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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने स्वास्थ्य और उससे जुड़े Allied & Healthcare क्षेत्र की डिग्रियों के ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कई हेल्थकेयर कोर्स में छात्रों को पहले की तरह केवल सामान्य या जनरल डिग्री नहीं दी जाएगी, बल्कि संबंधित क्षेत्र में चुनी गई स्पेशलाइजेशन के आधार पर डिग्री प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही कई डिग्रियों के नाम और उनकी अवधि में भी बदलाव किया गया है। यूजीसी ने कुल 21 मौजूदा UG और PG डिग्रियों को संशोधित/अपडेट किया है, जबकि 33 नए Allied और Healthcare degree programmes को भी अपनी सूची में शामिल किया है।
यह बदलाव खास तौर पर फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, ऑप्टोमेट्री, मेडिकल लैबोरेटरी साइंस, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी, एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, मेडिकल रेडियोलॉजी, न्यूट्रिशन, साइकोलॉजी, डायलिसिस, रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी और हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों से जुड़े विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।
सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं का उद्देश्य Allied और Healthcare शिक्षा में देशभर में एकरूपता लाना है, ताकि एक ही क्षेत्र की डिग्री का नाम, अवधि, प्रवेश योग्यता और पाठ्यक्रम ढांचा अलग-अलग संस्थानों में अलग-अलग न रहे। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह बदलाव National Commission for Allied and Healthcare Professions यानी NCAHP के नियामक ढांचे के तहत किया गया है।
2026-27 से लागू होगा नया डिग्री ढांचा
यूजीसी का यह बदलाव 27 अगस्त 2026 को जारी पांचवें संशोधन से जुड़ा है। इसकी गजट अधिसूचना 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुई। यह संशोधन UGC Act, 1956 की धारा 22(3) के तहत जारी किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इसका उद्देश्य Allied और Healthcare शिक्षा में डिग्री के नाम, अवधि और पेशेवर प्रशिक्षण को अधिक व्यवस्थित करना है।
इसका सीधा असर नए शैक्षणिक सत्र में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों पर पड़ेगा। जिन विद्यार्थियों ने संबंधित कोर्स में 2026-27 से पहले प्रवेश लिया है, उनके लिए पहले से लागू नियम जारी रहेंगे। यानी पुराने बैच के छात्रों की डिग्री को नए ढांचे के अनुसार बदलने की बात नहीं कही गई है।
नए विद्यार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि कुछ मास्टर डिग्रियों में अब सामान्य डिग्री के बजाय स्पेशलाइजेशन का उल्लेख किया जाएगा। इससे विद्यार्थी की पढ़ाई का विशेष क्षेत्र उसकी डिग्री में ही स्पष्ट होगा।
मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी में स्पेशलाइजेशन का प्रावधान
फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण है। नए ढांचे के तहत Master of Physiotherapy यानी M.PT को स्पेशलाइजेशन के साथ प्रदान किया जाएगा।
M.PT के अंतर्गत अलग-अलग विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें Musculoskeletal Sciences, Neurosciences, Cardiovascular and Pulmonary Sciences, Sports Sciences, Paediatrics and Neonatal Sciences, Obstetrics and Gynaecology Sciences, Oncology Sciences और Community Rehabilitation Sciences जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इसका मतलब यह है कि विद्यार्थी केवल सामान्य M.PT डिग्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पढ़ाई के दौरान चुने गए विशेषज्ञता क्षेत्र के आधार पर उसकी डिग्री की पहचान होगी।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई विद्यार्थी Sports Sciences में M.PT करता है, तो उसकी विशेषज्ञता खेलों से संबंधित फिजियोथेरेपी में होगी। इसी तरह Neurosciences से जुड़ी पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी का विशेषज्ञता क्षेत्र न्यूरोलॉजिकल स्थितियों से जुड़ा होगा।
इस बदलाव से विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और करियर के दौरान अपनी विशेषज्ञता को स्पष्ट रूप से दर्शाने में मदद मिल सकती है। हालांकि किसी विशेष नौकरी या पेशेवर पंजीकरण के लिए अलग-अलग संस्थाओं की पात्रता शर्तें लागू हो सकती हैं।
ऑक्यूपेशनल थेरेपी में भी बदला ढांचा
Master of Occupational Therapy यानी M.OT की डिग्री संरचना में भी बदलाव किया गया है। नए सत्र से M.OT भी विशेष विशेषज्ञता के साथ प्रदान की जाएगी। इसके तहत अलग-अलग क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
M.OT के लिए Musculoskeletal Sciences, Neurosciences and Mental Health, Paediatrics and Neonatology, Community Rehabilitation Sciences, Sports Sciences, Geriatrics, Cardiovascular and Pulmonary Sciences, Hand and Oncological Sciences तथा Obstetrics and Gynaecology Sciences जैसी विशेषज्ञताएं शामिल हैं।
इसका उद्देश्य Occupational Therapy की पढ़ाई को भी अधिक विशेषज्ञता आधारित बनाना है। ऐसे में विद्यार्थी जिस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करेगा, उसी के अनुरूप उसकी डिग्री का नाम निर्धारित किया जाएगा।
बीपीटी की अवधि भी बढ़ाई गई
यूजीसी के संशोधित ढांचे में Bachelor of Physiotherapy यानी BPT की अवधि को लेकर भी बदलाव किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार BPT की अवधि अब पांच वर्ष की होगी, जबकि पहले यह करीब साढ़े चार वर्ष की थी।
फिजियोथेरेपी जैसी क्लिनिकल शिक्षा में केवल कक्षा आधारित पढ़ाई ही पर्याप्त नहीं होती। विद्यार्थियों को अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में व्यावहारिक प्रशिक्षण और क्लिनिकल एक्सपोजर भी हासिल करना होता है। इसी वजह से Allied Healthcare शिक्षा में competency-based training और clinical exposure पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी कहा है कि NCAHP के competency-based curricula में अस्पतालों या संबंधित प्रैक्टिसिंग सुविधाओं में पर्याप्त अवधि की hands-on clinical training और internship पर जोर दिया गया है।
ऑप्टोमेट्री की डिग्री में भी बदलाव
ऑप्टोमेट्री से संबंधित डिग्री को भी संशोधित ढांचे में शामिल किया गया है। स्नातक स्तर पर Bachelor of Optometry की अवधि पांच वर्ष की किए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं Master of Optometry की अवधि दो वर्ष रखी गई है।
इस बदलाव का उद्देश्य ऑप्टोमेट्री शिक्षा को भी एक समान शैक्षणिक ढांचे में लाना है। आंखों की जांच, विजन से संबंधित सेवाओं और ऑप्टिकल हेल्थकेयर से जुड़े प्रशिक्षण में व्यावहारिक शिक्षा का महत्व काफी अधिक है।
नए डिग्री ढांचे में कोर्स की अवधि स्पष्ट होने से विद्यार्थियों को एडमिशन के समय यह समझने में आसानी होगी कि संबंधित डिग्री पूरी करने में कितना समय लगेगा।
मेडिकल लैबोरेटरी साइंस की पढ़ाई में बदलाव
मेडिकल लैबोरेटरी साइंस भी नए बदलावों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नए ढांचे में Bachelor of Medical Laboratory Science यानी B.MLS और Master of Medical Laboratory Science यानी M.MLS जैसे डिग्री नामों को शामिल किया गया है।
मेडिकल लैबोरेटरी क्षेत्र में मरीजों की जांच, सैंपल प्रोसेसिंग, टेस्टिंग और रिपोर्टिंग से जुड़ी तकनीकी भूमिका होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स की जरूरत अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सुविधाओं में बनी रहती है।
मास्टर स्तर पर Hematology and Transfusion Medicine तथा Histology and Cytopathology जैसे विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों को भी संशोधित डिग्री ढांचे में शामिल किया गया है।
इससे विद्यार्थियों को मेडिकल लैबोरेटरी के भीतर किसी विशेष क्षेत्र में आगे की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा।
इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी को भी नए ढांचे में जगह
Healthcare sector में Emergency Medical Technology का महत्व बढ़ने के साथ इस क्षेत्र से जुड़ी डिग्री को भी नए ढांचे में शामिल किया गया है।
Bachelor of Emergency Medical Technologist यानी B.EMT और Master of Advance Care Paramedics यानी M.ACP जैसे कार्यक्रम संशोधित सूची में शामिल हैं।
इमरजेंसी सेवाओं में मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले और अस्पताल की प्रारंभिक चिकित्सा व्यवस्था में प्रशिक्षित Allied Healthcare professionals की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए इस क्षेत्र में प्रशिक्षण और योग्यता के लिए एक समान शैक्षणिक ढांचा तैयार करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एनेस्थीसिया और ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी में नए डिग्री नाम
यूजीसी ने Anaesthesia and Operation Theatre Technology से संबंधित डिग्रियों को भी नए ढांचे में शामिल किया है।
Bachelor of Anaesthesia and Operation Theatre Technology यानी B.AOTT तथा Master of Anaesthesia and Operation Theatre Technology यानी M.AOTT को सूची में शामिल किया गया है।
ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों और नर्सिंग टीम के साथ तकनीकी रूप से प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। एनेस्थीसिया और ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोफेशनल्स ऑपरेशन से पहले, ऑपरेशन के दौरान और संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नए डिग्री ढांचे में इन कोर्सों को स्पष्ट नाम और संरचना मिलने से विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों के लिए पाठ्यक्रम की पहचान अधिक स्पष्ट होगी।
मेडिकल और सोशल साइंस से जुड़े कोर्स भी शामिल
नए Allied Healthcare degree structure में केवल तकनीकी स्वास्थ्य पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि Nutrition and Dietetics, Psychology तथा Medical and Psychiatric Social Work जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य सेवा अब केवल बीमारी का इलाज करने तक सीमित नहीं है। मरीज की मानसिक स्थिति, पोषण, सामाजिक परिस्थितियां और पुनर्वास भी स्वास्थ्य सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इसी वजह से अलग-अलग विशेषज्ञता वाले professionals की जरूरत बढ़ रही है। नए डिग्री ढांचे में इन क्षेत्रों को शामिल करना multidisciplinary healthcare approach की दिशा में एक कदम है।
मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग में भी बदलाव
Medical Radiology, Imaging and Therapeutic Technology से जुड़े कार्यक्रम भी संशोधित ढांचे में शामिल हैं। इसके अलावा Radiation Therapy Technology और Nuclear Medicine Technology से संबंधित डिग्री भी नई संरचना में शामिल की गई हैं।
आज अस्पतालों में बीमारी की पहचान और उपचार के लिए imaging तथा radiation-based technologies का उपयोग काफी महत्वपूर्ण है। CT scan, MRI, radiotherapy और nuclear medicine जैसे क्षेत्रों में तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत होती है।
नए डिग्री नाम और संरचना इन क्षेत्रों में शिक्षा को एक समान बनाने में मदद कर सकती है।
Physician Associate और Respiratory Technology भी शामिल
यूजीसी के नए ढांचे में Physician Associate और Respiratory Technology जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं। Respiratory Technology के अंतर्गत Neonatal and Paediatric Respiratory Care जैसे विशेषज्ञता क्षेत्र भी सूची में शामिल हैं।
Respiratory care में सांस से जुड़ी गंभीर समस्याओं वाले मरीजों की देखभाल महत्वपूर्ण होती है। विशेष रूप से बच्चों और नवजातों के मामले में प्रशिक्षित professionals की जरूरत अलग प्रकार की होती है।
इसी तरह Physician Associate से जुड़े कार्यक्रम healthcare team में चिकित्सकीय सहायता और patient-care से संबंधित भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षण पर केंद्रित होते हैं।
डायलिसिस और हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट में भी नए अवसर
Dialysis Therapy Technology को भी संशोधित Allied Healthcare framework में शामिल किया गया है। इसके साथ Health Information Management को भी नए degree structure में जगह मिली है।
Health Information Management में मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी डेटा, मेडिकल रिकॉर्ड और हेल्थकेयर सूचना प्रणालियों का प्रबंधन महत्वपूर्ण होता है।
नए ढांचे में Bachelor of Science in Health Information Management और Master of Science in Health Information Management जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। B.Sc. HIM की अवधि कम से कम चार वर्ष और M.Sc. HIM की अवधि कम से कम दो वर्ष बताई गई है।
इससे स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल तकनीक के बीच बढ़ते संबंध को भी शिक्षा व्यवस्था में जगह मिल रही है।
33 नए Allied Healthcare Degree Programmes भी मंजूर
UGC के इस संशोधन में केवल 21 मौजूदा डिग्रियों में बदलाव नहीं किया गया है। इसके साथ 33 नए Allied और Healthcare degree programmes को भी सूची में शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन डिग्रियों में Physiotherapy, Occupational Therapy, Optometry, Medical Laboratory Sciences, Emergency Medical Technology, Anaesthesia and Operation Theatre Technology, Nutrition and Dietetics, Psychology, Medical and Psychiatric Social Work, Medical Radiology, Imaging and Therapeutic Technology, Physician Associate, Respiratory Technology, Dialysis Therapy Technology और Health Information Management सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।
इस तरह कुल मिलाकर यह बदलाव Allied Healthcare education के बड़े हिस्से को प्रभावित करता है।
One Nation, One Curriculum की दिशा में कदम
NCAHP की ओर से जारी competency-based curricula का उद्देश्य Allied और Healthcare professions में शिक्षा और प्रशिक्षण के मानकों को एकरूप करना है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार NCAHP ने 28 professions को कवर करने वाले 18 competency-based curricula जारी किए हैं।
इस व्यवस्था में केवल डिग्री का नाम तय करना ही उद्देश्य नहीं है। विद्यार्थियों को किस प्रकार का theoretical knowledge, practical training और clinical exposure मिलना चाहिए, इसे भी अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है।
इससे अलग-अलग विश्वविद्यालयों में एक ही नाम के कोर्स की पढ़ाई में मौजूद अंतर को कम करने में मदद मिल सकती है।
पुराने विद्यार्थियों पर क्या असर होगा?
इस बदलाव को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल पुराने विद्यार्थियों का है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2026-27 से पहले जिन विद्यार्थियों ने MPT, MOT और संबंधित कार्यक्रमों में दाखिला लिया है, वे पुराने नियमों के अनुसार अपनी डिग्री पूरी करेंगे।
नए स्पेशलाइजेशन आधारित नियम मुख्य रूप से नए academic session से लागू होने वाले विद्यार्थियों के लिए हैं।
इसका मतलब यह है कि पहले से पढ़ाई कर रहे छात्रों को अचानक नए स्पेशलाइजेशन ढांचे में स्थानांतरित करने की व्यवस्था नहीं बताई गई है।
कॉलेज और विश्वविद्यालयों के लिए भी बदलाव महत्वपूर्ण
UGC के नए नियमों का असर केवल विद्यार्थियों पर नहीं बल्कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर भी पड़ेगा। जिन संस्थानों में संबंधित Allied Healthcare programmes चल रहे हैं, उन्हें अपने degree structure, course nomenclature और curriculum को नए प्रावधानों के अनुरूप देखना होगा।
NCAHP ने राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और संबंधित stakeholders को 2026-27 academic session से जारी curricula लागू करने के लिए निर्देश दिए हैं।
शिक्षण संस्थानों के लिए यह जरूरी होगा कि वे विद्यार्थियों को एडमिशन से पहले कोर्स का सही नाम, अवधि, प्रवेश योग्यता और संबंधित मान्यता की जानकारी स्पष्ट रूप से दें।
छात्रों को एडमिशन से पहले किन बातों की जांच करनी चाहिए?
नए बदलाव के बाद Allied Healthcare courses में admission लेने वाले विद्यार्थियों के लिए course name और duration की जांच करना महत्वपूर्ण हो जाएगा।
किसी भी कॉलेज में दाखिला लेने से पहले छात्र को यह देखना चाहिए कि संबंधित विश्वविद्यालय में वह course किस नाम से संचालित हो रहा है और उसकी degree structure UGC के नए specifications के अनुरूप है या नहीं।
इसके साथ ही संस्थान के affiliation, applicable professional regulatory requirements, clinical training, internship और admission eligibility की जानकारी भी देखनी चाहिए।
विशेष रूप से MPT और MOT में admission लेने वाले विद्यार्थियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कॉलेज कौन-सी specialization उपलब्ध करा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेषज्ञता पर बढ़ेगा जोर
नए बदलावों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि Allied Healthcare education को सामान्य डिग्री से अधिक specialized बनाया जा रहा है।
उदाहरण के तौर पर फिजियोथेरेपी में musculoskeletal, neurological, sports, paediatric, oncology और community rehabilitation जैसे अलग-अलग क्षेत्रों की जरूरत अलग होती है।
इसी तरह Occupational Therapy में mental health, paediatrics, geriatrics, rehabilitation और अन्य क्षेत्रों में विशेषज्ञता की जरूरत हो सकती है।
स्पेशलाइजेशन आधारित डिग्री से विद्यार्थी की शैक्षणिक पहचान अधिक स्पष्ट हो सकती है और आगे की पढ़ाई या संबंधित क्षेत्र में करियर बनाते समय उसकी विशेषज्ञता का उल्लेख सीधे डिग्री में किया जा सकेगा।
Healthcare workforce को मजबूत करने की कोशिश
भारत में स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में डॉक्टर और नर्स के साथ Allied Healthcare professionals की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अस्पतालों की diagnosis, rehabilitation, emergency care, laboratory testing, imaging, respiratory care, dialysis और अन्य सेवाओं में इन professionals की आवश्यकता होती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि Allied and Healthcare workforce multidisciplinary healthcare delivery का आवश्यक हिस्सा है। नए शैक्षणिक और पेशेवर मानकों का उद्देश्य इसी workforce को अधिक skilled और future-ready बनाना है।
अगर अलग-अलग संस्थानों में course duration और degree nomenclature एक समान होता है, तो students, employers और educational institutions के बीच qualification को समझने में भी आसानी हो सकती है।
डिग्री की अवधि में बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
किसी भी professional course की अवधि केवल एक संख्या नहीं होती। Allied Healthcare courses में theory के साथ practical training और clinical exposure भी महत्वपूर्ण होता है।
यदि किसी course की अवधि बढ़ाई जाती है तो उसमें अतिरिक्त academic content, practical training या internship को समायोजित करने की संभावना होती है। हालांकि किसी विशेष course में समय का वास्तविक विभाजन संबंधित curriculum और संस्थान की लागू व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
BPT की अवधि पांच वर्ष किए जाने की रिपोर्ट इसी broader competency-based approach से जुड़ी है।
नए सत्र में विद्यार्थियों के लिए बड़ा बदलाव
2026-27 academic session में Allied Healthcare courses चुनने वाले विद्यार्थियों के लिए admission process पहले की तुलना में अधिक ध्यान देने वाला हो सकता है।
अब केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि कॉलेज में “Physiotherapy”, “Occupational Therapy” या “Medical Laboratory” का कोर्स उपलब्ध है। विद्यार्थी को यह भी देखना होगा कि डिग्री का official nomenclature क्या है, उसकी अवधि कितनी है और वह किस regulatory framework के तहत संचालित है।
खास तौर पर नए specialization-based MPT और MOT programmes में specialization का नाम भी महत्वपूर्ण होगा।
21 मौजूदा डिग्रियों में बदलाव और 33 नए कोर्स का व्यापक असर
UGC का यह संशोधन Allied Healthcare education में एक व्यापक बदलाव के रूप में सामने आया है। एक तरफ 21 existing degree specifications को restructure या update किया गया है, दूसरी तरफ 33 नए degree programmes जोड़े गए हैं।
इसका असर आने वाले वर्षों में universities, colleges, students, healthcare institutions और employers सभी पर पड़ सकता है।
जहां विद्यार्थियों को अपनी qualification और specialization के बारे में अधिक स्पष्टता मिल सकती है, वहीं संस्थानों को curriculum और academic structure को नए नियमों के अनुसार व्यवस्थित करना होगा।
क्या सभी पुराने कोर्स तुरंत बंद हो जाएंगे?
नहीं, उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसा नहीं कहा जा सकता कि सभी पुराने कोर्स अचानक बंद हो जाएंगे। नए नियमों का implementation academic session 2026-27 और नए batches से संबंधित है। पहले से enrolled students के लिए पुराने नियमों के तहत degree जारी रहने की बात स्पष्ट की गई है।
इसलिए किसी विद्यार्थी को केवल course का पुराना नाम देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। उसे अपने admission year और संबंधित विश्वविद्यालय के आधिकारिक निर्देश को देखना चाहिए।
आगे क्या बदलेगा?
NCAHP की competency-based curriculum व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कुछ curricula पहले ही जारी किए जा चुके हैं और शेष curricula को आगे के academic sessions के लिए finalise किया जा रहा है।
इसका मतलब है कि आने वाले समय में Allied Healthcare education में degree names, curriculum, practical training, professional competencies और regulatory requirements को लेकर और भी स्पष्टता देखने को मिल सकती है।
छात्रों के लिए सबसे जरूरी बात
2026-27 में Allied Healthcare course में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को admission brochure और university notification को ध्यान से पढ़ना चाहिए। खासकर MPT, MOT, Optometry, Medical Laboratory Science, Emergency Medical Technology, Anaesthesia and Operation Theatre Technology, Respiratory Technology, Dialysis और Health Information Management जैसे courses में नए degree names और duration को समझना जरूरी होगा।
MPT और MOT में specialization का विकल्प इस बदलाव का सबसे प्रमुख हिस्सा है। वहीं BPT सहित कुछ courses की अवधि में बदलाव विद्यार्थियों के पूरे academic planning को प्रभावित कर सकता है।
कुल मिलाकर UGC का नया framework Allied और Healthcare education को अधिक standardised, specialised और competency-based बनाने की दिशा में किया गया बड़ा बदलाव है। 2026-27 से नए विद्यार्थियों को संशोधित degree structure के तहत पढ़ाई करनी होगी, जबकि पुराने बैच के विद्यार्थी अपने पहले से लागू नियमों के अनुसार course पूरा करेंगे।
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स्वास्थ्य मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी