टीआरएल संकाय : नागपुरी विभाग के विभागाध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया डॉ उमेश नन्द तिवारी, कहा -सबके सहयोग से अपने दायित्व का निर्वहन करूँगारांची : रांची विश्वविद्यालय के टीआरएल संकाय के स्नातकोत्तर नागपुरी विभाग में आज नये विभागाध्यक्ष के रूप में डॉ उमेश नन्द तिवारी ने पदभार ग्रहण किया. बता दे कि डॉ तिवारी डॉ सविता केशरी के सेवानिवृत्त होने के पश्चात् उनका स्थान लेंगे. डॉ केशरी 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुईं. इस मौके पर विभाग के डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो एवं डॉ रीझू नायक की अगुवाई में विभाग के शिक्षक, छात्र, शोधार्थी एवं कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से बुके देकर डॉ तिवारी का स्वागत किया. डॉ तिवारी ने कहा कि मुझे खुशी है कि मुझे दोबारा विभागाध्यक्ष का कार्यभार सौंपा गया है. मेरी कोशिश होगी कि हम सब मिलजुल कर अपने-अपने दायित्व का निर्वहण करेंगे. मौके पर बुद्धेश्वर बड़ाईक, सोनू सपवार व शोधार्थियों ने स्वागत गान प्रस्तुत किया.मौके पर टीआरएल संकाय के बंधु भगत, डॉ कुमारी शशि, डॉ गीता कुमारी सिंह, डॉ बीरेन्द्र कुमार सोय, करम सिंह मुण्डा, डॉ नरेन्द्र कुमार दास, डॉ राम कुमार, डॉ संतोष कुमार भगत, सुबास साहु, करमी मांझी, डॉ अनुराधा मुण्डू, मनय मुण्डा, डॉ उपेन्द्र कुमार, रवि कुमार, आलोक कुमार मिश्रा, प्रवीण कुमार, नेहा भगत, सोनू सपवार, अनुप गाड़ी, उषा कुमारी, पूनम कुमारी, धनंजय नायक, आनन्द विजय, राजकुमार, बसंती मुण्डा, प्रभा हेमरोम, चन्दा देवी के आलवा कई शिक्षकों, शोधार्थियों व छात्रों ने माला पहनाकर एवं बुके देकर बधाईयाँ दी साथ ही नयी जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएँ दी.

नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर का नियमितीकरण करे सरकार : संघ

झारखंड असिस्टेंट प्रोफेसर कांट्रैक्टच्युल एसोसियेशन (JAPCA) की 31 जनवरी को ऑनलाइन संपन्न बैठक में संघ के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ०एस०के०झा ने कहा कि राज्य अधीनस्थ विश्वविद्यालयों एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में कार्यरत…

TRL संकाय : नागपुरी विभागाध्यक्ष डॉ सविता केशरी सेवानिवृत्त, हुई भावुक, कहा – सेवानिवृत्त जरूर हुई हूँ पर सेवा के दायित्वों से नहीं

रांची : जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय, रांची विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर नागपुरी विभाग में पदस्थापित विभागाध्यक्ष डॉ सविता केशरी के सेवनिवृत्ति उपरांत विभागीय परिसर में विदाई सह सम्मान समारोह का…

बीपीएल बच्चों के नामांकन में गड़बड़ी का आरोप : अजय राय

रांची। बीपीएल बच्चों के नामांकन में गड़बड़ी का आरोप झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य के स्कूलों में बीपीएल बच्चों के नामांकन…

कोविड जैसी वैश्विक महामारी में की गई त्वरित कार्रवाई आपदा प्रबंधन का बेहतर उदाहरण है – अबु इमरान

पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी एंड डिजास्टर मैनेजमेंट-प्रोफेनशल डेवलपमेंट प्रोग्राम विषय पर दिया जा रहा है प्रशिक्षण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के अभियान निदेशक अबु इमरान ने कहा है कि कोविड जैसी…

जटिल गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें एफआरयू से टैग करें – डॉ पुष्पा

मातृत्व स्वास्थ्य एवं पोषण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन  रांची। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मातृत्व स्वास्थ्य कोषांग की राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ पुष्पा ने कहा है कि गर्भवती…

सोशल मीडिया पर प्रत्याशियों द्वारा किए जाने वाले पोस्टों के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किया गया है विशेष दिशा निर्देश

किसी भी प्रकार की चुनाव संबंधी जानकारी को सार्वजनिक करने से पूर्व समाचार पत्र, टीवी चैनल और मीडिया के अन्य माध्यम तथ्यों की पूरी तरह से जांच कर लें राँची।…

सभी स्वास्थ्य संस्थान लक्ष्य के मानकों पर खरा उतरें – डॉ चंद्रकिशोर शाही

सिजेरियन सेक्शन में गुणवत्ता और सुरक्षा विषय पर समीक्षा सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन रांची। राज्यभर के सभी स्वास्थ्य संस्थान गुणवत्ता के मानकों पर खरा उतरें। इसके लिए आवश्यक चेक…

डीएसपीएमयू के कुड़मालि विभाग में परछन कार्यक्रम मनाया गया

*रांची :* डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रांची में *कुड़मालि भाषा विभाग के पीजी तथा यूजी के नए सत्र के छात्र – छात्राओं के लिए स्वागत समारोह (परछन)* का आयोजन…

डीएसपीएमयू कुड़मालि विभाग के छात्र-छात्राओं का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण संपन्नशनिवार-रबिवार 27-28 जुलाई 2024 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू) रांची पीजी तथा यूजी अंतिम वर्ष के छात्रों ने दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण प. बंगाल के पूरूलिया जिला के ऐतिहासिक पंचकोट महाराजा के झालदा, केसरगढ़, कांसीपुर एवं गड़पंचकोट स्थित राजमहल एवं किला का भ्रमण किया। भ्रमण की शुरूआत पंचकोट महाराजा के द्वितीय राजधानी झालदा से शुरूआत की गई। झालदा में स्थित महाराजा के राजदरबार का सभी छात्रों ने गहन अध्ययन किया, जो कि लगभग 1500 वर्ष पुराना माना जाता है।यहां से सभी छात्र-छात्राएं इसके केसरगढ़ स्थित राजधानी गये। वहां कई राजघराना के किलों के अवशेष का निरीक्षण किया, जो कि काफी विध्वंश स्थिति में देखने को मिला। इसके बावजूद यहां पर रानी बांध, इसके समाधि स्थल जहां पर पूजा-अर्चना अब भी होता है। राजा के शास्त्रीय संगीत के वाद्ययंत्र होने के बात स्थानीय लोगों ने होने एवं 10 से अधिक बांध का नाम बतलाया, जिसमें ज्यादातर एक सीध में देखने को मिला।यहां से विद्यार्थी पंचकोट महाराजा के कांसीपुर स्थित राजधानी में स्थित राजबाड़ी का भ्रमण किया। इसके किला काफी अच्छी स्थिति में देखा गया। इस किला के एक भाग में इसके वंशज के एक सदस्य अभी निवास करते हैं। इसके किला के सबसे उपरी छोर में दिशा इंगित करने वाला है। जो कि धातु से बना हुआ है। मुख्य किला के आस-पास कई किला स्थित है जो कि ऊंची चारदिवारी में घिरी हुई है।यहां से विद्यार्थी पंचेत डेम के उस पार वेली पब्लिक स्कूल में रात्रि विश्राम किया। शैक्षणिक भ्रमण के दूसरे दिन 28 जुलाई को पंचेत डेम का भ्रमण किया। यह झारखंड एवं पश्चिम बंगाल के सीमा पर दामोदर नदी पर बना है। डेम के विशालकाय दृश्य देखकर सभी विद्यार्थी दंग रह गये और डेम में सेल्पी लेकर इसको अपने मोबाईल में कैद कर लिये।फिर दोपहर तक पंचकोट महाराजा के तीसरा स्थातंरित राजधानी गड़पंचकोट गया जो कि पंचेत पहाड़ एवं इसके किनारे स्थित है। कहा जाता है कि यहां पांच चरणों में कोट स्थापित होने के कारण इसको पंचकोट कहा जाता है। यह पांचों चरण पहाड़ के ऊंचाई के अनुसार विभक्त किया गया है। इसका अवशेष आज भी है। इसका निरीक्षण छात्रों ने पहाड़ चढ़कर किया। यहां पांच कोटों का गढ़ रहने के इस कारण इस पाहाड़ का नामकरण पंचकोट पहाड़ पड़ा है एवं इस पूरे क्षेत्र को ‘गड़ पंचकोट’ नाम दिया गया।यहां पर कुड़मालि भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं समाज से जुड़े कई साक्ष्य शिल्प कला के रूप में प्राप्त हुआ। जैसे दासांइ पर्व में होने वाले ‘कोहड़ा’ पूजा का प्रतीक, नटुवा नृत्य में प्रयोग होने वाला ‘फरि’, जिलहुड़ का चिन्ह, गुप्त दिरखा (कनगा), बुढ़ा बाबा का स्थल आदि। इसके अलावे पूर्व द्वार, झरना, सैनिक के गुप्त स्थल, जोड़ा हाथी, राजहंस, महाबीर जैसा पत्थर का बना मूर्ति, राजकीय प्रतीक चिन्ह, सबसे शीर्ष स्थल पर महाराजा, मंत्री, सेनापति आदि के बैठने का सभा स्थल, सजा हेतु ढलान पत्थर आदि प्रमुख है। यहां राजमहल के शुरूआत में स्थित एक आदि माइथान का निरीक्षण किया, जिसका आधा से ज्यादा अंश विध्वंश हो चुका था। इसका स्थलीय क्षेत्र लगभग 1.5 किलोमीटर परिधि में फैला हुआ है। उपर्युक्त इन सभी जगहों पर सबों ने किला एवं अवशेषों के सामने सामूहिक फोटो खिंचवाया और रात्रि में वापस विश्वविद्यालय परिसर रांची पहुंचे।इस शैक्षणिक भ्रमण में यूजी और पीजी के कुल मिलाकर 54 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। इनके साथ में कुड़मालि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. परमेश्वरी प्रसाद महतो, सहायक प्राध्यापक डॉ. निताई चंद्र महतो एवं पीएच. डी. शोधार्थी अशोक कुमार पुराण थे।ऐतिहासिक विश्लेषण के अनुसार पंचकोट राज्य के प्रथम राजधानी इस राढ़ भूमि स्थित गड़़ जयपुर (पुरूलिया) था जो कि 52 ई मानी जाती है। यहां पर कई सौ वर्ष राजधानी रहा फिर बाद में यहां से विस्तारित करते हुए झालदा मंे नया राजधानी स्थापित किया। यहां पर काफी लंबे वर्षाें तक राजधानी रहा और लगभग 900-1000 के आसपास यहां से अपनी राजधानी पूर्व की ओर ‘गड़पंचकोट’ में स्थापित किया। गड़पंचकोट में इसका राजधानी लगभग 350 वर्षों तक रहा फिर वहां से मुगलों एवं मराठों के आक्रमण के बाद लगभग 1300 ई. के आसपास यहां से राजधानी केसरगढ़ में स्थापित किया। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पर बहुत लंबे वषों तक राजधानी रहा लगभग 450-500 वर्ष तक। फिर यहां से 1750 के बाद इसकी राजधानी कांसीपुर में स्थापित किया, जो अंग्रेज एवं स्वतंत्रता काल तक रहा। इन जगहों से राजधानी स्थांतरण के बावजूद इसके वंशज के कुछ लोग वहीं रहने लगे। जिसका प्रमाण अभी भी झालदा राजघराना है।पंचकोट महाराजा के अधिन कई क्षेत्र के राजा थे जिसमें झरिया, कतरास, झालदा, चंदनकियारी आदि प्रमुख है।

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