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झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर एवं आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के सभी जिलों के सदर अस्पतालों और स्थापित चिकित्सा महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक में अस्पताल प्रबंधन, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, फेको तकनीक से मोतियाबिंद ऑपरेशन, ट्रॉमा सेंटर, मैटरनिटी एंड चाइल्ड हेल्थ अस्पताल, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और रोबोटिक सर्जरी सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को उनके कार्यकक्ष में आयोजित बैठक में राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने को लेकर अधिकारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। सरकार का उद्देश्य सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को आधुनिक सुविधाओं, पर्याप्त मानव संसाधन और बेहतर अस्पताल प्रबंधन से लैस करना है।
बैठक में विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा, संयुक्त सचिव श्री दिनेश कुमार यादव एवं श्री ललित मोहन शुक्ला, उप सचिव श्री ध्रुव प्रसाद सहित विभाग के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
सदर अस्पतालों की सुविधाओं की हुई विस्तृत समीक्षा
बैठक की शुरुआत राज्य के सभी जिलों के सदर अस्पतालों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा से हुई। अधिकारियों से अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं, मानव संसाधन, मशीनरी और अस्पताल प्रबंधन की स्थिति के बारे में जानकारी ली गई।

अपर मुख्य सचिव ने विशेष रूप से यह जानने की कोशिश की कि जिला स्तर पर मरीजों को किस तरह की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं और किन क्षेत्रों में अभी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने तथा जहां कमियां हैं, वहां समय पर आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया।
सरकार की योजना सदर अस्पतालों को धीरे-धीरे अधिक सुविधायुक्त और प्रभावी चिकित्सा केंद्रों के रूप में विकसित करने की है, ताकि मरीजों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए हर बार बड़े शहरों या मेडिकल कॉलेजों का रुख न करना पड़े।
फेको तकनीक से मोतियाबिंद ऑपरेशन पर जोर
बैठक में फेको विधि से मोतियाबिंद के ऑपरेशन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों से जानकारी ली कि उनके-अपने जिलों में फेको तकनीक के माध्यम से मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जा रहा है या नहीं।
अधिकांश जिलों की ओर से बताया गया कि वहां फेको विधि से ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है। हालांकि जिन जिलों में अभी तक यह सुविधा शुरू नहीं हुई है, वहां के चिकित्सकों को प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया।
इसके लिए डॉक्टरों को रिम्स, रांची में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण चार-चार चिकित्सकों के बैच में आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य जिला स्तर पर ही आधुनिक तकनीक से मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध कराना है।
इस पहल से मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलने के साथ-साथ उन्हें इलाज के लिए दूर जाने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
ऑर्थोपेडिक सर्जरी की भी समीक्षा
समीक्षा बैठक में ऑर्थोपेडिक सर्जरी यानी हड्डी से संबंधित ऑपरेशन की स्थिति पर भी चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव ने जिलों में उपलब्ध ऑर्थोपेडिक सेवाओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि किसी अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सर्जरी को लेकर किसी प्रकार की समस्या है तो विभाग को तत्काल इसकी जानकारी दी जाए।
उन्होंने कहा कि समस्याओं की पहचान कर उनका जल्द समाधान किया जाना जरूरी है, ताकि मरीजों को जिला स्तर पर ही आवश्यक उपचार मिल सके।
125 हॉस्पिटल मैनेजरों की नियुक्ति की तैयारी
अस्पतालों की चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। बैठक में 125 हॉस्पिटल मैनेजरों की नियुक्ति को लेकर चर्चा हुई।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रत्येक जिले को दो हॉस्पिटल मैनेजर उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड किया जाएगा। इन अपग्रेड किए जाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी हॉस्पिटल मैनेजरों की नियुक्ति की जाएगी।
इसके साथ ही अनुमंडल अस्पतालों में भी हॉस्पिटल मैनेजर तैनात किए जाएंगे।
24×7 अस्पताल प्रबंधन की होगी निगरानी
हॉस्पिटल मैनेजरों की जिम्मेदारी केवल कार्यालयी कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें 24×7 अस्पताल प्रबंधन व्यवस्था की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता, सुरक्षा व्यवस्था, मरीजों की सुविधा, गेट पास सिस्टम, आयुष्मान योजना और अस्पताल से जुड़े अन्य प्रशासनिक कार्यों की समग्र निगरानी हॉस्पिटल मैनेजर करेंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना तथा अस्पताल की दैनिक कार्यप्रणाली को व्यवस्थित करना है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की होगी नियुक्ति
राज्य के सदर अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा है।
इसके लिए जल्द ही समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति होने से जिला स्तर पर मरीजों को कई महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
सरकार का प्रयास है कि अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर किया जाए और मरीजों को बेहतर उपचार के लिए अनावश्यक रूप से दूसरे शहरों में रेफर न करना पड़े।
50 बेड के होंगे मैटरनिटी एंड चाइल्ड हेल्थ अस्पताल
बैठक में मैटरनिटी एंड चाइल्ड हेल्थ यानी MCH अस्पतालों के विकास को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तावित MCH अस्पतालों को 50 बेड की क्षमता वाला बनाने की योजना है।
इन अस्पतालों में आवश्यक विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी। प्रारंभिक योजना के अनुसार प्रत्येक MCH अस्पताल में करीब 10 चिकित्सकों की व्यवस्था करने पर विचार किया गया है।
इन अस्पतालों को डबल स्पेशियलिटी की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। इससे गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और अन्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सदर अस्पतालों को मल्टी-स्पेशियलिटी बनाने की योजना
राज्य के सभी सदर अस्पतालों को भविष्य में मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
बैठक में इसके लिए आवश्यक मशीनरी, मानव संसाधन, भवन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विश्लेषण किया गया। सरकार यह देख रही है कि प्रत्येक सदर अस्पताल में किन सुविधाओं की कमी है और उन्हें पूरा करने के लिए किस तरह की व्यवस्था की आवश्यकता होगी।
यदि सदर अस्पतालों में पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर, आधुनिक मशीनें और आवश्यक स्टाफ उपलब्ध कराया जाता है तो जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है।
ट्रॉमा सेंटरों के काम की समीक्षा
बैठक में राज्य के विभिन्न ट्रॉमा सेंटरों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। ट्रॉमा सेंटर सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर चोटों के मामलों में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अधिकारियों से ट्रॉमा सेंटरों में उपलब्ध सुविधाओं, मानव संसाधन और संचालन से जुड़ी स्थिति की जानकारी ली गई। सरकार का प्रयास है कि गंभीर मरीजों को समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
पीएम-अभीम योजना के कार्यों में तेजी के निर्देश
बैठक में पीएम-अभीम योजना के तहत चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। संयुक्त सचिव श्री दिनेश कुमार यादव ने सभी जिलों से योजना के अंतर्गत खर्च की स्थिति, निर्माण कार्यों की प्रगति, भुगतान और अन्य लंबित मामलों की जानकारी ली।
सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया गया कि वे उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक आयोजित करें और पीएम-अभीम योजना के तहत चल रहे कार्यों में तेजी लाएं।
साथ ही निर्माण और अन्य विकास कार्यों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि योजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके।
15वें वित्त आयोग और अन्य योजनाओं पर चर्चा
बैठक में 15वें वित्त आयोग, अस्पताल रख-रखाव योजना और चलंत ग्राम क्लिनिक सहित विभिन्न योजनाओं के तहत किए जा रहे खर्च की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों से योजनाओं में हुए खर्च और उपलब्ध संसाधनों के उपयोग की जानकारी ली गई। सरकार का जोर इस बात पर है कि स्वास्थ्य विभाग के लिए उपलब्ध राशि का सही उपयोग हो और उसका लाभ आम जनता तक पहुंचे।
स्वाइन फ्लू से निपटने की तैयारी
सदर अस्पतालों की समीक्षा के अंत में अपर मुख्य सचिव ने सभी अस्पतालों को स्वाइन फ्लू से बचाव और संभावित मामलों के प्रबंधन के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
अस्पतालों को संभावित मामलों की स्थिति में आवश्यक व्यवस्था तैयार रखने और मरीजों के प्रबंधन के लिए जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा गया।
मौसमी और संक्रामक बीमारियों को देखते हुए अस्पतालों की तैयारी मजबूत रखना स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चिकित्सा महाविद्यालयों की भी हुई समीक्षा
सदर अस्पतालों की समीक्षा के बाद राज्य के सभी स्थापित चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। इस दौरान मेडिकल कॉलेजों में UG और PG सीटों में संभावित वृद्धि से संबंधित तैयारियों पर चर्चा हुई।
अधिकारियों से यह जानकारी ली गई कि सीटों में संभावित वृद्धि के लिए आवेदन की स्थिति क्या है और इसके लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
UG और PG सीट बढ़ाने की तैयारी
चिकित्सा महाविद्यालयों में UG और PG सीटों में संभावित वृद्धि को लेकर सरकार गंभीरता से काम कर रही है। सीटें बढ़ाने के लिए मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी, भवन, मशीनरी और अन्य जरूरी सुविधाओं का होना आवश्यक है।
बैठक में इसी दृष्टि से चिकित्सा महाविद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा की गई। सरकार का उद्देश्य राज्य में मेडिकल शिक्षा के अवसरों को बढ़ाना और अधिक विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना है।
मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक उपकरणों पर जोर
चिकित्सा महाविद्यालयों में आवश्यक मशीनरी और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। अपर मुख्य सचिव ने आधुनिक तकनीक और बेहतर चिकित्सा उपकरणों की स्थापना पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना जरूरी है, ताकि यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण मिल सके और मरीजों को भी अत्याधुनिक इलाज की सुविधा प्राप्त हो।
फेको मशीन की भी होगी व्यवस्था
चिकित्सा महाविद्यालयों में फेको मशीन के माध्यम से नेत्र ऑपरेशन की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।
फेको तकनीक से मोतियाबिंद ऑपरेशन की सुविधा को मजबूत करने का उद्देश्य मरीजों को आधुनिक नेत्र चिकित्सा उपलब्ध कराना है। इसके लिए आवश्यक मशीनों और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।
मेडिकल कॉलेजों में शुरू होगी रोबोटिक सर्जरी
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक रोबोटिक सर्जरी शुरू करने को लेकर रहा। अपर मुख्य सचिव ने सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में अत्याधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए रोबोटिक सर्जरी शुरू करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों में रोबोटिक सर्जरी के लिए आवश्यक मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी।
रोबोटिक सर्जरी आधुनिक चिकित्सा तकनीक का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से जटिल ऑपरेशन को अधिक तकनीकी सहायता के साथ करने की दिशा में काम किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षण, तकनीकी स्टाफ और उचित इंफ्रास्ट्रक्चर भी आवश्यक होगा।
फैकल्टी की कमी दूर करने पर जोर
बैठक के दौरान कुछ चिकित्सा महाविद्यालयों में फैकल्टी की कमी का मुद्दा भी सामने आया। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जरूरत के अनुसार संविदा आधारित फैकल्टी की नियुक्ति करके शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सकता है।
मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी होना न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए जरूरी है, बल्कि मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए भी महत्वपूर्ण है।
HMIS और अस्पताल संचालन की भी समीक्षा
चिकित्सा महाविद्यालयों में HMIS की प्रगति और अस्पताल संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली गई।
डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए HMIS की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से अस्पतालों से संबंधित विभिन्न जानकारियों और सेवाओं को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
सरकार का प्रयास है कि चिकित्सा महाविद्यालयों में डिजिटल सिस्टम के साथ-साथ अस्पताल संचालन की व्यवस्था भी अधिक प्रभावी बनाई जाए।
आधुनिक तकनीक से बदलेंगे अस्पतालों के हालात
बैठक में स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया गया कि राज्य के अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों को आधुनिक तकनीक, बेहतर मानव संसाधन और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं से लैस करना सरकार की प्राथमिकता है।
फेको प्रशिक्षण से जिला स्तर पर नेत्र चिकित्सा को मजबूत करने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति से उपचार व्यवस्था बेहतर करने, हॉस्पिटल मैनेजरों की तैनाती से प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने और रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीक से मेडिकल कॉलेजों को अत्याधुनिक बनाने की योजना है।
क्या होगा आम मरीजों को फायदा?
इन योजनाओं का सबसे बड़ा लाभ आम मरीजों को मिलने की उम्मीद है। यदि सदर अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर, पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ, आधुनिक मशीनरी और बेहतर प्रबंधन उपलब्ध होता है तो मरीजों को अपने जिले में ही अधिक सुविधाएं मिल सकती हैं।
वहीं मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध होने से जटिल उपचार की सुविधाओं का विस्तार हो सकता है।
MCH अस्पतालों के विकास से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी, जबकि ट्रॉमा सेंटरों के बेहतर संचालन से गंभीर दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
झारखंड सरकार की इस समीक्षा बैठक में सदर अस्पतालों से लेकर चिकित्सा महाविद्यालयों तक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए। फेको प्रशिक्षण, 125 हॉस्पिटल मैनेजरों की नियुक्ति, विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती, 50 बेड वाले MCH अस्पताल, सदर अस्पतालों को मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने और मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी शुरू करने पर विशेष जोर दिया गया।
सरकार की योजना यदि तय समयसीमा के अनुसार जमीन पर लागू होती है तो राज्य की स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आधुनिक मशीनों के साथ पर्याप्त डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध कराना इस पूरी योजना की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा।