रांची यूनिवर्सिटी और डीएसपीएमयू के बीएड पाठ्यक्रम से कंप्यूटर साइंस विषय गायबरांची यूनिवर्सिटी और डीएसपीएमयू के बीएड पाठ्यक्रम से कंप्यूटर साइंस विषय गायब

राँची:राज्य के शिक्षा जगत और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। झारखंड की राजधानी राँची के प्रमुख विश्वविद्यालयों—राँची यूनिवर्सिटी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (डीएसपीएमयू)—में बीएड (B.Ed.) पाठ्यक्रम के दौरान कंप्यूटर साइंस पढ़ाने का कोई विकल्प ही उपलब्ध नहीं है। इस बड़ी व्यवस्थागत कमी के कारण आईटी (IT) पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले और भविष्य में कंप्यूटर साइंस के शिक्षक बनने का सपना देखने वाले विद्यार्थियों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। विषय गायब होने के कारण इन छात्रों को मजबूरी में गणित या अन्य दूसरे विषयों का विकल्प चुनना पड़ रहा है।

क्या है पूरा मामला और क्यों हो रही है परेशानी?

वर्तमान समय में राज्य के हाईस्कूलों में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई होती है और इसके लिए शिक्षकों के पद भी सृजित किए गए हैं। लेकिन विडंबना यह है कि इस विषय के शिक्षक बनने की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए राँची के इन दोनों प्रमुख विश्वविद्यालयों में बीएड के दौरान कंप्यूटर साइंस को ‘मेथड पेपर’ (शिक्षण विधि विषय) के रूप में शामिल नहीं किया गया है।

बीसीए (BCA), बीएससी आईटी (BSc IT), बीएससी सीए (BSc CA) और एमसीए (MCA) जैसी उच्च तकनीकी डिग्रियां हासिल करने वाले छात्र शैक्षिक योग्यता के अनुरूप अपना विषय चुनने के अधिकार से पूरी तरह वंचित हैं। एक तरफ सरकार स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में ही इस विषय की पढ़ाई का प्रबंध न होना शिक्षा व्यवस्था की एक बड़ी खामी को उजागर करता है।

दूसरे विश्वविद्यालयों में है सुविधा, फिर राँची में क्यों नहीं?

दिलचस्प बात यह है कि झारखंड के अन्य कई विश्वविद्यालयों में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई और इसे मेथड पेपर के रूप में पढ़ाने की सुविधा पहले से उपलब्ध है। विनोबा भावे विश्वविद्यालय (हजारीबाग) और कोल्हान विश्वविद्यालय (चाइबासा) में कंप्यूटर साइंस को बीएड के मेथड विषय के रूप में पढ़ाने का प्रावधान है। इसके अलावा, जब राँची वीमेंस कॉलेज एक स्वायत्त (ऑटोनॉमस) संस्थान था, तब उसने अपनी एकेडमिक काउंसिल में प्रस्ताव पास कराकर कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू की थी। ऐसे में राँची यूनिवर्सिटी और डीएसपीएमयू जैसे बड़े विश्वविद्यालयों में इस सुविधा का न होना छात्रों के साथ एक बड़ा भेदभाव माना जा रहा है।

छात्रों ने खोला मोर्चा, प्राचार्य और डीएसडब्ल्यू को सौंपा ज्ञापन

इस गंभीर समस्या को लेकर विद्यार्थियों का गुस्सा अब सामने आने लगा है। छात्रों ने गोलबंद होकर इसके खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। हाल ही में, राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय (जीटीटीसी), कांके के प्राचार्य डॉ. रमण कुमार झा और डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहू को छात्रों ने एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है।

मोर्चा महासचिव राकेश रोशन के नेतृत्व में पहुंचे विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने पुरजोर मांग की है कि जल्द से जल्द ‘बोर्ड ऑफ स्टडीज’ और ‘अकादमिक काउंसिल’ से प्रस्ताव पारित करवाकर बीएड पाठ्यक्रम में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू की जाए। इस प्रतिनिधिमंडल में मार्विन टोप्पो, अमन कुमार पांडेय, अनुज कुमार, अर्पण उरांव और आशीष कुजूर समेत कई अन्य छात्र भी शामिल थे, जिन्होंने एक स्वर में इस कमी को दूर करने की मांग की।

आगे की राह: कैसे दूर होगी यह समस्या?

शिक्षाविदों और जानकारों का मानना है कि इस समस्या का समाधान पूरी तरह संभव है, बशर्ते विश्वविद्यालय प्रशासन इसके प्रति गंभीर हो। बीएड कोर्स में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू करने के लिए सबसे पहले एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करना होगा। इस प्रस्ताव को विश्वविद्यालय की ‘बोर्ड ऑफ स्टडीज’ और ‘अकादमिक काउंसिल’ के समक्ष रखकर विधिवत स्वीकृति लेनी होगी। जैसे ही इन दोनों महत्वपूर्ण निकायों से मंजूरी मिल जाएगी, वैसे ही बीएड में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू होने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो जाएगा।

यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में राज्य के हाईस्कूलों को योग्य कंप्यूटर शिक्षकों की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे सीधे तौर पर स्कूली बच्चों की तकनीकी शिक्षा प्रभावित होगी।

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