Latest Post

झारखंड सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर श्री अरवा राजकमल ने नए झारखंड भवन का किया निरीक्षण, पारदर्शी एवं तकनीक-संचालित व्यवस्था विकसित करने पर जोर कालाजार के लक्षणों की पहचान है बचाव की पहली सीढ़ी: झारखंड सरकार कालाजार उन्मूलन की दिशा में तेज़ी से अग्रसर• साहेबगंज, गोड्डा, दुमका एवं पाकुड़ जिले के भी.बी.डी. अधिकारियों का कालाजार से सम्बंधित डॉसियर निर्माण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित• राज्य सरकार वर्ष 2023 में कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल कर लिया है और इसे बनाए रखने कि दिशा में बहु-आयामी प्रयास किए जा रहे हैं।रांची, दिनांक: 28 अप्रैल 2026- झारखंड सरकार कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। राज्य में इस बीमारी के मामलों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, जो स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ रणनीति, समयबद्ध हस्तक्षेप और व्यापक जन-जागरूकता अभियानों का परिणाम है।इसी क्रम में कालाजार प्रभावित चार जिलों, साहेबगंज, गोड्डा, दुमका एवं पाकुड़ के भी.बी.डी. अधिकारियों एवं संबंधित कर्मियों के लिए राष्ट्रीय सरकार दिशानिर्देश अनुसार डॉसियर निर्माण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 एवं 28 अप्रैल 2026 को गोड्डा जिले में आयोजित किया गया, जिसमें जिला एवं प्रखंड स्तर के अधिकारियों जैसे DVBDO, VBDC, FLA, DEO, MOIC, MTS, KTS एवं SI ने भाग लिया।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वर्ष 2018 से 2025 तक के कालाजार से संबंधित आंकड़ों का समेकन, विश्लेषण एवं प्रस्तुतीकरण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। इसमें डेटा संग्रहण, डॉसियर की संरचना, उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण, डिजिटल रिपोर्टिंग तथा निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया।कालाजार (विसरल लीशमैनियासिस) एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य संक्रामक बीमारी है, जो सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलती है। इसके प्रमुख लक्षणों में लंबे समय तक रहने वाला बुखार, अत्यधिक कमजोरी, वजन में कमी, भूख न लगना, पेट (तिल्ली/यकृत) का बढ़ना तथा खून की कमी (एनीमिया) शामिल हैं। समय पर जांच और उपचार न होने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना अत्यंत आवश्यक है।इस अवसर पर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, भी.बी.डी. झारखंड डॉ. बिरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2017-18 की तुलना में वर्तमान में कालाजार के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल कर लिया है और इसे बनाए रखने कि दिशा में बहु-आयामी प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में कालाजार नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें सक्रिय सर्वेक्षण, समय पर जांच एवं निःशुल्क उपचार, सैंडफ्लाई नियंत्रण हेतु नियमित इनडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS) तथा व्यापक जन-जागरूकता अभियान शामिल हैं। इन प्रयासों के कारण राज्य में कालाजार के मामलों में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। डॉ. कुमार ने कहा, “कालाजार उन्मूलन के लिए सटीक एवं प्रमाण-आधारित डाटा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से राज्य में डॉसियर तैयार करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि भारत सरकार के समक्ष झारखंड की प्रगति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।”उन्होंने यह भी बताया कि, “यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल डॉसियर निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत करेगा, बल्कि जिलों में कार्यरत अधिकारियों की क्षमता वृद्धि में भी सहायक होगा। इससे राज्य स्तर पर एक सुसंगत एवं विश्वसनीय रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी।”यह कार्यक्रम राज्य सरकार द्वारा किया गया था और इसे पिरामल स्वास्थ्य द्वारा सहयोग किया गया। इस अवसर पर राज्य एवं जिलों के भी.बी.डी. अधिकारी, कंसल्टेंट्स के साथ ही सहयोगी संस्थाओं यथा- विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य समन्वयक डॉ. अभिषेक पॉल, जोनल समन्वयक डॉ. हसीब, पिरामल स्वास्थ्य, ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे । *ऑड्रे हाउस, रांची में आयोजित तीन दिवसीय “सांसद सांस्कृतिक महोत्सव-सह-स्वदेशी मेला-2026” के उद्घाटन समारोह में सम्मिलित हुए राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार एवं मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन।* झारखंड में लैब सेवाएं होंगी हाईटेक: अब मोबाइल पर मिलेगी जांच रिपोर्ट एनएचएम को मिला छह माह का अवधि विस्तार

झारखंड सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर श्री अरवा राजकमल ने नए झारखंड भवन का किया निरीक्षण, पारदर्शी एवं तकनीक-संचालित व्यवस्था विकसित करने पर जोर

झारखंड सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर श्री अरवा राजकमल ने आज न्यू झारखंड भवन का विस्तृत औचक निरीक्षण कर समग्र व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की।निरीक्षण के दौरान भवन की मेंटेनेंस, हाउसकीपिंग,…

कालाजार के लक्षणों की पहचान है बचाव की पहली सीढ़ी: झारखंड सरकार कालाजार उन्मूलन की दिशा में तेज़ी से अग्रसर• साहेबगंज, गोड्डा, दुमका एवं पाकुड़ जिले के भी.बी.डी. अधिकारियों का कालाजार से सम्बंधित डॉसियर निर्माण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित• राज्य सरकार वर्ष 2023 में कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल कर लिया है और इसे बनाए रखने कि दिशा में बहु-आयामी प्रयास किए जा रहे हैं।रांची, दिनांक: 28 अप्रैल 2026- झारखंड सरकार कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। राज्य में इस बीमारी के मामलों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, जो स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ रणनीति, समयबद्ध हस्तक्षेप और व्यापक जन-जागरूकता अभियानों का परिणाम है।इसी क्रम में कालाजार प्रभावित चार जिलों, साहेबगंज, गोड्डा, दुमका एवं पाकुड़ के भी.बी.डी. अधिकारियों एवं संबंधित कर्मियों के लिए राष्ट्रीय सरकार दिशानिर्देश अनुसार डॉसियर निर्माण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 एवं 28 अप्रैल 2026 को गोड्डा जिले में आयोजित किया गया, जिसमें जिला एवं प्रखंड स्तर के अधिकारियों जैसे DVBDO, VBDC, FLA, DEO, MOIC, MTS, KTS एवं SI ने भाग लिया।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वर्ष 2018 से 2025 तक के कालाजार से संबंधित आंकड़ों का समेकन, विश्लेषण एवं प्रस्तुतीकरण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। इसमें डेटा संग्रहण, डॉसियर की संरचना, उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण, डिजिटल रिपोर्टिंग तथा निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया।कालाजार (विसरल लीशमैनियासिस) एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य संक्रामक बीमारी है, जो सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलती है। इसके प्रमुख लक्षणों में लंबे समय तक रहने वाला बुखार, अत्यधिक कमजोरी, वजन में कमी, भूख न लगना, पेट (तिल्ली/यकृत) का बढ़ना तथा खून की कमी (एनीमिया) शामिल हैं। समय पर जांच और उपचार न होने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना अत्यंत आवश्यक है।इस अवसर पर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, भी.बी.डी. झारखंड डॉ. बिरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2017-18 की तुलना में वर्तमान में कालाजार के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल कर लिया है और इसे बनाए रखने कि दिशा में बहु-आयामी प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में कालाजार नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें सक्रिय सर्वेक्षण, समय पर जांच एवं निःशुल्क उपचार, सैंडफ्लाई नियंत्रण हेतु नियमित इनडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS) तथा व्यापक जन-जागरूकता अभियान शामिल हैं। इन प्रयासों के कारण राज्य में कालाजार के मामलों में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। डॉ. कुमार ने कहा, “कालाजार उन्मूलन के लिए सटीक एवं प्रमाण-आधारित डाटा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से राज्य में डॉसियर तैयार करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि भारत सरकार के समक्ष झारखंड की प्रगति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।”उन्होंने यह भी बताया कि, “यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल डॉसियर निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत करेगा, बल्कि जिलों में कार्यरत अधिकारियों की क्षमता वृद्धि में भी सहायक होगा। इससे राज्य स्तर पर एक सुसंगत एवं विश्वसनीय रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी।”यह कार्यक्रम राज्य सरकार द्वारा किया गया था और इसे पिरामल स्वास्थ्य द्वारा सहयोग किया गया। इस अवसर पर राज्य एवं जिलों के भी.बी.डी. अधिकारी, कंसल्टेंट्स के साथ ही सहयोगी संस्थाओं यथा- विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य समन्वयक डॉ. अभिषेक पॉल, जोनल समन्वयक डॉ. हसीब, पिरामल स्वास्थ्य, ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे ।

*ऑड्रे हाउस, रांची में आयोजित तीन दिवसीय “सांसद सांस्कृतिक महोत्सव-सह-स्वदेशी मेला-2026” के उद्घाटन समारोह में सम्मिलित हुए राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार एवं मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन।*

=========================== *★ स्वदेशी वस्तुओं को निरंतर प्रमोट कर रही राज्य सरकार* *★ झारखंड की समृद्ध कला-संस्कृति  विरासत को संरक्षित करना प्राथमिकता* *★ प्रतिभा की कमी नहीं, इस राज्य के बच्चे…

झारखंड में लैब सेवाएं होंगी हाईटेक: अब मोबाइल पर मिलेगी जांच रिपोर्ट

मेरील कंपनी ने प्रस्तुत किया लैब इनफॉरमेशन सिस्टम, एचएमआईएस से होगा इंटीग्रेशन स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में…

एनएचएम को मिला छह माह का अवधि विस्तार

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कार्यकाल का विस्तार, राज्यों के साथ MoU 30 सितंबर तक बढ़ा नई दिल्ली/राँची: भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय…

कालाजार के निदान एवं प्रबंधन पर एम्स देवघर में कार्यशाला का आयोजन

रांची/देवघर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण (VBD), झारखंड के निर्देशानुसार आज एम्स, देवघर में कालाजार (विसरल लीशमैनियासिस) एवं पीकेडीएल के निदान एवं प्रबंधन पर एक दिवसीय कार्यशाला का…

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में 28 अप्रैल 2026 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय :- ★ W.P.(S) No.-4299/2024 सुदर्शन महतो एवं अन्य बनाम झारखण्ड…

रिम्स की 1 करोड़ रूपये से अधिक की निविदायें जो एसएफसी के बिना स्वीकृति के की गई हैं उनकी होगी उच्च स्तरीय जांच वित्त एवं लेखा समिति की बैठक में कड़े निर्देश बिना एसएफसी की स्वीकृति की वैसी योजनायें जिनकी लागत 1 करोड़ रूपये से अधिक है और नियमानुसार उस पर एसएफसी की स्वीकृति प्राप्त ही टेंडर की जानी है वैसे टेंडर पर सख्ती रिम्स को 3 माह में कैशलेस व पेपरलेस बनाने का लक्ष्य12 मंजिला हॉस्टल, पीपीपी मोड पर रोबोटिक सर्जरी और पीजी हॉस्टल, रिम्स में बड़े बदलाव की तैयारी

बैठक में कुल 15 एजेंडों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें वित्तीय पारदर्शिता, अधोसंरचना विकास, चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और प्रशासनिक सुधार प्रमुख मुद्दे रहे। समिति ने रिम्स द्वारा…

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने जगुआर कैंपस, रिंग रोड रांची में प्रस्तावित दिशोम गुरु शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय परिसर के निर्माण को लेकर अधिकारियों के साथ की बैठक। मौके पर…

*आईपीएच सभागार में विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर हुआ कार्यक्रम*

*हर वर्ष 25 अप्रैल को मनाया जाता है विश्व मलेरिया दिवस* *वेक्टर जनित रोग के उन्मूलन के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले कर्मियों को किया गया सम्मानित* *सम्मान समारोह…

You missed

कालाजार के लक्षणों की पहचान है बचाव की पहली सीढ़ी: झारखंड सरकार कालाजार उन्मूलन की दिशा में तेज़ी से अग्रसर• साहेबगंज, गोड्डा, दुमका एवं पाकुड़ जिले के भी.बी.डी. अधिकारियों का कालाजार से सम्बंधित डॉसियर निर्माण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित• राज्य सरकार वर्ष 2023 में कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल कर लिया है और इसे बनाए रखने कि दिशा में बहु-आयामी प्रयास किए जा रहे हैं।रांची, दिनांक: 28 अप्रैल 2026- झारखंड सरकार कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है। राज्य में इस बीमारी के मामलों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, जो स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ रणनीति, समयबद्ध हस्तक्षेप और व्यापक जन-जागरूकता अभियानों का परिणाम है।इसी क्रम में कालाजार प्रभावित चार जिलों, साहेबगंज, गोड्डा, दुमका एवं पाकुड़ के भी.बी.डी. अधिकारियों एवं संबंधित कर्मियों के लिए राष्ट्रीय सरकार दिशानिर्देश अनुसार डॉसियर निर्माण पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 27 एवं 28 अप्रैल 2026 को गोड्डा जिले में आयोजित किया गया, जिसमें जिला एवं प्रखंड स्तर के अधिकारियों जैसे DVBDO, VBDC, FLA, DEO, MOIC, MTS, KTS एवं SI ने भाग लिया।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वर्ष 2018 से 2025 तक के कालाजार से संबंधित आंकड़ों का समेकन, विश्लेषण एवं प्रस्तुतीकरण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। इसमें डेटा संग्रहण, डॉसियर की संरचना, उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण, डिजिटल रिपोर्टिंग तथा निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया।कालाजार (विसरल लीशमैनियासिस) एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य संक्रामक बीमारी है, जो सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलती है। इसके प्रमुख लक्षणों में लंबे समय तक रहने वाला बुखार, अत्यधिक कमजोरी, वजन में कमी, भूख न लगना, पेट (तिल्ली/यकृत) का बढ़ना तथा खून की कमी (एनीमिया) शामिल हैं। समय पर जांच और उपचार न होने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना अत्यंत आवश्यक है।इस अवसर पर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, भी.बी.डी. झारखंड डॉ. बिरेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2017-18 की तुलना में वर्तमान में कालाजार के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल कर लिया है और इसे बनाए रखने कि दिशा में बहु-आयामी प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में कालाजार नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें सक्रिय सर्वेक्षण, समय पर जांच एवं निःशुल्क उपचार, सैंडफ्लाई नियंत्रण हेतु नियमित इनडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS) तथा व्यापक जन-जागरूकता अभियान शामिल हैं। इन प्रयासों के कारण राज्य में कालाजार के मामलों में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। डॉ. कुमार ने कहा, “कालाजार उन्मूलन के लिए सटीक एवं प्रमाण-आधारित डाटा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से राज्य में डॉसियर तैयार करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि भारत सरकार के समक्ष झारखंड की प्रगति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।”उन्होंने यह भी बताया कि, “यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल डॉसियर निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत करेगा, बल्कि जिलों में कार्यरत अधिकारियों की क्षमता वृद्धि में भी सहायक होगा। इससे राज्य स्तर पर एक सुसंगत एवं विश्वसनीय रिपोर्ट तैयार की जा सकेगी।”यह कार्यक्रम राज्य सरकार द्वारा किया गया था और इसे पिरामल स्वास्थ्य द्वारा सहयोग किया गया। इस अवसर पर राज्य एवं जिलों के भी.बी.डी. अधिकारी, कंसल्टेंट्स के साथ ही सहयोगी संस्थाओं यथा- विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य समन्वयक डॉ. अभिषेक पॉल, जोनल समन्वयक डॉ. हसीब, पिरामल स्वास्थ्य, ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे ।