रांची: राजधानी रांची में विद्यार्थियों की सुरक्षा और भवन निर्माण नियमों के अनुपालन को लेकर नगर निगम ने कोचिंग संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। नियमों की अनदेखी कर संचालित किए जा रहे कोचिंग संस्थानों को सील करने की चेतावनी दी गई है। नगर निगम की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, संस्थानों को भवन का स्वीकृत नक्शा, भवन के निर्धारित उपयोग से जुड़े दस्तावेज, पार्किंग व्यवस्था, आपातकालीन निकासी मार्ग और अग्नि सुरक्षा से संबंधित आवश्यक प्रमाणपत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।

हाल में कोचिंग संस्थान संचालकों के साथ हुई बैठक में भवन निर्माण से जुड़े नियमों और विद्यार्थियों की सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान सामने आया कि कुछ संस्थानों के पास स्वीकृत भवन नक्शा उपलब्ध नहीं है, जबकि कई स्थानों पर पार्किंग, इमरजेंसी एग्जिट और अग्नि सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में कमियां पाई गई हैं। कुछ संस्थान ऐसे भवनों में भी संचालित हो रहे हैं, जिनका नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत है, लेकिन वहां व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं।

नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी को सामान्य प्रशासनिक कमी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिन संचालकों को संस्थान दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए, उन्हें इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। केवल मौखिक अनुरोध के आधार पर कार्रवाई से छूट नहीं दी जाएगी।

विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर नगर निगम सख्त

रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरियों, प्रवेश परीक्षाओं और अन्य पाठ्यक्रमों की तैयारी कराने वाले अनेक कोचिंग संस्थान संचालित हैं। इन संस्थानों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। कई जगह एक ही भवन में अलग-अलग संस्थानों की कक्षाएं चलती हैं। ऐसे में भवन की क्षमता, प्रवेश और निकास मार्ग, सीढ़ियों की स्थिति, अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था का पर्याप्त होना जरूरी है।

यदि किसी भवन में विद्यार्थियों की संख्या उसकी क्षमता से अधिक हो, निकास मार्ग बाधित हो या आग लगने जैसी स्थिति में बाहर निकलने के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध न हो, तो दुर्घटना की स्थिति में गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इसी तरह, बिजली की खराब व्यवस्था, ज्वलनशील सामग्री का अनुचित भंडारण और अग्निशमन उपकरणों का अभाव भी जोखिम बढ़ा सकता है।

नगर निगम की कार्रवाई का उद्देश्य संस्थानों को निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित कराना और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है। नियमों का पालन केवल दस्तावेज पूरे करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। भवन में मौजूद वास्तविक सुविधाओं और उनकी उपयोगिता की भी जांच जरूरी है।

स्वीकृत भवन नक्शे के बिना संचालन पर उठे सवाल

भवन का स्वीकृत नक्शा यह निर्धारित करता है कि भवन का निर्माण किस प्रकार और किस उपयोग के लिए किया जा सकता है। भवन में कमरों की स्थिति, मंजिलों का विन्यास, सीढ़ियां, प्रवेश-निकास, खुली जगह और अन्य निर्माण संबंधी पहलुओं का निर्धारण स्वीकृत योजना के आधार पर होता है।

नगर निगम की समीक्षा में कुछ संस्थानों से संबंधित भवन नक्शे को लेकर कमियां सामने आने की बात कही गई है। कुछ संचालकों ने नक्शा प्रस्तुत किया, लेकिन जांच में यह सामने आया कि संबंधित नक्शे आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत थे। ऐसे भवनों में कोचिंग जैसी व्यावसायिक गतिविधि चलाने के लिए लागू नियमों के अनुसार आवश्यक अनुमति की जरूरत हो सकती है।

किसी भवन का नक्शा मौजूद होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उस भवन में हर प्रकार की गतिविधि संचालित की जा सकती है। भवन का स्वीकृत उपयोग और मौके पर हो रही गतिविधि एक-दूसरे के अनुरूप होने चाहिए। यदि भवन का इस्तेमाल स्वीकृत उद्देश्य से अलग किया जा रहा है, तो संबंधित प्रावधानों के अनुसार अनुमति और अनुपालन की जांच की जा सकती है।

कोचिंग संस्थानों के संचालकों को इसलिए अपने भवन से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा करनी चाहिए। यदि भवन किराये पर लिया गया है, तो संचालक और भवन मालिक के बीच यह स्पष्ट होना चाहिए कि वहां शैक्षणिक या व्यावसायिक गतिविधि चलाने की अनुमति उपलब्ध है या नहीं। केवल किरायानामा होने से भवन से संबंधित सभी नियामकीय आवश्यकताएं पूरी नहीं हो जातीं।

फायर एनओसी और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की होगी जांच

कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। कई संस्थान बहुमंजिला इमारतों में संचालित होते हैं, जहां एक ही समय में बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रह सकते हैं। ऐसी स्थिति में आग लगने, धुएं के फैलने या किसी अन्य आपातकालीन घटना के दौरान विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उपयुक्त व्यवस्था होनी चाहिए।

नगर निगम की ओर से उठाए गए मुद्दों में फायर एनओसी यानी अग्निशमन विभाग से संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र और आवश्यक अग्नि सुरक्षा प्रबंध भी शामिल हैं। लागू नियमों के अनुसार जहां यह प्रमाणपत्र जरूरी है, वहां उसकी वैधता और शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।

अग्नि सुरक्षा का अर्थ केवल दीवार पर अग्निशामक यंत्र टांग देना नहीं है। उपकरण सही स्थिति में होने चाहिए और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किए जा सकने चाहिए। संस्थान के कर्मचारियों को यह भी पता होना चाहिए कि आग लगने की स्थिति में क्या करना है, विद्यार्थियों को किस रास्ते से बाहर निकालना है और आपातकालीन सहायता कैसे बुलानी है।

इसके साथ ही निकास मार्ग खुले और उपयोग योग्य रहने चाहिए। सीढ़ियों या गलियारों में ऐसी वस्तुएं नहीं रखी जानी चाहिए जो आपात स्थिति में रास्ता रोक दें। भवन में लगे बिजली के उपकरणों और तारों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। अग्नि सुरक्षा से संबंधित अंतिम आवश्यकताएं भवन की प्रकृति, उपयोग और लागू नियमों के अनुसार तय होती हैं।

इमरजेंसी एग्जिट की कमी से बढ़ सकता है खतरा

किसी भी शैक्षणिक संस्थान में आपातकालीन निकासी का सुरक्षित रास्ता विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होता है। आग, भूकंप, बिजली की खराबी या अन्य आपातकालीन परिस्थिति में भवन खाली कराना पड़ सकता है। यदि निकास मार्ग पर्याप्त नहीं हो या वहां अवरोध हों, तो लोगों को बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है।

रांची नगर निगम की बैठक में आपातकालीन निकासी व्यवस्था से संबंधित कमियों का मुद्दा भी सामने आया। कोचिंग संस्थानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भवन में प्रवेश और निकास की व्यवस्था लागू सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो। केवल सामान्य दिनों में आसानी से अंदर-बाहर आ पाना पर्याप्त नहीं है; आपात स्थिति को ध्यान में रखकर भी व्यवस्था का मूल्यांकन जरूरी है।

संस्थानों को विद्यार्थियों और कर्मचारियों को निकासी मार्ग की जानकारी देनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर निकासी अभ्यास और सुरक्षा निर्देश भी उपयोगी हो सकते हैं। किसी भी आपातकालीन रास्ते को ताला लगाकर बंद रखना या सामान रखकर अवरुद्ध करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

बहुमंजिला भवनों में यह विषय और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि ऊपरी मंजिलों से बाहर निकलने के लिए विद्यार्थियों को सीढ़ियों और निर्धारित निकास मार्गों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसलिए भवन के वास्तविक ढांचे और संस्थान की गतिविधियों के बीच उचित तालमेल होना चाहिए।

पार्किंग व्यवस्था और भवन उपयोग पर भी नजर

नगर निगम की समीक्षा में पार्किंग व्यवस्था से संबंधित कमियों का भी उल्लेख किया गया। घनी आबादी वाले इलाकों में संचालित कोचिंग संस्थानों के कारण भवन के आसपास वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है। यदि पार्किंग की समुचित व्यवस्था न हो, तो सड़क पर अव्यवस्थित ढंग से वाहन खड़े होने, यातायात बाधित होने और आपातकालीन वाहनों के आवागमन में परेशानी होने की आशंका रहती है।

पार्किंग की जरूरत भवन की संरचना, स्थान, उपयोग और लागू नियमों के अनुसार निर्धारित होती है। संस्थानों को अपने विद्यार्थियों, कर्मचारियों और आगंतुकों की आवाजाही को ध्यान में रखकर व्यवस्था करनी चाहिए। किसी भी स्थिति में पार्किंग के लिए निर्धारित स्थान को इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए कि निकास मार्ग या सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो।

भवन के स्वीकृत उपयोग का पालन भी जरूरी है। यदि किसी परिसर को आवासीय उद्देश्य के लिए मंजूरी मिली है, तो वहां कोचिंग संस्थान चलाने की वैधता की जांच आवश्यक हो सकती है। संबंधित अनुमति और नियमों का पालन किए बिना भवन के उपयोग में बदलाव करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

नगर निगम का जोर इस बात पर है कि संस्थान केवल पढ़ाई की सुविधा देखकर किसी भवन का चयन न करें। भवन की कानूनी स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था, क्षमता और अनुमत उपयोग की जानकारी पहले से प्राप्त करना भी जरूरी है।

समय मांगने के लिए देना होगा विधिवत आवेदन

बैठक में कुछ कोचिंग संस्थान संचालकों ने अपने संस्थान को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। इस पर नगर निगम की ओर से स्पष्ट किया गया कि समय मांगने के लिए केवल मौखिक आग्रह पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए नोटराइज्ड शपथ पत्र के साथ विधिवत आवेदन निगम कार्यालय में जमा करना होगा।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह है कि संस्थान संचालक अपनी स्थिति, स्थानांतरण की आवश्यकता और प्रस्तावित कार्रवाई के बारे में औपचारिक जानकारी दें। आवेदन प्राप्त होने के बाद उस पर नियमानुसार विचार किया जा सकता है। हालांकि, आवेदन जमा कर देने का अर्थ यह नहीं है कि संस्थान को स्वतः कार्रवाई से छूट मिल जाएगी। निर्णय संबंधित नियमों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर लिया जाएगा।

संस्थान संचालकों को चाहिए कि वे किसी भी नोटिस को गंभीरता से लें और उसमें निर्धारित समयसीमा, मांगे गए दस्तावेज तथा अनुपालन की शर्तों को ध्यान से पढ़ें। यदि किसी दस्तावेज की कमी है, तो उसे पूरा करने के लिए संबंधित विभाग से जानकारी लें। यदि स्थानांतरण आवश्यक है, तो नए भवन का चयन भी नियमानुसार किया जाना चाहिए।

नियमों का पालन नहीं करने पर हो सकती है सीलिंग की कार्रवाई

नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि भवन निर्माण संबंधी नियमों, पार्किंग और विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े अनिवार्य प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई संबंधित भवन और संस्थान की स्थिति, नोटिस, उपलब्ध दस्तावेजों और लागू कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।

सीलिंग की चेतावनी को केवल औपचारिक सूचना के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। यदि संस्थान आवश्यक अनुमतियों के बिना संचालित हो रहा है या सुरक्षा से जुड़ी कमियों को दूर नहीं कर रहा है, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई और संस्थान के संचालन पर असर पड़ सकता है। इसलिए संचालकों के लिए समय रहते नियमों की समीक्षा करना और कमियों को दूर करना बेहतर होगा।

दूसरी ओर, किसी संस्थान के खिलाफ कार्रवाई किए जाने पर संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों की उचित जांच भी महत्वपूर्ण है। भवन मालिक, संस्थान संचालक और संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाना चाहिए। जहां भवन की संरचना से जुड़ी कमी हो, वहां भवन मालिक की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, प्रत्येक मामले में जिम्मेदारी का निर्धारण लागू नियमों और वास्तविक तथ्यों के आधार पर किया जाएगा।

कोचिंग संचालकों को किन दस्तावेजों पर ध्यान देना चाहिए?

कोचिंग संस्थानों को अपने संचालन से संबंधित दस्तावेज व्यवस्थित रखने चाहिए। इनमें लागू नियमों के अनुसार निम्नलिखित दस्तावेज शामिल हो सकते हैं:

  1. स्वीकृत भवन नक्शा: यह सुनिश्चित करने के लिए कि भवन का निर्माण स्वीकृत योजना के अनुरूप है।
  2. भवन उपयोग से संबंधित अनुमति: यह देखने के लिए कि भवन में कोचिंग या संबंधित गतिविधि संचालित की जा सकती है या नहीं।
  3. ट्रेड लाइसेंस: जहां लागू हो, वहां नगर निगम से आवश्यक व्यावसायिक अनुमति।
  4. फायर एनओसी: जहां नियमों के तहत आवश्यक हो, वहां अग्निशमन विभाग से संबंधित प्रमाणपत्र।
  5. ऑक्यूपेंसी प्रमाणपत्र: जहां लागू हो, भवन के उपयोग और कब्जे से जुड़ा आवश्यक प्रमाणपत्र।
  6. पार्किंग और निकास व्यवस्था: भवन की प्रकृति तथा लागू सुरक्षा मानकों के अनुरूप उपलब्ध सुविधाएं।
  7. अन्य अनिवार्य अनुमतियां: संबंधित विभाग या भवन की श्रेणी के अनुसार आवश्यक दस्तावेज।

यह सूची सामान्य जानकारी के लिए है। हर भवन और संस्थान पर सभी दस्तावेज समान रूप से लागू हों, यह जरूरी नहीं है। संचालकों को नगर निगम, अग्निशमन विभाग और संबंधित प्राधिकरण से अपने परिसर पर लागू आवश्यकताओं की पुष्टि करनी चाहिए।

विद्यार्थियों और अभिभावकों की भी अहम भूमिका

कोचिंग संस्थान चुनते समय विद्यार्थी और अभिभावक सामान्यतः पढ़ाई की गुणवत्ता, शिक्षकों के अनुभव, फीस, परीक्षा परिणाम और संस्थान की प्रतिष्ठा पर ध्यान देते हैं। इन बातों के साथ परिसर की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है।

विद्यार्थियों को यह देखना चाहिए कि संस्थान में आने-जाने का रास्ता स्पष्ट है या नहीं, सीढ़ियां और गलियारे अवरुद्ध तो नहीं हैं तथा आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता उपलब्ध है या नहीं। अभिभावक संस्थान से सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक अनुमतियों के बारे में जानकारी मांग सकते हैं।

यदि किसी भवन में बहुत अधिक विद्यार्थी मौजूद रहते हों और वहां भीड़भाड़, खराब वेंटिलेशन या निकास मार्ग से संबंधित समस्या दिखाई दे, तो संस्थान प्रबंधन को इसकी जानकारी देना उचित है। सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंता होने पर संबंधित प्राधिकरण को भी सूचित किया जा सकता है।

हालांकि, किसी संस्थान के बारे में केवल अफवाह के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। नियमों के उल्लंघन से संबंधित जानकारी की पुष्टि आधिकारिक सूचना या सक्षम प्राधिकरण के माध्यम से की जानी चाहिए।

पहले भी जांच और नोटिस की कार्रवाई हो चुकी है

रांची में कोचिंग संस्थानों के भवन और सुरक्षा मानकों की जांच पहले भी चर्चा में रही है। अगस्त 2026 में नगर निगम की ओर से कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरी के दस्तावेजों की जांच तथा नोटिस जारी किए जाने की खबरें सामने आई थीं। सितंबर 2026 में कुछ संस्थानों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई भी रिपोर्ट की गई। इन खबरों में ट्रेड लाइसेंस, भवन नक्शा, अग्नि सुरक्षा और स्वीकृत उपयोग से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया था।

अक्टूबर 2026 में भी नियमों के अनुपालन को लेकर संस्थान संचालकों को चेतावनी और नोटिस दिए जाने की खबर सामने आई। इससे स्पष्ट होता है कि मामला केवल एक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में शैक्षणिक संस्थानों के संचालन और सुरक्षा मानकों की जांच का व्यापक विषय है।

हालांकि, अलग-अलग तारीखों पर जारी नोटिस, जांच और कार्रवाई की स्थिति अलग हो सकती है। किसी विशेष संस्थान के खिलाफ वर्तमान स्थिति जानने के लिए नगर निगम की आधिकारिक सूचना या संबंधित विभाग से पुष्टि करना जरूरी है। पहले जारी खबरों में उल्लिखित संस्थानों की सूची को वर्तमान कार्रवाई की अंतिम सूची नहीं माना जाना चाहिए।

शहर में सुरक्षित शैक्षणिक माहौल बनाने की जरूरत

रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी आते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए कोचिंग संस्थान शिक्षा और करियर की तैयारी का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसलिए संस्थानों का संचालन नियमित और सुरक्षित व्यवस्था के साथ होना चाहिए।

नियमों का पालन संस्थान संचालकों, भवन मालिकों और संबंधित प्रशासन की साझा जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है। भवन मालिक को परिसर की वैधता और संरचनात्मक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए, जबकि संचालक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संस्थान का संचालन स्वीकृत उपयोग और लागू सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि नियमों की जानकारी स्पष्ट करे, जांच निष्पक्ष रूप से करे और उल्लंघन पाए जाने पर उचित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करे।

कोचिंग संस्थानों को भी इस कार्रवाई को केवल दंडात्मक कदम के रूप में देखने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था सुधारने का अवसर मानना चाहिए। दस्तावेजों की कमी दूर करना, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखना, निकास मार्ग साफ रखना और विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार परिसर का उपयोग करना दुर्घटना के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

निष्कर्ष

रांची नगर निगम ने नियमों की अनदेखी कर संचालित कोचिंग संस्थानों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। स्वीकृत भवन नक्शा, भवन के उपयोग की अनुमति, पार्किंग, आपातकालीन निकासी और अग्नि सुरक्षा से जुड़ी कमियों को गंभीरता से लिया जा रहा है। संस्थान संचालकों से अपेक्षा है कि वे आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करें और लागू नियमों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करें।

जो संचालक संस्थान को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए अतिरिक्त समय चाहते हैं, उन्हें नोटराइज्ड शपथ पत्र के साथ औपचारिक आवेदन देना होगा। केवल मौखिक अनुरोध के आधार पर राहत मिलने की गारंटी नहीं है। नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर संबंधित संस्थान या भवन के खिलाफ सीलिंग सहित नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू विद्यार्थियों की सुरक्षा है। पढ़ाई की अच्छी व्यवस्था तभी प्रभावी मानी जा सकती है, जब विद्यार्थियों को सुरक्षित भवन, पर्याप्त निकास और जरूरी सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध हों। नगर निगम की कार्रवाई का अंतिम उद्देश्य यही होना चाहिए कि रांची में कोचिंग संस्थान नियमों के अनुरूप संचालित हों और विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ने का अवसर मिले।

रांची में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा पर नगर निगम की सख्ती — 21 अक्टूबर 2026

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रांची में कोचिंग संस्थानों को सील करने की कार्रवाई

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