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रांची: बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र के प्रभाव से झारखंड में लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं ने राजधानी रांची की बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। आंधी-बारिश के दौरान शहर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के पोल गिरने से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चार दिनों तक जारी बारिश के दौरान रांची जिले में 209 पेड़ गिरने की सूचना है, जबकि शहर में 75 बिजली पोल टूटे हैं। इन घटनाओं के कारण कई क्षेत्रों में घंटों तक बिजली गुल रही और उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बिजली संकट का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहा। औद्योगिक क्षेत्रों में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कई इकाइयों के कामकाज पर असर पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 450 औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन पर प्रभाव पड़ा है। कुछ जगहों पर बिजली की आपूर्ति बहाल होने के बाद वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और तकनीकी खराबी की शिकायतें भी सामने आईं।
लगातार बारिश के बीच बिजली विभाग की टीमें विभिन्न क्षेत्रों में खराबी दूर करने में जुटी रहीं। कई स्थानों पर गिरे पेड़ों को हटाने और क्षतिग्रस्त बिजली पोल बदलने का काम किया गया। विभाग ने कर्मचारियों और अधिकारियों को फील्ड में तैनात रखा, ताकि बिजली आपूर्ति को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जा सके।
आंधी-बारिश ने राजधानी की बिजली व्यवस्था को झकझोरा
रांची में पिछले कुछ दिनों से बारिश का दौर जारी है। तेज हवा के साथ हुई बारिश के दौरान जगह-जगह पेड़ और उनकी बड़ी डालियां सड़कों पर गिर गईं। कई पेड़ बिजली की लाइनों पर जा गिरे, जिससे तार टूटे और पोल क्षतिग्रस्त हुए।
इसका सीधा असर बिजली आपूर्ति पर पड़ा। कुछ इलाकों में थोड़ी देर के लिए बिजली बंद हुई, जबकि कई स्थानों पर लोगों को कई घंटों तक बिजली के लिए इंतजार करना पड़ा।
प्रभात खबर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रांची जिले में चार दिनों की बारिश के दौरान 209 पेड़ गिरने की सूचना है। इन पेड़ों के गिरने से कई स्थानों पर बिजली के तार और पोल भी क्षतिग्रस्त हुए। रांची शहर में 75 बिजली पोल टूटे और शुक्रवार तथा शनिवार को उनकी जगह नए पोल लगाने का काम किया गया।
नामकुम ग्रिड में 33 केवी लाइन का ब्रेकर खराब
खराब मौसम के बीच नामकुम ग्रिड सब स्टेशन में भी तकनीकी समस्या सामने आई। यहां 33 केवी लाइन का ब्रेकर उड़ गया, जिसके कारण शहर के कुछ हिस्सों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आंधी-पानी के कारण यह खराबी आई। बाद में विभाग की टीम ने ग्रिड पहुंचकर मरम्मत का काम किया और ब्रेकर को दुरुस्त किया।
इस खराबी का असर एयरपोर्ट क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पर भी पड़ा। हालांकि, क्षेत्र में पूरी तरह आपूर्ति बंद न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था से बिजली उपलब्ध कराने की कोशिश की गई।
नामकुम ग्रिड रांची की बिजली व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां से कई 33 केवी फीडरों के माध्यम से शहर के अलग-अलग हिस्सों में बिजली पहुंचती है। इसलिए ग्रिड स्तर पर तकनीकी खराबी का प्रभाव एक बड़े क्षेत्र में पड़ सकता है।
पिस्का मोड़ से मोरहाबादी तक बिजली संकट
आंधी-बारिश के बाद रांची के कई इलाकों से बिजली बाधित होने की शिकायतें सामने आईं। पिस्का मोड़ क्षेत्र में घंटों बिजली बाधित रहने की बात सामने आई। गाड़ीगांव में भी एक रात बिजली नहीं रहने की शिकायत रही।
मोरहाबादी के सिंदवार टोली क्षेत्र में बिजली बहाल होने के बाद भी समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। यहां कुछ उपभोक्ताओं ने एक फेज में लो वोल्टेज और बिजली के उतार-चढ़ाव की शिकायत की।
लो वोल्टेज के कारण घरों में मोटर और दूसरे विद्युत उपकरण चलाने में परेशानी हुई। बिजली आने के बावजूद वोल्टेज स्थिर नहीं होने से उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल सकी।
धुर्वा के लाइट हाउस प्रोजेक्ट क्षेत्र में भी लगभग छह घंटे बिजली बाधित रहने की शिकायत सामने आई। टाटीसिलवे, रानी बागान, एदलहातू, जोगो पहाड़ और अशोक नगर सहित कई क्षेत्रों में भी बिजली आपूर्ति रुक-रुककर प्रभावित हुई।
एचइसी सेक्टर-1 में करीब 36 घंटे की परेशानी
एचइसी सेक्टर-1 मार्केट क्षेत्र में बिजली संकट अपेक्षाकृत लंबा रहा। स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार, बिजली आने के कुछ समय बाद दोबारा आपूर्ति बंद हो गई।
एक उपभोक्ता के अनुसार, इलाके में करीब 36 घंटे तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। बीच में लगभग दो घंटे के लिए बिजली आई, लेकिन रात में फिर आपूर्ति बंद हो गई।
लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से स्थानीय लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। घरों में पानी भरने के लिए मोटर चलाना मुश्किल हुआ। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चार्ज करने से लेकर दैनिक घरेलू कामों तक पर इसका असर पड़ा।
टाटीसिलवे में उद्योगों पर पड़ा असर
बिजली संकट का असर रांची के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी दिखाई दिया। टाटीसिलवे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति से संबंधित समस्या के कारण उद्योगों में काम प्रभावित हुआ।
उद्योगों के लिए बिजली की लगातार और स्थिर आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण होती है। मशीनें अचानक बंद होने पर उत्पादन प्रक्रिया रुक सकती है। इसके अलावा बिजली के वोल्टेज में उतार-चढ़ाव से मशीनरी को नुकसान का जोखिम भी रहता है।
रिपोर्ट के अनुसार, बिजली संकट के कारण करीब 450 औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन पर असर पड़ा।
औद्योगिक इकाइयों में बिजली बाधित होने का प्रभाव केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहता। मशीनों को दोबारा चालू करने, उत्पादन प्रक्रिया को सामान्य करने और तैयार माल की समयसीमा बनाए रखने में भी अतिरिक्त समय लग सकता है।
बिजली की मांग और उपलब्ध आपूर्ति में अंतर
शनिवार शाम पांच बजे तक रांची के विभिन्न ग्रिडों से बिजली आपूर्ति सामान्य स्तर से कम रही। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार:
| ग्रिड | सामान्य/अनुमानित आपूर्ति | उस समय आपूर्ति |
|---|---|---|
| हटिया ग्रिड | 110 मेगावाट | 90 मेगावाट |
| नामकुम ग्रिड | 125 मेगावाट | 92 मेगावाट |
| स्मार्ट सिटी ग्रिड | 30 मेगावाट | 29 मेगावाट |
| बुढ़मू ग्रिड | 25 मेगावाट | 20 मेगावाट |
| कांके ग्रिड | 80 मेगावाट | 65 मेगावाट |
ये आंकड़े बताते हैं कि खराब मौसम के कारण बिजली नेटवर्क के कई हिस्सों में आपूर्ति सामान्य स्तर से नीचे रही।
75 बिजली पोल टूटने से बढ़ी परेशानी
आंधी के दौरान पेड़ों के गिरने से बिजली के पोल और तारों को भी नुकसान पहुंचा। रांची शहर में 75 पोल टूटने की जानकारी सामने आई है।
पोल टूटने के बाद केवल बिजली आपूर्ति बंद नहीं होती, बल्कि सड़क सुरक्षा का मुद्दा भी पैदा होता है। टूटे हुए पोल, झूलते तार और सड़क पर गिरे पेड़ लोगों के आवागमन के लिए खतरा बन सकते हैं।
इसी कारण बिजली विभाग को कई स्थानों पर पहले क्षेत्र को सुरक्षित करना पड़ा और उसके बाद मरम्मत कार्य करना पड़ा।
शुक्रवार और शनिवार को कई क्षेत्रों में नए पोल लगाने का काम किया गया। साथ ही टूटे तारों और लाइनों को भी ठीक किया गया।
209 पेड़ों के गिरने से कई सड़कें प्रभावित
पेड़ों के गिरने की घटनाएं केवल बिजली व्यवस्था तक सीमित नहीं रहीं। कई जगह पेड़ और बड़ी डालियां सड़कों पर गिरने से यातायात भी प्रभावित हुआ।
रांची में हजारीबाग रोड, कोकर औद्योगिक क्षेत्र, डोरंडा बाजार, एजी मोड़, पिस्का, कांके रोड, पुंदाग, चेशायर होम रोड, मोरहाबादी, बड़गाई, टैगोर हिल, आरके मिशन और प्लाजा चौक समेत कई क्षेत्रों में पेड़ या डालियां गिरने की सूचना दी गई।
कुछ जगहों पर बिजली के पोल भी गिरे। किशोरगंज, टुंगरीटोली, आलम चौक, विद्यानगर, खेलगांव, किशुनपुर, रानी बागान, मोरहाबादी, पंडरा, नया सराय, बिजुलिया, शिवाजी पार्क, पहाड़ टोली, हवाई नगर रोड, सेटेलाइट चौक, इरगू टोली, चिरौंदी, हरमू, जेल चौक, डोरंडा सहित कई इलाकों में पोल क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली।
बारिश के बीच मरम्मत कार्य बना चुनौती
बिजली विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि खराब मौसम के दौरान ही मरम्मत का काम करना पड़ा। बारिश लगातार होने पर बिजली के उपकरणों और लाइनों पर काम करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
इसके बावजूद विभाग की टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात रहीं। जहां पेड़ गिरने से लाइन बाधित हुई, वहां पहले पेड़ और मलबा हटाया गया और फिर बिजली लाइन की जांच की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें क्षेत्रों में तैनात रखा था। इसका उद्देश्य यह था कि खराबी आने पर उसे जल्द से जल्द ठीक किया जा सके।
33 केवी लाइन की आपूर्ति कई क्षेत्रों में बहाल
शुक्रवार को कई इलाकों में खराबी आने के बाद बिजली विभाग ने 33 केवी लाइनों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया। रिपोर्ट के अनुसार, सभी 33 केवी लाइनों से बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई थी और अधिकांश 11 केवी लाइनों से भी आपूर्ति शुरू हो गई थी।
हालांकि, लो टेंशन यानी एलटी लाइन में खराबी की शिकायतें ज्यादा रहीं। इन्हें धीरे-धीरे ठीक किया जा रहा था।
इससे यह भी पता चलता है कि बिजली नेटवर्क में ग्रिड स्तर की समस्या और स्थानीय लाइन की समस्या अलग-अलग प्रभाव डाल सकती है। ग्रिड से बिजली उपलब्ध होने के बाद भी यदि स्थानीय फीडर या एलटी लाइन क्षतिग्रस्त है, तो संबंधित इलाके में उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिल सकती।
पेड़ और बिजली लाइन का संबंध
रांची जैसे हरियाली वाले शहर में बिजली की ओवरहेड लाइन और पेड़ों के बीच दूरी बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। तेज हवा में पेड़ों की बड़ी शाखाएं बिजली के तारों से टकरा सकती हैं।
यदि कोई बड़ा पेड़ सीधे पोल पर गिरता है, तो एक साथ पोल, तार और ट्रांसफॉर्मर जैसी कई व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।
इसलिए सामान्य मौसम में भी बिजली लाइनों के आसपास पेड़ों की छंटाई और कमजोर शाखाओं की पहचान महत्वपूर्ण है। बारिश और तूफान के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
बिजली कटने से पानी की समस्या भी बढ़ी
बिजली आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर पानी की व्यवस्था पर पड़ता है। कई घरों में पानी की मोटर बिजली से चलती है। बिजली नहीं रहने पर टंकी भरना मुश्किल हो जाता है।
शहर के कई हिस्सों में बिजली संकट के दौरान पानी को लेकर भी परेशानी की शिकायत सामने आई। खासकर उन इलाकों में जहां घरों और संस्थानों में मोटर के माध्यम से पानी पहुंचता है।
रांची में बिजली और जलापूर्ति की व्यवस्था एक-दूसरे से काफी हद तक जुड़ी हुई है। इसलिए लंबे समय तक बिजली कटौती होने पर इसका प्रभाव पेयजल व्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है।
उद्योगों के लिए स्थिर बिजली आपूर्ति क्यों जरूरी
रांची और उसके आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में कई तरह की छोटी-बड़ी इकाइयां काम करती हैं। इनमें मशीन आधारित उत्पादन होता है।
ऐसे उद्योगों के लिए केवल बिजली उपलब्ध होना ही पर्याप्त नहीं है। बिजली की गुणवत्ता और वोल्टेज का स्थिर रहना भी महत्वपूर्ण है।
यदि अचानक बिजली चली जाती है तो मशीनें बंद हो सकती हैं। उत्पादन प्रक्रिया बीच में रुक सकती है। बिजली दोबारा आने के बाद मशीनों को फिर से चालू करने में समय लग सकता है।
यदि बार-बार वोल्टेज ऊपर-नीचे होता है तो संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और मशीनों पर असर पड़ने की संभावना रहती है।
यही कारण है कि खराब मौसम से पैदा हुआ बिजली संकट औद्योगिक क्षेत्र के लिए अतिरिक्त चुनौती बन जाता है।
रांची के बिजली नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत पर पहले भी चर्चा
रांची में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए ग्रिड और फीडर क्षमता बढ़ाने के प्रयास पहले से चल रहे हैं। मई 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, जेबीवीएनएल ने रांची के प्रमुख ग्रिडों की क्षमता बढ़ाने तथा ट्रिपिंग और कटौती कम करने के लिए कई योजनाओं पर काम शुरू किया था। कांके ग्रिड में अतिरिक्त 50 एमवीए यूनिट जोड़ने और नामकुम से एयरपोर्ट फीडर तक नई 33 केवी लाइन बिछाने की योजना की जानकारी दी गई थी।
इस तरह की आधारभूत संरचना मजबूत होने पर सामान्य परिस्थितियों में बिजली वितरण की क्षमता बढ़ सकती है। लेकिन अत्यधिक बारिश और तेज हवा जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों में ओवरहेड नेटवर्क के सामने अलग तरह की चुनौतियां बनी रहती हैं।
अंडरग्राउंड केबलिंग से मिल सकती है राहत
रांची में बिजली की ओवरहेड लाइनों को धीरे-धीरे भूमिगत करने का काम भी लंबे समय से चल रहा है। पहले की परियोजनाओं में 33 केवी और 11 केवी लाइनों को अंडरग्राउंड करने की योजना बनाई गई थी।
अंडरग्राउंड केबलिंग का एक फायदा यह हो सकता है कि पेड़ गिरने या तेज हवा के कारण ऊपर से गुजरने वाली लाइनों को होने वाला नुकसान कम हो। हालांकि, भूमिगत केबल में भी तकनीकी खराबी होने पर उसे ढूंढने और मरम्मत करने की अपनी चुनौतियां होती हैं।
इसलिए भविष्य में रांची की बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रिड क्षमता, वैकल्पिक फीडर, अंडरग्राउंड केबलिंग और पेड़ों की वैज्ञानिक छंटाई जैसे कई उपाय एक साथ महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
खराब मौसम में बिजली विभाग की तैयारी
चक्रवाती या गहरे निम्न दबाव के प्रभाव से भारी बारिश और तेज हवा की संभावना होने पर बिजली विभाग के सामने पहले से तैयारी करने की चुनौती होती है।
इसमें फील्ड टीमों को तैयार रखना, अतिरिक्त पोल और तार उपलब्ध रखना, फॉल्ट लोकेशन तक पहुंचने के लिए वाहन और उपकरण तैयार रखना तथा आपातकालीन शिकायतों को प्राथमिकता देना शामिल हो सकता है।
ताजा मामले में भी विभाग ने कर्मचारियों और अधिकारियों को क्षेत्रों में तैनात रखा और छुट्टियां रद्द करने की जानकारी दी गई।
उपभोक्ताओं के लिए भी जरूरी सावधानी
बारिश और आंधी के दौरान बिजली से जुड़ी घटनाओं में आम लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
यदि सड़क पर बिजली का तार गिरा दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे हटाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। पानी भरी सड़क पर गिरे तार को सामान्य तार समझकर पार करने की कोशिश करना खतरनाक हो सकता है।
इसी तरह टूटे बिजली पोल, झुके हुए ट्रांसफॉर्मर या स्पार्किंग वाली लाइन से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
बिजली विभाग को ऐसी घटना की सूचना देना चाहिए और संबंधित क्षेत्र में लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए सतर्क करना चाहिए।
मौसम में राहत की उम्मीद
झारखंड में पिछले कुछ दिनों से जारी बारिश और तेज हवा के बाद मौसम में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद जताई गई थी। 26 सितंबर की रिपोर्ट में 27 सितंबर से मौसम में राहत मिलने की संभावना बताई गई।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर बादल, बारिश और तेज हवा की स्थिति बदल सकती है। इसलिए बिजली व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य करने के लिए विभाग को उन इलाकों में दोबारा निरीक्षण करना पड़ सकता है जहां पेड़ या पोल गिरने से नेटवर्क को नुकसान पहुंचा है।
अभी किन इलाकों पर नजर
रांची के जिन क्षेत्रों में पेड़, बिजली पोल या तार गिरने की शिकायत मिली है, वहां बिजली विभाग की टीमों की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी।
खासकर पिस्का मोड़, गाड़ीगांव, मोरहाबादी, धुर्वा, टाटीसिलवे, रानी बागान, एदलहातू, अशोक नगर, एयरपोर्ट क्षेत्र और औद्योगिक इलाकों में आपूर्ति सामान्य बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा।
विभाग की प्राथमिकता पहले बड़े फीडरों को चालू करना और उसके बाद स्थानीय एलटी लाइनों की खराबी दूर करना रही।
बिजली संकट ने शहर के सामान्य जीवन को प्रभावित किया
बिजली कटौती का असर केवल घरों पर नहीं पड़ा। बाजार, छोटे कारोबार, कार्यालय, अस्पतालों की कुछ सेवाएं, औद्योगिक इकाइयां, पानी की मोटर और मोबाइल नेटवर्क से जुड़े उपकरणों पर भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
खराब मौसम में जब बिजली के साथ सड़क और यातायात भी प्रभावित हो, तब शहर की सामान्य गतिविधियों पर एक साथ कई स्तरों पर असर पड़ता है।
रांची में पेड़ गिरने और बिजली पोल टूटने की बड़ी संख्या इस बात को दिखाती है कि तेज हवा और बारिश के दौरान शहरी बिजली नेटवर्क पर कितना दबाव पड़ सकता है।
निष्कर्ष
रांची में लगातार बारिश और आंधी ने राजधानी की बिजली व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चार दिनों की बारिश के दौरान रांची जिले में 209 पेड़ गिरे और शहर में 75 बिजली पोल टूटे। कई स्थानों पर तार और बिजली उपकरण भी क्षतिग्रस्त हुए।
नामकुम ग्रिड में 33 केवी लाइन के ब्रेकर में खराबी, कई फीडरों में तकनीकी समस्या और स्थानीय एलटी लाइनों के क्षतिग्रस्त होने से अलग-अलग इलाकों में बिजली संकट बना रहा। पिस्का मोड़, गाड़ीगांव, मोरहाबादी, धुर्वा, टाटीसिलवे, एचइसी और अन्य क्षेत्रों से लंबे समय तक बिजली बाधित रहने की शिकायतें सामने आईं।
वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों में भी बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से करीब 450 औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन पर असर पड़ा। बिजली विभाग ने खराब मौसम के बीच टीमों को मैदान में उतारकर पेड़ हटाने, पोल बदलने और लाइनों की मरम्मत का काम जारी रखा।
रांची में बिजली नेटवर्क को भविष्य में और मजबूत करने के लिए ग्रिड क्षमता बढ़ाने, वैकल्पिक फीडर तैयार करने और अंडरग्राउंड केबलिंग जैसी योजनाओं का महत्व भी इस घटना से सामने आता है।
फिलहाल मौसम में सुधार की संभावना के बीच विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी स्थानीय फॉल्ट को दूर कर पूरे शहर में स्थिर और सुरक्षित बिजली आपूर्ति बहाल करना है।