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रांची। सहायक लोक अभियोजक यानी एपीपी की नियमित एवं बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए फिलहाल सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) को शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख निर्धारित की है। ऐसे में एपीपी परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की नजर अब अगली सुनवाई पर टिक गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से सरकार द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की गई है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि याचिकाकर्ताओं के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा यानी पीटी का परिणाम पहले ही जारी किया जा चुका है और इसके बाद मुख्य परीक्षा आयोजित की जानी थी। लेकिन राज्य सरकार की ओर से पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया। अब अभ्यर्थी इसी फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे हैं।
क्या है एपीपी परीक्षा का पूरा मामला
सहायक लोक अभियोजक के पदों पर नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसमें नियमित और बैकलॉग पदों को शामिल किया गया था। परीक्षा प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों ने आवेदन किया और प्रारंभिक परीक्षा में हिस्सा लिया।

प्रारंभिक परीक्षा यानी पीटी के बाद उसका परिणाम भी जारी कर दिया गया। परिणाम जारी होने के बाद चयन प्रक्रिया के अगले चरण के रूप में मुख्य परीक्षा आयोजित की जानी थी। इसी बीच सरकार की ओर से परीक्षा से संबंधित अधिसूचना को रद्द कर दिया गया।
सरकार के इस फैसले के बाद परीक्षा प्रक्रिया में शामिल कुछ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से सरकार की अधिसूचना को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की है।
उनका कहना है कि जब परीक्षा की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम भी जारी किया जा चुका था, तब पूरी प्रक्रिया को रद्द किए जाने से उन अभ्यर्थियों के हित प्रभावित हो रहे हैं, जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा में भाग लिया था।
हाईकोर्ट ने तत्काल रोक लगाने से किया इनकार
शुक्रवार को जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की गई।
अदालत ने पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसका मतलब यह है कि अभी परीक्षा की आगे की प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने का कोई अंतरिम आदेश अदालत की ओर से नहीं दिया गया है।
हालांकि अदालत ने मामले को समाप्त नहीं किया है। राज्य सरकार और जेपीएससी को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। जवाब मिलने के बाद अदालत मामले के विभिन्न पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी।
इससे स्पष्ट है कि फिलहाल एपीपी परीक्षा को लेकर अंतिम फैसला नहीं आया है। अगली सुनवाई में सरकार और आयोग का पक्ष सामने आने के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार और जेपीएससी को देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग को शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सरकार को परीक्षा रद्द करने से जुड़े अपने फैसले का आधार अदालत के सामने रखना होगा।
वहीं जेपीएससी को परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों और अपनी भूमिका के संबंध में अदालत को जानकारी देनी होगी। अदालत के समक्ष यह भी स्पष्ट होगा कि प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के बाद मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया किस स्थिति में थी और सरकार द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने के बाद आयोग की ओर से क्या कदम उठाए गए।
सरकार और जेपीएससी के जवाब के बाद अदालत यह तय करेगी कि याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर आगे किस तरह विचार किया जाना है।
याचिकाकर्ताओं ने अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके जरिए एपीपी परीक्षा से जुड़े विज्ञापन संख्या 05/2025 और 06/2025 को रद्द किया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह पक्ष रखा गया कि प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जा चुकी है और उसका परिणाम भी जारी हो चुका है। मुख्य परीक्षा का आयोजन बाकी था। ऐसे में पूरी परीक्षा प्रक्रिया को समाप्त करने के फैसले पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों ने आवेदन से लेकर प्रारंभिक परीक्षा तक निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया है। परिणाम जारी होने के बाद उन्हें आगे की चयन प्रक्रिया में शामिल होने की उम्मीद थी।
सरकार की अधिसूचना के बाद यह प्रक्रिया रुक गई। इसी कारण अभ्यर्थियों ने अदालत से राहत की मांग की है।
प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने का मुद्दा अहम
इस मामले में प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होना याचिकाकर्ताओं की दलील का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अभ्यर्थियों की ओर से अदालत को बताया गया कि पीटी का परिणाम पहले ही जारी हो चुका था।
आमतौर पर प्रतियोगिता परीक्षा की चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। प्रारंभिक परीक्षा के बाद सफल अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में शामिल होते हैं और इसके बाद आगे की चयन प्रक्रिया होती है। ऐसे में पीटी का परिणाम जारी होने के बाद मुख्य परीक्षा का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए सरकार द्वारा पूरी प्रक्रिया रद्द किया जाना बड़ा बदलाव है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने परीक्षा में शामिल होने के लिए समय और संसाधन लगाए हैं तथा प्रारंभिक चरण में सफल होने के बाद वे अगले चरण की तैयारी कर रहे थे।
अब अदालत के सामने सरकार के फैसले और अभ्यर्थियों की दलीलों दोनों पर विचार किया जाना है।
मुख्य परीक्षा का इंतजार कर रहे थे अभ्यर्थी
प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद सफल अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि मुख्य परीक्षा आयोजित की जानी थी, लेकिन सरकार ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया।
इससे अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हुई। जिन उम्मीदवारों ने पीटी में सफलता हासिल की थी, उनके लिए आगे की प्रक्रिया रुक गई।
अदालत में दाखिल याचिकाओं के जरिए अब यही मांग की गई है कि सरकार की अधिसूचना को निरस्त किया जाए और परीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया जाए।
हालांकि हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मांग पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी है।
किन वकीलों ने रखा पक्ष
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अनुराग कश्यप ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया और सरकार की ओर से जारी अधिसूचना से जुड़े मुद्दों को अदालत के सामने रखा।
उन्होंने अदालत को बताया कि प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी हो चुका है और मुख्य परीक्षा आयोजित की जानी थी। सरकार की ओर से पूरी प्रक्रिया रद्द करने के बाद आगे की परीक्षा पर रोक लग गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से सरकार की अधिसूचना को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई।
वहीं जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने पैरवी की। आयोग की ओर से मामले में अपना पक्ष रखा गया।
कई अभ्यर्थियों ने मिलकर दायर की याचिका
मामले में कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया है। रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ताओं में आदित्य भास्कर, आनंद सिंह, अनिरुद्ध ओझा और आलोक रंजन समेत अन्य अभ्यर्थी शामिल हैं।
इन अभ्यर्थियों ने सरकार की ओर से जारी अधिसूचना को चुनौती दी है। उनका मुख्य आग्रह परीक्षा रद्द करने के फैसले को निरस्त कर परीक्षा की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से जुड़ा है।
अभ्यर्थियों का पक्ष है कि वे पहले ही चयन प्रक्रिया के एक चरण में शामिल हो चुके हैं और प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम भी जारी हो चुका है। ऐसे में मुख्य परीक्षा से पहले पूरी प्रक्रिया को समाप्त किए जाने के फैसले की न्यायिक समीक्षा जरूरी है।
सरकार का पक्ष अगली सुनवाई में सामने आएगा
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जेपीएससी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसलिए सरकार का विस्तृत पक्ष अब अगली सुनवाई में सामने आने की उम्मीद है।
सरकार यह बताएगी कि परीक्षा से संबंधित अधिसूचना को रद्द करने का निर्णय किन कारणों से लिया गया। वहीं जेपीएससी परीक्षा की स्थिति और संबंधित प्रशासनिक पहलुओं पर अपना जवाब दाखिल करेगा।
अदालत के समक्ष दोनों पक्षों के जवाब आने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
इससे पहले अदालत ने तत्काल रोक लगाने की मांग को स्वीकार नहीं किया है। इसलिए फिलहाल सरकार का परीक्षा रद्द करने संबंधी फैसला प्रभावी बना हुआ है।
विज्ञापन संख्या 05/2025 और 06/2025 पर विवाद
याचिका का एक प्रमुख आधार एपीपी परीक्षा से संबंधित विज्ञापन संख्या 05/2025 और 06/2025 हैं। इन्हीं विज्ञापनों से जुड़ी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द करने संबंधी सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से इन विज्ञापनों को रद्द करने के फैसले को उचित नहीं बताया गया है। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी और प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
अब अदालत को यह देखना है कि सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका में उठाए गए कानूनी और प्रशासनिक सवालों पर क्या निर्णय लिया जाए।
परीक्षा रद्द होने से अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ी
प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थी लंबे समय तक तैयारी करते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी का अलग चरण शुरू होता है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने का फैसला अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण होता है।
एपीपी परीक्षा के मामले में भी प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम आने के बाद अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन सरकार की अधिसूचना के बाद पूरी प्रक्रिया पर विराम लग गया।
अब अदालत की अगली सुनवाई से अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
अदालत के आदेश के बाद फिलहाल क्या स्थिति है?
हाईकोर्ट ने शुक्रवार की सुनवाई में तीन महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट की हैं। पहली, परीक्षा रद्द करने की सरकारी अधिसूचना पर फिलहाल रोक नहीं लगाई गई है। दूसरी, राज्य सरकार और जेपीएससी को शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करना होगा। तीसरी, मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख तय की गई है।
इसका अर्थ है कि अभी परीक्षा की आगे की प्रक्रिया को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अभ्यर्थियों को अगली सुनवाई का इंतजार करना होगा।
24 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। उस दिन राज्य सरकार और जेपीएससी की ओर से अदालत में अपना जवाब प्रस्तुत किया जाना है।
सरकार और आयोग के जवाब के बाद अदालत याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए मुद्दों पर आगे सुनवाई करेगी। इस सुनवाई के बाद एपीपी परीक्षा को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
अभ्यर्थियों के लिए अगली सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल मुख्य परीक्षा आयोजित होने को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।
अंतिम फैसला अभी बाकी
हाईकोर्ट द्वारा परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना पर तत्काल रोक नहीं लगाए जाने का मतलब यह नहीं है कि मामले का अंतिम फैसला सरकार के पक्ष में हो गया है। अदालत ने मामले में सरकार और जेपीएससी से जवाब मांगा है और आगे सुनवाई की तारीख तय की है।
इसलिए अभी अंतिम निर्णय आना बाकी है। आगे की कार्रवाई अदालत में प्रस्तुत होने वाले दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगी।
अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट के अगले आदेश पर
एपीपी परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के लिए अब अगली सुनवाई सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होगी। प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद मुख्य परीक्षा का इंतजार कर रहे उम्मीदवार यह जानना चाहते हैं कि परीक्षा प्रक्रिया का भविष्य क्या होगा।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर अदालत का अंतिम रुख आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या सरकार का फैसला बरकरार रहेगा।
फिलहाल हाईकोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए सरकार और जेपीएससी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
क्या हो सकता है आगे?
आगे की स्थिति मुख्य रूप से तीन चीजों पर निर्भर करेगी। पहला, राज्य सरकार अपने फैसले के समर्थन में क्या कारण अदालत के सामने रखती है। दूसरा, जेपीएससी परीक्षा प्रक्रिया और प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम से जुड़े तथ्यों को किस तरह प्रस्तुत करता है। तीसरा, याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर अदालत का क्या रुख रहता है।
24 सितंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान इन पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
फिलहाल एपीपी परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों को अदालत के अगले आदेश का इंतजार करना होगा।
निष्कर्ष
झारखंड में सहायक लोक अभियोजक की नियमित एवं बैकलॉग प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर विवाद अब हाईकोर्ट पहुंच चुका है। सरकार द्वारा परीक्षा प्रक्रिया रद्द किए जाने के फैसले को अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है। उनका कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा आयोजित हो चुकी है और उसका परिणाम भी जारी किया जा चुका है, जबकि मुख्य परीक्षा आयोजित होनी बाकी थी।
शुक्रवार को हुई सुनवाई में जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सरकार की अधिसूचना पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन राज्य सरकार और जेपीएससी को शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
इस सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि एपीपी परीक्षा की आगे की प्रक्रिया को लेकर अदालत का क्या रुख रहता है। तब तक परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार व जेपीएससी के जवाब पर रहेगी।