेश।

अकादमिक जगत और शोधार्थियों के लिए अवसर

रामटहल चौधरी महाविद्यालय, दड़दाग (ओरमांझी) में आयोजित होने वाली इस कार्यशाला में महाविद्यालय परिवार के साथ-साथ रांची विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं हिस्सा लेंगे।

आयोजन समिति का उद्देश्य युवाओं में अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व की भावना जगाना तथा उन्हें शोध, लेखन एवं भाषा-संस्कृति के संरक्षण के प्रति प्रेरित करना है। डिजिटल युग में स्थानीय बोलियों और भाषाओं को इंटरनेट, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स एवं आधुनिक शोध से जोड़ने की दिशा में यह कार्यशाला एक मील का पत्थर साबित होगी।

महाविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग ने क्षेत्र के शिक्षाविदों, भाषा प्रेमियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से इस एक दिवसीय कार्यशाला में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया है।

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