NHM Jharkhand: स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ की ओर से होटल रेडिसन ब्लू में तीन दिवसीय कार्यशाला का आज से शुभारंभ
NHM Jharkhand: कार्यशाला में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने, पोर्टल पर सटीक रिपोर्टिंग और डेटा गुणवत्ता सुधार पर चल रहा है मंथन
NHM Jharkhand: स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में मैटरनल, पेरीनेटल, चाइल्ड डेथ सर्विलांस एंड रिस्पांस (MPCDSR) विषय पर आधारित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला की शुरुआत मंगलवार से होटल रेडिशन ब्लू में हुई। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में यूनिसेफ से डॉ कनिका मित्रा, एसआरसीएचओ डॉ अश्विनी, राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ विजय किशोर रजक, आईईसी के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ राहुल किशोर सिंह, आईडीएसपी के नोडल पदाधिकारी डॉ प्रदीप कुमार सिंह, डॉ विशाल कटारिया, डॉ वनेश माथुर, डॉ राजेश मेहता समेत सहित अन्य गणमान्य अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
इस अवसर पर NHM Jharkhand: अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए प्रशासनिक सख्ती और जमीनी स्तर पर पूरी ईमानदारी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मृत जन्म (स्टिलबर्थ) और शिशु मृत्यु की सही और वास्तविक स्थिति जानने के लिए सही रजिस्ट्रेशन और रिपोर्टिंग बेहद जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि एसआरएस रिपोर्टिंग और डेटाबेस में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
NHM Jharkhand: के MD श्री शशि प्रकाश झा ने कहा कि योजनाओं का लाभ धरातल पर तभी दिखेगा जब डेटा एंट्री समय पर और सटीक हो। उन्होंने विशेष रूप से बल दिया कि बच्चों की मृत्यु होने पर उसकी सही जिम्मेदारी तय होनी चाहिए तथा इसके लिए जवाबदेही तय करने से अधिकारी पीछे न हटें। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को पूरी मेहनत और पारदर्शिता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी ताकि बच्चों की मृत्यु के कारणों को रोककर स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाया जा सके।
अभियान निदेशक ने सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा या आपातकालीन स्थिति होने पर स्वास्थ्य सहिया और एएनएम द्वारा समय पर सूचना दी जानी चाहिए, ताकि वैकल्पिक एम्बुलेंस व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही, गंभीर रूप से एनेमिक (खून की कमी से पीड़ित) महिलाओं की पहचान कर उन्हें तत्काल उच्च संस्थानों में त्वरित इलाज उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।
NHM Jharkhand: अभियान निदेशक ने गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा और पोषण को सामाजिक सहभागिता से जोड़ने पर भी जोर दिया। उन्होंने समाज में व्याप्त बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता बताई, ताकि बाल विवाह पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। स्वास्थ्य अधिकारियों से अभियान निदेशक ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को उनके परिवार की ओर से पर्याप्त भावनात्मक सहयोग मिले, इस बात पर भी चर्चा होनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को समय पर एंटीनेटल चेकअप करवाने और संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करने हेतु जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश अभियान निदेशक ने दिए।
NHM Jharkhand: तीन दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की सटीक रिपोर्टिंग और डेटा गुणवत्ता सुधार, वास्तविक कारणों की पहचान और गंभीर मामलों की केस स्टडीज पर गहन चर्चा की जा रही है। आज की कार्यशाला के अंत में सभी प्रशिक्षकों को निर्देश दिए गए कि वे यहां प्राप्त प्रशिक्षण को अपने जिलों और प्रखंड स्तर पर पहुंचकर जमीनी स्वास्थ्य कर्मियों तक पहुंचाएं। कार्यशाला का समापन गुरुवार को होगा। कार्यशाला में सभी जिलों से स्त्री रोग, शिशु रोग विशेषज्ञ और स्टाफ नर्स भाग ले रहे हैं।
https://zindagijindabaad.com/sadar-hospital-ranchi-patient-safety-workshop-report/
