रांची: झारखंड में कर्मचारी राज्य बीमा योजना यानी ESIC (Employees’ State Insurance Corporation) की चिकित्सा एवं सामाजिक सुरक्षा सेवाओं को अधिक व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य में अब ESIC की स्वास्थ्य सेवाओं को केवल मौजूदा डिस्पेंसरी और केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी CHC और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी PHC के नेटवर्क के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की योजना तैयार की जा रही है। इस पहल के लागू होने से राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले बीमित श्रमिकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी हो सकती है।
इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के लाभुकों को भी ESIC अस्पतालों में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा और स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस पूरी पहल का उद्देश्य राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, बीमित श्रमिकों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना तथा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों और ESIC के बीच समन्वय को मजबूत करना है।
ESIC सेवाओं को ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाने की तैयारी
झारखंड में बड़ी संख्या में श्रमिक औद्योगिक प्रतिष्ठानों, फैक्ट्रियों, निर्माण क्षेत्र और विभिन्न संगठित क्षेत्रों में काम करते हैं। कर्मचारी राज्य बीमा योजना के अंतर्गत पात्र श्रमिकों को चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि, राज्य के कई क्षेत्रों में ESIC की स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अभी सीमित है।
इसी को देखते हुए अब राज्य के CHC और PHC नेटवर्क को ESIC की चिकित्सा सेवाओं के साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। यदि प्रस्तावित व्यवस्था को मंजूरी मिलती है तो राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से ESIC से जुड़े बीमित व्यक्तियों और उनके परिवारों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी।
CHC और PHC पहले से ही राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में इन संस्थानों की बड़ी भूमिका है। ऐसे में इन स्वास्थ्य संस्थानों को ESIC की सेवाओं से जोड़ने से बीमित श्रमिकों को इलाज के लिए दूर स्थित ESIC केंद्रों पर निर्भरता कम हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की बैठक में हुई महत्वपूर्ण चर्चा
ESIC की चिकित्सा सेवाओं के विस्तार को लेकर स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में ESIC से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों और राज्य में इसकी चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ESIC की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अधिक से अधिक बीमित श्रमिकों और उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य में उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए ESIC के लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए।

सरकार का मानना है कि राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों और ESIC के बीच बेहतर तालमेल से चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता को व्यापक बनाया जा सकता है। इससे खास तौर पर उन क्षेत्रों के श्रमिकों और उनके परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है, जहां वर्तमान में ESIC की प्रत्यक्ष स्वास्थ्य सुविधा सीमित है।
वर्तमान में झारखंड में ESIS की 21 डिस्पेंसरी
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में झारखंड में ESIS की 21 डिस्पेंसरी संचालित हैं। इन डिस्पेंसरी के माध्यम से बीमित व्यक्तियों और उनके परिवारों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
हालांकि, राज्य में ESIC से जुड़े लाभार्थियों की संख्या और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए मौजूदा नेटवर्क को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी क्रम में CHC और PHC को ESIC की चिकित्सा सेवाओं के साथ जोड़ने की योजना सामने आई है।
यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो मौजूदा 21 डिस्पेंसरी के साथ राज्य के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का नेटवर्क भी ESIC लाभार्थियों के लिए उपयोगी हो सकेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।
खास बात यह है कि CHC और PHC पहले से ही स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं। ऐसे में इन संस्थानों के माध्यम से ESIC लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।
करीब 6 लाख लाभार्थियों को मिल सकता है फायदा
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ESIC द्वारा संबद्ध प्रति बीमित व्यक्ति ₹1,000 प्रतिवर्ष की दर से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव है। इस व्यवस्था से लगभग 1.50 लाख बीमित व्यक्तियों और उनके परिवारों सहित करीब 6 लाख लाभार्थियों को चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलने की संभावना जताई गई है।
यह आंकड़ा इस पहल के संभावित प्रभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि करीब छह लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के नेटवर्क से जोड़ा जाता है, तो इससे राज्य के स्वास्थ्य सेवा तंत्र पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
बीमित श्रमिकों के परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने से सामाजिक सुरक्षा का दायरा मजबूत होगा। श्रमिकों के लिए केवल रोजगार और आय ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या के समय परिवार के सदस्यों को समय पर उपचार मिलना भी उनकी आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ESIC की योजना इसी व्यापक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। इसलिए राज्य में इसके नेटवर्क का विस्तार श्रमिक कल्याण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लाभुकों को भी ESIC अस्पतालों में इलाज की तैयारी
बैठक में केवल ESIC बीमित व्यक्तियों के लिए सेवाओं के विस्तार पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लाभुकों को भी ESIC अस्पतालों में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने की संभावना पर चर्चा की गई।
झारखंड सरकार द्वारा शुरू की गई अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि ESIC के अस्पतालों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जाता है तो पात्र लाभुकों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य संस्थानों का दायरा बढ़ सकता है।
प्रस्तावित व्यवस्था में विशेष रूप से रांची और जमशेदपुर स्थित ESIC केंद्रों में अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लाभुकों के इलाज की संभावना पर चर्चा हुई है।
यदि इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलती है, तो संबंधित लाभुकों को निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार इन केंद्रों पर उपचार की सुविधा मिल सकती है।
आयुष्मान भारत के लाभुकों के लिए भी खुल सकता है ESIC अस्पतालों का रास्ता
बैठक में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लाभुकों को भी ESIC अस्पतालों में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने पर विचार किया गया।
आयुष्मान भारत योजना देश की प्रमुख स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं में शामिल है। इसके माध्यम से पात्र परिवारों को निर्धारित चिकित्सा उपचार के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जाती है।
यदि ESIC अस्पतालों को आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के लिए भी उपलब्ध कराया जाता है तो इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ ESIC के अस्पतालों की उपयोगिता भी बढ़ सकती है।
इस व्यवस्था का अंतिम स्वरूप कैबिनेट की स्वीकृति और संबंधित विभागों द्वारा निर्धारित नियमों के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल इसे लेकर प्रस्तावित व्यवस्था पर चर्चा की गई है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और आयुष्मान भारत के लाभुकों को ESIC अस्पतालों में इलाज उपलब्ध कराने की योजना को लागू करने के लिए कैबिनेट से अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होगा।
बैठक में बताया गया कि कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद इन योजनाओं के लाभुकों के इलाज से संबंधित क्लेम की राशि झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।
इससे इलाज की लागत और भुगतान से संबंधित व्यवस्था को संस्थागत रूप दिया जा सकेगा। हालांकि, योजना लागू होने के बाद इसके तहत इलाज की पात्रता, अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाएं, क्लेम प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक प्रावधान संबंधित दिशा-निर्देशों के आधार पर तय होंगे।
इसका मतलब यह है कि फिलहाल यह व्यवस्था प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम रूप कैबिनेट की मंजूरी तथा उसके बाद जारी होने वाले दिशा-निर्देशों के आधार पर मिलेगा।
श्रमिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ESIC?
कर्मचारी राज्य बीमा योजना देश में श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था है। इसके अंतर्गत पात्र बीमित व्यक्तियों को केवल इलाज की सुविधा ही नहीं, बल्कि कई अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ भी प्रदान किए जाते हैं।
ESIC के अंतर्गत पात्र बीमित व्यक्ति और उनके परिवार के सदस्य नियमानुसार चिकित्सा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा बीमारी हितलाभ, मातृत्व हितलाभ, दिव्यांगता हितलाभ, आश्रित हितलाभ सहित अन्य वैधानिक सामाजिक सुरक्षा लाभ भी योजना का हिस्सा हैं।
इसलिए ESIC का विस्तार केवल अस्पताल या डिस्पेंसरी की संख्या बढ़ाने का विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध श्रमिक परिवारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से है।
किसी श्रमिक के बीमार पड़ने की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार के बजट पर बड़ा असर डाल सकता है। ऐसे में यदि स्वास्थ्य सेवा आसानी से उपलब्ध हो और निर्धारित व्यवस्था के तहत चिकित्सा सहायता मिल सके तो परिवार पर आर्थिक दबाव कम हो सकता है।
CHC और PHC नेटवर्क से क्या बदलेगा?
राज्य के CHC और PHC नेटवर्क को ESIC सेवाओं से जोड़ने का सबसे बड़ा संभावित लाभ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच का विस्तार होगा।
PHC यानी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आम तौर पर स्थानीय स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं CHC यानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अपेक्षाकृत बड़े स्वास्थ्य संस्थान होते हैं, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की तुलना में अधिक व्यापक सेवाएं उपलब्ध हो सकती हैं।
यदि इन संस्थानों को ESIC नेटवर्क से जोड़ा जाता है तो बीमित श्रमिकों और उनके परिवारों को अपने क्षेत्र के नजदीक स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
इससे इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम हो सकती है। विशेषकर उन श्रमिक परिवारों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है जो औद्योगिक या रोजगार वाले क्षेत्रों से दूर रहते हैं लेकिन ESIC के दायरे में आते हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों के श्रमिकों को मिलेगा लाभ
झारखंड देश के प्रमुख खनिज और औद्योगिक राज्यों में शामिल है। राज्य के कई जिलों में खनन, उद्योग, निर्माण, विनिर्माण और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जुड़े श्रमिक कार्यरत हैं।
ऐसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हो सकते हैं जो कर्मचारी राज्य बीमा योजना के दायरे में आते हैं। ESIC सेवाओं का विस्तार होने से पात्र श्रमिकों और उनके परिवारों तक चिकित्सा सुरक्षा पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
रांची और जमशेदपुर जैसे प्रमुख शहरों के अलावा राज्य के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों और ESIC के बीच समन्वय बढ़ने से भविष्य में पात्र श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी बेहतर हो सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं में समन्वय पर जोर
बैठक में स्वास्थ्य विभाग और ESIC के बीच समन्वय को विशेष महत्व दिया गया। इसका कारण यह है कि अलग-अलग स्वास्थ्य योजनाओं और संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल से उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है।
यदि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों और ESIC के बीच स्पष्ट व्यवस्था तैयार होती है तो लाभार्थियों को इलाज के लिए सही संस्थान तक पहुंचाने, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और वित्तीय भुगतान की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
अपर मुख्य सचिव द्वारा अधिकारियों को राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लगभग 1.50 लाख बीमित व्यक्तियों पर रहेगा फोकस
प्रस्तावित व्यवस्था का एक प्रमुख लक्ष्य लगभग 1.50 लाख बीमित व्यक्तियों को चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ना है। इन बीमित व्यक्तियों के परिवारों को शामिल करने पर संभावित लाभार्थियों की संख्या करीब छह लाख तक पहुंच सकती है।
इतने बड़े लाभार्थी समूह के लिए स्वास्थ्य सेवा का विस्तार राज्य के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
परिवार आधारित स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि किसी श्रमिक की बीमारी का प्रभाव केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। परिवार के दूसरे सदस्यों की बीमारी, इलाज का खर्च और काम से अनुपस्थिति जैसी परिस्थितियां भी परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती हैं।
इसलिए बीमित श्रमिक के साथ उसके परिवार को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना ESIC व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
₹1,000 प्रति बीमित व्यक्ति वार्षिक सहायता का प्रस्ताव
प्रस्तावित मॉडल में ESIC द्वारा संबद्ध प्रति बीमित व्यक्ति ₹1,000 प्रति वर्ष की दर से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
यह वित्तीय व्यवस्था CHC और PHC के माध्यम से ESIC सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि इस सहायता के उपयोग, भुगतान और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन से संबंधित विस्तृत नियम अंतिम व्यवस्था में स्पष्ट होंगे।
यदि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो वित्तीय सहायता के आधार पर स्वास्थ्य संस्थानों और ESIC के बीच सेवा वितरण का मॉडल तैयार किया जा सकता है।
इससे राज्य के मौजूदा स्वास्थ्य ढांचे का उपयोग करते हुए ESIC लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंचाने की संभावना बढ़ेगी।
रांची और जमशेदपुर पर विशेष ध्यान
प्रस्तावित व्यवस्था में रांची और जमशेदपुर स्थित ESIC केंद्रों का विशेष उल्लेख किया गया है। दोनों शहर राज्य के प्रमुख शहरी और औद्योगिक केंद्रों में शामिल हैं।
रांची राज्य की राजधानी होने के साथ प्रशासनिक और स्वास्थ्य सुविधाओं का महत्वपूर्ण केंद्र है, जबकि जमशेदपुर राज्य का प्रमुख औद्योगिक शहर है। यहां बड़ी संख्या में औद्योगिक प्रतिष्ठान और श्रमिक आबादी मौजूद है।
ऐसे में इन दोनों शहरों के ESIC केंद्रों में अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और आयुष्मान भारत के लाभुकों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है।
सामाजिक सुरक्षा के दायरे को मजबूत करने की दिशा में कदम
ESIC सेवाओं का विस्तार केवल स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा हुआ है।
कर्मचारी राज्य बीमा योजना के तहत पात्र लोगों को विभिन्न परिस्थितियों में सहायता मिलती है। बीमारी के दौरान बीमारी हितलाभ, मातृत्व की स्थिति में मातृत्व हितलाभ, काम के दौरान या अन्य परिस्थितियों में दिव्यांगता से संबंधित लाभ और मृत्यु की स्थिति में आश्रित हितलाभ जैसी व्यवस्थाएं श्रमिक परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का आधार बनती हैं।
इसलिए राज्य में ESIC की पहुंच बढ़ने से अधिक से अधिक पात्र श्रमिक परिवार सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकते हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास
झारखंड जैसे भौगोलिक और सामाजिक रूप से विविध राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को सभी वर्गों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। राज्य के कुछ हिस्सों में बड़े अस्पतालों और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अधिक है, जबकि दूरदराज क्षेत्रों में लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है।
ऐसे में उपलब्ध CHC और PHC नेटवर्क का इस्तेमाल ESIC सेवाओं के विस्तार के लिए किया जाना व्यावहारिक कदम हो सकता है।
इस व्यवस्था के जरिए स्वास्थ्य सेवा के लिए नया ढांचा खड़ा करने के बजाय मौजूदा स्वास्थ्य संस्थानों को एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम किया जा सकता है।
योजना लागू होने के बाद क्या होगा?
प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करने के लिए कई प्रशासनिक चरणों से गुजरना होगा। सबसे पहले संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिलनी होगी। इसके बाद संबंधित विभागों द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
इन दिशा-निर्देशों में लाभार्थियों की पात्रता, अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका, इलाज की प्रक्रिया, वित्तीय सहायता, क्लेम का भुगतान, रिकॉर्ड प्रबंधन और विभागों के बीच समन्वय जैसे विषयों को शामिल किया जा सकता है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि योजना को किस चरण में और किन क्षेत्रों से लागू किया जाएगा।
अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक
ESIC से संबंधित इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग और संबंधित संस्थानों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में अपर सचिव संदीप कुमार दोराईबुरू, संयुक्त सचिव अनुज कुमार प्रसाद, श्रम सचिव जितेंद्र कुमार सिंह तथा ESIC झारखंड के क्षेत्रीय निदेशक शिवेंद्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
अधिकारियों के बीच ESIC की वर्तमान स्थिति, सेवाओं के विस्तार और राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने को लेकर चर्चा की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में ESIC की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाना तथा अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों और उनके परिवारों तक चिकित्सा एवं सामाजिक सुरक्षा सेवाएं पहुंचाना रहा।
आने वाले समय में बढ़ सकता है ESIC का कवरेज
यदि प्रस्तावित व्यवस्था को मंजूरी मिलती है और इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो आने वाले समय में झारखंड में ESIC कवरेज का दायरा बढ़ सकता है।
CHC और PHC को ESIC नेटवर्क से जोड़ने से स्वास्थ्य सेवाओं की भौगोलिक पहुंच बढ़ेगी। वहीं अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और आयुष्मान भारत के लाभुकों को ESIC अस्पतालों से जोड़ने की व्यवस्था से मौजूदा स्वास्थ्य संसाधनों का उपयोग और व्यापक स्तर पर किया जा सकता है।
करीब छह लाख संभावित लाभार्थियों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच इस पहल को खास बनाती है।
श्रमिक परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण
झारखंड के श्रमिक परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण विषय है। बीमारी या दुर्घटना जैसी स्थिति में इलाज का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन श्रमिक परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
ESIC सेवाओं को राज्य के व्यापक स्वास्थ्य नेटवर्क से जोड़ने की पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो बीमित श्रमिकों और उनके परिवारों को अपने नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधा मिल सकती है।
इसके साथ ही अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और आयुष्मान भारत के लाभुकों को ESIC अस्पतालों से जोड़ने की तैयारी से स्वास्थ्य सुविधाओं के इस्तेमाल का दायरा भी बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
झारखंड में ESIC की चिकित्सा एवं सामाजिक सुरक्षा सेवाओं के विस्तार की प्रस्तावित योजना राज्य के श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। CHC और PHC के नेटवर्क को ESIC सेवाओं से जोड़ने से राज्य के अधिक क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने की संभावना है।
वर्तमान में संचालित 21 ESIS डिस्पेंसरी के अलावा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को नेटवर्क में शामिल करने से लगभग 1.50 लाख बीमित व्यक्तियों और उनके परिवारों सहित करीब छह लाख संभावित लाभार्थियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
वहीं रांची और जमशेदपुर स्थित ESIC केंद्रों में अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और आयुष्मान भारत के लाभुकों को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विस्तार हो सकता है।
हालांकि इन प्रस्तावों को लागू करने से पहले कैबिनेट की मंजूरी और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। मंजूरी मिलने के बाद वित्तीय सहायता, क्लेम भुगतान और अस्पतालों की भूमिका से संबंधित व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, झारखंड में ESIC सेवाओं के विस्तार की यह पहल श्रमिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा देने, सरकारी स्वास्थ्य ढांचे का बेहतर उपयोग करने और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में कैबिनेट की मंजूरी और कार्यान्वयन की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।