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रांची में 14वें ईस्ट जोन क्रिटिकल केयर कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ, AI और टेली-ICU से गंभीर मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज
रांची। झारखंड में गंभीर रूप से बीमार मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य राज्य के प्रत्येक जिले में ICU की सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए केवल बड़े शहरों या चुनिंदा अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े। खासकर झारखंड के सुदूरवर्ती, ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक गंभीर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
यह बात स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने शुक्रवार को रांची में आयोजित 14वें ईस्ट जोन क्रिटिकल केयर कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों के उपचार में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि मरीज को समय पर ICU, विशेषज्ञ डॉक्टर और जरूरी चिकित्सा सुविधा मिल जाए, तो कई गंभीर परिस्थितियों में उसकी जान बचाई जा सकती है।
रांची क्रिटिकल केयर सोसाइटी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय 14वें ईस्ट जोन क्रिटिकल केयर कॉन्फ्रेंस का आयोजन 11 से 13 सितंबर तक सेलिब्रेशंस, करमटोली में किया जा रहा है। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय ‘इंटीग्रेटेड क्रिटिकल केयर : ब्रिजिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड कंपैशन’ रखा गया है। सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, चिकित्सक, इंटेंसिविस्ट और एनेस्थिसियोलॉजिस्ट हिस्सा ले रहे हैं।
अजय कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड जैसे राज्य में क्रिटिकल केयर को मजबूत करना बेहद जरूरी है। राज्य का भौगोलिक क्षेत्र बड़ा है और यहां बड़ी संख्या में ग्रामीण तथा आदिवासी आबादी रहती है। कई गांव ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जहां अस्पतालों तक पहुंचना आसान नहीं है। कुछ इलाकों में सड़क और परिवहन की सुविधा भी सीमित है। ऐसी स्थिति में यदि किसी व्यक्ति को अचानक गंभीर बीमारी हो जाए या उसे तत्काल ICU की आवश्यकता पड़े, तो मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें मरीज की आर्थिक स्थिति और उसके निवास स्थान की दूरी उसके इलाज में बाधा न बने। इसके लिए जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है।
हर जिले में ICU सुविधा विकसित करने पर जोर
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार राज्य के प्रत्येक जिले में ICU की व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि गंभीर मरीजों को शुरुआती और आवश्यक क्रिटिकल केयर सुविधा उनके अपने जिले के आसपास ही उपलब्ध हो सके।
अभी गंभीर मरीजों को कई बार बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल से रांची या दूसरे बड़े चिकित्सा केंद्रों में रेफर करना पड़ता है। इस दौरान मरीज को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। गंभीर स्थिति में यह यात्रा मरीज के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। यदि जिला स्तर पर ICU और प्रशिक्षित चिकित्सा टीम उपलब्ध हो, तो मरीज को तत्काल जरूरी उपचार दिया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लेकर आगे का उपचार तय किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश केवल ICU बेड बढ़ाने तक सीमित नहीं है। ICU के साथ प्रशिक्षित चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, आवश्यक उपकरण, मॉनिटरिंग सिस्टम, वेंटिलेटर और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। क्रिटिकल केयर तभी प्रभावी हो सकता है जब अस्पताल में पूरी व्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ी हो।
टेली-ICU से दूरदराज के मरीजों को मिलेगी विशेषज्ञ सलाह
झारखंड में गंभीर मरीजों के उपचार में टेली-ICU को भी महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा रहा है। अजय कुमार सिंह ने बताया कि राज्य में 10 बेड की टेली-ICU सुविधा के माध्यम से जिला स्तर पर गंभीर मरीजों के उपचार में सहायता दी जा रही है।
टेली-ICU की मदद से दूर स्थित अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों के बारे में विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह ली जा सकती है। इससे छोटे या जिला स्तर के अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टरों को गंभीर मामलों में विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिल सकता है।
कई बार किसी जिला अस्पताल में मरीज का इलाज शुरू करने के लिए जरूरी डॉक्टर और उपकरण उपलब्ध होते हैं, लेकिन किसी विशेष गंभीर स्थिति के प्रबंधन के लिए विशेषज्ञ की सलाह की जरूरत पड़ती है। ऐसे मामलों में टेली-ICU व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है।
इस व्यवस्था के माध्यम से मरीज की स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े और मेडिकल पैरामीटर विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंचाए जा सकते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर इन जानकारियों के आधार पर स्थानीय चिकित्सा टीम को जरूरी सुझाव दे सकते हैं। इससे मरीज को तुरंत दूसरे शहर में भेजने की आवश्यकता कुछ मामलों में कम हो सकती है और उपचार की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है।
AI का बढ़ेगा इस्तेमाल
अजय कुमार सिंह ने कहा कि आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल भी बढ़ाया जाएगा। AI आधारित तकनीक गंभीर मरीजों की लगातार निगरानी में डॉक्टरों की सहायता कर सकती है।
ICU में भर्ती मरीजों की स्थिति में बहुत तेजी से बदलाव हो सकता है। मरीज का ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन स्तर, हार्ट रेट, तापमान और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मापदंड लगातार बदलते रहते हैं। इन सभी पैरामीटर पर नजर रखना क्रिटिकल केयर टीम की जिम्मेदारी होती है।
AI आधारित प्रणाली बड़ी मात्रा में स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण करके डॉक्टरों को मरीज की स्थिति में होने वाले संभावित बदलावों के बारे में संकेत दे सकती है। इससे डॉक्टरों को मरीज की निगरानी में मदद मिल सकती है और किसी गंभीर बदलाव की स्थिति में समय रहते ध्यान दिया जा सकता है।
हालांकि अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि AI डॉक्टरों का स्थान नहीं लेगा। मरीज के उपचार से संबंधित अंतिम निर्णय चिकित्सक ही लेंगे। AI का इस्तेमाल डॉक्टरों को बेहतर जानकारी और निगरानी में सहायता देने के लिए किया जाएगा।
इस तरह आधुनिक तकनीक का उद्देश्य चिकित्सा विशेषज्ञों की क्षमता को बढ़ाना है। यदि किसी दूरस्थ जिले में ICU में भर्ती मरीज की स्थिति में बदलाव आता है, तो स्थानीय चिकित्सक के साथ विशेषज्ञ चिकित्सक और तकनीकी सिस्टम मिलकर मरीज के उपचार में सहायता कर सकते हैं।
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक दूरदराज के इलाकों तक विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा पहुंचाना है। राज्य में बड़ी संख्या में आदिवासी और ग्रामीण आबादी रहती है। कई गांव पहाड़ी, जंगल और दुर्गम इलाकों में स्थित हैं।
अजय कुमार सिंह ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि इन क्षेत्रों के लोगों को गंभीर बीमारी की स्थिति में बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध हो। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में किसी मरीज की हालत अचानक गंभीर हो जाती है और उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत होती है। यदि अस्पताल तक पहुंचने में कई घंटे लग जाएं, तो मरीज की स्थिति और बिगड़ सकती है।
इस समस्या से निपटने के लिए जिला स्तर पर ICU और क्रिटिकल केयर सुविधा मजबूत करना जरूरी है। इसके साथ ही एंबुलेंस सेवा, रेफरल सिस्टम और टेली-मेडिसिन जैसी सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक की मदद से विशेषज्ञ डॉक्टरों और दूरदराज के मरीजों के बीच की दूरी कम की जा सकती है। इससे गंभीर मरीजों को समय पर उचित चिकित्सा सलाह मिल सकेगी।
ICU सुविधाओं की कमी अभी भी बड़ी चुनौती
राज्य में क्रिटिकल केयर सुविधाओं को विस्तार देने के सामने कई चुनौतियां हैं। अपर मुख्य सचिव ने ICU बेड की सीमित उपलब्धता, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और अस्पतालों में पर्याप्त बेड की कमी को प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया।
गंभीर मरीजों के उपचार में ICU की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। लेकिन ICU स्थापित करना केवल बेड लगाने तक सीमित नहीं है। इसके लिए वेंटिलेटर, मॉनिटरिंग उपकरण, ऑक्सीजन सपोर्ट, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, विशेषज्ञ चिकित्सक और चौबीसों घंटे उपलब्ध चिकित्सा टीम की जरूरत होती है।
इसी वजह से राज्य सरकार के सामने प्रत्येक जिले में ICU सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य एक बड़ी स्वास्थ्य योजना के रूप में सामने आया है। इसके लिए मौजूदा अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर काम करना होगा।
गंभीर बीमारी के इलाज का खर्च भी बड़ी चिंता
क्रिटिकल केयर उपचार महंगा भी हो सकता है। लंबे समय तक ICU में रहने वाले मरीजों के इलाज में दवाइयों, जांच, उपकरणों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता होती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च बड़ी चुनौती बन सकता है।
अजय कुमार सिंह ने कहा कि ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है जिसमें किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति उसके इलाज में बाधा न बने। सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है, खासकर गंभीर बीमारी के मामलों में।
यदि जिला स्तर पर ICU और विशेषज्ञ सलाह की सुविधा मजबूत होती है, तो मरीजों और उनके परिवारों को इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाने की आवश्यकता कम हो सकती है। इससे यात्रा और अन्य खर्चों का बोझ भी कम हो सकता है।
कोविड महामारी ने समझाया क्रिटिकल केयर का महत्व
अपर मुख्य सचिव ने कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान पूरी दुनिया ने क्रिटिकल केयर के महत्व को समझा। महामारी के समय गंभीर मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई थी। अस्पतालों में ICU बेड, वेंटिलेटर, मॉनिटर और अन्य जरूरी संसाधनों की मांग तेजी से बढ़ी थी।
उस दौर में बड़े शहरों के अस्पतालों में भी गंभीर मरीजों को समय पर ICU उपलब्ध कराने में कठिनाइयां सामने आई थीं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए मजबूत क्रिटिकल केयर सिस्टम कितना जरूरी है।
कोविड महामारी से मिले अनुभव के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में ICU क्षमता बढ़ाने, ऑक्सीजन व्यवस्था मजबूत करने, प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की संख्या बढ़ाने और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने की जरूरत और स्पष्ट हुई।
झारखंड जैसे राज्य के लिए यह चुनौती और अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाना आवश्यक है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य
क्रिटिकल केयर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल अस्पताल और उपकरण पर्याप्त नहीं हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता भी जरूरी है। अजय कुमार सिंह ने राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि इस दिशा में चिकित्सा शिक्षा का विस्तार किया जा रहा है।
वर्तमान में रिम्स में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा की व्यवस्था है, जहां नौ सीटें उपलब्ध हैं। सरकार अन्य संस्थानों में भी विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा शुरू करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि अगले तीन से चार वर्षों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सीटों की संख्या बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे राज्य में आने वाले समय में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ सकती है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से जिला और अन्य सरकारी अस्पतालों में गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही टेली-ICU और टेली-मेडिसिन व्यवस्था का प्रभावी उपयोग भी किया जा सकेगा।
मेडिकल शिक्षा और क्रिटिकल केयर का संबंध
क्रिटिकल केयर की गुणवत्ता सीधे तौर पर विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा से जुड़ी हुई है। गंभीर मरीजों के उपचार के लिए ऐसे डॉक्टरों की जरूरत होती है जो ICU में जटिल परिस्थितियों को संभालने के लिए प्रशिक्षित हों।
इसी वजह से राज्य सरकार चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर भी ध्यान दे रही है। विशेषज्ञ सीटों की संख्या बढ़ाने से अधिक डॉक्टरों को उच्च स्तरीय चिकित्सा प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
आने वाले वर्षों में यदि विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ती है, तो इसका फायदा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ राज्य की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को मिल सकता है। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ने से रेफरल सिस्टम भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच समन्वय जरूरी
अजय कुमार सिंह ने सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में मजबूत क्रिटिकल केयर इकोसिस्टम विकसित करने के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों को एक-दूसरे के साथ समन्वय से काम करने की जरूरत है।
किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था में सरकारी अस्पतालों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन निजी अस्पताल भी गंभीर मरीजों के उपचार में बड़ी भूमिका निभाते हैं। यदि दोनों क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय हो, तो मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार सही स्थान पर उपचार दिलाने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, ICU बेड, जांच सुविधाएं और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी आपस में साझा करने से मरीजों के रेफरल को बेहतर बनाया जा सकता है।
समय पर इलाज से बच सकती है मरीज की जान
क्रिटिकल केयर में समय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी गंभीर मरीज की स्थिति कुछ ही समय में बदल सकती है। हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गंभीर संक्रमण, सांस से जुड़ी समस्या, दुर्घटना और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में शुरुआती उपचार का असर मरीज के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
यदि मरीज को नजदीकी अस्पताल में तुरंत प्राथमिक उपचार और आवश्यक निगरानी मिल जाए, तो विशेषज्ञ केंद्र तक पहुंचने तक उसकी स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
यही वजह है कि जिला स्तर पर ICU और टेली-ICU जैसी सुविधाओं को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य यह नहीं है कि हर गंभीर मरीज को जिला अस्पताल में ही अंतिम उपचार मिल जाए, बल्कि जरूरत के अनुसार तत्काल चिकित्सा शुरू की जा सके और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह उपलब्ध हो सके।
सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञों की भागीदारी
रांची में आयोजित 14वें ईस्ट जोन क्रिटिकल केयर कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न हिस्सों से विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हुए हैं। सम्मेलन में 150 से अधिक फैकल्टी और 200 से अधिक डॉक्टरों की भागीदारी हो रही है।
तीन दिवसीय सम्मेलन में क्रिटिकल केयर से जुड़े विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिक सत्र और विशेषज्ञ चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं। सम्मेलन का मुख्य विषय विज्ञान, तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता को एक साथ जोड़कर बेहतर क्रिटिकल केयर व्यवस्था तैयार करने पर केंद्रित है।
कार्यक्रम की शुरुआत एक दिवसीय हैंड्स-ऑन वर्कशॉप से हुई। इसमें चिकित्सा विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को क्रिटिकल केयर से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी जा रही है।
ऐसे सम्मेलन चिकित्सकों को नई तकनीक, उपचार पद्धतियों और गंभीर मरीजों के प्रबंधन में हो रहे बदलावों के बारे में जानकारी देने का अवसर प्रदान करते हैं।
AI और मानवीय संवेदनशीलता का संतुलन
सम्मेलन के विषय में विज्ञान और तकनीक के साथ ‘कंपैशन’ यानी मानवीय संवेदनशीलता को भी शामिल किया गया है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके परिवार के लिए चिकित्सा उपचार के साथ मानवीय व्यवहार भी महत्वपूर्ण होता है।
ICU में भर्ती मरीज अक्सर अपनी स्थिति के कारण मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कमजोर होता है। ऐसे समय में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का व्यवहार मरीज और उसके परिवार के लिए महत्वपूर्ण होता है।
तकनीक मरीज की निगरानी और उपचार में सहायता कर सकती है, लेकिन मरीज के इलाज का अंतिम निर्णय चिकित्सक के अनुभव और चिकित्सा ज्ञान पर आधारित रहेगा। इसलिए भविष्य की क्रिटिकल केयर व्यवस्था में AI और मानवीय विशेषज्ञता के बीच संतुलन जरूरी होगा।
टेली-मेडिसिन से कम होगी दूरी
झारखंड के ग्रामीण और दुर्गम इलाकों के लिए टेली-मेडिसिन और टेली-ICU जैसी तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इन माध्यमों से दूर बैठे विशेषज्ञ डॉक्टर किसी मरीज की स्थिति के बारे में स्थानीय चिकित्सक को सलाह दे सकते हैं।
इससे विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा के लिए मरीज को हर बार बड़े शहर तक ले जाने की जरूरत कम हो सकती है। खासकर उन मामलों में जहां स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार और निगरानी संभव है, लेकिन विशेषज्ञ सलाह की आवश्यकता होती है।
सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को और व्यापक बनाना है।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में ISCCM के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणबीर सिंह त्यागी और राष्ट्रीय सचिव डॉ. घनश्याम जागोतकर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश कुमार अग्रवाल और आयोजन सचिव डॉ. मनोज कुमार के नेतृत्व में सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन समिति के सदस्य डॉ. विनोद, डॉ. विशाल विनोद, डॉ. तापस साहू, डॉ. जय प्रकाश, डॉ. विजय मिश्रा और डॉ. डीएसएन राव सहित रांची क्रिटिकल केयर सोसाइटी के सदस्यों ने सम्मेलन के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में हो रहे बदलावों, नई तकनीकों और गंभीर मरीजों के उपचार से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।
झारखंड में मजबूत होगा क्रिटिकल केयर नेटवर्क
राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक जिले में ICU सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से विकसित होती है, तो जिला स्तर पर गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ सकती है।
इसके साथ ही टेली-ICU, AI, टेली-मेडिसिन और विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा के विस्तार से राज्य में क्रिटिकल केयर का नेटवर्क मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
सरकार के सामने हालांकि कई चुनौतियां भी हैं। ICU के लिए आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था, प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता, अस्पतालों में पर्याप्त बेड, एंबुलेंस और रेफरल व्यवस्था तथा ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर करना जरूरी होगा।
यदि इन सभी क्षेत्रों पर एक साथ काम किया जाता है, तो गंभीर मरीजों के इलाज में समय और दूरी से जुड़ी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अजय कुमार सिंह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता राज्य के सुदूरवर्ती और आदिवासी बहुल गांवों तक गंभीर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। प्रत्येक जिले में ICU की व्यवस्था करने के प्रयास इसी दिशा में किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाकर विशेषज्ञ डॉक्टरों और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों के बीच की दूरी कम करने की कोशिश की जाएगी।
आने वाले तीन से चार वर्षों में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा की सीटों को 100 तक बढ़ाने का लक्ष्य भी इसी व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा है। इससे राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और गंभीर मरीजों के उपचार की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रांची में आयोजित 14वां ईस्ट जोन क्रिटिकल केयर कॉन्फ्रेंस भी इसी विषय को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच है। देशभर से आए विशेषज्ञ यहां अपने अनुभव और नई चिकित्सा तकनीकों से जुड़ी जानकारी साझा कर रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य विज्ञान और तकनीक के साथ मानवीय संवेदनशीलता को जोड़ते हुए ऐसी क्रिटिकल केयर व्यवस्था पर चर्चा करना है, जो गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध करा सके।
झारखंड जैसे भौगोलिक और सामाजिक रूप से विविध राज्य में मजबूत क्रिटिकल केयर व्यवस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस की जाती रही है। जिला स्तर पर ICU, टेली-ICU और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से गंभीर मरीजों को अपने क्षेत्र के नजदीक इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही AI और टेली-मेडिसिन जैसी तकनीकों का सही इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।
सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें किसी गंभीर मरीज को केवल इसलिए बेहतर इलाज से वंचित न होना पड़े कि वह राज्य के किसी दूरदराज या दुर्गम क्षेत्र में रहता है। इसके लिए जिला स्तर की सुविधाओं को मजबूत करने के साथ आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।