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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की विभिन्न परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं की जांच अब और तेज होने जा रही है। पुलिस मुख्यालय ने जांच के लिए करीब 35 पुलिस अधिकारियों की छह विशेष टीमें गठित की हैं। इन टीमों को JPSC की उन 21 परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच की जिम्मेदारी दी गई है, जिनमें अनियमितता, कथित प्रश्नपत्र लीक और OMR शीट में हेराफेरी जैसी शिकायतें सामने आई हैं। छह विशेष टीमों में डीआईजी, एसपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और दारोगा स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब JPSC परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच पहले से ही CID द्वारा की जा रही है। अतिरिक्त जांच अधिकारियों की जरूरत को देखते हुए CID ने पुलिस मुख्यालय से बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने अलग-अलग स्तर के अधिकारियों को जांच में लगाया है। अधिकारियों को जल्द CID में योगदान देने का निर्देश दिया गया है, ताकि जांच को अलग-अलग स्तर पर आगे बढ़ाया जा सके।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच का दायरा केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। पुलिस मुख्यालय के स्तर पर गठित छह टीमों को JPSC की 21 अलग-अलग परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच करनी है। इन परीक्षाओं में सिविल सेवा, न्यायिक सेवा, वन सेवा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, CDPO, सहायक लोक अभियोजक और अन्य नियुक्ति परीक्षाएं शामिल हैं।
35 पुलिस अधिकारियों को जांच में लगाया गया
JPSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए गठित छह टीमों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इन टीमों में दो डीआईजी और तीन एसपी के अलावा डीएसपी, इंस्पेक्टर और दारोगा स्तर के अधिकारी शामिल हैं। अलग-अलग टीमों को जांच की जिम्मेदारियां दी जाएंगी, जिससे विभिन्न मामलों की समानांतर जांच की जा सके।
जिन वरिष्ठ अधिकारियों को टीमों का नेतृत्व सौंपा गया है, उनमें डीआईजी जैप कार्तिक एस., डीआईजी झारखंड जगुआर (एसटीएफ) इंद्रजीत महथा, एसपी अभियान दीपक कुमार शर्मा, एसपी वायरलेस प्रशांत आनंद और एसपी विशेष शाखा सौरभ शामिल हैं। इन अधिकारियों के नेतृत्व में गठित टीमों को JPSC की विवादित परीक्षाओं से संबंधित अलग-अलग पहलुओं की जांच करनी है।
पुलिस मुख्यालय की ओर से यह कदम CID की जांच को अतिरिक्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। जांच के दौरान छापेमारी, संदिग्धों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच, तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण और विभिन्न लोगों की भूमिका की पड़ताल जैसे काम किए जाने की जरूरत बताई गई है।
किन 21 परीक्षाओं की जांच होगी?
रिपोर्ट के अनुसार, CID की छह टीमें JPSC से संबंधित 21 विवादित परीक्षाओं की जांच करेंगी। इनमें प्रमुख रूप से निम्न परीक्षाएं शामिल हैं:
- झारखंड सिविल सेवा संयुक्त परीक्षा-2023
- झारखंड 14वीं सिविल सेवा संयुक्त परीक्षा-2025
- सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2023
- सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा-2025
- विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति परीक्षा-2025
- सहायक निदेशक एवं सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर बैकलॉग नियुक्ति परीक्षा-2025
- सहायक निदेशक एवं सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर नियमित नियुक्ति परीक्षा-2025
- ड्रग इंस्पेक्टर नियुक्ति परीक्षा-2025
- इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक बैकलॉग नियुक्ति परीक्षा-2026
- गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक में व्याख्याताओं की नियुक्ति परीक्षा-2026
- गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक में व्याख्याताओं की बैकलॉग नियुक्ति परीक्षा-2026
- मेडिकल कॉलेजों में स्पेशियलिटी सहायक प्राध्यापक नियुक्ति परीक्षा-2026
- सिविल जज जूनियर डिविजन नियुक्ति परीक्षा-2023
- सहायक वन संरक्षक नियुक्ति परीक्षा-2024
- वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा-2024
- सहायक लोक अभियोजक नियमित नियुक्ति परीक्षा-2025
- सहायक लोक अभियोजक बैकलॉग नियुक्ति परीक्षा-2025
- खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा-2023
- CDPO नियुक्ति परीक्षा-2023
- झारखंड पात्रता परीक्षा-2024
- छठी सीमित उपसमाहर्ता परीक्षा-2018
इन परीक्षाओं को लेकर सामने आई शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच अब विशेष टीमों के स्तर पर की जाएगी।
पेपर लीक के साथ OMR शीट भी जांच के केंद्र में
JPSC मामले में जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा OMR शीट से जुड़ा है। OMR यानी Optical Mark Recognition आधारित उत्तर पुस्तिका का इस्तेमाल कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के उत्तरों की जांच के लिए किया जाता है। ऐसे में OMR शीट में किसी भी तरह की कथित हेराफेरी परीक्षा की पूरी निष्पक्षता पर असर डाल सकती है।
JPSC मामले की जांच के दौरान OMR और अन्य परीक्षा रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ के आरोपों की पड़ताल की जा रही है। अगस्त 2026 में सामने आई रिपोर्टों में जांच से जुड़े बयानों के आधार पर OMR और On-Screen Marking यानी OSM में कथित बदलाव की बात सामने आई थी। हालांकि, इन बयानों और दावों का सत्यापन जांच एजेंसी द्वारा किया जाना बाकी है।
सितंबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, CID की केस डायरी में दो परीक्षाओं से जुड़ी करीब 500 OMR शीट में कथित छेड़छाड़ का उल्लेख सामने आया था। यह जांच के दायरे में शामिल आरोपों का हिस्सा है और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होंगे।
इसी क्रम में CID ने JPSC परीक्षा में सफल घोषित अभ्यर्थियों से उनकी OMR शीट की कार्बन कॉपी भी मांगी थी। जुलाई में जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार अभ्यर्थियों से पेपर-1 और पेपर-2 की OMR शीट की कार्बन कॉपी की PDF या फोटो भेजने का अनुरोध किया गया था।
इस तरह जांच में एक तरफ परीक्षा संचालन से जुड़े रिकॉर्ड देखे जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अभ्यर्थियों के पास मौजूद OMR शीट की कार्बन कॉपी और अन्य दस्तावेजों से भी मिलान किया जा रहा है।
454 सफल अभ्यर्थियों की OMR को लेकर भी उठे सवाल
JPSC मामले की जांच के दौरान एक समय 454 सफल अभ्यर्थियों द्वारा OMR शीट की कॉपी उपलब्ध नहीं कराने की रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, CID ने सफल अभ्यर्थियों से उनकी OMR शीट की कॉपी उपलब्ध कराने को कहा था।
यहां यह समझना जरूरी है कि किसी अभ्यर्थी द्वारा OMR की कॉपी नहीं देने मात्र से उसकी संलिप्तता साबित नहीं होती। जांच एजेंसी ऐसे मामलों में उपलब्ध दस्तावेजों, परीक्षा रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करती है। इसलिए किसी व्यक्ति की भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
जांच के लिए अतिरिक्त बल की जरूरत क्यों पड़ी?
JPSC से जुड़े मामलों की जांच का दायरा काफी बड़ा है। एक ही मामले की जांच के बजाय कई परीक्षाओं, अलग-अलग वर्षों और विभिन्न नियुक्ति प्रक्रियाओं से जुड़े आरोपों की पड़ताल करनी है। इसके अलावा जांच में रांची के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों में भी पूछताछ और छानबीन की जरूरत पड़ सकती है।
इसी वजह से CID ने पुलिस मुख्यालय से अतिरिक्त अधिकारियों की मांग की थी। रिपोर्ट के अनुसार CID को छापेमारी, राज्य के अलग-अलग स्थानों पर जांच, संदिग्धों की निगरानी, पूछताछ और अन्य जांच प्रक्रियाओं के लिए अतिरिक्त बल की आवश्यकता थी। पुलिस मुख्यालय ने CID के अनुरोध पर अधिकारियों की छह टीमें उपलब्ध कराई हैं।
राज्य के जिलों को भी CID की जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मतलब है कि अगर जांच टीम को किसी जिले में दस्तावेज जुटाने, किसी व्यक्ति से पूछताछ करने या अन्य कानूनी प्रक्रिया के लिए स्थानीय पुलिस की आवश्यकता होती है तो संबंधित जिला पुलिस को सहयोग करना होगा।
JPSC जांच के बीच JSSC-CGL मामला भी चर्चा में
JPSC मामले के साथ-साथ झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (CGL) में कथित पेपर लीक मामले की जांच भी चल रही है। दोनों मामले अलग-अलग हैं, हालांकि दोनों में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
JSSC-CGL मामले में भी जांच एजेंसियों ने कई स्तरों पर कार्रवाई की है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, CID ने फूड इंस्पेक्टर संजय कुमार को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पुलिस ने गिरिडीह जिले के गावां थाना क्षेत्र स्थित पिहरा गांव में उनके आवास पर कार्रवाई की और उन्हें पूछताछ के लिए रांची लाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, संजय कुमार की भूमिका की जांच की जा रही है और उनसे परीक्षा में कथित अनियमितताओं से संबंधित जानकारी हासिल की जा रही है। उनकी भूमिका जांच में मिले साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर स्पष्ट होगी।
एक अन्य रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अभ्यर्थियों से पैसे लेने और उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर तैयार कराने जैसी गतिविधियों से संजय कुमार की कथित भूमिका की जांच की जा रही है। ये आरोप जांच का हिस्सा हैं और इनके संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसी के साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
JSSC-CGL जांच में पहले भी सामने आए कई नाम
JSSC-CGL मामले की जांच में भी CID को अलग-अलग स्तर पर कथित पेपर लीक और अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचने से संबंधित जानकारी मिली है। सितंबर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जांच में एक ऐसे नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल की जा रही है जिसके माध्यम से कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र अलग-अलग लोगों तक पहुंचा।
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में मिथिलेश सिंह नामक व्यक्ति की कथित भूमिका भी सामने आई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्र किस माध्यम से और किन लोगों तक पहुंचा। इस तरह के मामलों में जांच एजेंसी आमतौर पर संपर्कों, फोन रिकॉर्ड, आर्थिक लेन-देन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान करती है।
इसके अलावा JPSC और JSSC से जुड़े मामलों में अलग-अलग आरोपियों की गिरफ्तारी और पूछताछ की खबरें भी सामने आई हैं। सितंबर 2026 में CID ने JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े मामलों में दो आरोपितों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इनमें JPSC मामलों में एजेंट और अभ्यर्थियों के बीच कथित सेटिंग से जुड़ा आरोप तथा JSSC-CGL में अभ्यर्थियों को उत्तर रटाने से जुड़ा आरोप शामिल था।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता का सवाल
प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थी कई महीनों और कई बार वर्षों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में किसी भी परीक्षा में कथित पेपर लीक, OMR हेराफेरी या चयन प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत सामने आने पर सबसे बड़ा सवाल परीक्षा की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भरोसे से जुड़ता है।
JPSC जैसी परीक्षाएं राज्य में प्रशासनिक और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति के लिए आयोजित की जाती हैं। इन परीक्षाओं में हजारों अभ्यर्थी शामिल होते हैं। इसलिए किसी परीक्षा से संबंधित शिकायत की जांच केवल किसी एक व्यक्ति की भूमिका तक सीमित नहीं रहती, बल्कि परीक्षा आयोजित करने की पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा की जरूरत पड़ सकती है।
इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसकी छपाई, सुरक्षित रखे जाने, परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने, परीक्षा संचालन, OMR शीट संग्रह, स्ट्रॉन्ग रूम में रखने, स्कैनिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने तक के चरण शामिल हो सकते हैं।
JPSC मामले में जांच एजेंसी द्वारा OMR और अन्य परीक्षा रिकॉर्ड की पड़ताल किए जाने की रिपोर्टें इसी व्यापक जांच की ओर संकेत करती हैं। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन स्तरों पर वास्तविक अनियमितता हुई और उसमें किन लोगों की भूमिका थी।
OMR शीट की जांच क्यों महत्वपूर्ण है?
OMR शीट प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्मीदवार के उत्तरों का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होती है। अभ्यर्थी परीक्षा के दौरान प्रश्नों के उत्तर निर्धारित विकल्पों पर अंकित करता है। बाद में मशीन आधारित प्रक्रिया से इन उत्तरों की जांच की जाती है।
यदि OMR शीट में कथित तौर पर परीक्षा के बाद बदलाव किया जाए या रिकॉर्ड में किसी तरह का परिवर्तन हो, तो उम्मीदवार के वास्तविक प्रदर्शन और परिणाम के बीच अंतर पैदा हो सकता है। इसी वजह से OMR शीट की कार्बन कॉपी, मूल रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा का मिलान जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है।
JPSC मामले में CID द्वारा सफल अभ्यर्थियों से OMR की कार्बन कॉपी मांगे जाने की कार्रवाई इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। जांच एजेंसी इन कॉपियों की तुलना उपलब्ध रिकॉर्ड से कर सकती है और यदि कहीं अंतर पाया जाता है तो उसके कारण की जांच की जा सकती है।
जांच में डिजिटल रिकॉर्ड की भी भूमिका
आजकल प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। परीक्षा से जुड़े कई चरणों में कंप्यूटर सिस्टम, स्कैनिंग, डिजिटल डेटा, सर्वर और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होता है। इसलिए किसी परीक्षा में कथित डिजिटल हेराफेरी की जांच के लिए तकनीकी रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
JPSC मामले में OMR और On-Screen Marking से संबंधित कथित हेराफेरी के दावों की जांच की खबरें सामने आई हैं। जांच एजेंसी इन दावों का सत्यापन उपलब्ध तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कर रही है।
यदि किसी परीक्षा में OMR की स्कैन कॉपी, परीक्षा के दौरान तैयार रिकॉर्ड और बाद के परिणामों में अंतर मिलता है तो जांच एजेंसी उसके स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, किसी भी तकनीकी अंतर को अपने आप धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता; उसके पीछे तकनीकी त्रुटि या अन्य कारण भी हो सकते हैं। अंतिम निष्कर्ष साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा।
अभ्यर्थियों के लिए क्या मायने रखता है?
JPSC की 21 परीक्षाओं की जांच शुरू होने से उन परीक्षाओं में शामिल रहे अभ्यर्थियों के बीच स्वाभाविक रूप से कई सवाल उठ सकते हैं। विशेष रूप से जिन परीक्षाओं के परिणाम, नियुक्ति या चयन प्रक्रिया पर शिकायतें रही हैं, उनसे जुड़े उम्मीदवार जांच की प्रगति पर नजर रख सकते हैं।
ऐसे मामलों में अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपने पास उपलब्ध वैध दस्तावेजों को सुरक्षित रखें। इनमें एडमिट कार्ड, परीक्षा से संबंधित कागजात, OMR की कार्बन कॉपी, आवेदन से जुड़े दस्तावेज और आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए अन्य रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं।
CID ने पहले भी कुछ मामलों में अभ्यर्थियों से OMR से संबंधित जानकारी मांगी थी। इससे संकेत मिलता है कि जांच में अभ्यर्थियों के पास उपलब्ध मूल या कार्बन कॉपी रिकॉर्ड भी उपयोगी हो सकते हैं।
जांच का अगला चरण क्या हो सकता है?
अब छह विशेष टीमों के सक्रिय होने के बाद जांच कई दिशाओं में आगे बढ़ सकती है। अलग-अलग परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज जुटाना, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ करना, परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका देखना और उपलब्ध तकनीकी रिकॉर्ड का परीक्षण करना जांच का हिस्सा हो सकता है।
इसके अलावा जहां जरूरी होगा, वहां संदिग्ध लोगों से पूछताछ और छापेमारी भी की जा सकती है। पुलिस मुख्यालय ने CID को अतिरिक्त बल इसलिए उपलब्ध कराया है ताकि जांच के दौरान अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करने में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध रहे।
जांच की दिशा में यह भी देखा जा सकता है कि कथित अनियमितता किसी एक परीक्षा या किसी एक चरण तक सीमित थी या अलग-अलग परीक्षाओं में एक जैसे तरीके से हुई। इसके लिए अलग-अलग परीक्षाओं के रिकॉर्ड और जांच से सामने आए तथ्यों का आपस में मिलान किया जा सकता है।
क्या सभी 21 परीक्षाओं में गड़बड़ी साबित हो चुकी है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 21 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है, इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी 21 परीक्षाओं में अनियमितता अदालत या अंतिम जांच के स्तर पर साबित हो चुकी है।
इन परीक्षाओं के संबंध में शिकायतें, आरोप या अनियमितता की आशंकाएं सामने आने के बाद जांच की जा रही है। पुलिस मुख्यालय द्वारा छह टीमों का गठन जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है। अंतिम रूप से किसी व्यक्ति या प्रक्रिया की जिम्मेदारी तभी तय होगी जब जांच में पर्याप्त साक्ष्य सामने आएं और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी हो।
इसी तरह JSSC-CGL मामले में भी जिन लोगों से पूछताछ की जा रही है, उनके खिलाफ लगे आरोपों को जांच के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। किसी व्यक्ति से पूछताछ या हिरासत अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। संजय कुमार के मामले में भी उनकी भूमिका जांच के बाद स्पष्ट होगी।
JPSC की परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ा ध्यान
JPSC की 21 परीक्षाओं को एक साथ जांच के दायरे में लिए जाने से राज्य की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। परीक्षा की निष्पक्षता के लिए प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, OMR शीट का सुरक्षित रखरखाव और मूल्यांकन प्रक्रिया जैसे सभी चरण महत्वपूर्ण होते हैं।
एक परीक्षा में शामिल उम्मीदवार के लिए यह जरूरी है कि उसे यह विश्वास हो कि उसकी मेहनत का मूल्यांकन निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ है। इसलिए किसी भी अनियमितता की शिकायत सामने आने पर उसकी निष्पक्ष और तथ्य आधारित जांच आवश्यक होती है।
वर्तमान में छह विशेष टीमों के गठन के बाद जांच का दायरा पहले की तुलना में व्यापक हो गया है। करीब 35 अधिकारियों को इसमें लगाया गया है और अलग-अलग परीक्षाओं से जुड़े मामलों को समानांतर तरीके से देखने की तैयारी है।
पुलिस मुख्यालय ने जिलों को सहयोग का निर्देश दिया
जांच के दौरान यदि किसी जिले में CID को स्थानीय स्तर पर पुलिस सहायता की जरूरत होती है तो संबंधित जिला पुलिस को सहयोग करना होगा। यह व्यवस्था जांच टीमों को दस्तावेज जुटाने, पूछताछ और अन्य कानूनी कार्रवाई में सहायता देने के लिए महत्वपूर्ण है।
क्योंकि जिन 21 परीक्षाओं की जांच की जा रही है, उनमें अलग-अलग वर्षों की परीक्षाएं शामिल हैं, इसलिए जांच एजेंसी को पुराने रिकॉर्ड भी जुटाने पड़ सकते हैं। कई मामलों में परीक्षा से जुड़े अधिकारी या कर्मचारी अलग-अलग स्थानों पर पदस्थ हो सकते हैं। ऐसे में जिला पुलिस का सहयोग जांच को आगे बढ़ाने में उपयोगी हो सकता है।
परीक्षा में गड़बड़ी की जांच सिर्फ पेपर तक सीमित नहीं
आमतौर पर परीक्षा संबंधी विवाद सामने आने पर सबसे पहले पेपर लीक की बात होती है, लेकिन जांच का दायरा इससे कहीं ज्यादा व्यापक हो सकता है। किसी परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होने के कई संभावित तरीके हो सकते हैं।
इनमें प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग होना, परीक्षा केंद्र से संबंधित अनियमितता, OMR रिकॉर्ड में बदलाव, मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी, डिजिटल डेटा में छेड़छाड़ या चयन सूची तैयार करने की प्रक्रिया में अनियमितता जैसे अलग-अलग पहलू शामिल हो सकते हैं।
JPSC मामले में सामने आई रिपोर्टों में OMR, OSM और अन्य रिकॉर्ड से संबंधित अलग-अलग दावों की जांच का उल्लेख है।
इसी कारण छह विशेष टीमों के जरिए व्यापक जांच कराए जाने की व्यवस्था की गई है।
आगे जांच रिपोर्ट पर रहेगी नजर
अब सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि छह विशेष टीमें जांच के दौरान क्या तथ्य सामने लाती हैं। किन परीक्षाओं में किस प्रकार की शिकायत सही पाई जाती है, किन रिकॉर्ड में अंतर मिलता है, किन लोगों की भूमिका सामने आती है और किन आरोपों की पुष्टि नहीं होती—इन सभी सवालों का जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ मिल सकता है।
जांच में यदि किसी व्यक्ति की भूमिका के संबंध में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि किसी आरोप की पुष्टि नहीं होती है तो उस तथ्य को भी जांच के अंतिम निष्कर्ष में शामिल किया जाएगा।
फिलहाल पुलिस मुख्यालय द्वारा 35 अधिकारियों की छह टीमों का गठन JPSC की 21 परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच को तेज करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है। CID पहले से इन मामलों की पड़ताल कर रही है और अतिरिक्त पुलिस बल मिलने से जांच के विभिन्न पहलुओं को एक साथ आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
झारखंड में JPSC की 21 परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच अब बड़े स्तर पर आगे बढ़ रही है। पुलिस मुख्यालय ने करीब 35 अधिकारियों की छह विशेष टीमें गठित की हैं। इन टीमों में दो डीआईजी, तीन एसपी के साथ डीएसपी, इंस्पेक्टर और दारोगा स्तर के अधिकारी शामिल हैं। टीमों को JPSC की विभिन्न विवादित परीक्षाओं की जांच का जिम्मा दिया गया है।
जांच में कथित पेपर लीक के अलावा OMR शीट और परीक्षा प्रक्रिया के दूसरे हिस्सों में संभावित हेराफेरी की भी पड़ताल की जा रही है। CID ने पहले सफल अभ्यर्थियों से OMR शीट की कार्बन कॉपी मांगी थी और जांच में OMR तथा OSM से जुड़े कई दावों की पड़ताल की जा रही है।
इसी बीच JSSC-CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले की जांच भी जारी है। फूड इंस्पेक्टर संजय कुमार को पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने की ताजा कार्रवाई इसी जांच का हिस्सा बताई गई है। उनकी भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
अब निगाहें CID की आगे की जांच पर हैं। 21 परीक्षाओं से जुड़े मामलों की विस्तृत पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन शिकायतों में तथ्य मिले, किन स्तरों पर अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था। तब तक इन मामलों से जुड़े आरोपों को जांचाधीन ही माना जाना चाहिए।
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JPSC की 21 परीक्षाओं की जांच — 35 अफसरों की 6 टीमें
इस रिपोर्ट में 21 परीक्षाओं की सूची और छह टीमों के गठन की जानकारी भी दी गई है।