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रांची। झारखंड के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने की योजना पर काम तेज कर दिया है। राज्य के चिन्हित 100 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी CHC में आईसीयू और एसएनसीयू सुविधाओं को मजबूत करने की तैयारी है। इसके साथ ही राज्य के कुल 188 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और आपात स्थिति वाले मरीजों को स्थानीय स्तर पर अधिक बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। अभी गंभीर स्थिति में कई मरीजों को बड़े अस्पतालों, जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों की ओर रेफर करना पड़ता है। यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, आपातकालीन सेवाएं और रेफरल सुविधाएं मजबूत होती हैं, तो शुरुआती स्तर पर ही कई मरीजों को जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।

राज्य में सभी 188 सीएचसी को फर्स्ट रेफरल यूनिट यानी FRU के रूप में विकसित करने की दिशा में भी योजना चल रही है। जून 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार पहले चरण में 20 सीएचसी को मॉडल एफआरयू के रूप में विकसित करने और उनके अनुभव के आधार पर बाकी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड करने की योजना बताई गई थी।

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100 सीएचसी पर विशेष फोकस

नई पहल में राज्य के चिन्हित 100 सीएचसी में आईसीयू और एसएनसीयू से जुड़ी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन केंद्रों में मौजूद सुविधाओं और कमियों का आकलन करने की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके लिए गैप एनालिसिस किया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि किसी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में वर्तमान में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं और बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए किन सुविधाओं की जरूरत है, इसका व्यवस्थित आकलन किया जाएगा।

इस आकलन के आधार पर चिकित्सा उपकरण, मानव संसाधन, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी जरूरी सुविधाओं की जरूरत को चिह्नित किया जा सकेगा। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

हाल ही में स्वास्थ्य झारखंड की ओर से भी 100 चिन्हित सीएचसी के सुदृढ़ीकरण और ICU-SNCU गैप एनालिसिस को लेकर समीक्षा की जानकारी साझा की गई है।

188 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना

झारखंड में कुल 188 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की योजना व्यापक स्तर पर तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य सिर्फ किसी एक सुविधा को उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम करना है।

पहले चरण में कुछ सीएचसी को मॉडल फर्स्ट रेफरल यूनिट के तौर पर विकसित करने की योजना है। इन केंद्रों में उपलब्ध संसाधनों और कमियों का अध्ययन करने के बाद आगे के केंद्रों को भी उसी आधार पर विकसित किया जाएगा।

जून 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण में 20 सीएचसी को मॉडल एफआरयू के रूप में विकसित करने की योजना बताई गई थी। इनके अनुभव के आधार पर शेष 168 सीएचसी को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड करने की बात सामने आई थी।

इस योजना से ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में सीएचसी की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और बड़े जिला या मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बीच सीएचसी एक महत्वपूर्ण रेफरल केंद्र के रूप में काम कर सकता है।

गैप एनालिसिस से पता चलेगी अस्पतालों की वास्तविक जरूरत

स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड करने से पहले यह पता लगाना जरूरी है कि वहां वर्तमान में क्या उपलब्ध है और किन चीजों की कमी है। इसी उद्देश्य से गैप एनालिसिस की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

इसमें अस्पताल की इमारत, बेड, आईसीयू से संबंधित उपकरण, नवजात देखभाल की सुविधा, ऑक्सीजन व्यवस्था, बिजली, मेडिकल गैस, जरूरी चिकित्सा उपकरण, डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ जैसी जरूरतों को देखा जा सकता है।

गैप एनालिसिस के बाद स्वास्थ्य विभाग के पास यह जानकारी उपलब्ध होगी कि किस सीएचसी में किस प्रकार की सुविधा की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। इससे संसाधनों को जरूरत के अनुसार लगाने में मदद मिल सकती है।

प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड की ओर से भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के गैप एनालिसिस के आधार पर मैनपावर और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करने की दिशा में काम करने की बात सामने आई है।

15वें वित्त आयोग की राशि से खरीदे जाएंगे उपकरण

खबर के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने के लिए 15वें वित्त आयोग की राशि से आवश्यक उपकरणों की खरीद भी की जाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों में प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे, सीएचसी, पीएचसी और ब्लॉक स्तर की स्वास्थ्य इकाइयों को मजबूत करने के लिए अनुदान का प्रावधान किया गया था। केंद्र सरकार की जानकारी के अनुसार 15वें वित्त आयोग ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 1,06,606 करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की थी, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे से जुड़े विभिन्न घटक शामिल थे।

झारखंड में इस तरह के संसाधनों का इस्तेमाल स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। उपकरणों की उपलब्धता का सीधा संबंध मरीजों की जांच, उपचार और आपातकालीन सेवाओं से होता है।

हालांकि किसी भी स्वास्थ्य केंद्र को केवल उपकरण उपलब्ध करा देने से ही पूरी तरह सक्षम नहीं बनाया जा सकता। उपकरणों के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन, रखरखाव, बिजली, ऑक्सीजन, दवाएं और 24 घंटे की सेवा व्यवस्था भी जरूरी होती है। इसलिए अपग्रेडेशन की प्रक्रिया में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में रेफरल व्यवस्था होगी मजबूत

झारखंड के कई ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में बड़े अस्पतालों तक पहुंचने में समय लगता है। ऐसे में स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों की क्षमता बढ़ाना मरीजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

फर्स्ट रेफरल यूनिट के रूप में विकसित होने वाले सीएचसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और बड़े अस्पतालों के बीच एक कड़ी के रूप में काम कर सकते हैं। इससे जरूरत पड़ने पर मरीज को उचित स्तर की चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी और गंभीर मामलों को व्यवस्थित तरीके से उच्च चिकित्सा केंद्रों तक भेजा जा सकेगा।

जून 2026 में सामने आई जानकारी के मुताबिक एफआरयू मॉडल में 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं, जटिल प्रसव और सिजेरियन जैसी सुविधाओं को मजबूत करने तथा नवजात देखभाल पर भी जोर दिया जाना है।

ICU सुविधा मजबूत होने से गंभीर मरीजों को फायदा

आईसीयू यानी Intensive Care Unit गंभीर मरीजों की निगरानी और उपचार के लिए महत्वपूर्ण सुविधा है। ऐसे मरीज जिन्हें लगातार मॉनिटरिंग, ऑक्सीजन सपोर्ट या विशेष चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है, उनके लिए आईसीयू जैसी सुविधाएं महत्वपूर्ण होती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी सुविधा सीमित होने पर गंभीर मरीजों को बड़े अस्पताल में रेफर करना पड़ सकता है। इस दौरान मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने में समय लगता है।

यदि चिन्हित सीएचसी में आईसीयू संबंधी सुविधाओं को मजबूत किया जाता है, तो गंभीर मरीजों को शुरुआती स्तर पर ही आवश्यक चिकित्सा सहायता मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके बाद डॉक्टर मरीज की स्थिति के आधार पर यह निर्णय ले सकते हैं कि उसे आगे उच्च केंद्र पर रेफर करना जरूरी है या स्थानीय स्तर पर इलाज जारी रखा जा सकता है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की एक समीक्षा रिपोर्ट में भी झारखंड के कुछ सीएचसी में आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी चुनौतियों, जैसे स्थान की कमी और रेफरल में देरी, का उल्लेख किया गया है।

SNCU से नवजात शिशुओं की देखभाल को मिलेगा सहारा

SNCU यानी Special Newborn Care Unit नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा है। जन्म के बाद यदि किसी बच्चे को विशेष निगरानी या चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है, तो ऐसी यूनिट महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

100 चिन्हित सीएचसी में SNCU सुविधाओं को मजबूत करने का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में नवजात शिशुओं को शुरुआती स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

विशेषकर ऐसे क्षेत्रों में जहां जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने में काफी समय लगता है, वहां स्थानीय स्तर पर नवजात देखभाल की सुविधा मजबूत होना महत्वपूर्ण हो सकता है।

SNCU में आवश्यक उपकरणों के साथ प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए स्वास्थ्य केंद्रों के अपग्रेडेशन में उपकरण और मानव संसाधन दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी होगा।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर भी होगा असर

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का एक बड़ा उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना भी है। गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, सुरक्षित प्रसव, आपातकालीन प्रसूति सेवा और जरूरत पड़ने पर सिजेरियन सुविधा मिलना महत्वपूर्ण है।

एफआरयू के रूप में विकसित होने वाले सीएचसी में जटिल प्रसव और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं को मजबूत करने की योजना बताई गई है। इसके साथ ही ब्लड स्टोरेज या न्यूनतम रक्त उपलब्धता की व्यवस्था को भी मजबूत करने की बात सामने आई है।

यदि ग्रामीण क्षेत्र के किसी स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव के दौरान जटिलता आती है, तो तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध होना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में रेफरल की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।

ब्लड स्टोरेज और आपातकालीन सेवाओं पर जोर

गंभीर चिकित्सा मामलों और प्रसव संबंधी जटिलताओं में रक्त की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने की योजना में ब्लड स्टोरेज जैसी सुविधाओं को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एफआरयू मॉडल से जुड़ी जानकारी के अनुसार इन केंद्रों पर ब्लड स्टोरेज या न्यूनतम ब्लड ट्रांसफ्यूजन व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाना है।

इसके अलावा आपातकालीन सेवाओं को 24 घंटे उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीण मरीजों के लिए रात या छुट्टी के समय भी आपातकालीन चिकित्सा उपलब्ध होना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्रभावशीलता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

हर ब्लॉक में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बनाने की दिशा

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ब्लॉक स्तर की स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि सीएचसी में जरूरी चिकित्सा सुविधाएं मजबूत होती हैं, तो इसका असर पूरे ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों पर पड़ सकता है।

गांवों और छोटे कस्बों के मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से आगे जरूरत पड़ने पर सीएचसी तक पहुंचते हैं। यहां से गंभीर मामलों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज तक रेफर किया जा सकता है।

इसलिए सीएचसी को मजबूत करने से स्वास्थ्य व्यवस्था के अलग-अलग स्तरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता भी जरूरी

अस्पताल में आधुनिक उपकरण लगाने के साथ डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता भी जरूरी है। ICU या SNCU जैसी सुविधाएं तभी प्रभावी तरीके से काम कर सकती हैं जब उन्हें संचालित करने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध हो।

इसी कारण गैप एनालिसिस में केवल भवन और उपकरण ही नहीं, बल्कि मानव संसाधन की जरूरतों का भी आकलन महत्वपूर्ण होगा।

जून 2026 की रिपोर्ट में भी सीएचसी के अपग्रेडेशन के दौरान डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों को मजबूत करने की दिशा में काम करने की बात कही गई थी।

बड़े अस्पतालों पर कम हो सकता है दबाव

यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, तो प्राथमिक स्तर के कई मरीजों का उपचार स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है। इससे जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों पर अनावश्यक रेफरल का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि गंभीर मरीजों के लिए उच्च स्तरीय अस्पतालों की आवश्यकता बनी रहेगी। ऐसे मामलों में सीएचसी की भूमिका मरीज को स्थिर करने, शुरुआती उपचार देने और आवश्यकता होने पर उचित रेफरल सुनिश्चित करने की हो सकती है।

इस तरह स्वास्थ्य व्यवस्था में प्रत्येक स्तर की भूमिका स्पष्ट होने से मरीजों को सही समय पर सही स्तर की चिकित्सा सुविधा मिल सकती है।

20 मॉडल एफआरयू के अनुभव के आधार पर आगे बढ़ेगा काम

राज्य के सभी 188 सीएचसी को एक साथ अपग्रेड करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से काम करने की योजना बताई गई है। पहले चरण में 20 केंद्रों को मॉडल एफआरयू के रूप में विकसित करने की बात सामने आई थी।

इन केंद्रों में काम के अनुभव, उपलब्ध संसाधनों, मरीजों की जरूरत और सामने आने वाली चुनौतियों के आधार पर आगे के सीएचसी में भी बदलाव किए जा सकते हैं।

इस तरह मॉडल केंद्रों से मिले अनुभव का इस्तेमाल व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों को विकसित करने में किया जा सकता है।

स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ गुणवत्ता पर भी ध्यान

किसी स्वास्थ्य केंद्र को बेहतर बनाने में केवल भवन निर्माण या मशीनें लगाने से काम पूरा नहीं होता। मरीजों को समय पर डॉक्टर, दवा, जांच, आपातकालीन सहायता और रेफरल सुविधा मिलना भी जरूरी है।

इसलिए 100 सीएचसी में ICU और SNCU को मजबूत करने की योजना में सुविधाओं की वास्तविक जरूरत का आकलन महत्वपूर्ण है। गैप एनालिसिस इसी उद्देश्य से किया जाएगा, ताकि उपलब्ध संसाधनों और जरूरत के बीच अंतर को समझा जा सके।

इसके आधार पर उपकरणों की खरीद, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और मानव संसाधन से जुड़ी जरूरतों पर काम किया जा सकता है।

ग्रामीण मरीजों को स्थानीय स्तर पर मिल सकती है बेहतर सुविधा

झारखंड की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। ऐसे में ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की क्षमता बढ़ाना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

यदि गांव के नजदीक मौजूद सीएचसी में आपातकालीन सेवा, नवजात देखभाल, आईसीयू से जुड़ी सुविधा, प्रसूति सेवा और जरूरी जांच की व्यवस्था मजबूत होती है, तो मरीजों को हर छोटी-बड़ी समस्या के लिए दूर के अस्पताल जाने की जरूरत कम हो सकती है।

विशेष रूप से रात के समय होने वाली आपात स्थिति में स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

सरकार की योजना का व्यापक उद्देश्य

इस पूरी पहल को ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के व्यापक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। राज्य के 188 सीएचसी को चरणबद्ध तरीके से एफआरयू मॉडल में विकसित करने और 100 चिन्हित सीएचसी में ICU-SNCU सुविधाओं को मजबूत करने की योजना एक-दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई देती है।

एक ओर जहां एफआरयू मॉडल में आपातकालीन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर है, वहीं दूसरी ओर ICU और SNCU सुविधाओं को बेहतर करने से गंभीर मरीजों और नवजात शिशुओं के उपचार की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

15वें वित्त आयोग के संसाधनों का इस्तेमाल

15वें वित्त आयोग के स्वास्थ्य अनुदान का उद्देश्य देश में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने से जुड़ा रहा है। आयोग की सिफारिशों में सीएचसी, पीएचसी, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र और ब्लॉक स्तर की स्वास्थ्य इकाइयों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।

झारखंड में इस तरह के संसाधनों का इस्तेमाल चिन्हित स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी उपकरणों और सुविधाओं को मजबूत करने के लिए किए जाने की बात खबर में कही गई है।

आगे क्या होगा?

आने वाले चरण में सबसे पहले संबंधित सीएचसी में उपलब्ध सुविधाओं और कमियों का आकलन किया जाएगा। इसके बाद जरूरत के अनुसार उपकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन की जरूरत तय की जाएगी।

100 चिन्हित सीएचसी में ICU और SNCU से संबंधित सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ राज्य के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना आगे बढ़ेगी।

पहले चरण में विकसित किए जाने वाले मॉडल केंद्रों से मिले अनुभव के आधार पर बाकी केंद्रों में सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण पहल

झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करना महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। 188 सीएचसी को चरणबद्ध तरीके से विकसित करने और 100 चिन्हित केंद्रों में ICU तथा SNCU सुविधाओं को मजबूत करने की योजना का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर चिकित्सा क्षमता बढ़ाना है।

गैप एनालिसिस के जरिए कमियों की पहचान, 15वें वित्त आयोग की राशि से उपकरणों की खरीद, मॉडल एफआरयू के अनुभवों का इस्तेमाल और रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने जैसे कदम इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

यदि इन योजनाओं को आवश्यक मानव संसाधन, उपकरणों के रखरखाव, दवाओं की उपलब्धता, ऑक्सीजन, बिजली और 24 घंटे की आपातकालीन सेवा के साथ प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो ग्रामीण मरीजों को स्थानीय स्तर पर अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

राज्य में पहले चरण में 20 सीएचसी को मॉडल एफआरयू बनाने और आगे शेष केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड करने की जानकारी पहले ही सामने आ चुकी है।

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