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रांची/जमशेदपुर: बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र के असर से झारखंड में बारिश का दौर तेज हो गया है। राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में लगातार बारिश और गरज-चमक के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। सबसे ज्यादा असर कोल्हान क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जहां लगातार बारिश के बाद स्वर्णरेखा और खरकई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। जमशेदपुर और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक रांची में 25 सितंबर की सुबह तक पिछले 24 घंटे में 41 मिमी बारिश दर्ज की गई और न्यूनतम तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 25 सितंबर को झारखंड में भारी बारिश के साथ गरज, बिजली और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है।
जमशेदपुर के लिए भी मौसम विभाग ने 25 सितंबर को बादल छाए रहने, बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ने और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाओं की संभावना जताई थी। 26 सितंबर को भी बारिश और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा का अनुमान है।
अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भारी बारिश के कारण कई जगह नदियां खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर पहुंचने लगी हैं। जमशेदपुर, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम और बोकारो समेत कई इलाकों में नदी, पुल-पुलिया और निचले क्षेत्रों पर बारिश का असर दिखाई दे रहा है।
बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बदला झारखंड का मौसम
झारखंड में सितंबर के अंतिम सप्ताह में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे निम्न दबाव और उससे जुड़े मौसमी सिस्टम के कारण राज्य में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं।
मौसम प्रणाली का प्रभाव केवल एक-दो जिलों तक सीमित नहीं है। राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए हुए हैं और अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की जा रही है।
मौसम विभाग ने 24 सितंबर के लिए झारखंड में बहुत भारी बारिश, जबकि 25 सितंबर के लिए भारी बारिश के साथ गरज, बिजली और तेज हवा की चेतावनी जारी की थी। 26 और 27 सितंबर को भी गरज और बिजली की गतिविधियों की संभावना बताई गई है।
इसका असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। शहरों में सड़कों पर जलजमाव की स्थिति बन रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों में नदियों और छोटी धाराओं का जलस्तर बढ़ने से पुल-पुलिया और संपर्क मार्ग प्रभावित होने लगे हैं।
रांची में 24 घंटे में 41 मिमी बारिश
राजधानी रांची भी लगातार बारिश से प्रभावित है। मौसम विभाग के 25 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार रांची में पिछले 24 घंटे में 41 मिमी बारिश दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सुबह के समय सापेक्षिक आर्द्रता 96 प्रतिशत रही।
इससे पहले 24 सितंबर को रांची में 24 घंटे में 52 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। उस दिन अधिकतम तापमान 24.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 5.2 डिग्री कम था।
लगातार बारिश के कारण राजधानी में कई स्थानों पर सड़क पर पानी जमा हुआ। यातायात की रफ्तार प्रभावित हुई और लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई।
रांची के लिए 25 सितंबर को मौसम विभाग ने बादल छाए रहने और बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना जताई थी। साथ ही 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे तक तेज हवा चलने की चेतावनी भी दी गई थी।
जमशेदपुर में बढ़ा बाढ़ का खतरा
इस मौसम प्रणाली का सबसे गंभीर असर पूर्वी सिंहभूम और जमशेदपुर क्षेत्र में देखा जा रहा है। यहां लगातार बारिश के कारण स्वर्णरेखा और खरकई नदी का जलस्तर बढ़ रहा है।
दोनों नदियां जमशेदपुर के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनके किनारे बड़ी संख्या में आबादी रहती है। इसलिए नदी का जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने खतरा पैदा होता है।
अगस्त 2026 में भी जमशेदपुर में लगातार बारिश के दौरान दोनों नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था। उस समय कई निचले इलाकों में पानी घुसा था और प्रशासन को राहत एवं बचाव की तैयारी करनी पड़ी थी।
मौजूदा बारिश के दौरान भी नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
खरकई नदी खतरे के निशान के करीब
खरकई नदी का खतरे का निशान 129 मीटर है। पिछले दिनों भारी बारिश के दौरान नदी का जलस्तर इस सीमा के आसपास पहुंच गया था।
25 सितंबर की एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार आदित्यपुर पुल के पास खरकई का जलस्तर 129 मीटर के आसपास पहुंच गया था। जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में नदी का स्तर और बढ़ने की आशंका जताई गई।
यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खरकई नदी के आसपास आदित्यपुर, कदमा, बागबेड़ा और अन्य निचले इलाकों में बड़ी आबादी रहती है।
नदी का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंचने के बाद प्रशासन और स्थानीय निकायों के लिए सबसे बड़ी चुनौती निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखना होती है।
स्वर्णरेखा नदी भी बढ़ी
स्वर्णरेखा नदी का खतरे का निशान जमशेदपुर क्षेत्र में 121.50 मीटर बताया जाता है। भारी बारिश के समय इसका जलस्तर भी तेजी से बढ़ सकता है।
अगस्त में स्वर्णरेखा का जलस्तर 122.96 मीटर तक पहुंच गया था, जो खतरे के निशान से 1.46 मीटर ऊपर था। उसी समय खरकई नदी 134.37 मीटर तक पहुंच गई थी, जो उसके खतरे के निशान से 5.37 मीटर ऊपर थी।
इन आंकड़ों से यह समझा जा सकता है कि लगातार बारिश के दौरान दोनों नदियों में जलस्तर कितनी तेजी से बढ़ सकता है।
इसलिए वर्तमान बारिश के दौरान भी नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
नदी किनारे की बस्तियों पर सबसे ज्यादा असर
स्वर्णरेखा और खरकई के बढ़ते जलस्तर का सबसे अधिक असर उन बस्तियों पर पड़ता है जो नदी के बिल्कुल आसपास या निचले भू-भाग में बसी हैं।

बागबेड़ा, मानगो, कदमा, जुगसलाई, भुइयांडीह और आसपास के कई इलाके पहले भी नदी के बढ़े पानी से प्रभावित हो चुके हैं।
अगस्त में आई बाढ़ के दौरान बागबेड़ा, जुगसलाई, शास्त्रीनगर और मानगो की कई बस्तियों में पानी घुसने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस दौरान प्रशासन ने कई राहत शिविर भी तैयार किए थे।
मौजूदा परिस्थितियों में भी इन इलाकों पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो गया है।
सरायकेला-खरसावां में भी बारिश का असर
जमशेदपुर के साथ-साथ सरायकेला-खरसावां जिले में भी लगातार बारिश का असर दिखाई दे रहा है। जिले के ग्रामीण और वन क्षेत्र में लगातार बारिश से छोटी नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ रहा है।
अखबार की रिपोर्ट में सरांडा क्षेत्र में बारिश से जनजीवन प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है। भारी बारिश के कारण जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों से निकलने वाले जलस्रोतों में अचानक पानी बढ़ने की स्थिति बन सकती है।
सरांडा क्षेत्र में कई गांव सड़क संपर्क और छोटी पुलिया पर निर्भर हैं। बारिश के दौरान पुलिया के ऊपर पानी बहने लगे तो स्थानीय लोगों का आवागमन प्रभावित हो सकता है।
ऐसी स्थिति में स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और जरूरी काम से निकलने वाले लोगों को विशेष परेशानी होती है।
बोकारो में लोहे की पुलिया डूबी
भारी बारिश का असर बोकारो जिले में भी दिखाई दिया। अखबार में प्रकाशित तस्वीर और रिपोर्ट के अनुसार बारिश के कारण एक लोहे की पुलिया पानी में डूब गई।
पुलिया के ऊपर से तेज बहाव के साथ पानी गुजरने की स्थिति में आवागमन बेहद जोखिमपूर्ण हो जाता है। ऐसी पुलिया आमतौर पर स्थानीय गांवों और बस्तियों को जोड़ने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।
पानी पुलिया के ऊपर से बहने लगे तो लोगों के लिए इसे पार करना खतरे से खाली नहीं होता। खासकर तेज बहाव के दौरान वाहन या पैदल व्यक्ति के बहने का खतरा रहता है।
इसलिए प्रशासन द्वारा ऐसे स्थानों पर बैरिकेडिंग या आवाजाही रोकने की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
छोटी पुलिया और डायवर्सन पर सबसे ज्यादा खतरा
भारी बारिश में बड़े पुलों की तुलना में छोटी पुलिया और डायवर्सन अधिक प्रभावित होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई सड़कें छोटी पुलिया या कॉजवे के माध्यम से नदियों और बरसाती नालों को पार करती हैं।
बारिश के दौरान जलस्तर अचानक बढ़ने पर इन पुलियाओं के ऊपर पानी आ जाता है।
कई बार पानी कुछ घंटे में तेजी से बढ़ता है और लोगों को पुल पार करने का मौका भी नहीं मिलता। ऐसे में प्रशासन की चेतावनी और स्थानीय लोगों की सतर्कता महत्वपूर्ण हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तेज बहाव वाले पानी में पैदल या दोपहिया वाहन से पुलिया पार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
सड़क पर जलजमाव से बढ़ी परेशानी
जमशेदपुर और अन्य शहरों में भारी बारिश का असर केवल नदियों तक सीमित नहीं रहा। शहर की कई सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हुआ।
अखबार में प्रकाशित तस्वीर में बारिश के बीच सड़क पर पानी जमा दिखाई दे रहा है और वाहन जलजमाव के बीच से गुजरते नजर आ रहे हैं।
लगातार बारिश होने पर सड़क के किनारे की मिट्टी भी कमजोर हो जाती है। इससे निर्माणाधीन सड़क, खुदाई वाले स्थान और अस्थायी बैरिकेडिंग वाले क्षेत्रों में दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।
नगर निकायों के सामने ऐसी स्थिति में पानी की निकासी सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन जाती है।
निचले इलाकों में रहने वालों के लिए बढ़ी चिंता
बारिश के दौरान सबसे अधिक जोखिम नदी और नाले के किनारे बसे निचले इलाकों में रहता है।
जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो नदी का पानी आसपास के निचले क्षेत्रों में फैल सकता है। इसके अलावा नालों में पानी का बहाव तेज होने से बैकफ्लो की स्थिति भी बन सकती है।
जमशेदपुर में पहले भी स्वर्णरेखा और खरकई के जलस्तर बढ़ने के दौरान निचली बस्तियों में पानी घुसने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
इसलिए ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय प्रशासन की चेतावनी पर नजर रखना जरूरी है।
चांडिल और अन्य जलाशयों पर भी नजर
नदियों के जलस्तर पर केवल बारिश का ही असर नहीं पड़ता। जलग्रहण क्षेत्र में हुई बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति भी नदी के जलस्तर को प्रभावित कर सकती है।
जमशेदपुर क्षेत्र में चांडिल डैम और अन्य जलाशयों की स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण रहती है।
पिछली बाढ़ की घटनाओं में बांधों के फाटक खोले जाने और नदी के जलस्तर बढ़ने के बीच संबंध देखा गया है। 2026 में अगस्त की बाढ़ के दौरान भी ओडिशा के कुछ बांधों से पानी छोड़े जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
इसलिए प्रशासन को बारिश के साथ-साथ बांधों और जलाशयों के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखनी पड़ती है।
मौसम विभाग ने जारी की तेज हवा और गरज की चेतावनी
मौसम विभाग ने सिर्फ बारिश ही नहीं बल्कि गरज, बिजली और तेज हवाओं को लेकर भी चेतावनी दी है।
25 सितंबर को झारखंड के लिए भारी बारिश के साथ thunderstorm और lightning की चेतावनी थी। 26 सितंबर को भी गरज और बिजली की गतिविधि की संभावना बताई गई है।
रांची के लिए 25 सितंबर को 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा और 26 सितंबर को 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे तक हवा की संभावना बताई गई है।
जमशेदपुर के लिए भी 25 सितंबर को 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे और 26-27 सितंबर को 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवा की चेतावनी दी गई थी।
बिजली गिरने का भी खतरा
बारिश के साथ बिजली गिरना भी झारखंड में एक महत्वपूर्ण मौसमी जोखिम है। ग्रामीण क्षेत्रों में खुले मैदान, खेत, पेड़ और नदी किनारे के इलाके विशेष रूप से संवेदनशील हो सकते हैं।
गरज सुनाई देने पर लोगों को खुले मैदान में खड़े रहने से बचना चाहिए। पेड़ के नीचे खड़ा होना भी सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता।
बिजली की गतिविधि के दौरान मोबाइल टावर, बिजली के खंभे और खुले जलस्रोतों के आसपास अनावश्यक रूप से रुकने से बचना चाहिए।
नदी के पास जाने से बचने की जरूरत
बाढ़ के समय सबसे महत्वपूर्ण सावधानी नदी और तेज बहाव वाले पानी से दूरी बनाए रखना है।
कई बार लोग बढ़े हुए जलस्तर को देखने के लिए नदी किनारे पहुंच जाते हैं। लेकिन सामान्य दिखने वाला पानी भी अचानक तेज बहाव में बदल सकता है।
जमशेदपुर में पहले भी नदी का जलस्तर बढ़ने के दौरान प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे नहीं जाने और खतरे वाले क्षेत्रों में सतर्क रहने की अपील की है।
विशेष रूप से बच्चों को नदी, पुल और जलमग्न पुलिया से दूर रखना जरूरी है।
स्कूल, बाजार और दैनिक गतिविधियों पर असर
लगातार बारिश का असर आम लोगों की दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ता है। सड़क पर पानी जमा होने से स्कूल बस, ऑटो, बाइक और निजी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में यदि कोई सड़क या पुलिया पानी में डूब जाती है तो गांवों का संपर्क प्रभावित हो सकता है।
बाजारों में भी ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है। छोटे दुकानदारों को बारिश के कारण व्यापारिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
सब्जी और फल विक्रेताओं के लिए लगातार बारिश विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि सामान खराब होने का जोखिम बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है असर
बाढ़ या जलजमाव के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी प्रभावित हो सकती है। यदि किसी गांव या बस्ती की सड़क जलमग्न हो जाती है तो मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हो सकती है।
इसी कारण संभावित बाढ़ वाले क्षेत्रों में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को आपात स्थिति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखनी पड़ती है।
निचले इलाकों में पानी जमा रहने पर मच्छरों और जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए पानी की निकासी और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है।
बिजली आपूर्ति में भी आ सकती है बाधा
तेज हवा और बारिश के दौरान बिजली के तार टूटने, पेड़ गिरने या ट्रांसफॉर्मर क्षेत्र में पानी जमा होने की स्थिति में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
ऐसे समय में लोगों को टूटे हुए बिजली के तारों से बिल्कुल दूर रहना चाहिए।
यदि कहीं तार पानी में गिरा हुआ दिखाई दे तो उसके आसपास जमा पानी में प्रवेश नहीं करना चाहिए और तुरंत संबंधित विभाग को सूचना देनी चाहिए।
प्रशासन के सामने राहत और बचाव की चुनौती
भारी बारिश के दौरान जिला प्रशासन की प्राथमिकता आमतौर पर संवेदनशील इलाकों की निगरानी, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और सड़क संपर्क बनाए रखना होती है।
जमशेदपुर में पिछली बाढ़ की स्थिति के दौरान प्रशासन ने अलग-अलग क्षेत्रों में राहत शिविर तैयार किए थे। मानगो, जुगसलाई, बागबेड़ा और जमशेदपुर के अन्य इलाकों में प्रभावित लोगों के लिए शेल्टर बनाए गए थे।
मौजूदा बारिश को देखते हुए ऐसे इलाकों में प्रशासनिक निगरानी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
आपदा की स्थिति में राहत शिविरों की भूमिका
यदि नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है या बस्तियों में पानी घुसता है, तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना जरूरी हो जाता है।
राहत शिविरों में आमतौर पर भोजन, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और रहने की व्यवस्था की जाती है।
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को प्राथमिकता से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की आवश्यकता होती है।
ऐसी स्थिति में स्थानीय लोगों को प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए और अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
अगले कुछ दिनों तक मौसम पर नजर
मौसम विभाग के अनुसार 25 सितंबर के बाद भी 26 और 27 सितंबर को झारखंड में गरज और बिजली की गतिविधि की संभावना बनी हुई है। 28 सितंबर से विशेष चेतावनी नहीं है, हालांकि कुछ स्थानों पर बारिश या गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं।
रांची के पूर्वानुमान में भी 25 और 26 सितंबर को बारिश या गरज के साथ छींटे और 27 सितंबर को भी गरज के साथ मौसम खराब रहने की संभावना दी गई है।
इसका मतलब यह है कि नदियों और जलाशयों के जलस्तर पर अगले कुछ दिनों तक नजर बनाए रखना जरूरी रहेगा।
झारखंड में बारिश का व्यापक असर
इस बार बारिश का प्रभाव केवल राजधानी या जमशेदपुर तक सीमित नहीं है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और मौसम की गतिविधियां जारी हैं।
कोल्हान में नदी और पहाड़ी क्षेत्र अधिक संवेदनशील हैं, जबकि मध्य झारखंड में जलजमाव और तेज बारिश से सड़क संपर्क प्रभावित हो सकता है।
ग्रामीण इलाकों में पुल-पुलिया और कच्ची सड़कों की स्थिति विशेष चिंता का विषय रहती है।
यदि लगातार बारिश होती है तो मिट्टी की नमी बढ़ने के कारण पेड़ गिरने और सड़क किनारे कटाव का खतरा भी बढ़ जाता है।
स्वर्णरेखा-खरकई का जलस्तर क्यों महत्वपूर्ण है?
जमशेदपुर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए स्वर्णरेखा और खरकई नदियों का जलस्तर शहर के लिए महत्वपूर्ण है।
दोनों नदियों के किनारे बड़ी संख्या में बस्तियां और औद्योगिक तथा शहरी क्षेत्र हैं। जब जलस्तर बढ़ता है तो नदी के आसपास के निचले हिस्सों में सबसे पहले पानी पहुंचता है।
अगस्त 2026 की बाढ़ के दौरान दोनों नदियों के खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने और कई बस्तियों में पानी घुसने की रिपोर्ट सामने आई थी।
इसलिए सितंबर की मौजूदा बारिश के दौरान भी नदी के स्तर में होने वाली हर वृद्धि पर नजर रखना जरूरी है।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
मौसम खराब रहने के दौरान लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए। यदि सड़क पर पानी भरा हो तो उसकी गहराई का अंदाजा लगाए बिना वाहन लेकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए।
नदी, नाला या पुलिया के ऊपर पानी बह रहा हो तो उसे पार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
तेज बारिश के दौरान बच्चों को अकेले बाहर नहीं भेजना चाहिए।
बिजली गिरने की संभावना होने पर खुले मैदान, पेड़ और जलस्रोत से दूरी बनाकर किसी सुरक्षित भवन के अंदर रहना बेहतर है।
चक्रवाती सिस्टम ने बढ़ाई मौसम की सक्रियता
झारखंड में सितंबर के अंतिम सप्ताह में सक्रिय मौसम प्रणाली ने बारिश की तीव्रता बढ़ाई है। IMD के अनुसार 24 सितंबर को राज्य में बहुत भारी बारिश की चेतावनी थी और 25 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई।
रांची में 24 सितंबर को 52 मिमी और अगले 24 घंटे के आंकड़ों में 41 मिमी बारिश दर्ज होना यह दिखाता है कि राजधानी में भी बारिश का दौर काफी सक्रिय रहा है।
जमशेदपुर में इसके साथ नदी के जलस्तर का बढ़ना प्रशासन के लिए अतिरिक्त चुनौती बन गया है।
अभी सबसे बड़ी चिंता निचले इलाकों की
भारी बारिश के बीच सबसे ज्यादा निगरानी निचले इलाकों पर रखनी होगी। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय नालों और छोटी नदियों में भी अचानक पानी बढ़ सकता है।
खासकर रात के समय स्थिति बदलने की संभावना रहती है। इसलिए लोगों को मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखनी चाहिए।
यदि प्रशासन किसी इलाके को खाली करने या सुरक्षित स्थान पर जाने का निर्देश देता है तो उसे गंभीरता से लेना जरूरी है।
निष्कर्ष
झारखंड में चक्रवाती मौसम प्रणाली के असर से बारिश ने एक बार फिर कई इलाकों में परेशानी बढ़ा दी है। राजधानी रांची में लगातार बारिश दर्ज की गई है, जबकि जमशेदपुर में स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। सरायकेला-खरसावां के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में भी बारिश से छोटी नदियों और पुलियाओं पर दबाव बढ़ा है। बोकारो में लोहे की पुलिया के पानी में डूबने से ग्रामीण संपर्क प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है।
मौसम विभाग ने 25 सितंबर को झारखंड में भारी बारिश के साथ गरज, बिजली और तेज हवा की चेतावनी दी है। रांची में 41 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि 24 सितंबर को 52 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
जमशेदपुर में स्थिति विशेष रूप से नदी के जलस्तर पर निर्भर करेगी। स्वर्णरेखा और खरकई के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होने पर नदी किनारे और निचले इलाकों में पानी का खतरा बढ़ सकता है। पहले भी दोनों नदियों के खतरे के निशान पार करने पर बागबेड़ा, मानगो, जुगसलाई और अन्य इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति सामने आ चुकी है।
आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता, जलग्रहण क्षेत्रों की स्थिति और बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी। ऐसे में प्रशासन के लिए नदी और पुल-पुलिया की लगातार निगरानी जरूरी है, जबकि आम लोगों के लिए नदी, नाले, जलमग्न सड़क और तेज बहाव वाले स्थानों से दूरी बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण सावधानी होगी।