इस बार सर्दी कम पड़ेगी:इस बार मैदानों में कम पड़ेगी सर्दी, पहाड़ों पर बर्फबारी भी कम; 2 डिग्री तक बढ़ सकता है तापमान
नई दिल्ली: दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच देश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार सर्दियों के मौसम में मैदानी इलाकों में ठंड सामान्य से कम रहने की संभावना है। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में भी बर्फबारी पिछले वर्षों की तुलना में कम हो सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान सामान्य से करीब दो डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहने का अनुमान जताया गया है।
कम ठंड का असर खास तौर पर उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। दिल्ली, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में शीतलहर के दिनों में कमी आने की संभावना है। हालांकि मौसम में अचानक बदलाव होने पर कुछ दिनों के लिए तेज ठंड का दौर भी आ सकता है।
अल नीनो का दिख सकता है असर
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के दौरान अल नीनो की स्थिति रहने की संभावना करीब 100 प्रतिशत है। इसके चलते सर्दियों के तापमान और बारिश के सामान्य पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है।
अमेरिकी मौसम एजेंसी और विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के दौरान अल नीनो की स्थिति बने रहने की संभावना काफी अधिक है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर भारत के मौसम पर भी पड़ सकता है।
इसका एक प्रमुख प्रभाव यह हो सकता है कि उत्तर भारत में सामान्य तौर पर पड़ने वाली तेज सर्दी इस बार अपेक्षाकृत कमजोर रहे।

शीतलहर के दिन घटकर आधे रह सकते हैं
कम ठंड पड़ने की वजह से उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में शीतलहर चलने वाले दिनों की संख्या घट सकती है। दिल्ली, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में शीतलहर के दिन सामान्य की तुलना में लगभग आधे रह सकते हैं इस बार सर्दी कम पड़ेगी: पहाड़ों पर बर्फबारी भी होगी कम; तापमान दो डिग्री तक ज्यादा रहने का अनुमान।
स्काईमेट के वैज्ञानिक महेश पालावत के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी कम होने और मैदानी इलाकों में सर्दियों की बारिश घटने की संभावना है। हालांकि अगर कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है तो कुछ दिनों के लिए तापमान तेजी से गिर सकता है और ठंड बढ़ सकती है।
इसका मतलब यह है कि पूरे सर्दी के मौसम में लगातार कड़ाके की ठंड के बजाय बीच-बीच में ठंड के छोटे दौर देखने को मिल सकते हैं।
गेहूं की पैदावार पर पड़ सकता है असर
सर्दियों में तापमान सामान्य से अधिक रहने का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर गेहूं की फसल पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
अनुमान के मुताबिक तापमान अधिक रहने से गेहूं के पौधे समय से पहले बड़े हो सकते हैं। इससे फसल के दाने बनने और पकने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में गेहूं की पैदावार में करीब 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट का जोखिम बताया गया है।
गेहूं के अलावा सरसों जैसी फसलों पर भी अधिक तापमान और सूखी हवाओं का असर पड़ सकता है। सरसों में चेपा कीट का प्रकोप और सफेद रस्ट जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में किसानों को मौसम और फसल की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत होगी।
पहाड़ों पर भी कम हो सकती है बर्फबारी
इस बार केवल मैदानी इलाकों में ही नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में भी बर्फबारी कम होने का अनुमान है। सामान्य तौर पर सर्दियों के दौरान पश्चिमी विक्षोभ के कारण जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होती है।
अगर पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहे तो पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश दोनों कम हो सकती हैं। इससे पहाड़ों में पर्यटन गतिविधियों और जल स्रोतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
पिछले वर्षों में भी दिखा अल नीनो का असर
मौसम के आंकड़ों में अल नीनो और सर्दियों के तापमान के बीच संबंध पहले भी देखा गया है। 2015-16 में जब अल नीनो इंडेक्स करीब +2.2 डिग्री सेल्सियस पर था, तब देश में सामान्य से कम ठंड पड़ी थी। सीजन में बारिश सामान्य से करीब 57 प्रतिशत कम रही थी।
इसी तरह 2023-24 में भी मजबूत अल नीनो की स्थिति देखी गई थी। उस दौरान तापमान करीब 13.50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो 1901 के बाद से अब तक का सबसे गर्म विंटर सीजन बताया गया। उस साल भी सर्दियों की बारिश सामान्य से काफी कम रही थी।
हालांकि मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक अल नीनो के प्रभाव के बावजूद स्थानीय मौसम परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी भी क्षेत्र में कुछ दिनों के लिए सामान्य से अधिक ठंड पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
किसानों और आम लोगों को क्या ध्यान रखना होगा?
अगर सर्दियों में तापमान सामान्य से अधिक रहता है तो किसानों को गेहूं और सरसों जैसी फसलों की निगरानी अधिक सावधानी से करनी होगी। सिंचाई, कीट नियंत्रण और फसल की अवस्था के अनुसार कृषि सलाह का पालन करना महत्वपूर्ण होगा।
वहीं आम लोगों के लिए इस बार लंबे समय तक कड़ाके की ठंड से राहत मिल सकती है। हालांकि मौसम में अचानक बदलाव होने पर कुछ दिनों के लिए शीतलहर की स्थिति बन सकती है। इसलिए दिसंबर से फरवरी के बीच मौसम विभाग के स्थानीय पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी रहेगा।
इस बार सर्दी कम पड़ेगी: पहाड़ों पर बर्फबारी भी होगी कम; तापमान दो डिग्री तक ज्यादा रहने का अनुमान
इस बार सर्दी कम पड़ेगी:इस बार मैदानों में कम पड़ेगी सर्दी, पहाड़ों पर बर्फबारी भी कम; 2 डिग्री तक बढ़ सकता है तापमान
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