आजादी की लड़ाई में पलामू के क्रांतिकारियों का योगदान

रांची। जिंदगी जिंदाबाद


@कनक राज पाठक
भारतीय स्वतंत्रता के महासमर में पलामू के क्रांतिकारियों का भी अभिन्न योगदान है। आजादी की लड़ाई में कदमताल करने वाले, ब्रितानी हुकूमत से लोहा लेने वाले पलामू के क्रांतिकारियों का नाम इतिहास के स्मृति पटल से गुम हो गया था। उन गुमनाम चेहरों को पुनः स्मारित करने का काम पलामू के मूल निवासी और नोएडा उत्तर प्रदेश में कार्यरत एक पत्रकार प्रभात मिश्रा “सुमन स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में पलामू के योगदान की चर्चा नहीं के बराबर है। आजादी के अमृतकाल में ऐतिहासिक स्त्रोतों, स्थानों, पुस्तकों में चर्चाओं और व्यक्तिगत साक्षात्कारों से मथ कर सुधा के इस कलशरूपी पुस्तक के अमृत रसपान के लिए प्रस्तुत किया है। 216 पन्नों के इस पुस्तक में 31 गुमनान क्रांतिकारियों के बारे में उल्लेख किया गया है, जिन्होंने पलामू में स्वतंत्रता आंदोलन के मशाल को अपनी कुर्बानियों की लौ से जलाए रखा। पुस्तक की शुरुआत पलामू में 1942 की क्रांति का उल्लेख से होता है। 9 दिसंबर 1940 को यदुवंश सहाय को गिरफ्तार किया गया और 10 अगस्त को एक साल की सजा सुनाते हुए हजारीबाग जेल भेज दिया गया था। यदु बाबू के अलावा उमेश्वरी चरण, लल्लू बाबू सहित दर्जनों लोगों को 1942 की क्रांति में जेल जाना पड़ा था।
इसके पूर्व 28 मार्च 1959 को लेस्लीगंज छावनी में नीलांबर शाही भोक्ता और पीतांबर शाही भोक्ता को एक पेड़ पर फांसी दे दी गई थी। इन दोनों सहोदर भाइयों के संपर्क बिहार के वीर कुंअर सिंह और उनके भाई अमर सिंह से भी थे। पुस्तक में महात्मा गांधी, राजेंद्र प्रसाद और नेता जी सुभाष चंद्र बोस के आगमन की भी विस्तृत चर्चा की गई है। गांधी के नगर भ्रमण की भी चर्चा पुस्तक में की गई है। नेता जी का जपला सीमेंट फैक्ट्री में जाना और वहां के मजदूरों को आंदोलित करने की भी चर्चा इस पुस्तक में रोचक ढंग से की गई है।
इस पुस्ततक के प्रथम खंड में ही यह जानकारी मिलती है कि भारतीय संविधान के निर्माण में पलामू के यदुवंश सहाय का भी योगदान है। दिल्ली में संविधान सभा के सभी सदस्यों का जहां हस्ताक्षर आज भी सुरक्षित है, उसमें पलामू के यदुवंश सहाय का भी हस्ताक्षर है। पुस्तक में बेलवाटीकर के गणेश प्रसाद वर्मा, डालटनगंज के ही अमीय घोष, लेस्लीगंज के जीतू राम, पिपरा बभंडी के राजकिशोर सिंह, जगरानायण पाठक, गौरी शंकर ओझा, केतात के भुवनेश्वर चौबे सहित महान क्रांतिकारियों के बड़े-बड़े कारनामों का उल्लेख है।
इस पुस्तक में काकोरी ट्रेन एक्शन के मुख्य नायक अशफाक उल्ला खां ने पलामू के डालटनगंज में एक इंजीनियरिंग कंपनी में करीब दस माह तक काम किया था। इसके अलावा मदन मोहन मालवीय द्वारा दिल्ली में संचालित एक अनाथालय के लिए 27 मई 1929 को पोस्टल लूट कांड को अंजाम दिया गया था।
वहीं पलामू के राम प्रसाद आजाद ने गोवा मुक्ति अभियान में हिस्सा लिया था।
यह पुस्तक पलामू जिले के सभी लोगों को तो पढ़नी ही चाहिए साथ ही साथ आजादी के आंदोलन में पलामू जिले के योगदान के बारे में जानने की जिज्ञासा रखने वाले सभी शोधार्थियों, विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मूल रूप से पलामू के प्रभात मिश्रा “सुमन” जी, जो पेशे से पत्रकार हैं और वर्तमान में अमर उजाला के नोएडा में संपादकीय विभाग में कार्यरत हैं। प्रभात जी ने पलामू के क्रांतिवीर शीर्षक से पुस्तक लिखी है, पुस्तक को प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशित किया है और पुस्तक की कीमत 300 रुपए है। यह पुस्तक प्रभात प्रकाशन के सभी केंद्रों और अन्य पुस्तक बिक्री केंद्रों के अलावा अमेजन पर भी ऑनलाइन उपलब्ध है।

https://zindagijindabaad.com/humble-tribute-on-dr-apj-abdul-kalam/

https://archive.org/details/in.gov.tribals.74102

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