रांची: दीपावली के दौरान आतिशबाजी में थोड़ी सी भी लापरवाही खुशी के माहौल को हादसे में बदल सकती है। अनार, रॉकेट और बम जैसे पटाखों के इस्तेमाल के दौरान विशेष सतर्कता और सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है। रांची के चिकित्सा विशेषज्ञों ने त्योहार के दौरान जलने, आंखों में चोट और त्वचा की एलर्जी से बचाव के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं।
प्लास्टिक सर्जन और बर्न विशेषज्ञ डॉ. अनंत सिन्हा के अनुसार, यदि पटाखे से त्वचा जल जाए तो तुरंत प्रभावित हिस्से पर 15 से 20 मिनट तक नल का बहता ठंडा पानी डालना चाहिए। इससे त्वचा का तापमान कम होता है और घाव की गंभीरता घटती है। जलने पर बर्फ, आलू, टूथपेस्ट, घी या अन्य घरेलू चीजें लगाने से बचना चाहिए। साथ ही, जले हुए स्थान से चिपके कपड़ों को जबरन खींचकर न निकालें। चेहरे पर जलन या गंभीर घाव की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचें।
पटाखे छुड़ाने के तरीके पर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि अनार को हमेशा जमीन पर रखकर फुलझड़ी से जलाएं, उसे हाथ में पकड़ने की भूल न करें। रॉकेट छोड़ने के लिए कांच की बोतल का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि प्लास्टिक की बोतलें गर्मी से पिघलकर रॉकेट की दिशा बदल सकती हैं। बम को भी जमीन पर रखकर दूर से जलाना चाहिए। यदि कोई पटाखा एक बार में न जले, तो उसे दोबारा जलाने के लिए तुरंत उसके पास न जाएं। बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न चलाने दें।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीतीश प्रणय ने सचेत किया है कि पटाखों की चिंगारी और धुएं से आंखों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। आंख में धूल या चिंगारी जाने पर उसे बिल्कुल न रगड़ें, इससे कॉर्निया को क्षति पहुंच सकती है। आंख में लालिमा, दर्द या धुंधला दिखने पर डॉक्टर से परामर्श लें और मनमाने ढंग से आई ड्रॉप्स का उपयोग न करें।
वहीं, त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा रानी ने बताया कि पटाखों का धुआं और रासायनिक तत्व संवेदनशील त्वचा पर खुजली, जलन या एलर्जी पैदा कर सकते हैं। शरीर पर कालिख या बारूद जमने पर उसे तुरंत साफ पानी से धो लें। त्वचा संबंधी कोई भी समस्या से बचाव के लिए खुले और हवादार स्थानों पर ही पटाखे जलाएं ताकि धुएं से बचाव हो सके।