Jharkhand High Court से बड़ी राहत: Ranchi University के ILS में कानून की पढ़ाई के लिए दाखिले का रास्ता साफJharkhand High Court से बड़ी राहत: Ranchi University के ILS में कानून की पढ़ाई के लिए दाखिले का रास्ता साफ

Ranchi University के इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज ILS में लॉ की पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों के लिए Jharkhand High Court से राहत भरी खबर सामने आई है। Jharkhand High Court ने संस्थान में विद्यार्थियों के दाखिले का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत में ILS में फैकल्टी और आधारभूत सुविधाओं की कमी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान Ranchi University और ILS प्रशासन की ओर से अदालत को सूचित किया गया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने संस्थान को अस्थायी मान्यता प्रदान कर दी है। BCI के अधिवक्ता ने भी अदालत के समक्ष इस बात की पुष्टि की। इसके बाद Jharkhand High Court ने BCI से मिली इस अस्थायी मान्यता को रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब BCI की ओर से संस्थान को अस्थायी मान्यता मिल चुकी है, तो ILS अपनी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार छात्रों का दाखिला ले सकता है।

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इस फैसले से पिछले काफी समय से दाखिले को लेकर बनी असमंजस और अनिश्चितता की स्थिति पूरी तरह समाप्त हो गई है। हाईकोर्ट के इस निर्देश का सीधा लाभ उन सैकड़ों विद्यार्थियों को मिलेगा, जो ILS में विधि की पढ़ाई करना चाहते हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नामांकन की यह पूरी प्रक्रिया BCI के तय मानकों, नियमों और संस्थान की निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही पूरी की जाएगी।

फैकल्टी की कमी दूर करने के Jharkhand High Court के कड़े निर्देश

Jharkhand High Court ने केवल दाखिले की अनुमति देने तक ही मामले को सीमित नहीं रखा। अदालत ने संस्थान में पढ़ाई के स्तर और गुणवत्ता को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। पीठ ने निर्देश दिया कि BCI की ओर से निर्धारित शर्तों के अनुरूप संस्थान में आवश्यक न्यूनतम संख्या में शिक्षकों (फैकल्टी) की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए। अदालत ने Ranchi University और ILS प्रशासन को हिदायत दी कि यदि संस्थान में अध्यापकों की कमी है, तो उसे दूर करने के लिए तत्काल आवश्यक और ठोस कदम उठाए जाएं। रिक्त पदों को भरने के लिए जल्द से जल्द प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि कानून की पढ़ाई निर्धारित उच्च मानकों के अनुसार संचालित हो सके।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं की कमी पर Jharkhand High Court में दायर हुई थी याचिका

यह पूरा मामला ILS में फैकल्टी और बुनियादी सुविधाओं की घोर कमी को लेकर Jharkhand High Court पहुंचा था। संस्थान के छात्र अंबेश चौबे और अन्य विद्यार्थियों ने Jharkhand High Court में जनहित में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि संस्थान में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और आधारभूत ढांचा भी कमजोर है, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार किया जाए और कमियों को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए। इसी मामले की सुनवाई के दौरान यूनिवर्सिटी की ओर से BCI की अस्थायी मान्यता मिलने का दस्तावेज और पक्ष प्रस्तुत किया गया।

आठ सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद Jharkhand High Court ने BCI की अस्थायी मान्यता से जुड़े सभी कागजात रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही, संस्थान को फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की रिपोर्ट पेश करने को कहा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए आठ सप्ताह बाद की तारीख तय की है। इस दौरान रांची यूनिवर्सिटी और ILS प्रशासन को BCI की सभी शर्तों का पालन करते हुए जरूरी व्यवस्थाएं पूरी करनी होंगी।

कुल मिलाकर, BCI की अस्थायी मान्यता से ILS में नए सत्र के दाखिले का ताला तो खुल गया है, लेकिन Jharkhand High Court के कड़े रुख ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने यह चुनौती भी तय कर दी है कि उन्हें जल्द से जल्द योग्य फैकल्टी और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था करनी होगी, ताकि पढ़ाई की गुणवत्ता मानकों पर खरी उतर सके।

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