नई दिल्ली: देश में बिना वैध थर्ड पार्टी वाहन बीमा के सड़कों पर चल रहे वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ा निर्देश(वाहन बीमा नहीं तो नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल) दिया है। अदालत ने सरकार से एक पायलट परियोजना शुरू करने को कहा है, जिसके तहत जिन वाहनों के पास वैध थर्ड पार्टी बीमा नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि इस कदम से वाहन मालिक समय पर अपना बीमा नवीनीकरण कराएंगे और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए थर्ड पार्टी बीमा बेहद आवश्यक है। इसके बावजूद देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं, जिससे दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को कानूनी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अदालत ने इस समस्या को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार को ठोस और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है।
वाहन बीमा नहीं तो नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

बिना बीमा वाले वाहनों पर सख्ती की तैयारी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि बिना वैध बीमा के वाहन चलाना कानून का उल्लंघन है। अदालत ने सुझाव दिया कि यदि किसी वाहन का बीमा समाप्त हो चुका है या उसके पास वैध थर्ड पार्टी बीमा नहीं है, तो ऐसे वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जाए। हालांकि, यह व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है। फिलहाल अदालत ने केंद्र सरकार को इसकी व्यवहारिकता का अध्ययन करने और पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है।
पायलट प्रोजेक्ट के जरिए होगी शुरुआत
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि पहले कुछ राज्यों या चुनिंदा क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट चलाकर इसकी प्रभावशीलता का परीक्षण किया जाए। यदि यह योजना सफल रहती है, तो भविष्य में इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है। सरकार को आधुनिक तकनीक की मदद से वाहन के पंजीकरण और बीमा संबंधी जानकारी को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की संभावना पर भी विचार करने के लिए कहा गया है।
इस व्यवस्था के लागू होने पर पेट्रोल पंपों पर वाहन का बीमा रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से सत्यापित किया जा सकेगा। यदि बीमा वैध नहीं होगा, तो वाहन चालक को पहले बीमा नवीनीकरण कराने की सलाह दी जाएगी। इससे नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
करोड़ों वाहन बिना बीमा के
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि देश में लगभग 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से करीब 16.54 करोड़ वाहनों के पास वैध थर्ड पार्टी बीमा नहीं है। यह आंकड़ा सड़क सुरक्षा और बीमा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन मालिक समय पर बीमा नहीं कराते हैं, तो दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को मुआवजा मिलने में देरी होती है। कई मामलों में वाहन मालिकों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में सभी वाहनों का बीमा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
सड़क सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिना बीमा वाले वाहनों को ईंधन नहीं देने की व्यवस्था लागू होती है, तो वाहन मालिक अपने बीमा दस्तावेज समय पर अपडेट कराएंगे। इससे सड़क पर बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या कम होगी और दुर्घटना पीड़ितों को कानूनी सुरक्षा भी मिलेगी।
इसके अलावा सरकार को भी वाहन बीमा से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड को अधिक प्रभावी बनाने का अवसर मिलेगा। इससे वाहन पंजीकरण, बीमा और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन आसान हो सकेगा। यह व्यवस्था डिजिटल इंडिया अभियान और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी मजबूती दे सकती है।
सरकार की रिपोर्ट के बाद होगा अगला फैसला
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पायलट परियोजना शुरू करने और उसकी विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। सरकार की रिपोर्ट और तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि यह योजना सफल रहती है, तो भविष्य में देशभर में बिना वैध थर्ड पार्टी बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिए जाने का नियम लागू किया जा सकता है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दुर्घटनाओं के बाद पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने, वाहन मालिकों को कानून का पालन करने के लिए प्रेरित करने और देश में सुरक्षित यातायात व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आने वाले समय में केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।
वाहन बीमा नहीं तो नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल
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