पाकुड़ जिले में उद्यमिता, नवाचार एवं स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को रविन्द्र भवन टाउन हॉल, पाकुड़ में तेजस जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), स्टार्टअप इंडिया, झारखंड सरकार एवं JIIDCO के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त मेघा भारद्वाज,जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक राजेंद्र प्रसाद, सहायक निदेशक, एमएसएमई, धनबाद दीपक कुमार, JIIDCO, रांची के अनमोल चक्रवती ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यशाला में स्टार्टअप इंडिया एवं तेजस पहल के तहत स्टार्टअप शुरू करने की प्रक्रिया, व्यवसायिक विचारों को विकसित करने, नवाचार, क्षमता निर्माण, मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन, वित्तीय सहयोग, बाजार से जुड़ाव तथा विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों को दी गई। विशेषज्ञों एवं संबंधित पदाधिकारियों ने उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं और अवसरों पर मार्गदर्शन दिया तथा प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का समाधान किया।
*समस्या पहचानें, समाधान सोचें और उसे स्टार्टअप में बदलें:- डीसी*
उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि पाकुड़ जिले में स्टार्टअप एवं नवाचार की अपार संभावनाएं हैं। युवाओं को अपने आसपास की छोटी- छोटी समस्याओं को पहचानकर उनके सरल एवं व्यावहारिक समाधान तलाशने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के लिए हमेशा बड़े निवेश की आवश्यकता नहीं होती। कई बार कम लागत अथवा बिना किसी बड़े खर्च के भी किसी समस्या का प्रभावी समाधान विकसित किया जा सकता है। इसके लिए समस्या की पहचान, समाधान की सोच और उस विचार को नवाचार के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। उपायुक्त ने कहा कि किसी युवा के पास आइडिया होने के बाद फंडिंग, प्रशिक्षण, जागरूकता और बाजार से जुड़ाव जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। ऐसे समय में जिला उद्योग केंद्र, एमएसएमई से जुड़े संस्थान एवं बैंकिंग व्यवस्था महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर सकते हैं। इन संस्थाओं के सहयोग से छोटे-छोटे विचारों को बेहतर एवं व्यवहारिक बिजनेस मॉडल में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को ऐसे लोगों से सीखने का अवसर देना है, जिन्होंने अपने नवाचार को आगे बढ़ाया है, उनकी चुनौतियों एवं सफलताओं को समझना तथा अपने लिए सही दिशा निर्धारित करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सामूहिक प्रयासों से जिले में वर्तमान स्टार्टअप की संख्या को बढ़ाकर कम से कम 20 तक ले जाने की दिशा में सार्थक पहल की जाएगी।
*स्थानीय समस्याओं में छिपे हैं स्टार्टअप के अवसर*
उपायुक्त ने युवाओं से कहा कि पाकुड़ में समस्याओं की कमी नहीं है, जरूरत है उन्हें एक नए नजरिए से देखने की। जिले के कृषि एवं खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण तथा बेहतर बाजार से जोड़ने की दिशा में पहल की जा रही है। इसी प्रकार सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सोलर पैनल के बढ़ते उपयोग को देखते हुए उनके रिपेयर एवं मेंटेनेंस से संबंधित प्रशिक्षण की योजना बनाई गई है, ताकि भविष्य में उत्पन्न होने वाली मांग के अनुरूप स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिल सकें। उपायुक्त ने युवाओं से अपनी शिक्षा, तकनीकी ज्ञान एवं डिजिटल माध्यमों से प्राप्त जानकारी का सकारात्मक उपयोग करते हुए स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए नए विचार विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक छोटी समस्या की पहचान से शुरू हुआ विचार भी आगे चलकर बड़ा बदलाव और सफल स्टार्टअप बन सकता है।
*पाकुड़ में वर्तमान में 7 स्टार्टअप पंजीकृत*
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि पाकुड़ जिले में भारत सरकार के पोर्टल पर वर्तमान में 7 स्टार्टअप पंजीकृत हैं, जिनमें से 5 स्टार्टअप के प्रतिनिधि कार्यशाला में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम के तहत देशभर के 132 जिलों में आयोजित कार्यशालाओं में पाकुड़ का चयन गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं एवं संभावित उद्यमियों को स्टार्टअप की अवधारणा, पंजीकरण, व्यवसायिक मॉडल, वित्तीय सहयोग एवं उपलब्ध संसाधनों की जानकारी देना है। जिला उद्योग केंद्र द्वारा PMEGP, PMFME, RAMP सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवाओं एवं सूक्ष्म-लघु उद्यमों को सहयोग दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना तथा अधिक से अधिक युवाओं को स्टार्टअप एवं उद्यमिता से जोड़ना है।
*महिला उद्यमियों, विद्यार्थियों एवं नवोन्मेषकों को भी मिला मार्गदर्शन*
कार्यशाला में आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं महाविद्यालयों के छात्र- छात्राओं, महिला प्रतिभागियों, उद्यमियों, नवोन्मेषकों, कारीगरों एवं उभरते उद्यमियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों एवं संबंधित पदाधिकारियों ने उद्यमिता, क्षमता निर्माण, मेंटरशिप, कौशल विकास, स्थानीय उद्योग एवं रोजगार सृजन से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी साझा की।
डीपीआईआईटी (DPIIT) की टीम ने वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला में सहभागिता करते हुए प्रतिभागियों को स्टार्टअप एवं उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न अवसरों, केंद्र सरकार की योजनाओं, स्टार्टअप इंडिया के तहत मिलने वाली सुविधाओं तथा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उपलब्ध सहयोग एवं प्रोत्साहन के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
सहायक निदेशक, एमएसएमई, धनबाद श्री दीपक कुमार, JIIDCO के प्रतिनिधि अनमोल कुमार सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी प्रतिभागियों को उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों एवं संभावनाओं की जानकारी दी।
मौके पर जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक, डीआईओ, आरसेटी निदेशक, डीडीएम नाबार्ड, ईओडीबी प्रबंधक समेत अन्य उपस्थित थे।