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रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के अवसर पर गुरुवार, 27 अगस्त 2026 को नेत्रदान जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। गवर्नमेंट आई बैंक, क्षेत्रीय नेत्र संस्थान (RIO), RIMS की ओर से आयोजित इस रैली का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करना, इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना और मृत्यु के बाद नेत्रदान के महत्व का संदेश लोगों तक पहुंचाना था।
रैली में चिकित्सकों, मेडिकल छात्रों, नर्सिंग कर्मियों, अस्पताल के कर्मचारियों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों समेत करीब 150 लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रतिभागियों ने नेत्रदान के समर्थन में पोस्टर और जागरूकता संदेश लेकर लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। रैली के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प भी लिया।
RIMS से शुरू हुई नेत्रदान जागरूकता रैली
नेत्रदान जागरूकता रैली की शुरुआत RIO भवन से हुई। इसके बाद रैली बरियातू रोड से होते हुए RIMS परिसर, ट्रॉमा सेंटर, OPD ब्लॉक और सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक से होकर गुजरी। विभिन्न स्थानों से गुजरते हुए प्रतिभागियों ने लोगों को नेत्रदान के महत्व के बारे में जानकारी दी। इसके बाद रैली वापस RIO भवन पहुंची, जहां कार्यक्रम का समापन किया गया।
रैली में शामिल लोगों ने नेत्रदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया। इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि मृत्यु के बाद आंखों का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी ला सकता है।
150 लोगों ने लिया नेत्रदान का संकल्प
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में नेत्रदान प्रतिज्ञा कार्यक्रम शामिल रहा। रैली के दौरान करीब 150 लोगों ने pledge form भरकर मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लिया।
इस दौरान प्रतिभागियों ने नेत्रदान जागरूकता सेल्फी प्वाइंट पर सेल्फी भी ली। इसका उद्देश्य नेत्रदान अभियान के संदेश को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना था।
नेत्रदान का संकल्प लेने वालों में डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल रहे। इस पहल के माध्यम से लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि नेत्रदान के लिए केवल जागरूकता अभियान में शामिल होना ही नहीं, बल्कि स्वयं संकल्प लेना भी जरूरी है।
RIMS निदेशक और मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने भी लिया संकल्प
नेत्रदान जागरूकता अभियान को और प्रेरणादायी बनाने के लिए RIMS के निदेशक प्रो. (डॉ.) डी. के. सिन्हा और मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. (डॉ.) हिरेंद्र बिरुआ ने भी स्वयं नेत्रदान का संकल्प लिया।

वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नेत्रदान का संकल्प लेने से कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भी इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरणा मिली। कार्यक्रम के दौरान नेत्रदान को समाज के लिए महत्वपूर्ण मानवीय कार्य बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से इसके लिए आगे आने की अपील की गई।
नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने पर जोर
नेत्रदान को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में आज भी कई तरह की भ्रांतियां देखने को मिलती हैं। जागरूकता रैली का एक प्रमुख उद्देश्य इन्हीं भ्रांतियों को दूर करना था।
RIO और आई बैंक की टीम की ओर से लोगों को बताया गया कि मृत्यु के बाद नेत्रदान का निर्णय किसी जरूरतमंद दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। लोगों से अपील की गई कि वे नेत्रदान के महत्व को समझें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
RIO विभागाध्यक्ष ने बताया नेत्रदान का महत्व
कार्यक्रम में RIO के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सुनील कुमार ने नेत्रदान को लेकर लोगों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति का नेत्रदान दो लोगों के जीवन में रोशनी ला सकता है।
उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस महान कार्य के लिए आगे लाना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि नेत्रदान को लेकर समाज में सकारात्मक माहौल तैयार किया जाए।
निदेशक ने कहा- नेत्रदान सबसे बड़ा मानवीय उपहार
RIMS के निदेशक प्रो. (डॉ.) डी. के. सिन्हा ने नेत्रदान को मृत्यु के बाद भी किसी व्यक्ति को दुनिया देखने का अवसर देने वाला बड़ा मानवीय उपहार बताया।
उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को नेत्रदान का संकल्प लेना चाहिए। उनका संदेश लोगों को यह समझाने पर केंद्रित रहा कि मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाने का अवसर मिल सकता है।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने भी की अपील
RIMS के मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. (डॉ.) हिरेंद्र बिरुआ ने कहा कि नेत्रदान केवल आंखों का दान नहीं है, बल्कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नई उम्मीद और जीवन में रोशनी देने का संकल्प है।
उन्होंने बताया कि RIMS इस तरह के जन-जागरूकता अभियान को और व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि समाज में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
नेत्रदान जागरूकता रैली में RIMS के निदेशक प्रो. (डॉ.) डी. के. सिन्हा, डीन प्रो. (डॉ.) राजीव मिश्रा, मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. (डॉ.) हिरेंद्र बिरुआ, RIO के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सुनील कुमार, ब्लाइंडनेस ऑफिसर डॉ. पंकज कुमार, डॉ. दीपक लकड़ा, डॉ. राहुल प्रसाद, SOTTO के नोडल ऑफिसर डॉ. प्रीतिश, सदर रांची की टीम, आई बैंक की टीम, सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट, नर्सिंग स्टाफ और ऑप्थैल्मिक असिस्टेंट समेत करीब 150 लोग उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य संस्थान से जुड़े विभिन्न वर्गों की भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक बनाया और लोगों तक नेत्रदान का संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सेल्फी प्वाइंट बना आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान बनाए गए नेत्रदान जागरूकता सेल्फी प्वाइंट पर भी प्रतिभागियों ने उत्साह दिखाया। लोगों ने यहां सेल्फी लेकर नेत्रदान अभियान के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।
सोशल मीडिया के दौर में इस तरह की गतिविधियों को जागरूकता फैलाने का प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। एक व्यक्ति के माध्यम से अभियान का संदेश उसके परिवार, दोस्तों और सोशल मीडिया नेटवर्क तक पहुंच सकता है।
आम लोगों से नेत्रदान की अपील
कार्यक्रम के अंत में आई बैंक, RIO की ओर से आम जनता से नेत्रदान के प्रति जागरूक बनने की अपील की गई। लोगों से कहा गया कि वे स्वयं नेत्रदान का संकल्प लें और अपने परिवार तथा समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
मृत्यु के बाद समय पर नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया दृष्टिहीन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है। इसलिए लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया और इससे जुड़े नियमों के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने के लिए अधिकृत स्वास्थ्य संस्थानों और आई बैंक से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।
नेत्रदान जागरूकता अभियान का संदेश
RIMS में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना केवल स्वास्थ्य संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
यदि ज्यादा से ज्यादा लोग नेत्रदान का संकल्प लेते हैं और अपने परिवार को भी इसकी जानकारी देते हैं, तो मृत्यु के बाद प्राप्त होने वाले नेत्रों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक दृष्टि पहुंचाने के प्रयास को मजबूती मिल सकती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के अवसर पर RIMS के क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में आयोजित नेत्रदान जागरूकता रैली ने लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। रैली में करीब 150 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया। RIMS के वरिष्ठ अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों की भागीदारी ने अभियान को और प्रभावी बनाया।
नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए ऐसे अभियान लगातार आयोजित किए जाने की जरूरत है। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा—“नेत्रदान महादान — आंखें दान करें, किसी के जीवन में रोशनी भरें।”