उपायुक्त संदीप कुमार ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की निस्वार्थ भाव से मदद करें और उसके जीवन को बचाने में भागीदार बनें।
गुड सेमेरिटन :
गुड सेमेरिटन या नेक इंसान वह मददगार व्यक्ति है जो सड़क दुर्घटना या किसी आपात स्थिति में फंसे घायल व्यक्ति को बिना किसी स्वार्थ, दुश्मनी या इनाम की उम्मीद के तुरंत अस्पताल या सुरक्षित जगह पहुंचाता है। झारखण्ड गजट 23 सितंबर 2022 के अनुसार गुड सेमेरिटन एक ऐसा नेक व्यक्ति होता है जो घायल को बिना किसी विशेष संबंध और वित्तीय लाभ की अपेक्षा के मदद करता है।
गुड सेमेरिटन कानून यह सुरक्षा देता है :
पूरी कानूनी सुरक्षा: यह कानून मदद करने वाले को पुलिस और कानूनी मामलों से पूरी सुरक्षा देता है। नेक नीयत से मदद करने वाले पर किसी भी प्रकार की आपराधिक या सिविल कार्रवाई नहीं की जा सकती।
परेशानी से मुक्ति: मददगार व्यक्ति से पुलिस या अस्पताल में जबरन पूछताछ या गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उसे अनावश्यक रूप से अस्पताल में रोका नहीं जाएगा।
पहचान गुप्त रखने का अधिकार: यदि मददगार अपनी पहचान नहीं बताना चाहता, तो वह बिना नाम-पता बताए जा सकता है। पुलिस उसे पहचान बताने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। विशेष परिस्थिति में ही गवाही के लिए बुलाया जाएगा।
मानदेय का प्रावधान: यदि पुलिस या कोर्ट की जांच में गवाही के लिए बुलाया जाता है, तो प्रत्येक दिन के लिए 1,000 रुपये मानदेय/यात्रा भत्ता के रूप में उसके बैंक खाते में दिया जाएगा।
गुड सेमेरिटन योजना के तहत इनाम:
उपायुक्त संदीप कुमार ने बताया कि लोगों के मन से पुलिस के डर को खत्म करने और गोल्डन आवर (दुर्घटना के बाद का पहला 1 घंटा) में मदद को बढ़ावा देने के लिए सरकार इनाम देती है।
झारखंड सरकार की योजना:
झारखंड गुड सेमेरिटन पॉलिसी 2020 के तहत राज्य सरकार की ओर से *2,000 रुपये* की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यदि दो लोग मदद करते हैं तो दोनों को 2,000-2,000 रुपये, और तीन या अधिक लोग मदद करते हैं तो राशि सभी में समान रूप से बांटी जाती है और प्रशस्ति प्रमाण पत्र भी दिया जाता है।
उपायुक्त संदीप कुमार ने कहा कि सड़क हादसे के बाद मदद करना अब सिर्फ मानवता नहीं, बल्कि सम्मान भी है। जिला प्रशासन लातेहार आप सभी से उम्मीद करता है कि आप एक जिम्मेदार नागरिक बनकर किसी की जान बचाने में मदद करेंगे।