तीन महीने में निर्णय लेने का निर्देशहाईकोर्ट ने आवेदन पर तीन महीने में फैसला लेने को कहा।

हाईकोर्ट ने कहा- लाइसेंस पर फैसला लेते समय पुलिस सत्यापन, खतरे के आकलन और मामले की मौजूदा स्थिति पर करना होगा विचार

पटना हाईकोर्ट हथियार लाइसेंस:

पटना: पटना हाईकोर्ट ने हथियार लाइसेंस से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होने या FIR दर्ज होने के आधार पर हथियार लाइसेंस के आवेदन को खारिज नहीं किया जा सकता। लाइसेंस देने या न देने का फैसला करते समय संबंधित व्यक्ति से हथियार के दुरुपयोग, हिंसा या सार्वजनिक सुरक्षा को होने वाले संभावित खतरे का ठोस आधार होना जरूरी है।

पटना हाईकोर्ट हथियार लाइसेंस

कोर्ट ने यह भी कहा कि लाइसेंस के आवेदन पर विचार करते समय पुलिस की सत्यापन रिपोर्ट और आवेदक की सुरक्षा से जुड़े वास्तविक पहलुओं को भी उचित तरीके से देखा जाना चाहिए। मामले में अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट और डिविजनल कमिश्नर के पहले के आदेशों को रद्द करते हुए आवेदन पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया पटना हाईकोर्ट हथियार लाइसेंस:लंबित FIR के आधार पर हथियार लाइसेंस खारिज करना उचित नहीं।

लंबित आपराधिक मामले के आधार पर खारिज हुआ था आवेदन

मामला एक ऐसे याचिकाकर्ता से जुड़ा था, जिसने हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। संबंधित अधिकारियों ने मुख्य रूप से उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामले को आधार बनाकर लाइसेंस देने से इनकार कर दिया था।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि जिस आपराधिक मामले का हवाला देकर आवेदन खारिज किया गया था, उसमें बाद में उसे बरी कर दिया गया था। खास बात यह थी कि डिविजनल कमिश्नर द्वारा पहले के आदेश की पुष्टि किए जाने से पहले ही उस मामले में याचिकाकर्ता को राहत मिल चुकी थी।

हाईकोर्ट ने इसी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों के आदेशों को रद्द कर दिया और मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया।

पुलिस रिपोर्ट के आधार पर होगा नए सिरे से विचार

अदालत ने पटना के जिला मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि मामले में नई पुलिस रिपोर्ट मंगाई जाए। इसके बाद हथियार लाइसेंस के आवेदन पर कानून के अनुसार नए सिरे से निर्णय लिया जाए।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल FIR या पुराने आपराधिक मामले की मौजूदगी को आधार बनाकर आवेदन पर फैसला नहीं किया जाना चाहिए। संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मामले की वर्तमान स्थिति और उससे जुड़े वास्तविक तथ्यों को भी ध्यान में रखना होगा।

इसके साथ ही पुलिस सत्यापन रिपोर्ट को भी गंभीरता से देखने की जरूरत बताई गई। यदि पुलिस रिपोर्ट में किसी वास्तविक खतरे या हथियार के संभावित दुरुपयोग की बात सामने आती है, तो उस पहलू पर सक्षम प्राधिकारी को विचार करना होगा।

सुरक्षा की जरूरत पर भी ध्यान देने का निर्देश

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की पेशेवर स्थिति और उसके काम की प्रकृति को भी विचार में लेने को कहा। याचिकाकर्ता के बिल्डर और व्यवसायी होने तथा उसके काम से जुड़े सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर भी अधिकारियों को विचार करना होगा।

अदालत का निर्देश है कि लाइसेंस के आवेदन पर फैसला केवल आपराधिक मामले की मौजूदगी के आधार पर न होकर सभी प्रासंगिक परिस्थितियों को देखने के बाद लिया जाए।

इसमें आवेदक की सुरक्षा की वास्तविक आवश्यकता, पुलिस की रिपोर्ट, खतरे का आकलन और आपराधिक मामले की वर्तमान स्थिति जैसे पहलू शामिल होंगे।

तीन महीने में निर्णय लेने का निर्देश

पटना हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट को पूरे मामले पर नए सिरे से विचार कर आवेदन का निर्णय लेने के लिए तीन महीने की समयसीमा दी है।

इस तरह अदालत ने पुराने आदेशों को हटाकर प्रशासन को मामले की दोबारा जांच करने का रास्ता दिया है। अब नई पुलिस रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जिला प्रशासन को आवेदन पर फैसला करना होगा।

क्या है कोर्ट के फैसले का मुख्य संदेश?

इस मामले में अदालत के निर्देश का मुख्य बिंदु यह है कि हथियार लाइसेंस के आवेदन पर फैसला करते समय किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज या लंबित आपराधिक मामले को अकेले निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता। अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि हथियार रखने से वास्तव में सार्वजनिक सुरक्षा को कोई खतरा है या उसके दुरुपयोग की ठोस आशंका है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि आपराधिक पृष्ठभूमि को बिल्कुल नजरअंदाज किया जाएगा। लाइसेंसिंग प्राधिकारी को उपलब्ध पुलिस रिपोर्ट और अन्य प्रासंगिक तथ्यों के आधार पर कानून के अनुसार निर्णय लेना होगा।

नोट: उपलब्ध खोज में इस विशेष आदेश का पूरा आधिकारिक निर्णय/केस नंबर नहीं मिला। इसलिए ऊपर की खबर आपके दिए गए विवरण के आधार पर तैयार की गई है; इसे प्रकाशन से पहले पटना हाईकोर्ट के आधिकारिक Judgment Orders सेक्शन में केस नंबर/आदेश से मिलान करना उचित रहेगा। पटना हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर Judgment Orders और केस सर्च की सुविधा उपलब्ध है।

लंबित FIR के आधार पर हथियार लाइसेंस खारिज करना उचित नहीं: पटना हाईकोर्ट


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