झारखंड का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण दो दिवसीय मुड़मा जतरा मंगलवार से आरंभ हो रहा है। आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं तथा मेला क्षेत्र को पूरी तरह सजा दिया गया है। इस जतरा में राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा देश के अन्य राज्यों तथा पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है। मेले की भव्यता और उमड़ने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और आयोजन समिति ने सुरक्षा व यातायात के कड़े प्रबंध किए हैं।
शक्ति खूंटा की पूजा से होगी विधिवत शुरुआत
मेले के पहले दिन यानी 27 अक्टूबर को इसकी शुरुआत पारंपरिक अनुष्ठान के साथ होगी। सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा की अगुवाई में 40 पड़हा के पाहन-पुजार और विभिन्न धार्मिक अगुआ जतरा स्थल पर पहुंचेंगे। यहां सबसे पहले ‘शक्ति खूंटा’ की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी। इस धार्मिक अनुष्ठान के संपन्न होने के बाद ही मेले की आधिकारिक शुरुआत मानी जाएगी। आदिवासी संस्कृति और प्रकृति पूजा के प्रतीक इस महापर्व में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का जतरा स्थल पर पहुंचना शुरू हो गया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रण
ऐतिहासिक राजी पड़हा राजकीय मुड़मा जतरा-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है। सोमवार को झारखंड मंत्रालय में ‘ऐतिहासिक राजी पड़हा जतरा समिति, मुड़मा’ के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें इस ऐतिहासिक आयोजन में सम्मिलित होने का आग्रह पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री को आमंत्रण देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में सरना धर्मगुरु बंधन तिग्गा और केंद्रीय सरना समिति, भारत के अध्यक्ष नारायण उरांव भी विशेष रूप से उपस्थित थे।
चार सेक्टरों में बंटा मेला क्षेत्र, ड्रोन और सीसीटीवी से होगी निगरानी
मेले में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद रखा गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे मेला क्षेत्र को सुरक्षा की दृष्टि से चार प्रमुख सेक्टरों में विभाजित किया गया है।
- मेला परिसर की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है, जिसमें ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी सर्विलांस मुख्य रूप से शामिल हैं।
- सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए कुल 21 गश्ती दल (पेट्रोलिंग टीम) लगातार मेला क्षेत्र में गश्त करते रहेंगे।
- किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जतरा स्थल पर एक विशेष नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) बनाया गया है।
- प्रशासन के साथ-साथ ‘राजी पड़हा जतरा समिति’ के दो हजार से अधिक स्वयंसेवक भी मुस्तैद रहेंगे जो व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में पुलिस प्रशासन का भरपूर सहयोग करेंगे।
यातायात व्यवस्था में बदलाव: एनएच-75 का रूट डायवर्ट
मुड़मा जतरा के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने यातायात मार्ग में विशेष परिवर्तन किया है। 27 और 28 अक्टूबर को एनएच-75 पर यातायात मार्ग बदला गया है:
- लोहरदगा की ओर से आने वाले सभी वाहन टांगरबसली मोड़ से बेड़ो होते हुए रांची की ओर जाएंगे।
- वहीं, रांची की ओर से आने वाले वाहन काठीटांड से ठाकुरगांव और बुढ़मू होते हुए अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचेंगे। प्रशासन ने यात्रियों और चालकों से अपील की है कि वे असुविधा से बचने के लिए इन वैकल्पिक मार्गों का ही प्रयोग करें।
मनोरंजन के साधन और समापन समारोह का मुख्य आकर्षण
मेले में पारंपरिक आयोजनों के साथ-साथ आम जनमानस के मनोरंजन का भी पूरा ध्यान रखा गया है। मेला परिसर में विभिन्न प्रकार के झूले, रोमांचक ‘मौत का कुआं’, जादू के खेल और बच्चों के लिए मनोरंजन के तमाम साधनों के साथ-साथ सैकड़ों की संख्या में दुकानें सज चुकी हैं।
इस दो दिवसीय ऐतिहासिक आयोजन का समापन 28 अक्टूबर को होगा। समापन के दिन मुड़मा जतरा का मुख्य आकर्षण एक भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा होगी। इस दिन 40 पड़हा के पारंपरिक निशान, लकड़ी के बने हाथी-घोड़े और अन्य सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ एक विशाल जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेंगे। यह जतरा न केवल आदिवासी संस्कृति का अनूठा संगम है, बल्कि आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का एक बड़ा मंच भी है।
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