झारखंड में सहायक लोक अभियोजक यानी APP नियमित प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने फिलहाल परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने गुरुवार को परीक्षा रद्द करने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने फिलहाल अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार करते हुए राज्य सरकार और JPSC को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को निर्धारित की गई है। वहीं, सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रतियोगिता परीक्षा की अधिसूचना रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिका पर 31 अगस्त को सुनवाई होगी। इस मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई की तारीख निर्धारित की है।
APP परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना को चुनौती
झारखंड हाईकोर्ट में सहायक लोक अभियोजक यानी APP की नियमित प्रतियोगिता परीक्षा का विज्ञापन रद्द किए जाने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता सत्यांशु शुभम की ओर से इस मामले में याचिका दाखिल की गई थी।
याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया गया। हालांकि अदालत ने फिलहाल इस आग्रह को स्वीकार नहीं किया।

हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब सरकार और आयोग की ओर से अदालत में अपना पक्ष रखा जाएगा।
24 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। इस दौरान राज्य सरकार और JPSC की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब पर आगे की सुनवाई हो सकती है।
APP परीक्षा को लेकर उम्मीदवारों के बीच भी इस मामले को लेकर काफी रुचि है, क्योंकि परीक्षा के विज्ञापन को रद्द किए जाने से भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
याचिकाकर्ता की ओर से परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई है। अब अदालत में मामले के कानूनी पहलुओं पर आगे सुनवाई होगी।
सिविल जज परीक्षा मामले में 31 अगस्त को सुनवाई
इसी बीच सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रतियोगिता परीक्षा, विज्ञापन संख्या 22/2023 से जुड़ा मामला भी हाईकोर्ट पहुंच गया है।

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रतियोगिता परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने की अधिसूचना जारी की गई थी। इस अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए 31 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई है।
याचिका पर हाईकोर्ट की खंडपीठ सुनवाई करेगी। अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार, मामले में प्रार्थियों की ओर से चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ से शीघ्र सुनवाई का आग्रह किया गया था।
परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने पर विवाद
सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रतियोगिता परीक्षा के विज्ञापन को रद्द किए जाने के बाद इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है। मामले में अधिवक्ताओं की ओर से अदालत के सामने परीक्षा और विज्ञापन से संबंधित पक्ष रखा गया।
रिपोर्ट के अनुसार, JPSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने अदालत को बताया कि APP परीक्षा का पीटी यानी प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी हो चुका है।
यह बिंदु मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि परीक्षा प्रक्रिया का एक चरण पहले ही पूरा हो चुका था।
APP नियुक्ति को लेकर भी मामला लंबित
खबर के अनुसार, APP नियुक्ति से संबंधित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई के लिए अदालत ने 28 अगस्त की तारीख निर्धारित की है। हालांकि इस मामले में अब तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई है।
इससे स्पष्ट है कि APP भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अलग-अलग कानूनी मामले अदालत के समक्ष लंबित हैं और इन पर होने वाली सुनवाई के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
उम्मीदवारों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना पर तत्काल रोक नहीं लगाई है।
अदालत के आदेश से उम्मीदवारों की नजर अगली सुनवाई पर
APP और न्यायिक सेवा से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों की नजर अब हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर रहेगी।
अदालत द्वारा सरकार और JPSC को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिए जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई में संबंधित पक्ष अपना विस्तृत पक्ष रख सकते हैं।
ऐसे में उम्मीदवारों को किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय अदालत के अगले आदेश का इंतजार करना होगा।
भर्ती प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर
प्रतियोगी परीक्षाओं के विज्ञापन को रद्द करने या परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव होने का सीधा असर अभ्यर्थियों पर पड़ता है। बड़ी संख्या में उम्मीदवार लंबे समय से ऐसी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
ऐसे में परीक्षा रद्द होने की स्थिति में अभ्यर्थियों के सामने आगे की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो जाते हैं। यही कारण है कि APP और सिविल जज परीक्षा से जुड़े मामलों में हाईकोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।
JPSC और सरकार को देना होगा जवाब
APP परीक्षा के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और JPSC को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब संबंधित पक्षों को अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने का आधार क्या है और इस संबंध में सरकार एवं आयोग का क्या पक्ष है।
अदालत दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में आगे का आदेश दे सकती है।
परीक्षा परिणाम जारी होने का भी मुद्दा
सिविल जज मामले की सुनवाई के दौरान JPSC की ओर से यह जानकारी अदालत को दी गई कि APP परीक्षा के पीटी का परिणाम जारी हो चुका है।
परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ा परिणाम जारी हो जाने के बाद विज्ञापन रद्द करने के फैसले को लेकर उठे कानूनी सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। हालांकि इस संबंध में अंतिम स्थिति अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
अभ्यर्थियों के लिए क्या जरूरी?
APP और सिविल जज परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को फिलहाल आधिकारिक और न्यायिक अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।
सोशल मीडिया या अनधिकृत स्रोतों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर परीक्षा या भर्ती के संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लेना चाहिए। अदालत में मामले की सुनवाई जारी है और अगली सुनवाई के बाद स्थिति में बदलाव संभव है।
निष्कर्ष
झारखंड हाईकोर्ट में APP और सिविल जज भर्ती परीक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई ने प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। APP नियमित प्रतियोगिता परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने की राज्य सरकार की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार किया है और राज्य सरकार तथा JPSC से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
वहीं, सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रतियोगिता परीक्षा के विज्ञापन संख्या 22/2023 को रद्द करने की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर 31 अगस्त को सुनवाई निर्धारित है।
ऐसे में APP और न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की सुनवाई और आदेश काफी महत्वपूर्ण रहेंगे।