रांची। जिंदगी जिंदाबाद
JPSC JSSC Protest Ranchi: 22वें दिन उग्र हुआ छात्रों का आंदोलन, अल्बर्ट एक्का चौक पर पुतला दहन के बाद 20 अगस्त को CM आवास घेराव का अल्टीमेटम रांची में जेपीएससी और जेएसएससी की कथित अनियमितताओं को लेकर जारी अभ्यर्थियों का आंदोलन अब अपने 22वें दिन प्रवेश करने के साथ ही एक बेहद गंभीर और निर्णायक मोड़ पर आ चुका है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुआ यह विरोध अब केवल अभ्यर्थियों की नाराजगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राज्य के संपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है।
शहर के हृदयस्थल अल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव के सांकेतिक पुतले फूंककर आक्रोशित छात्रों ने यह साफ कर दिया है कि उनका यह संघर्ष अब केवल प्रशासनिक बदइंतजामी के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्य के सत्तारूढ़ ‘इंडिया’ गठबंधन की नीति और नीयत के खिलाफ एक सीधे राजनीतिक शक्ति-प्रदर्शन का रूप ले चुका है।
छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का यह नया और आक्रामक तेवर वास्तव में सत्तापक्ष के उन राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चेहरों पर भारी दबाव बनाने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय मंचों पर रोजगार और परीक्षाओं की पारदर्शिता की वकालत करते रहे हैं।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब झारखंड में गठबंधन सरकार के तहत युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है, तो कांग्रेस और राजद जैसी सहयोगी पार्टियां चुप रहकर अपनी जवाबदेही से भाग नहीं सकतीं। मौन मार्च, आक्रोश रैली और विशाल तिरंगा यात्रा के बाद पुतला दहन का यह कदम यह संदेश देता है कि अभ्यर्थियों का धैर्य अब पूरी तरह जवाब दे चुका है।
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की मुख्य मांगों में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द करना और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष सीबीआई (CBI) जांच कराना प्रमुखता से शामिल है। इसके साथ ही संदिग्ध एजेंसियों को काली सूची में डालने, भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाने और प्रभावित युवाओं को आगामी परीक्षाओं में उम्र सीमा में एकमुश्त राहत देने जैसी मांगें भी मजबूती से उठाई जा रही हैं।
यद्यपि प्रशासनिक अधिकारियों की आवाजाही लगातार जारी है और सरकार का दावा है कि अभ्यर्थियों की कई मांगों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन छात्रों का स्पष्ट रुख है कि जब तक परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मुख्य मांग पर लिखित व ठोस फैसला नहीं आता, तब तक कोई भी समझौता संभव नहीं है। इसी अविश्वास और संवादहीनता के कारण 22 दिन बीत जाने के बाद भी गतिरोध जस का तस बना हुआ है।
प्रतिकूल मौसम के बीच पिछले तीन हफ्तों से लगातार सड़कों पर डटे रहने के कारण कई अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। धूप और बारिश के बीच बीमार पड़ रहे छात्रों की स्थिति ने इस आंदोलन में भावनात्मक आक्रोश की एक और परत जोड़ दी है। इस राजनीतिक और सामाजिक संकट का सर्वमान्य समाधान निकालने के लिए विशेषज्ञों और नागरिक समाज की ओर से यह सुझाव उभरकर सामने आ रहा है कि सरकार को अब तक की गई जांच और प्रशासनिक कार्रवाइयों पर एक पारदर्शी ‘श्वेत पत्र’ जारी करना चाहिए।
इसके साथ ही जेएसएससी और जेपीएससी की नई नियुक्तियों का एक समयबद्ध रोडमैप पेश किया जाना चाहिए, ताकि युवाओं में विश्वास बहाल हो सके और वे वापस अपनी पढ़ाई की ओर लौट सकें।
फिलहाल अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने 18 अगस्त तक का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि वे संवाद के दरवाजे बंद नहीं कर रहे हैं। यदि 18 अगस्त तक सरकार किसी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के जरिए ठोस और पारदर्शी समाधान की दिशा में कदम नहीं बढ़ाती है, तो 20 अगस्त को राज्यभर के हजारों छात्र एकजुट होकर मुख्यमंत्री आवास का ऐतिहासिक घेराव करेंगे। आने वाले 48 घंटे झारखंड के प्रशासनिक तंत्र और राज्य सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति के लिए अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक साबित होने वाले हैं।
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