जीआई टैग से जुड़े पारंपरिक कलाकारों को मिला सम्मान
समाहरणालय सभागार में दुमका की समृद्ध लोक परंपरा एवं पारंपरिक कला को जीआई टैग के माध्यम से मिली विशिष्ट पहचान के उपलक्ष्य में स्थानीय कलाकारों तथा जीआई संरक्षण एवं प्रोत्साहन में योगदान देने वाली संस्थाओं के सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने जीआई टैग से सम्मानित पांच क्राफ्ट से जुड़े कलाकारों को प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो एवं शॉल देकर सम्मानित किया।
जीआई टैग केवल सम्मान नहीं, पीढ़ियों से चली आ रही कला और कलाकारों की मेहनत की पहचान है
उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने सभी कलाकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दुमका की लोक परंपरा और पारंपरिक कला को जीआई टैग मिलना अपने आप में गौरव की बात है। यह उपलब्धि केवल किसी एक कलाकार या संस्था की नहीं, बल्कि दुमका की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं और उन कलाकारों की मेहनत का सम्मान है, जिन्होंने अपनी कला को जीवित रखा है।
उन्होंने कहा कि दुमका की कला और यहां के कलाकारों की प्रतिभा की पहचान केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी पहचान देश और पूरी दुनिया में दिखनी चाहिए। यहां की पारंपरिक कलाओं में दुमका की संस्कृति, जनजीवन, इतिहास और स्थानीय परंपराओं की झलक मिलती है। इन कलाओं को व्यापक मंच प्रदान करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
कलाकारों की आमदनी बढ़ाने और बाजार से जोड़ने की दिशा में होगा प्रयास
उपायुक्त ने कहा कि जीआई टैग मिलने से निश्चित रूप से पारंपरिक कलाकारों के लिए नए बाजार और बेहतर आमदनी के अवसर तैयार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कलाकार जिस कला को वर्षों से साधना और मेहनत के साथ आगे बढ़ा रहे हैं, वह उनकी पहचान के साथ-साथ उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि आपकी कला को और बेहतर पहचान मिले, यह जिला प्रशासन का कर्तव्य है। आपकी समस्याओं को सुना जाएगा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाएगी। आपकी मदद के लिए जिला प्रशासन हमेशा तैयार है।
नई पीढ़ी को पारंपरिक कला से जोड़ना जरूरी
उपायुक्त ने कहा कि पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि युवाओं और नई पीढ़ी को इन कलाओं से जोड़ा जाए। यदि पारंपरिक कला को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, डिजाइन, बाजार और उचित मंच से जोड़ा जाए तो इसके संरक्षण के साथ कलाकारों की आजीविका को भी मजबूती मिल सकती है।
उन्होंने कलाकारों से अपनी कला को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि दुमका की पहचान यहां की प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा से है और कलाकार इस पहचान के महत्वपूर्ण वाहक हैं।
आर्ट/क्राफ्ट विलेज बनाने का प्रस्ताव, उपायुक्त ने दिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों एवं संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा दुमका में ‘आर्ट/क्राफ्ट विलेज’ बनाने का प्रस्ताव उपायुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रस्ताव के माध्यम से पारंपरिक कलाकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने, उनकी कला के प्रदर्शन, प्रशिक्षण, प्रचार-प्रसार तथा बाजार से जोड़ने की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता बताई गई।
उपायुक्त ने प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कलाकारों को बेहतर मंच उपलब्ध कराने और उनकी कला को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में प्राप्त प्रस्ताव पर नियमानुसार आवश्यक पहल की जाए।
दुमका की पांच पारंपरिक कलाओं को मिली जीआई टैग की पहचान…
श्रेया संस्थान से जुड़ी जादोपटिया चित्रकला, डोकरा कला, पंची-पड़हान एवं बानाम-म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट को जीआई टैग प्राप्त हुआ है। वहीं जनमत शोध संस्थान की आदिवासी कठपुतली लोक कला ‘चादर बादोनी’ को भी जीआई टैग प्राप्त हुआ है।
इन पारंपरिक कलाओं को जीआई टैग मिलने से दुमका की विशिष्ट लोककला को औपचारिक पहचान मिली है। इससे इन कलाओं के संरक्षण, संवर्धन, प्रचार-प्रसार तथा कलाकारों को व्यापक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में नई संभावनाएं बनी हैं।
संस्थाओं के प्रतिनिधि भी हुए सम्मानित
इस अवसर पर श्रेया संस्थान के निदेशक अमित कुमार सिंह एवं जनमत शोध संस्थान के सचिव अशोक सिंह को भी जीआई टैग से जुड़ी पारंपरिक कलाओं के संरक्षण एवं प्रोत्साहन में योगदान के लिए उपायुक्त अभिजीत सिन्हा द्वारा मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र एवं शॉल देकर सम्मानित किया गया।
समारोह में उपस्थित कलाकारों एवं संस्था के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन द्वारा दिए गए सम्मान एवं प्रोत्साहन के प्रति आभार व्यक्त किया।