केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एनएचएसआरसी सहित विभिन्न 6 राज्यों के स्वास्थ्य विशेषज्ञ ले रहे हैं हिस्सा
रांची। जिंदगी जिंदाबाद
Jharkhand: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखण्ड की ओर से 10-दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग मॉड्यूल – आशा रीजनल टीओटी फॉर स्टेट मास्टर ट्रेनर्स” का औपचारिक शुभारंभ आज दिनांक 03 अगस्त 2026 को रांची-खूंटी मार्ग पर स्थित मोमेन्ट्स रिसॉर्ट्स में हुआ। यह कार्यशाला आज से 12 अगस्त तक चलेगा।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य स्तर के मास्टर ट्रेनर्स को स्वास्थ्य सहिया कार्यकर्ताओं के एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग मॉड्यूल में निपुण बनाना है, ताकि ग्रामीण एवं समुदाय स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखरेख प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाया जा सके। यह आयोजन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), झारखण्ड एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (एनएचएसआरसी) के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर की इस कार्यशाला में एनएचएसआरसी, नई दिल्ली के वरिष्ठ विशेषज्ञ एवं सलाहकार मुख्य रूप से उपस्थित हैं, जिनमें डॉ. अनुराधा जैन (सलाहकार, सीपी-सीपीएचसी), डॉ. सुरभि सेठी (लीड, सीपी-सीपीएचसी), डॉ. ऋचा शर्मा (वरिष्ठ सलाहकार), डॉ. राकेश सारस्वत, डॉ. नीलम सिद्दीकी, डॉ. सीमा मल्होत्रा, डॉ. पंकज शाह, डॉ. ज्योत्स्ना एवं सुश्री प्रतिभा किशोर शामिल हैं। इसके साथ ही झारखण्ड, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए हुए चिकित्सा अधिकारी, कार्यक्रम समन्वयक तथा राज्य प्रशिक्षक भी इस 10-दिवसीय गहन प्रशिक्षण में भाग ले रहे हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखण्ड के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जन-स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच मजबूत करने में सहिया कार्यकर्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्रशिक्षण सहियाओं के क्षमता निर्माण और उनकी कार्यप्रणाली में निरंतर सुधार लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजनों से विचारों का आदान-प्रदान होता है, जिससे अन्य राज्यों के बेस्ट प्रैक्टिसेज को समझकर झारखण्ड में लागू करने का अवसर मिलता है। हमारा मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को एकदम निचले स्तर तक पहुँचाकर अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ सुनिश्चित करना है।
यह 10-दिवसीय गहन प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर्स की तकनीकी एवं व्यावहारिक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि करेगा, जिससे भविष्य में राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और एकीकृत स्वास्थ्य सुविधाएँ सुलभ कराई जा सकेंगी।
अभियान निदेशक ने आगे बताया कि सहियाओं के कार्यों को अधिक सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न राज्यों के सफल मॉडल्स का अध्ययन किया जा रहा है। सहियाओं के लिए हेल्प डेस्क और 24×7 ऑनलाइन मार्गदर्शन व्यवस्था जैसी सुविधाओं पर विचार किया जा रहा है, ताकि सहियाएँ मास्टर ट्रेनर से हर स्तर पर सीधा मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें। साथ ही, अभियान निदेशक ने डिजिटल कार्य को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने बेहतर डिजिटल कार्य करने वाली स्वास्थ्य सहियाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें मास्टर ट्रेनर बनाने का स्पष्ट निर्देश दिया। इसके साथ ही, उन्होंने सहियाओं की सुगमता और बेहतर समझ के लिए पूरे ट्रेनिंग मॉड्यूल को सरल भाषा हिंदी में तैयार करने का निर्देश दिया। सहियाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म और ‘सहिया ऐप’ का प्रभावी उपयोग किया जाएगा, जिससे एआई के माध्यम से डेटा विश्लेषण, डिजिटल एंट्री और एसएमएस अलार्म जैसी सुविधाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और क्रियान्वयन को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान सीपीएचसी के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. मुकेश मिश्र, डॉ. कमलेश, आईईसी के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. राहुल किशोर सिंह एवं डॉ पुष्पा, राज्य कार्यक्रम समन्वयक अकय मिंज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. मुकेश मिश्र ने व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखरेख के सफल क्रियान्वयन में एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मास्टर ट्रेनर्स के सशक्त होने से गाँव के अंतिम छोर पर खड़ी सहिया को तकनीकी एवं रणनीतिक संबल मिलेगा, जिससे समुदाय स्तर पर मातृ-शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और प्राथमिक देखभाल की दिशा में व्यापक सुधार होगा।
वहीं डॉ. राहुल किशोर सिंह ने बताया कि इस प्रशिक्षण से फील्ड-स्तरीय चुनौतियों के समाधान तथा विभिन्न राज्यों से आए अनुभवों के बेहतर समन्वय पर बल मिलेगा।
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