झारखंड में पहली बार नवंबर में सजेगा 'अरण्यक' फॉरेस्ट फिल्म फेस्टिवल का मंचझारखंड में पहली बार नवंबर में सजेगा 'अरण्यक' फॉरेस्ट फिल्म फेस्टिवल का मंच

राँची: झारखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक गोद में सिनेमा के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए एक ऐतिहासिक और अनूठी शुरुआत होने जा रही है। राज्य में पहली बार आगामी 28 से 30 नवंबर 2026 तक तीन दिवसीय ‘अरण्यक – झारखंड फॉरेस्ट फिल्म फेस्टिवल’ का भव्य आयोजन राँची में किया जाएगा। वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से आयोजित होने वाले इस अपनी तरह के पहले महोत्सव को लेकर प्रकृति प्रेमियों, फिल्मकारों और आम नागरिकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। यह महोत्सव न केवल कला और संस्कृति का संगम होगा, बल्कि झारखंड के जंगलों, वन्यजीवों और पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम भी बनेगा।

राँची के वन भवन में सजेगा सिनेमा का संसार

इस प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव का मुख्य आयोजन राँची के डोरंडा स्थित वन भवन परिसर में किया जाएगा। वन भवन के अत्याधुनिक पलाश ऑडिटोरियम और जैप ऑडिटोरियम में महोत्सव के दौरान चयनित फिल्मों की स्क्रीनिंग (प्रदर्शन) की जाएगी। इन दोनों प्रतिष्ठित मंचों पर देश-विदेश से आने वाले फिल्मकारों, पर्यावरणविदों और दर्शकों को प्रकृति पर आधारित बेहतरीन सिनेमाई कृतियों को देखने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन के जरिए फिल्मकारों को पर्यावरण और संरक्षण से जुड़े गंभीर मुद्दों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने और समाज में सार्थक संवाद स्थापित करने का बेहतरीन अवसर मिलेगा।

महोत्सव का मुख्य उद्देश्य: प्रकृति और मानव के बीच गहराता रिश्ता

इस अनूठे फिल्म फेस्टिवल के आयोजन का मुख्य उद्देश्य सिनेमा के माध्यम से जन-सामान्य को जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। झारखंड, जो अपनी समृद्ध वनीय संपदा, हरे-भरे जंगलों और आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है, वहाँ इस प्रकार का आयोजन पर्यावरणीय चेतना को एक नई दिशा देगा।

आयोजकों के अनुसार, इस महोत्सव के केंद्र में विशेष रूप से जंगल और वन्यजीव रहेंगे। महोत्सव में वन, वन्यजीव, जैव विविधता, पर्यावरण परिवर्तन, आदिवासी समुदायों के जीवन और संघर्ष, प्रकृति तथा सतत विकास से संबंधित चुनिंदा फिल्मों को शामिल किया गया है। इसके माध्यम से आम जनता और विशेषकर युवा पीढ़ी के मन में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का गंभीर प्रयास किया जा रहा है। सिनेमा एक ऐसा माध्यम है जो सीधे दिल को छूता है, और इसी ताकत का इस्तेमाल करके पर्यावरण बचाने की इस मुहिम को जन-आंदोलन का रूप देने की तैयारी है।

फिल्मकारों और वैज्ञानिकों का होगा अनूठा संगम

‘अरण्यक’ फॉरेस्ट फिल्म फेस्टिवल केवल फिल्मों के प्रदर्शन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह विचारों के आदान-प्रदान का भी एक बड़ा केंद्र बनेगा। इस महोत्सव के माध्यम से फिल्मकारों, वैज्ञानिकों, संरक्षण विशेषज्ञों, वनवासी समुदायों और विद्यार्थियों को एक साझा मंच पर लाने की अनूठी पहल की गई है। जब पर्यावरण पर शोध करने वाले वैज्ञानिक, जमीन पर काम करने वाले संरक्षण विशेषज्ञ और अपनी कला के जरिए बात रखने वाले फिल्मकार एक मंच पर आएंगे, तो निश्चित रूप से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई नए रास्ते खुलेंगे। इस मंच के जरिए प्रकृति और मानव के बीच के प्राचीन और गहरे संबंधों को गहराई से समझने और आज के दौर में आ रही पर्यावरणीय चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिलेगा।

500 से अधिक प्रविष्टियां और पाँच प्रतिष्ठित श्रेणियों में पुरस्कार

झारखंड में पहली बार आयोजित हो रहे इस महोत्सव को लेकर फिल्म जगत और स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। महोत्सव के लिए देश भर से 500 से अधिक प्रविष्टियां (Entries) प्राप्त हुई हैं। वर्तमान में इन सभी प्रविष्टियों की सूक्ष्मता से छंटनी की जा रही है, ताकि बेहतरीन और उच्च गुणवत्ता वाली फिल्मों को ही मंच मिल सके। महोत्सव में फिल्मों की विषयवस्तु, उनकी प्रासंगिकता और मौलिकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रतियोगिता और पुरस्कारों के लिए कुल पाँच प्रमुख श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा:

  1. सर्वश्रेष्ठ लंबी डॉक्यूमेंट्री (Best Feature Documentary)
  1. सर्वश्रेष्ठ लघु डॉक्यूमेंट्री (Best Short Documentary)
  1. सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म (Best Animation Film)
  1. सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी फिल्म (Best Student Film)
  1. विशेष जूरी पुरस्कार (Special Jury Award)

इन श्रेणियों के माध्यम से विभिन्न विधाओं में काम करने वाले रचनाकारों को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए सम्मानित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण सिनेमा को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

झारखंड के पर्यावरणीय परिदृश्य में मील का पत्थर

झारखंड, जो अपने खनिज संसाधनों के साथ-साथ अपनी समृद्ध वानिकी और वन्यजीव अभ्यारण्यों के लिए प्रसिद्ध है, वहाँ पर्यावरण और वनों पर केंद्रित इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तर के फिल्म फेस्टिवल का होना अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम है। आने वाले 28 से 30 नवंबर 2026 तक राँची का वन भवन देश भर के पर्यावरण प्रेमियों और सिने प्रेमियों का मुख्य केंद्र बना रहेगा। यह महोत्सव न केवल झारखंड की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई ऊँचाई देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जंगलों और वन्यजीवों को बचाने का एक मजबूत संदेश भी समाज के हर वर्ग तक पहुँचाएगा।

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