JPSC द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा: कोडिंग में खामी और कॉपियों पर विशेष निशानJPSC द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा: कोडिंग में खामी और कॉपियों पर विशेष निशान, CBI ने दोबारा शुरू की जांच

रांची। जिंदगी जिंदाबाद

JPSC परीक्षा धांधली: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली और मेधा घोटाले के मामले में जांच एजेंसी सीआईडी ने शनिवार को गिरफ्तार पांचों मुख्य आरोपियों को पूछताछ के लिए रिमांड पर ले लिया है।

अदालत से रिमांड मिलने के बाद सीआईडी अब पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल (TDS Data Processing Pvt. Ltd.) के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी और तकनीकी प्रोग्रामरों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है। रिमांड के पहले दिन सीआईडी ने ओएमआर शीट से छेड़छाड़, परिणाम बदलने और परीक्षा पास कराने के एवज में 5 लाख से 25 लाख रुपये तक के वित्तीय लेन-देन पर सवाल पूछे।

जांच के दौरान सीआईडी ने इस बात की भी पड़ताल की कि झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाली जा चुकी टीडीपीएल एजेंसी को किसके दबाव और सहयोग से परीक्षा संचालन का काम दिया गया था।

पूछताछ में मास्टरमाइंड मनोज कुमार तिवारी की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है, जो खुद एजेंसी का मैनेजर रहते हुए कई परीक्षाओं में अभ्यर्थी बनकर पास हुआ और इसी के दम पर दूसरे अभ्यर्थियों से पास कराने के नाम पर मोटी रकम वसूलता था।

सीआईडी की टीम जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते के आवास और कार्यालय से जब्त कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव की फोरेंसिक जांच करा रही है। इसके साथ ही ख्यांगते की दो अमेरिका यात्राओं के खर्च के स्रोतों की भी जांच की जा रही है। आरोपियों की रिमांड अवधि के दौरान इस घोटाले में शामिल कई अन्य बड़े अधिकारियों और बिचौलियों के बेनकाब होने की संभावना है।

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https://zindagijindabaad.com/pralhad-joshi-will-be-new-education-minister/

https://www.jpsc.gov.in/

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