झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव वाले क्षेत्र के प्रभाव और मानसूनी गतिविधियों के बढ़ने से राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में झारखंड के अलग-अलग जिलों में वज्रपात के साथ भारी बारिश की संभावना जताई है। राजधानी रांची समेत कई जिलों में बादल छाए रहने और बारिश होने का अनुमान है।

मौसम विभाग के अनुसार, 30 अगस्त और एक सितंबर को रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। वहीं 31 अगस्त को भी राज्य के कई जिलों में वज्रपात के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ऐसे में लोगों को मौसम को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

शुक्रवार को रांची और हजारीबाग में बारिश दर्ज की गई। हजारीबाग में करीब 14 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि रांची में नौ मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा खूंटी में आठ मिलीमीटर और सिमडेगा में चार मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार झारखंड में अब भी सामान्य से करीब 10 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है, जबकि राजधानी रांची में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। इससे साफ है कि राज्य में बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा है। कुछ जिलों में सामान्य से कम तो कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।

Table of Contents

बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का असर

मौसम में बदलाव का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव वाला क्षेत्र बताया जा रहा है। इस सिस्टम के प्रभाव से झारखंड में मानसूनी गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार, निम्न दबाव वाले क्षेत्र के कारण वातावरण में नमी बढ़ रही है। इसके चलते राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बादल बन रहे हैं और कई स्थानों पर बारिश हो रही है।

आने वाले दिनों में इस मौसम प्रणाली का असर और देखने को मिल सकता है। खासकर 30 अगस्त से एक सितंबर के बीच कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि बारिश और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचें और मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर रहें।

30 अगस्त को कई जिलों में भारी बारिश की संभावना

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 30 अगस्त को रांची समेत खूंटी, हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, धनबाद, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ में वज्रपात के साथ भारी बारिश हो सकती है।

इन जिलों में मौसम खराब होने की स्थिति में तेज बारिश के साथ बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। ऐसे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

राजधानी रांची में भी 30 अगस्त को बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। शहर के कई इलाकों में बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने की संभावना बनी रहेगी।

31 अगस्त को भी वज्रपात और भारी बारिश का अलर्ट

31 अगस्त को भी मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों के लिए चेतावनी जारी की है। रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो, गिरिडीह, धनबाद, देवघर, दुमका, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में वज्रपात के साथ भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

वहीं राज्य के अन्य हिस्सों में बादल छाए रहने और कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

इस दौरान तापमान में भी कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है। लगातार बादल और बारिश के कारण दिन के तापमान में कमी आने की संभावना रहती है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।

एक सितंबर को फिर बढ़ेगी बारिश

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक एक सितंबर को रांची समेत खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, गढ़वा, पलामू और चतरा में वज्रपात के साथ भारी बारिश हो सकती है।

इसका मतलब है कि अगस्त के अंतिम दिनों से सितंबर की शुरुआत तक झारखंड में मानसून सक्रिय रह सकता है।

बारिश के साथ बिजली गिरने की आशंका वाले जिलों में प्रशासन और आम लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

लातेहार में वज्रपात से दो लोगों की मौत

खबर के अनुसार शुक्रवार को बारिश के दौरान हुए वज्रपात से लातेहार जिले के लटमटिया में दिनेश भुइयां और मुकेश भुइयां की मौत हो गई।

वज्रपात की घटनाएं मानसून के दौरान झारखंड के ग्रामीण और खुले इलाकों में विशेष चिंता का विषय रहती हैं। खेतों, जंगलों और खुले स्थानों में काम करने वाले लोगों के लिए बिजली गिरने का खतरा अधिक हो सकता है।

इसी वजह से मौसम विभाग की चेतावनी के दौरान लोगों को खुले मैदान, पेड़ के नीचे या जलाशयों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

रांची में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश

मौसम के आंकड़ों के अनुसार रांची में इस अवधि के दौरान सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है।

शुक्रवार को भी राजधानी में नौ मिलीमीटर बारिश हुई। लगातार बारिश और बादल रहने के कारण शहर के कई हिस्सों में मौसम सुहाना रहा।

हालांकि तेज बारिश होने की स्थिति में शहर के निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या भी पैदा हो सकती है। सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित होने की संभावना रहती है।

हजारीबाग में 14 मिलीमीटर बारिश

शुक्रवार को हजारीबाग में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई। यहां 14 मिलीमीटर बारिश हुई।

इसके अलावा खूंटी में आठ मिलीमीटर और सिमडेगा में चार मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इन आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की तीव्रता अलग-अलग रही।

आने वाले दिनों में बारिश का वितरण और बढ़ सकता है।

झारखंड में अब भी सामान्य से कम बारिश

हालांकि कुछ जिलों में अच्छी बारिश हुई है, लेकिन पूरे झारखंड की स्थिति देखें तो राज्य में अब भी सामान्य से करीब 10 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

बारिश का असमान वितरण किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है। जहां कुछ इलाकों में पर्याप्त बारिश हुई है, वहीं कुछ क्षेत्रों में किसानों को अब भी अच्छी बारिश का इंतजार है।

मानसून की बाकी अवधि में होने वाली बारिश राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण होगी।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण है बारिश

झारखंड की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। ऐसे में मानसून की बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ता है। धान समेत खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त बारिश जरूरी होती है।

यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो खेती-किसानी को फायदा मिल सकता है। हालांकि बहुत अधिक बारिश होने पर खेतों में जलजमाव और फसलों को नुकसान का खतरा भी पैदा हो सकता है।

इसलिए किसानों के लिए बारिश की मात्रा और मौसम विभाग के पूर्वानुमान दोनों महत्वपूर्ण हैं।

वज्रपात के दौरान क्या सावधानी बरतें?

झारखंड में मानसून के दौरान वज्रपात की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेना जरूरी है।

वज्रपात के दौरान लोगों को खुले मैदान में खड़े होने से बचना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति खेत या खुले क्षेत्र में है और अचानक तेज गर्जना के साथ बारिश शुरू हो जाती है, तो उसे जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए।

बिजली चमकने के दौरान पेड़ के नीचे खड़े होना भी सुरक्षित नहीं माना जाता। विशेष रूप से ऊंचे और अकेले पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए।

बारिश और आंधी के दौरान घर में रहें सुरक्षित

तेज बारिश और वज्रपात के दौरान यदि संभव हो तो घर के अंदर रहना बेहतर है। बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए।

यदि मौसम बहुत खराब हो तो अनावश्यक रूप से बाइक या अन्य दोपहिया वाहन से यात्रा करने से बचना चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को खेतों और खुले स्थानों में काम करते समय मौसम की जानकारी पर नजर रखनी चाहिए।

सड़क और यातायात पर भी असर संभव

भारी बारिश की स्थिति में सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है। ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश के कारण सड़क पर पानी जमा होने या रास्तों की स्थिति खराब होने की संभावना रहती है।

राजधानी रांची में भी भारी बारिश होने पर कुछ निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

वाहन चालकों को बारिश के दौरान धीमी गति से वाहन चलाने और सड़क की स्थिति देखकर ही आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है।

पेड़ और बिजली के खंभों से रहें दूर

तेज हवा और भारी बारिश के दौरान पेड़ गिरने या बिजली के तारों से संबंधित दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में टूटे हुए बिजली के तारों के पास जाने से बचना चाहिए।

यदि किसी स्थान पर बिजली का तार गिरा हुआ दिखाई दे तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को देनी चाहिए और लोगों को उससे दूर रखना चाहिए।

किन जिलों पर रहेगा ज्यादा असर?

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में राज्य के कई जिलों में मौसम सक्रिय रहेगा।

विशेष रूप से रांची, खूंटी, हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, धनबाद, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, गिरिडीह, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, गढ़वा, पलामू और चतरा में बारिश और वज्रपात की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

हालांकि बारिश की तीव्रता जिले और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

सितंबर की शुरुआत में भी बारिश जारी रहने की उम्मीद

मानसून की गतिविधियां सितंबर की शुरुआत में भी जारी रहने का अनुमान है। एक सितंबर को राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की संभावना है।

इससे यह संकेत मिलता है कि अगस्त के आखिरी दिनों में शुरू हुआ बारिश का दौर सितंबर के शुरुआती दिनों तक जारी रह सकता है।

मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों के पूर्वानुमान में बदलाव संभव है।

मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लें

मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट का उद्देश्य लोगों को संभावित खराब मौसम के बारे में पहले से जानकारी देना है। ऐसे में आम लोगों को मौसम विभाग और जिला प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

विशेष रूप से वज्रपात की चेतावनी के दौरान खुले स्थानों पर गतिविधियां कम करना और सुरक्षित स्थान पर रहना जरूरी है।

निष्कर्ष

झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय है और बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के प्रभाव से आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मौसम विभाग ने 30 अगस्त और एक सितंबर को रांची समेत कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। वहीं 31 अगस्त को भी कई जिलों में वज्रपात के साथ भारी बारिश का अलर्ट है।

रांची में शुक्रवार को नौ मिलीमीटर और हजारीबाग में 14 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राज्य में अभी सामान्य से करीब 10 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि रांची में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।

बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आ सकती है, लेकिन वज्रपात की घटनाओं को देखते हुए सावधानी बेहद जरूरी है। लातेहार में वज्रपात से दो लोगों की मौत की घटना यह बताती है कि मौसम विभाग की चेतावनी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

आने वाले दिनों में रांची समेत झारखंड के कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की संभावना को देखते हुए लोगों को सुरक्षित रहने, मौसम की ताजा जानकारी लेते रहने और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की जरूरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *