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रांची: राजधानी रांची में बिजली के पोल पर बेतरतीब तरीके से लगाए गए इंटरनेट, ऑप्टिकल फाइबर और टीवी केबल के खिलाफ झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने कार्रवाई तेज कर दी है। निगम की ओर से ऐसे केबल हटाए जा रहे हैं, जिन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार अनुमति नहीं मिली थी या जो सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं लगाए गए थे। कार्रवाई का असर शहर के कई इलाकों में इंटरनेट और केबल टीवी सेवाओं पर भी देखने को मिला है।

आपके दिए गए समाचार के अनुसार JBVNL ने बुधवार को रांची के कई प्रमुख इलाकों में बिजली के पोल पर लटक रहे इंटरनेट और टीवी केबल हटाए। इनमें कांटाटोली, मेन रोड, रातू रोड, हरमू, अरगोड़ा चौक, धुर्वा, कांके रोड और अपर बाजार जैसे इलाके शामिल हैं। कार्रवाई के बाद अपर बाजार और रातू रोड क्षेत्र में कुछ लोगों ने इंटरनेट सेवा बाधित होने की शिकायत भी की।

यह कार्रवाई केवल तार हटाने तक सीमित नहीं है। JBVNL का कहना है कि बिजली के पोल पर केबल लगाने के लिए संबंधित कंपनियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना आवश्यक है। इसके अलावा केबल की ऊंचाई और उसकी फिटिंग भी सुरक्षा मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

हाल के दिनों में रांची में बिजली के पोल पर झूलते और बेतरतीब केबल का मामला काफी गंभीर हुआ है। अगस्त 2026 में JBVNL ने असुरक्षित और अनधिकृत केबल हटाने के लिए अभियान शुरू किया था। अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार निगम ने टेलीकॉम और केबल ऑपरेटरों को अपने तार सुरक्षित करने और जरूरी अनुमति लेने का निर्देश दिया था।

Table of Contents

बिजली पोल से इंटरनेट और टीवी केबल हटाने की कार्रवाई

रांची में बिजली के पोल का इस्तेमाल बड़ी संख्या में इंटरनेट और टीवी नेटवर्क के लिए किया जाता है। अलग-अलग कंपनियां अपने नेटवर्क को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए बिजली के पोल पर केबल लगाती हैं।

समस्या उस समय बढ़ती है जब एक ही पोल पर कई कंपनियों के केबल बिना व्यवस्थित तरीके से लगाए जाते हैं। कई स्थानों पर पुराने केबल हटाए नहीं जाते और उनके ऊपर नए केबल जोड़ दिए जाते हैं। इससे पोल पर तारों का भार बढ़ने के साथ-साथ सड़क के ऊपर तारों का जाल भी बन जाता है।

JBVNL की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ऐसे ही असुरक्षित और अनधिकृत केबल को हटाना बताया जा रहा है।

रांची में पहले भी बिजली विभाग और प्रशासन के सामने बिजली पोल पर लटकते तारों की शिकायतें आती रही हैं। कई जगहों पर केबल इतने नीचे झूलते दिखाई देते हैं कि बड़े वाहनों के गुजरने में भी परेशानी हो सकती है।

किन इलाकों में हुई कार्रवाई?

समाचार में जिन इलाकों का उल्लेख किया गया है, उनमें रांची के कई प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।

प्रमुख इलाके

  • कांटाटोली
  • मेन रोड
  • रातू रोड
  • हरमू
  • अरगोड़ा चौक
  • धुर्वा
  • कांके रोड
  • अपर बाजार

इन इलाकों में बिजली के पोल से इंटरनेट और टीवी केबल हटाने की कार्रवाई की गई है।

खबर के मुताबिक, कार्रवाई के बाद अपर बाजार और रातू रोड क्षेत्र में इंटरनेट सेवा प्रभावित होने की शिकायत सामने आई। इसका सीधा असर उन घरों, दुकानों और कार्यालयों पर पड़ सकता है जो स्थानीय केबल या फाइबर इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर हैं।

हालांकि, कार्रवाई का उद्देश्य इंटरनेट सेवा बंद करना नहीं, बल्कि बिजली के पोल पर लगे नेटवर्क को निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुसार व्यवस्थित करना बताया गया है।

12 फीट से अधिक ऊंचाई पर होना चाहिए केबल

JBVNL की कार्रवाई में केबल की ऊंचाई भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार बिजली के पोल से गुजरने वाले टेलीकॉम और केबल वायर को 12 फीट से अधिक ऊंचाई पर रखना जरूरी बताया गया है। साथ ही संबंधित कंपनी की पहचान के लिए तार पर कंपनी का टैग लगाने की बात भी कही गई है।

इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी पोल पर लगा हुआ केबल किस कंपनी का है।

अधिकारियों के अनुसार समस्या यह भी है कि कुछ कंपनियां सीमित संख्या में पोल का इस्तेमाल करने की अनुमति लेने के बाद उससे कहीं अधिक पोल पर अपना नेटवर्क फैला देती हैं। ऐसी स्थिति में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा तार वैध अनुमति के तहत लगाया गया है और कौन सा नहीं।

इसी वजह से JBVNL ने केबल नेटवर्क को व्यवस्थित करने और अनुमति की जांच करने की दिशा में कार्रवाई तेज की है।

अनुमति के बिना केबल लगाने पर कार्रवाई

समाचार में रांची के JBVNL के डीएन साह के हवाले से बताया गया है कि 12 फीट से अधिक ऊंचाई के केबल को भी मनमाने तरीके से नहीं काटा जाना चाहिए, बल्कि केबल लगाने से पहले JBVNL से अनुमति लेना जरूरी है।

इसका मतलब यह है कि केवल ऊंचाई का मानक पूरा कर लेना पर्याप्त नहीं है। संबंधित कंपनी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जिस बिजली पोल का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसके लिए आवश्यक अनुमति मौजूद हो।

यदि किसी कंपनी ने अनुमति नहीं ली है या निर्धारित अनुमति से अधिक पोल पर केबल लगाया है, तो ऐसे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

यह अभियान आगे भी जारी रहने की बात कही गई है।

इंटरनेट सेवा बाधित होने से लोगों की परेशानी

बिजली पोल से इंटरनेट और टीवी केबल हटाने की कार्रवाई का सबसे तत्काल प्रभाव उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

आज इंटरनेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है। स्कूल-कॉलेज की ऑनलाइन पढ़ाई, वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, सरकारी सेवाएं, ऑनलाइन मीटिंग और कारोबार तक इंटरनेट पर निर्भर हैं।

ऐसे में अचानक फाइबर या केबल कटने से उपभोक्ताओं को परेशानी हो सकती है।

रांची के कुछ इलाकों में कार्रवाई के बाद इंटरनेट सेवा बाधित होने की शिकायत सामने आने की बात खबर में कही गई है। खासकर अपर बाजार और रातू रोड जैसे व्यस्त इलाकों में व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को नेटवर्क समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, अगर केबल अवैध या असुरक्षित तरीके से लगाया गया है, तो लंबे समय में उसे व्यवस्थित करना सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी माना जा सकता है।

JBVNL की कार्रवाई के पीछे सुरक्षा सबसे बड़ा कारण

बिजली के पोल पर लगे इंटरनेट और टीवी केबल देखने में केवल संचार नेटवर्क का हिस्सा लग सकते हैं, लेकिन इनके गलत तरीके से लगाए जाने पर कई प्रकार के खतरे पैदा हो सकते हैं।

यदि भारी संख्या में केबल एक ही पोल पर बांध दिए जाएं, तो पोल पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है। इसके अलावा सड़क पार करते समय यदि केबल बहुत नीचे हो तो बड़े वाहन उससे टकरा सकते हैं।

बारिश और तेज हवा के दौरान भी ढीले और बेतरतीब केबल समस्या पैदा कर सकते हैं।

JBVNL ने पहले भी कंपनियों को केबल सुरक्षित तरीके से लगाने का निर्देश दिया था। अगस्त में निगम ने असुरक्षित केबल को लेकर अंतिम नोटिस जारी किया था और नियमों का पालन नहीं करने पर केबल हटाने की कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी कार्रवाई

रांची में लटकते और अव्यवस्थित इंटरनेट तथा केबल तारों का मामला झारखंड हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है।

अगस्त 2026 में झारखंड हाईकोर्ट ने रांची शहर में अव्यवस्थित केबल और इंटरनेट तारों से लोगों को हो रही परेशानी पर सुनवाई की थी। अदालत ने JBVNL के एमडी से यह बताने को कहा था कि शहर में कितनी टेलीकॉम कंपनियों को केबल लगाने की अनुमति दी गई है और अनुमति के तहत कितने तार लगाए गए हैं।

कोर्ट ने यह भी जानना चाहा था कि सड़क और गलियों में झूलते केबल के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार है और अब तक संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

इस मामले में टेलीकॉम कंपनियों से भी जवाब मांगा गया था।

इस घटनाक्रम के बाद JBVNL की ओर से अवैध और असुरक्षित केबल के खिलाफ कार्रवाई को और तेज किया गया।

50 टीमों ने शुरू किया था केबल हटाने का अभियान

रांची में पहले चरण की कार्रवाई के दौरान JBVNL ने बड़ी संख्या में टीमों को लगाया था। एक रिपोर्ट के अनुसार 50 टीमों ने बिजली के पोल से अवैध और असुरक्षित ऑप्टिकल फाइबर केबल हटाने का काम किया था।

इस कार्रवाई का असर डोरंडा, हिनू, अरगोड़ा, मोरहाबादी और लालपुर जैसे क्षेत्रों में भी बताया गया था।

कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में केबल और तार हटाए गए। बारिश के कारण अभियान की गति कुछ स्थानों पर प्रभावित होने की भी जानकारी सामने आई थी।

इससे यह स्पष्ट है कि मामला केवल किसी एक सड़क या मोहल्ले तक सीमित नहीं है, बल्कि रांची शहर में बिजली पोल पर लगे टेलीकॉम नेटवर्क को व्यवस्थित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।

कंपनियों को पहले दिया गया था मौका

JBVNL ने अचानक सीधे सभी केबल काटने की कार्रवाई शुरू नहीं की। इससे पहले कंपनियों को अपने नेटवर्क को सुरक्षित करने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया गया था।

रिपोर्टों के अनुसार कंपनियों को केबल की जानकारी उपलब्ध कराने, पोल का विवरण देने और सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए कहा गया था। कुछ रिपोर्टों में GPS मैपिंग और केबल की पहचान से जुड़ी जानकारी मांगे जाने का भी उल्लेख है।

इसके बावजूद जिन कंपनियों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया, उनके नेटवर्क पर कार्रवाई की गई।

कंपनी केबल पर टैग लगाना भी जरूरी

रांची में अब केबल नेटवर्क की पहचान आसान बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

यदि किसी पोल पर कई कंपनियों के तार लगे हैं और किसी तार पर कंपनी की पहचान नहीं है, तो किसी समस्या की स्थिति में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि तार किसका है।

इसी वजह से JBVNL की ओर से संबंधित कंपनियों के केबल पर पहचान टैग लगाने की बात कही गई है।

इससे भविष्य में शिकायत मिलने पर संबंधित कंपनी की पहचान करना आसान हो सकता है और अनधिकृत केबल को अलग करने में भी मदद मिलेगी।

एक कंपनी की अनुमति दूसरे पोल पर इस्तेमाल नहीं होगी

समाचार में एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आई है कि कंपनियां कुछ सौ बिजली पोल के लिए अनुमति लेकर हजारों पोल पर अपना नेटवर्क नहीं फैला सकतीं।

यदि किसी कंपनी को निश्चित संख्या में पोल पर केबल लगाने की अनुमति मिली है, तो उसे उसी सीमा में नेटवर्क स्थापित करना होगा।

इसके अलावा अगर कंपनी को किसी विशेष क्षेत्र में पोल के इस्तेमाल की अनुमति मिली है, तो दूसरे क्षेत्र में नेटवर्क बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इस व्यवस्था से बिजली विभाग को यह पता रखने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में किस कंपनी का कितना नेटवर्क है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने रखता है?

JBVNL की कार्रवाई से सीधे तौर पर इंटरनेट उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठ सकता है कि उनका इंटरनेट कब तक बंद रहेगा या सेवा दोबारा कब शुरू होगी।

ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को अपने इंटरनेट सेवा प्रदाता से संपर्क करना चाहिए।

यदि केबल कट गया है, तो सेवा प्रदाता को यह देखना होगा कि नया कनेक्शन निर्धारित और अनुमति प्राप्त मार्ग से कैसे उपलब्ध कराया जाए।

उपभोक्ताओं को स्वयं बिजली के पोल पर कोई तार लगाने या कटे हुए तार को जोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

विशेष रूप से बिजली के पोल के आसपास किसी भी तार के साथ छेड़छाड़ करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

बिजली और इंटरनेट के तारों को अलग रखना जरूरी

बिजली के तार और इंटरनेट केबल अलग-अलग उद्देश्य के लिए होते हैं। बिजली नेटवर्क में उच्च वोल्टेज का खतरा हो सकता है, जबकि इंटरनेट नेटवर्क सामान्यतः डेटा ट्रांसमिशन के लिए इस्तेमाल होता है।

लेकिन जब दोनों नेटवर्क एक ही पोल पर अव्यवस्थित तरीके से लगाए जाते हैं तो रखरखाव और सुरक्षा दोनों मुश्किल हो जाते हैं।

यदि किसी इंटरनेट केबल की मरम्मत के दौरान बिजली के तारों के बहुत पास काम करना पड़े, तो तकनीशियन के लिए भी जोखिम बढ़ सकता है।

इसी वजह से केबल की ऊंचाई, दूरी, पोल पर भार और इंस्टॉलेशन की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जाता है।

रांची में समस्या काफी समय से बनी हुई है

रांची की सड़कों पर बिजली के पोल के साथ-साथ बड़ी संख्या में टेलीकॉम और केबल नेटवर्क दिखाई देते हैं।

जैसे-जैसे इंटरनेट की मांग बढ़ी, वैसे-वैसे फाइबर नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा। पुराने नेटवर्क के साथ नए नेटवर्क जुड़ते गए। कई जगह पुराने तार हटाए नहीं गए और नए तार उसी पोल पर लगाए गए।

परिणामस्वरूप कुछ इलाकों में पोल के आसपास तारों का घना जाल दिखाई देने लगा।

इस तरह की स्थिति केवल रांची तक सीमित नहीं है। देश के कई बड़े शहरों में बिजली के पोल और स्ट्रीट इंफ्रास्ट्रक्चर पर टेलीकॉम केबल का दबाव बढ़ता रहा है।

लेकिन रांची में इस मुद्दे पर अब प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर भी कार्रवाई सामने आई है।

JBVNL की आधिकारिक जानकारी और संपर्क

JBVNL की आधिकारिक वेबसाइट पर रांची समेत झारखंड के अलग-अलग इलेक्ट्रिक सप्लाई एरिया की जानकारी उपलब्ध है। निगम की वेबसाइट पर रांची इलेक्ट्रिक सप्लाई एरिया और संबंधित डिवीजन की जानकारी भी दी गई है।

उपभोक्ता बिजली से संबंधित शिकायतों के लिए JBVNL के आधिकारिक संपर्क माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

JBVNL की वेबसाइट पर 1912 सहित हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध हैं।

आधिकारिक वेबसाइट: JBVNL Official Website

आगे भी जारी रहेगा केबल हटाने का अभियान

JBVNL की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई केवल एक दिन की नहीं है। जिन कंपनियों के केबल निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं हैं, उनके खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहने की बात कही गई है।

इससे आने वाले दिनों में रांची के दूसरे इलाकों में भी केबल हटाए जाने की संभावना है।

ऐसे में इंटरनेट और टीवी सेवा देने वाली कंपनियों के लिए जरूरी होगा कि वे अपने नेटवर्क का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि उनके सभी केबल निर्धारित अनुमति और सुरक्षा मानकों के तहत लगे हों।

दूसरी ओर, उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे इंटरनेट कनेक्शन लेते समय सेवा प्रदाता से नेटवर्क इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया और उपलब्धता की जानकारी लें।

क्यों जरूरी है यह कार्रवाई?

अगर पूरे मामले को केवल इंटरनेट सेवा बाधित होने के नजरिये से देखा जाए तो उपभोक्ताओं को परेशानी जरूर दिखाई देती है। लेकिन दूसरी तरफ शहर की सुरक्षा और व्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर भी महत्वपूर्ण है।

बिजली के पोल पर भारी मात्रा में केबल का अनियंत्रित इस्तेमाल लंबे समय में दुर्घटना, पोल पर अतिरिक्त भार, सड़क सुरक्षा और रखरखाव जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

इसलिए विशेषज्ञों और प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि सुरक्षा नियम भी लागू हों और लोगों की इंटरनेट सेवा भी अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो।

इसके लिए JBVNL और टेलीकॉम कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।

यदि कंपनियां अपने केबल का पूरा रिकॉर्ड रखें, पोल की अनुमति लें, तारों को निर्धारित ऊंचाई पर लगाएं और पुराने/अनावश्यक तारों को हटाती रहें, तो ऐसी समस्या काफी हद तक कम की जा सकती है।


निष्कर्ष

रांची में JBVNL की ओर से बिजली के पोल पर लगे इंटरनेट और टीवी केबल के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। समाचार के अनुसार कांटाटोली, मेन रोड, रातू रोड, हरमू, अरगोड़ा चौक, धुर्वा, कांके रोड और अपर बाजार सहित कई इलाकों में केबल हटाए गए हैं।

इस कार्रवाई के बाद कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवा प्रभावित होने की शिकायत सामने आई है, लेकिन JBVNL का मुख्य तर्क अनधिकृत और असुरक्षित केबल को हटाना तथा बिजली पोल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

रांची में पहले से ही झूलते और अव्यवस्थित केबल को लेकर हाईकोर्ट की निगरानी और सवाल सामने आ चुके हैं। ऐसे में आने वाले समय में बिजली पोल पर लगे टेलीकॉम नेटवर्क को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि टेलीकॉम कंपनियां अपने नेटवर्क को किस तरह नियमित करती हैं और JBVNL की कार्रवाई के बाद उपभोक्ताओं को इंटरनेट सेवा में कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

Official source

JBVNL की आधिकारिक वेबसाइट पर रांची इलेक्ट्रिक सप्लाई एरिया और संपर्क जानकारी उपलब्ध है। JBVNL Official Website

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