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सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों द्वारा किए जाने वाले पोस्टों के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किया गया है विशेष दिशा निर्देश

किसी भी प्रकार की चुनाव संबंधी जानकारी को सार्वजनिक करने से पूर्व समाचार पत्र, टीवी चैनल और मीडिया के अन्य माध्यम तथ्यों की पूरी तरह से जांच कर लें राँची।…

सभी स्वास्थ्य संस्थान लक्ष्य के मानकों पर खरा उतरें – डॉ चंद्रकिशोर शाही

सिजेरियन सेक्शन में गुणवत्ता और सुरक्षा विषय पर समीक्षा सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन रांची। राज्यभर के सभी स्वास्थ्य संस्थान गुणवत्ता के मानकों पर खरा उतरें। इसके लिए आवश्यक चेक…

डीएसपीएमयू के कुड़मालि विभाग में परछन कार्यक्रम मनाया गया

*रांची :* डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रांची में *कुड़मालि भाषा विभाग के पीजी तथा यूजी के नए सत्र के छात्र – छात्राओं के लिए स्वागत समारोह (परछन)* का आयोजन…

डीएसपीएमयू कुड़मालि विभाग के छात्र-छात्राओं का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण संपन्नशनिवार-रबिवार 27-28 जुलाई 2024 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) रांची पीजी तथा यूजी अंतिम वर्ष के छात्रों ने दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण प. बंगाल के पूरूलिया जिला के ऐतिहासिक पंचकोट महाराजा के झालदा, केसरगढ़, कांसीपुर एवं गड़पंचकोट स्थित राजमहल एवं किला का भ्रमण किया। भ्रमण की शुरूआत पंचकोट महाराजा के द्वितीय राजधानी झालदा से शुरूआत की गई। झालदा में स्थित महाराजा के राजदरबार का सभी छात्रों ने गहन अध्ययन किया, जो कि लगभग 1500 वर्ष पुराना माना जाता है।यहां से सभी छात्र-छात्राएं इसके केसरगढ़ स्थित राजधानी गये। वहां कई राजघराना के किलों के अवशेष का निरीक्षण किया, जो कि काफी विध्वंश स्थिति में देखने को मिला। इसके बावजूद यहां पर रानी बांध, इसके समाधि स्थल जहां पर पूजा-अर्चना अब भी होता है। राजा के शास्त्रीय संगीत के वाद्ययंत्र होने के बात स्थानीय लोगों ने होने एवं 10 से अधिक बांध का नाम बतलाया, जिसमें ज्यादातर एक सीध में देखने को मिला।यहां से विद्यार्थी पंचकोट महाराजा के कांसीपुर स्थित राजधानी में स्थित राजबाड़ी का भ्रमण किया। इसके किला काफी अच्छी स्थिति में देखा गया। इस किला के एक भाग में इसके वंशज के एक सदस्य अभी निवास करते हैं। इसके किला के सबसे उपरी छोर में दिशा इंगित करने वाला है। जो कि धातु से बना हुआ है। मुख्य किला के आस-पास कई किला स्थित है जो कि ऊंची चारदिवारी में घिरी हुई है।यहां से विद्यार्थी पंचेत डेम के उस पार वेली पब्लिक स्कूल में रात्रि विश्राम किया। शैक्षणिक भ्रमण के दूसरे दिन 28 जुलाई को पंचेत डेम का भ्रमण किया। यह झारखंड एवं पश्चिम बंगाल के सीमा पर दामोदर नदी पर बना है। डेम के विशालकाय दृश्य देखकर सभी विद्यार्थी दंग रह गये और डेम में सेल्पी लेकर इसको अपने मोबाईल में कैद कर लिये।फिर दोपहर तक पंचकोट महाराजा के तीसरा स्थातंरित राजधानी गड़पंचकोट गया जो कि पंचेत पहाड़ एवं इसके किनारे स्थित है। कहा जाता है कि यहां पांच चरणों में कोट स्थापित होने के कारण इसको पंचकोट कहा जाता है। यह पांचों चरण पहाड़ के ऊंचाई के अनुसार विभक्त किया गया है। इसका अवशेष आज भी है। इसका निरीक्षण छात्रों ने पहाड़ चढ़कर किया। यहां पांच कोटों का गढ़ रहने के इस कारण इस पाहाड़ का नामकरण पंचकोट पहाड़ पड़ा है एवं इस पूरे क्षेत्र को ‘गड़ पंचकोट’ नाम दिया गया।यहां पर कुड़मालि भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं समाज से जुड़े कई साक्ष्य शिल्प कला के रूप में प्राप्त हुआ। जैसे दासांइ पर्व में होने वाले ‘कोहड़ा’ पूजा का प्रतीक, नटुवा नृत्य में प्रयोग होने वाला ‘फरि’, जिलहुड़ का चिन्ह, गुप्त दिरखा (कनगा), बुढ़ा बाबा का स्थल आदि। इसके अलावे पूर्व द्वार, झरना, सैनिक के गुप्त स्थल, जोड़ा हाथी, राजहंस, महाबीर जैसा पत्थर का बना मूर्ति, राजकीय प्रतीक चिन्ह, सबसे शीर्ष स्थल पर महाराजा, मंत्री, सेनापति आदि के बैठने का सभा स्थल, सजा हेतु ढलान पत्थर आदि प्रमुख है। यहां राजमहल के शुरूआत में स्थित एक आदि माइथान का निरीक्षण किया, जिसका आधा से ज्यादा अंश विध्वंश हो चुका था। इसका स्थलीय क्षेत्र लगभग 1.5 किलोमीटर परिधि में फैला हुआ है। उपर्युक्त इन सभी जगहों पर सबों ने किला एवं अवशेषों के सामने सामूहिक फोटो खिंचवाया और रात्रि में वापस विश्वविद्यालय परिसर रांची पहुंचे।इस शैक्षणिक भ्रमण में यूजी और पीजी के कुल मिलाकर 54 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। इनके साथ में कुड़मालि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. परमेश्वरी प्रसाद महतो, सहायक प्राध्यापक डॉ. निताई चंद्र महतो एवं पीएच. डी. शोधार्थी अशोक कुमार पुराण थे।ऐतिहासिक विश्लेषण के अनुसार पंचकोट राज्य के प्रथम राजधानी इस राढ़ भूमि स्थित गड़़ जयपुर (पुरूलिया) था जो कि 52 ई मानी जाती है। यहां पर कई सौ वर्ष राजधानी रहा फिर बाद में यहां से विस्तारित करते हुए झालदा मंे नया राजधानी स्थापित किया। यहां पर काफी लंबे वर्षाें तक राजधानी रहा और लगभग 900-1000 के आसपास यहां से अपनी राजधानी पूर्व की ओर ‘गड़पंचकोट’ में स्थापित किया। गड़पंचकोट में इसका राजधानी लगभग 350 वर्षों तक रहा फिर वहां से मुगलों एवं मराठों के आक्रमण के बाद लगभग 1300 ई. के आसपास यहां से राजधानी केसरगढ़ में स्थापित किया। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पर बहुत लंबे वषों तक राजधानी रहा लगभग 450-500 वर्ष तक। फिर यहां से 1750 के बाद इसकी राजधानी कांसीपुर में स्थापित किया, जो अंग्रेज एवं स्वतंत्रता काल तक रहा। इन जगहों से राजधानी स्थांतरण के बावजूद इसके वंशज के कुछ लोग वहीं रहने लगे। जिसका प्रमाण अभी भी झालदा राजघराना है।पंचकोट महाराजा के अधिन कई क्षेत्र के राजा थे जिसमें झरिया, कतरास, झालदा, चंदनकियारी आदि प्रमुख है।

सीएचओ की भागीदारी से समुदाय में आयेगा बदलाव – डॉ॰ पुष्पा आईईसी और सीपीएचसी-आम कोषांग के सहयोग से एसबीसीसी और आईपीसी पर चैथे बैच का प्रशिक्षण शुरू। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मातृत्व स्वास्थ्य कोषांग प्रभारी डॉ पुष्पा ने कहा है कि मरीजों का पहला सम्पर्क कम्युनिटी हेल्थ आफिसर (सी-एच-ओ) से होता है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रमों को जनता तक पहुचाने की जिम्मेदारी में उनका प्रमुख स्थान है। डॉ पुष्पा गुरूवार को नामकुम स्थित लोक स्वास्थ्य संस्थान में सीएचओ के लिए आयोजित दो दिवसीय आईईसी/बीसीसी प्रशिक्षण के चौथे बैच को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा की संस्थागत प्रसव, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व आश्वासन के बारे में आमजनों को जागरूक करें। उन्होंने परिवार नियोजन की विभिन्न स्थाई और अस्थाई विधियों के प्रयोग के बारे में आम जनों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करने पर बल दिया। परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरूषों की भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा की संचार तकनीक का उपयोग कर क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।आईईसी कोषांग प्रभारी डॉ लाल मांझी ने कहा कि संचार के माध्यम से हम स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम को आमजनों तक अच्छे से पहुंचा सकते हैं। सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, यूट्यूब और एक्स हैन्डल के माध्यम से विश्वसनीय और प्रमाणित जानकारी हम लोगों तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर आने वाले मरीजों, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के बीच स्वच्छ आदत और स्वच्छता व्यवहार अपनाने के लिए भी जागरूक करें। यह प्रशिक्षण आईईसी और सीपीएचसी आयुष्मान आरोग मंदिर (आम) कोषांग के सहयोग से दिया जा रहा है, जिसमें तकनीकी सहयोग यूनिसेफ द्वारा प्रदान किया जा रहा है।

माउथ कैंसर की रोकथाम के लिए वर्चुअल मोड में प्रशिक्षण शुरू

o एनएचएम के नर्सिंग सेल, ईसीएचओ इंडिया और झारखण्ड नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल के सहयोग से प्रारंभ किया गया है। o माउथ कैंसर की रोकथाम, पहचान और जागरूकता को बढ़ावा देने…

“पद्मश्री डॉ गिरिधारी राम गौंझू स्मृति सम्मान 2024” से सम्मानित प्राध्यापक डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो ‘गोतिया’ का टीआरएल संकाय में किया गया स्वागत व सम्मान, वक्ताओं ने कहा -यह सम्मान डॉ बीरेन्द्र महतो के कार्यों का आकलन है

रांची : झारखंड साहित्य अकादमी संघर्ष समिति के तत्वावधान में पद्मश्री डॉ गिरिधारी राम गौंझू स्मृति सम्मान 2024 से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय के सहायक प्राध्यापक सह इंकलाबी नौजवान…

श्री मंगल टाइल्स एवं सेनेटरी के शोरूम का भव्य उद्घाटन, केन्द्रीय रक्षा राज्यमंत्री ने कहा -बेहतर क्वालिटी के लिए अब शहर जाने की आवश्यकता नहीं

रांची : पिठोरिया के मुरहर पहार के नजदीक टाइल्स एंड सेनेटरी शोरूम का भव्य शुभ उद्घाटन किया गया। इसका विधिवत उद्घाटन केन्द्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने फीता काटकर किया।…

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने 1500 नवनियुक्त स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षकों को सौंपा नियुक्ति पत्र, नौजवानों को अपने पैरों पर खड़ा करने का दोहराया संकल्प

शिक्षा की रोशनी से झारखंड की तस्वीर और तकदीर बदलने की मुख्यमंत्री ने जताई प्रतिबद्धता ◆ मुख्यमंत्री ने कहा- राज्य के गरीब बच्चों को मिलेगा क्वालिटी एजुकेशन , निजी विद्यालय…

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*विश्व तंबाकू निषेध* *दिवस-2026 पर राज्य स्तरीय कार्यशाला सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित*—————————–*अभियान निदेशक ने कविता “धुएं से आज़ादी” के माध्यम से दिया नशामुक्त झारखंड का संदेश, तंबाकू नियंत्रण को जन-आंदोलन बनाने का किया आह्वान*——————————विश्व तंबाकू निषेध दिवस-2026 के अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड द्वारा राज्य स्तरीय कार्यशाला सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य तंबाकू नियंत्रण गतिविधियों को सुदृढ़ करना, विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करना तथा स्वस्थ एवं तंबाकू मुक्त झारखंड के निर्माण हेतु सामूहिक सहभागिता सुनिश्चित करना था।श्री शशि प्रकाश झा, के अभियान निदेशक ,राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड ने तंबाकू के विरुद्ध जन-जागरूकता का संदेश देते हुए “धुएं से आज़ादी” शीर्षक से एक प्रेरणादायक कविता प्रस्तुत की। कविता के माध्यम से उन्होंने युवाओं से तंबाकू एवं अन्य नशों से दूर रहने तथा समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।कविता की प्रमुख पंक्तियां—”एक कश में क्या रखा है,ज़रा सोचो तो यारों।पल भर का नशा देकर,छीन लेता है बहारों।””बीड़ी, सिगरेट, खैनी, गुटखा,मौत के चार हथियार।फेफड़ों को काला करके,कर दे जीवन बेकार।””आओ कसम खाएं आज,31 मई के दिन।ना खुद छुएंगे, ना छूने देंगे,दोस्तों को भी रोकेंगे, बिन।””धुआँ नहीं, अब उड़ान भरो,सेहत की पतंग आसमान छुए।तम्बाकू छोड़ो, जीवन चुनो,यही है सबसे बड़ी दुआ।”अपने संबोधन में श्री झा ने कहा कि झारखंड में प्रतिवर्ष लगभग 35,000 से 40,000 कैंसर रोगियों की पहचान होती है, जिनमें 40 से 45 प्रतिशत मरीज मुख (ओरल) कैंसर से प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि तंबाकू सेवन मुख कैंसर का प्रमुख कारण है तथा समय रहते जागरूकता एवं रोकथाम के माध्यम से इस चुनौती पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।*कार्यक्रम का आयोजन आईपीएच प्रेक्षागृह में किया गया।*उन्होंने कहा कि तंबाकू नियंत्रण केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज का अभियान है। तंबाकू मुक्त झारखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए “*Whole of Government*” एवं “*Whole of Society*” दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहिया, एएनएम, पंचायती राज संस्थाएं, ग्रामीण विकास विभाग, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाएं, शैक्षणिक संस्थान, नगरीय निकाय, सामुदायिक संगठन तथा आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और मानसिक रूप से भी कमजोर बनाता है। नशे के कारण व्यक्ति की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर होती है। उन्होंने लोगों से नशे की लत छोड़कर शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनने का आह्वान किया।श्री झा ने दंत चिकित्सकों को तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की अग्रिम पंक्ति का योद्धा बताते हुए कहा कि प्रत्येक दंत चिकित्सा इकाई को तंबाकू त्याग परामर्श एवं व्यवहार परिवर्तन संचार का प्रभावी केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को स्वास्थ्य संवर्धन एवं तंबाकू त्याग सेवाओं के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी बल दिया।उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं एवं शहरी स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, युवा संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, धार्मिक नेताओं, मीडिया प्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि तंबाकू नियंत्रण को जनभागीदारी आधारित जन-आंदोलन का स्वरूप देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे स्वयं तंबाकू मुक्त जीवनशैली अपनाएं तथा समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बनें। विद्यालयों, महाविद्यालयों, एनएसएस, एनसीसी, नेहरू युवा केंद्र एवं युवा क्लबों को इस अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ने की आवश्यकता है।*राज्य भर मे कुल के 1680 स्कूलो मे तंबाकू जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया।* *पुलिस, शिक्षा एवं अन्य विभागों के साथ 282  प्रशिक्षण दिया गया*। *पूरे राज्य मे 208701 टीटीसी काउन्सेलिंग किया गया एवं 43308* *Pharmacotherapy किया गया*।कार्यक्रम के अंतर्गत तीन महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। *प्रथम कार्यशाला* में डॉ. अर्पिता राय, अतिरिक्त प्राध्यापक, रिम्स रांची द्वारा तंबाकू सेवन से होने वाले मुख कैंसर, उसकी प्रारंभिक पहचान एवं रोकथाम पर विस्तृत जानकारी दी गई, जबकि श्रीमती संताना कुमारी ने मानसिक स्वास्थ्य एवं नशे के दुष्प्रभावों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया।*द्वितीय कार्यशाला* में एनसीडी सेल द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) के लिए नशामुक्ति विषय पर प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें समुदाय स्तर पर परामर्श सेवाओं एवं व्यवहार परिवर्तन संचार की रणनीतियों पर चर्चा की गई।*तृतीय कार्यशाला* में सहियाओं को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभाव, कैंसर एवं अन्य गैर-संचारी रोगों के जोखिम तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाने में उनकी भूमिका के संबंध में प्रशिक्षित किया गया।कार्यक्रम के दौरान नुक्कड़ नाटक टीम द्वारा तंबाकू सेवन एवं नशे के दुष्प्रभावों पर आधारित एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। *कार्यक्रम के दौरान अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा द्वारा उपस्थित सभी अधिकारियों, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, सामुदायिक कार्यकर्ताओं एवं प्रतिभागियों को तंबाकू निषेध की शपथ दिलाई गई। शपथ के माध्यम से सभी ने स्वयं तंबाकू एवं अन्य नशे से दूर रहने की सलाह दिया ।*कार्यक्रम में  दंत चिकित्सा पदाधिकारी, आयुष चिकित्सा पदाधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ), राज्य एवं जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।कार्यक्रम में डॉ. रवि राज (सदर अस्पताल, रांची), डॉ. अर्पिता राय (अतिरिक्त प्राध्यापक, रिम्स रांची), डॉ. राजीव रंजन (सदर अस्पताल, खूंटी), डॉ. लाल मांझी (राज्य नोडल पदाधिकारी, एनसीडी), डॉ. राहुल किशोर सिंह (राज्य नोडल पदाधिकारी, आईईसी सेल), डॉ. विजय किशोर रजक (राज्य नोडल पदाधिकारी, शिशु स्वास्थ्य एवं आरकेएसके), डॉ. मुकेश (राज्य नोडल पदाधिकारी, सीएम-सीपीएचसी सेल), डॉ. राजीव कुमार (आयुष चिकित्सक) सहित स्वास्थ्य विभाग के अनेक अधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मैत्री क्लिनिक, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों तथा राष्ट्रीय तंबाकू त्याग हेल्पलाइन – 1800-11-2356 के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क परामर्श एवं सहायता सेवाओं की जानकारी भी प्रदान की गई।नारा“*तंबाकू को ना, जिंदगी को हाँ*”“*एक कश भी कैंसर तक ले जाए*”