झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को उनके कार्यालय कक्ष में राज्य के सभी सिविल सर्जनों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, विभाग के अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, डीआईसी डॉ सिद्धार्थ सान्याल, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला सहित विभाग के कई वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक की शुरुआत हाल में विभिन्न जिलों में हुई घटनाओं की समीक्षा से हुई। सरायकेला में मां-बेटी की मौत के मामले पर वहां की सिविल सर्जन से जानकारी ली गई। सिविल सर्जन ने बताया कि मामले की जांच जारी है। वहीं गोड्डा की घटना पर संबंधित सिविल सर्जन ने बताया कि दोषी ममता वाहन चालक, मरीज को ले जाने वाले सहिया तथा संबंधित अस्पताल संचालक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है तथा सहिया की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए तथा दोषियों को किसी भी परिस्थिति में बचाया न जाए।
रांची में मरीज की मौत के मामले में सिविल सर्जन ने बताया कि मरीज को बचाने का प्रयास किया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। मामले की जांच जारी है। इस पर अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों को अपने स्तर से जांच कर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
बैठक में हजारीबाग में बिना सामान आपूर्ति किए भुगतान कर दिए जाने का मामला भी उठा। संबंधित सिविल सर्जन ने बताया कि मामला पुराना है, लेकिन हालिया जांच में सामने आया है। अपर मुख्य सचिव ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित सप्लायर को ब्लैकलिस्ट करने तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रोक्योरमेंट-2024 लागू हो चुका है, इसलिए सभी सिविल सर्जन पिछले दो वर्षों का ऑडिट कर कमियों को दूर करें।
मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना की समीक्षा करते हुए अपर मुख्य सचिव ने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि वे स्वयं सीएचसी और पीएचसी स्तर तक जाकर निरीक्षण करें तथा अस्पतालों की वास्तविक स्थिति की तस्वीरें अपलोड करें। उन्होंने आईसीयू, सीसीयू, इमरजेंसी और बेड की स्थिति का भी आकलन करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस वर्ष की राशि सभी जिलों को उपलब्ध करा दी गई है और कहीं से भी शिकायत नहीं आनी चाहिए।
एनएचएम अंतर्गत पारा मेडिकल स्टाफ और तकनीशियन की बहाली पर उन्होंने कहा कि जिला वार सूची भेज दी गई है तथा दो माह के भीतर सभी रिक्त पद भरने होंगे। डीआईसी को राज्य स्तर से जेएसएससी को रिक्विजिशन भेजने का निर्देश दिया गया।
देवघर और गुमला में वेतन भुगतान संबंधी मामलों की भी समीक्षा की गई। देवघर में गलत भुगतान की जांच जारी रहने की जानकारी दी गई, जबकि गुमला की सिविल सर्जन ने बताया कि पीएचसी और सीएचसी के मर्ज होने के कारण पोर्टल पर तकनीकी त्रुटि के चलते गलतफहमी उत्पन्न हुई।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ने बीड श्रेणी के डॉक्टरों की उपस्थिति को लेकर भी सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो डॉक्टर अपने निर्धारित स्थान पर कार्य नहीं कर रहे हैं, उनकी तत्काल रिपोर्ट की जाए ताकि कार्रवाई हो सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी डॉक्टर को मनमाने तरीके से अन्यत्र ट्रांसफर नहीं किया जाए। पलामू में एक प्रभारी के वेतन से कटौती का मामला सामने आने पर उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी शिकायत मिलने पर संबंधित सिविल सर्जन पर भी कार्रवाई होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई बीड श्रेणी का डॉक्टर दो बार नियुक्ति के बाद इस्तीफा देता है तो उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा, ताकि वह भविष्य में पुनः आवेदन न कर सके।
तकनीशियन की नियुक्ति के संबंध में उन्होंने कहा कि आउटसोर्स एजेंसी पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही नियुक्ति करे और आवश्यकता होने पर ही किसी को रखा जाए। बिना सत्यापन किसी का भुगतान नहीं किया जाए।
बैठक के दौरान अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज ने मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना और एबीडीएम की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य की सभी स्वास्थ्य सुविधाओं को इंटरनेट से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक जिले में कंट्रोल एंड कमांड सेंटर स्थापित किया जाएगा तथा राज्य स्तर पर भी एक केंद्रीय कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा, जहां से सभी जिलों की निगरानी की जा सकेगी। उन्होंने सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में सीसीटीवी लगाने की तैयारी पूरी करने को कहा तथा स्पष्ट किया कि ओटी में कैमरे नहीं लगाए जाएंगे और मरीजों की प्राइवेसी का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
उन्होंने बताया कि सभी सीएचसी और पीएचसी में कंप्यूटर लगाए जाएंगे तथा एआई आधारित इंटीग्रेटेड डैशबोर्ड विकसित किया जा रहा है। डीबीडीएमएस के तहत सी-डैक से ऐसा सिस्टम विकसित करने को कहा गया, जिससे दवाओं की एक्सपायरी की निगरानी हो सके।
विभाग की संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला ने मुख्यमंत्री अस्पताल कायाकल्प योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि जिन जिलों में कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है, वहां शीघ्र काम शुरू कराया जाए तथा उपायुक्त स्तर पर लंबित प्रस्तावों को तत्काल स्वीकृत कराया जाए।
डीआईसी डॉ सिद्धार्थ सान्याल ने आईसीयू निर्माण की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रत्येक जिले में न्यूनतम 2000 वर्गफीट स्थान उपलब्ध होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कुछ जिलों ने केवल 600 से 900 वर्गफीट जमीन उपलब्ध कराने की सूचना दी है, जो पर्याप्त नहीं है। उन्होंने वेंटिलेटर छोड़कर अन्य आवश्यक उपकरणों की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
बैठक के अंत में एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने 15वें वित्त आयोग और पीएम-अभिम योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि कई जिलों में लैब निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने पुराने लैब भवनों को मॉडिफाई कर शीघ्र कार्य शुरू करने का निर्देश दिया।