पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में गठित एसआईटी में तैनात तीन डीएसपी को उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया
जमीन घोटालों की जांच वाली एसआईटी से तीन डीएसपी हटे, मूल विभाग में भेजे गए:
रांची: झारखंड में जमीन घोटालों और भूमि विवादों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) में तैनात तीन डीएसपी को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में जमीन घोटालों और भूमि विवादों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। इस एसआईटी में तैनात तीन डीएसपी को अब उनके मूल विभाग में वापस भेजे जाने का आदेश जारी किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 21 सितंबर को जारी आदेश के तहत डीएसपी सुमनमणि नाग और तारामणी बारखड़ा के साथ डीएसपी प्रदीप पाल हेटवार को झारखंड एटीएस वापस भेजा गया है। तीनों डीएसपी की एसआईटी में तैनाती 12 अगस्त 2024 को हुई थी। एसआईटी में जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच चल रही थी।

अखबार की रिपोर्ट में बताया गया है कि 27 मई 2026 को तीनों डीएसपी की वापसी की प्रक्रिया शुरू हुई थी। सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक ने पुलिस मुख्यालय से तीनों डीएसपी को उनके पैतृक विभाग में वापस भेजने का आग्रह किया था। करीब चार महीने बाद इस कार्रवाई को पूरा करते हुए उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी गई।जमीन घोटालों की जांच वाली एसआईटी से तीन डीएसपी हटे, मूल विभाग में भेजे गए
रिपोर्ट के अनुसार, तीनों डीएसपी के एसआईटी से हटने के बाद जमीन घोटालों और भूमि विवादों से जुड़े लंबित मामलों की जांच की दिशा और रफ्तार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर उन मामलों को लेकर चर्चा है, जिनकी जांच पहले ही धीमी पड़ चुकी थी।
एसआईबी के सवालों का जवाब नहीं दे पाए पूर्व सीआई और लिपिक
अखबार की कटिंग में एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। इसमें नामकुम अंचल कार्यालय से दाखिल-खारिज की फाइल गायब होने और बाद में रिकॉर्ड में फाइल के खुलेआम मिलने से जुड़े मामले की जांच की जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, एसआईबी के अधिकारियों ने पूर्व सीआई मनोज कुमार दीक्षित और पूर्व लिपिक दीपक कुमार से मामले से संबंधित जानकारी मांगी थी। दोनों से पूछताछ के दौरान कई सवाल किए गए, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि वे एसआईबी के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
मामला जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर से जुड़ा बताया गया है। एसआईबी ने रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच के लिए कार्रवाई शुरू की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फाइल की आवाजाही और रिकॉर्ड में हुए बदलाव की जानकारी जुटाई जा रही है।
जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर का आरोप
रिपोर्ट में धुर्वा क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित जमीन के रिकॉर्ड का भी उल्लेख है। एसआईबी के अनुसार, खाता संख्या 32 के प्लॉट संख्या 776, 820, 821 और 822 से जुड़ी करीब 1.22 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि अंचल स्तर पर रिकॉर्ड में हेरफेर कर प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में जमाबंदी कायम कर दी गई। इसके बाद जमीन के दस्तावेजों और रिकॉर्ड में हुए बदलाव की जांच शुरू हुई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मूल रैयत के अनुसार उनकी मां ने 1978-79 में निबंधित केवाला के माध्यम से 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी। बाद में जमीन के बंटवारे और जमाबंदी से संबंधित प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड में बदलाव की बात सामने आई।

रिकॉर्ड में निजी कंपनी का नाम दर्ज होने की जांच
एसआईबी की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि पुरानी जमीन के रिकॉर्ड के एक हिस्से में निजी कंपनी का नाम किस प्रक्रिया के तहत दर्ज किया गया। जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु यही बताया गया है कि रिकॉर्ड में बदलाव कैसे हुआ और संबंधित मूल फाइल किसके नियंत्रण में थी।
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी रिकॉर्ड में हुए बदलाव, संबंधित दस्तावेजों और फाइल की आवाजाही से जुड़े तथ्यों को खंगाल रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होने की बात सामने आई है।
