JPSC और JSSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ अभ्यर्थियों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच’ के नेतृत्व में जारी यह आंदोलन मंगलवार को अपने 18वें दिन में प्रवेश कर गया। इस अवसर पर प्रदर्शनकारी छात्रों ने राजधानी रांची की सड़कों पर एक बेहद अनोखे और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया।
हाथों में ताजे फूल और जुबां पर खामोशी लिए हजारों की संख्या में मंगलवार की शाम अभ्यर्थी सड़कों पर उतरे। यह ‘साइलेंट मार्च’ रांची के ऐतिहासिक जयपाल सिंह स्टेडियम से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा। आंदोलन के दौरान पूरी तरह से शांति बनी रही और छात्रों ने किसी भी प्रकार की नारेबाजी से परहेज किया।

JPSC-JSSC भर्ती धांधली के खिलाफ मौन जुलूस और गांधीवादी विरोध का संदेश
मंगलवार के प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत इसका गांधीवादी और शांतिपूर्ण स्वरूप रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनका यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत नेता, अधिकारी या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह राज्य की पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और लाखों युवाओं के भविष्य को बचाने की लड़ाई है।
हाथों में फूल लेकर निकले अभ्यर्थियों ने संदेश दिया कि वे व्यवस्था में सुधार और अपनी जायज मांगों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचकर छात्रों ने भर्ती प्रक्रियाओं में निष्पक्षता, उत्तरदायित्व और पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को दोहराया।
25 जुलाई से जारी है आंदोलन, 6 छात्र अनशन पर
उल्लेखनीय है कि JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों को रद्द करने और सुधार की मांग को लेकर अभ्यर्थी 25 जुलाई से लगातार आंदोलनरत हैं।
- स्वास्थ्य संकट: आंदोलन को तेज करने के लिए छह अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। लगातार अनशन के कारण दो छात्रों की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
- युवाओं का तर्क: छात्रों का कहना है कि राज्य के लाखों युवा वर्षों तक अपने बहुमूल्य समय और संसाधनों को इन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगाते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवाल उठने लगें, तो युवाओं का पूरी व्यवस्था से भरोसा उठ जाता है।
JPSC-JSSC भर्ती CBI या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पैनल से जांच की मांग
आंदोलनकारी छात्रों की मुख्य मांगों में JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली का संपूर्ण पुनर्गठन और निष्पक्ष जांच शामिल है। छात्रों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- निष्पक्ष एजेंसी से जांच: भर्ती परीक्षाओं में हुए कथित विवादों की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए।
- न्यायिक पैनल: यदि CBI जांच संभव न हो, तो राज्य के बाहर के उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का एक स्वतंत्र पैनल गठित कर पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए।
- परीक्षाएं रद्द हों: जिन-जिन भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता के पुख्ता आरोप लगे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से रद्द कर नए सिरे से आयोजित किया जाए।
- जिम्मेदारी तय हो: भविष्य में पेपर लीक या धांधली रोकने के लिए ठोस कानून और सख्त जवाबदेही तय की जाए।
छठे दौर की वार्ता भी रही बेनतीजा, गतिरोध बरकरार
आंदोलन के समाधान के लिए रविवार को झारखंड सरकार के प्रतिनिधियों और ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच’ के प्रतिनिधिमंडल के बीच छठे दौर की उच्चस्तरीय वार्ता हुई। हालांकि, कई घंटों तक चली बातचीत के बावजूद दोनों पक्षों के बीच किसी ठोस बिंदु पर सहमति नहीं बन सकी।
वार्ता बेनतीजा रहने के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मामले को सुलझाने के प्रति गंभीर न होने का आरोप लगाया। वार्ता की विफलता के कारण छात्रों का असंतोष और गहरा गया है। इस बीच, विधानसभा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने से जुड़े वक्तव्य के बाद राजनीतिक व प्रशासनिक हलचलें भी तेज हो गई हैं।
फिलहाल, 18वें दिन भी समाधान न निकलने से अभ्यर्थियों ने आंदोलन को और तेज करने का संकेत दिया है, वहीं सरकार के सामने भी बातचीत के जरिए बने इस गतिरोध को जल्द से जल्द खत्म करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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