नेमरा (रामगढ़), झारखंड।

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा, झारखंड के नौ भाषाओं के संयोजकों ने झारखंड आंदोलन के महानायक एवं दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन तथा झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी की माता स्वर्गीय श्रीमती रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए उनके पैतृक गांव नेमरा पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने दोनों महान विभूतियों के जीवन, संघर्ष, सामाजिक योगदान और झारखंड की अस्मिता, संस्कृति एवं पहचान को मजबूत करने में उनकी भूमिका को याद किया।

श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन का जीवन झारखंड के जल, जंगल, जमीन, आदिवासी-मूलवासी अधिकारों तथा सामाजिक न्याय के संघर्ष को समर्पित रहा। उन्होंने झारखंड राज्य के निर्माण के लिए लंबे समय तक आंदोलन किया और यहां के लोगों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा की। उनका संघर्ष, विचार और जनसेवा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

प्रतिनिधियों ने स्वर्गीय श्रीमती रूपी सोरेन को भी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि परिवार और समाज के प्रति उनके योगदान को सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा। नेमरा की धरती झारखंड के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास में विशेष महत्व रखती है। यहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करना मोर्चा के सदस्यों के लिए भावनात्मक एवं सम्मानपूर्ण क्षण रहा।

नौ भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि झारखंड की पहचान केवल उसके प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से भी है। राज्य की भाषाओं का संरक्षण करना झारखंड आंदोलन के मूल उद्देश्यों और सांस्कृतिक अस्मिता को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मोर्चा के अनुसार, झारखंड की भाषाओं को शिक्षा, रोजगार, प्रशासन और सामाजिक जीवन में उचित स्थान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे किसी समाज के इतिहास, ज्ञान, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान की वाहक होती हैं। यदि किसी भाषा का प्रयोग नई पीढ़ी में कम होता है, तो उससे जुड़ी लोककथाएं, लोकगीत, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर भी प्रभावित होती हैं।

इसी उद्देश्य से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा झारखंड की नौ प्रमुख भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और अधिकारों को लेकर जागरूकता अभियान चला रहा है। इनमें कुड़माली, नागपुरी, खोरठा, कुड़ुख, हो, मुंडारी, खड़िया, संताली और पंचपरगनिया भाषाएं शामिल हैं।

मोर्चा के प्रतिनिधियों ने संकल्प व्यक्त किया कि इन भाषाओं के विकास, शैक्षणिक विस्तार, साहित्यिक गतिविधियों और नई पीढ़ी तक इनके हस्तांतरण के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। साथ ही, झारखंड की भाषाई विविधता को सम्मान दिलाने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और भाषा प्रेमियों को एकजुट किया जाएगा।

प्रतिनिधियों ने कहा कि स्वर्गीय शिबू सोरेन के संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेते हुए झारखंड की भाषाओं, संस्कृति और सामाजिक अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा।

अंत में मोर्चा के सदस्यों ने दोनों दिवंगत आत्माओं के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों पर चलने तथा झारखंड की भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
मौके पर नागपुरी प्रदीप उरांव , कुड़माली से पप्पू कुमार महतो, कुड़ुख से जगदीश उरांव,संथाली सुनील हेंब्रम, पंचपरगनिया सहदेव,,हो मुंडारी में महेंद्र, लेबेयान खोरठा , परशुराम मानकी।

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