राँची, विशेष संवाददाता: झारखंड के जनजातीय विद्यार्थियों के नवाचारों को उत्पाद और व्यावसायिक प्रक्रिया में बदलने के उद्देश्य से झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जेयूटी) की सेक्शन-8 कंपनी ‘सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एन्ट्रेप्रेन्योरशिप (जेयूटी-सीआईआईई)’ की ओर से ‘आइडिया ट्राइब-2026’ के तहत क्षेत्रीय उद्यमिता बूट कैंप की शुरुआत मंगलवार से हो गई है। 30 अक्टूबर तक चलने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम में झारखंड के चार क्षेत्रीय केंद्रों से चयनित 100 टीमों के कुल 441 विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने विचारों को व्यावहारिक उत्पादों, प्रक्रियाओं और बाजार में उपयोगी उद्यमों में बदलने के लिए तैयार करना है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और दिग्गज कंपनियों का मिल रहा सहयोग
इस अनूठी पहल को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के सहयोग से संचालित ‘टेक्समिन’ और सीसीएल, राँची का भरपूर समर्थन मिल रहा है। ‘आइडिया ट्राइब-2026’ के तीसरे चरण के तहत राज्य के चार प्रमुख शैक्षणिक और औद्योगिक केंद्रों—जमशेदपुर, राँची, पलामू और बीआईटी सिंदरी (धनबाद)—में यह क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
इस संबंध में झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके सिंह ने कहा है कि “झारखंड के जनजातीय विद्यार्थियों में नवाचार और पारंपरिक ज्ञान से उद्यम स्थापित करने की अपार क्षमता है। हमारा लक्ष्य विद्यार्थियों को सफल उद्यमी बनाकर राज्य को स्टार्टअप का एक प्रमुख केंद्र बनाना है।”
विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों पर सहभागिता का विवरण
जेयूटी के इन चार क्षेत्रीय केंद्रों पर कुल 441 विद्यार्थियों को गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। केंद्रवार प्रतिभागियों की संख्या और टीमों का विवरण इस प्रकार है:
- जमशेदपुर केंद्र: 23 टीमों के 104 विद्यार्थी शामिल हैं।
- राँची केंद्र: 20 टीमों के 90 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।
- पलामू केंद्र: 17 टीमों के 80 विद्यार्थी इस बूट कैंप का हिस्सा हैं।
- बीआईटी सिंदरी, धनबाद केंद्र (दुमका सहित): 40 टीमों के कुल 167 विद्यार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
बूट कैंप में किन बातों पर दिया जा रहा है जोर?
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को व्यावहारिक धरातल पर मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है:
- स्थानीय व जनजातीय समस्याओं का समाधान: विद्यार्थियों को स्थानीय और जनजातीय समुदायों की विशिष्ट समस्याओं की पहचान करने तथा उपलब्ध संसाधनों से कम लागत वाले टिकाऊ समाधान विकसित करने का प्रशिक्षण मिल रहा है।
- व्यावहारिकता का आकलन: छात्र अपने विचारों की व्यावसायिक व्यवहार्यता (Feasibility) का आकलन करना सीख रहे हैं।
- उत्पाद विकास व लागत निर्धारण: प्रोटोटाइप तैयार करने, उत्पाद विकास, लागत निर्धारण, बिजनेस मॉडल तैयार करने, संभावित ग्राहकों की पहचान करने और बाजार की मांग को गहराई से समझने पर जोर दिया जा रहा है।
- फंडिंग और बौद्धिक संपदा (IPR): विद्यार्थियों को एमएसएमई योजनाओं, स्टार्टअप फंडिंग, वित्तीय सहायता, इन्क्यूबेशन सुविधाओं, बौद्धिक संपदा संरक्षण (Patent) और प्रोटोटाइप विकास में सीधी मदद व मार्गदर्शन मिल रहा है।
- प्रमुख फोकस क्षेत्र: इसमें जनजातीय ज्ञान और पारंपरिक कौशल, कृषि और वनोपज उद्यम, खाद्य प्रसंस्करण, हरित ऊर्जा, तकनीक आधारित ग्रामीण समाधान, डिजिटल सेवाओं और महिला उद्यमिता में मौजूद संभावनाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
उद्योग विशेषज्ञों द्वारा मिल रहा उच्चस्तरीय मार्गदर्शन
इस बूट कैंप को सफल बनाने के लिए उद्योग जगत, तकनीकी व शैक्षणिक संस्थानों और उद्यमिता क्षेत्र के कई दिग्गज विशेषज्ञ विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से आईआईटी कोलकाता के अध्यक्ष एवं टाटा स्टील के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश झा, ब्लू मिशन के अध्यक्ष डॉ. पंकज सोनी, बीएसएनएल के प्रिंसिपल जनरल मैनेजर, झारखंड सरकार के पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी निदेशक्यूपी साह, बीआईटी सिंदरी के प्रकाश कुमार और टेक्समिन के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूरज शामिल हैं। इन दिग्गजों के जुड़ने से विद्यार्थियों को सीधे तौर पर इंडस्ट्री के तौर-तरीकों और बाजार की वास्तविक सच्चदाइयों को जानने का अवसर मिल रहा है।
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