'मैं' नहीं 'हम' का प्रतीक है आदिवासी समाज: राज्यसभा उपसभापति हरिवंश'मैं' नहीं 'हम' का प्रतीक है आदिवासी समाज: राज्यसभा उपसभापति हरिवंश

संवाद-2026 कार्यक्रम में बोले हरिवंश— “सार्थक संवाद और दूसरों को सुनने के धैर्य से ही होगा स्वस्थ समाज का निर्माण”

राँची, 27 सितंबर 2026: करमटोली स्थित सेलिब्रेशन हॉल में आयोजित ‘कांके टॉक्स’ के संवाद-2026 कार्यक्रम में विचारों और अनुभवों का अद्भुत समागम देखने को मिला। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यसभा के उपसभापति एवं वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश ने समाज, संवाद और परंपराओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।

आदिवासी समाज: सामूहिक चेतना का अनुपम उदाहरण

अपने संबोधन में उपसभापति हरिवंश ने आदिवासी जीवन शैली और उसकी सामाजिक संरचना की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संवाद की सबसे श्रेष्ठ और समृद्ध परंपरा हमारे आदिवासी समुदाय में विद्यमान है। आधुनिक समाज जहाँ व्यक्तिवाद और ‘मैं’ के अहंकार में उलझा हुआ है, वहीं हमारा आदिवासी समाज ‘मैं’ की जगह ‘हम’ की भावना को प्राथमिकता देता है। यही सामूहिक चेतना और सह-अस्तित्व की सोच उन्हें आधुनिक समाज की तुलना में कहीं अधिक बेहतर और संवेदनशील बनाती है।

स्वस्थ संवाद से ही बनेगा स्वस्थ समाज

हरिवंश ने वैचारिक असहिष्णुता पर प्रहार करते हुए कहा, “यदि किसी की यह सोच बन जाए कि ‘सिर्फ मैं ही सही हूँ और बाकी सब गलत हैं‘, तो वहां सार्थक संवाद की संभावना ही समाप्त हो जाती है।” उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज का निर्माण केवल स्वस्थ संवाद के माध्यम से ही संभव है।

ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए उन्होंने मगध साम्राज्य, लिच्छवी गणराज्य और प्राचीन धर्मग्रंथों के उदाहरण रखे और संवाद की अहमियत को रेखांकित किया। राज्यसभा में अपनी भूमिका की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनका मुख्य दायित्व ही विभिन्न विचारों और संवादों को धैर्यपूर्वक सुनना है।

उन्होंने एक गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि आज के दौर में सबसे बड़ा सवाल यह है कि— क्या हमारे पास दूसरों की बात को सुनने का उतना धैर्य है, जितना कि अपनी बात कहने की व्यग्रता (हड़बड़ी)? श्रेष्ठ संवाद वही है जहाँ केवल समस्याओं पर चर्चा न हो, बल्कि सर्वसम्मति से उनका समाधान भी खोजा जाए। संवाद ही समस्या को समाधान में बदलने का सबसे सशक्त माध्यम है।

स्वस्थ जीवन शैली, विकास और जड़ों से जुड़ाव पर चर्चा

कार्यक्रम की शुरुआत में अरुण ऋषि (स्वर्गीय) ने स्वस्थ जीवन जीने की कला पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को प्राकृतिक और दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों के प्रति जागरूक करते हुए बताया कि कैसे हर दिन थोड़ी देर ताली बजाकर खुद को निरोग रखा जा सकता है और नियमित अभ्यासों से आँखों से चश्मा तक उतारा जा सकता है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने विकास की अंधी दौड़ के बीच अपनी जड़ों, संस्कृति और विरासत को सहेजने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वही समाज स्थायी प्रगति कर सकता है जो आधुनिकता को अपनाते हुए भी अपनी पहचान और परंपराओं से जुड़ा रहता है।

वहीं, आईपीएस अधिकारी प्रशांत आनंद ने देश सेवा और राष्ट्रहित के प्रति अपनी निष्ठा व प्रतिबद्धता के महत्व को रेखांकित किया।

गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

इस भव्य आयोजन में कांके टॉक्स के फाउंडर अमित मोदी, ट्रेडेक्स के राजीव गुप्ता और वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री बलबीर दत्त ने भी अपने विचार रखे और कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर शहर के कई गणमान्य नागरिक, बुद्धिजीवी और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे, जिन्होंने इस संवाद सत्र की भूरि-भूरि सराहना की।

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