नाइट शिफ्ट और ब्रेस्ट कैंसर
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई महिलाओं को नौकरी के कारण रात में भी काम करना पड़ता है। आईटी, स्वास्थ्य सेवा, कॉल सेंटर, परिवहन और अन्य क्षेत्रों में नाइट शिफ्ट आम है। हालांकि, रात में काम करने के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर समय-समय पर शोध होते रहे हैं। इनमें शरीर की जैविक घड़ी और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संभावित संबंध भी शामिल है।
नाइट शिफ्ट और ब्रेस्ट कैंसर के बीच क्या संबंध है?
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने रात की शिफ्ट में काम करने को 2019 में ‘संभवतः कैंसरकारी’ (Group 2A) श्रेणी में रखा था। यह वर्गीकरण सीमित मानव साक्ष्यों और अन्य वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि नाइट शिफ्ट करने वाली हर महिला को कैंसर होगा या रात में काम करना अपने आप कैंसर का कारण साबित हो चुका है।
2025 में प्रकाशित एक समीक्षा में 2019 के बाद के 10 अध्ययनों का आकलन किया गया। इसमें लंबे समय तक या बार-बार नाइट शिफ्ट करने और ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते जोखिम के बीच कुछ संभावित संबंध के संकेत मिले। हालांकि, कई अध्ययनों में प्रतिभागियों की संख्या सीमित थी और परिणामों की पुष्टि के लिए आगे शोध की जरूरत है।

शरीर की जैविक घड़ी कैसे होती है प्रभावित?
हमारे शरीर में एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। यह नींद-जागने के चक्र, हार्मोन के स्राव और शरीर की कई अन्य प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करती है।
रात में जागकर काम करने और दिन में सोने से यह चक्र प्रभावित हो सकता है। अंधेरे में शरीर सामान्य रूप से मेलाटोनिन नामक हार्मोन बनाता है, जो नींद-जागने के चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रात में तेज रोशनी के संपर्क में रहने से इसका स्राव प्रभावित हो सकता है। वैज्ञानिक यह अध्ययन कर रहे हैं कि जैविक घड़ी में इस तरह के बदलावों का कैंसर के जोखिम से क्या संबंध है।
क्या हर नाइट शिफ्ट करने वाली महिला को खतरा है?
नहीं। शोध के नतीजे एक जैसे नहीं हैं। 2019 में प्रकाशित ब्रिटेन की एक बड़ी स्टडी में 1,02,869 महिलाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। इसमें हाल के वर्षों में नाइट शिफ्ट करने और ब्रेस्ट कैंसर के बीच कुल मिलाकर कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला।
वहीं, कुछ अन्य अध्ययनों में लंबे समय तक रात में काम करने वाली महिलाओं में संभावित बढ़े हुए जोखिम के संकेत मिले हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि नाइट शिफ्ट करने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा निश्चित रूप से तीन गुना बढ़ जाता है। जोखिम पर उम्र, पारिवारिक इतिहास, जीवनशैली और अन्य कारकों का भी प्रभाव पड़ सकता है।
नाइट शिफ्ट में काम करने वाले क्या सावधानी बरतें?
रात में काम करने वाले लोगों के लिए पर्याप्त और नियमित नींद लेना महत्वपूर्ण है। संभव हो तो सोने और जागने का समय नियमित रखें, सोने के कमरे में अंधेरा और शांत वातावरण बनाएं तथा कैफीन का सेवन सोने के समय के करीब न करें। संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और धूम्रपान से दूरी भी समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं।
महिलाओं को अपने स्तनों में नई गांठ, त्वचा में बदलाव, निप्पल से असामान्य स्राव या आकार में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन उनकी जांच कराना जरूरी है। उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग के बारे में भी डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।
निष्कर्ष
नाइट शिफ्ट और ब्रेस्ट कैंसर के बीच संभावित संबंध पर शोध जारी है। मौजूदा वैज्ञानिक प्रमाण कुछ चिंता जरूर पैदा करते हैं, लेकिन वे हर महिला के लिए निश्चित जोखिम या तीन गुना खतरे की पुष्टि नहीं करते। बेहतर नींद, स्वस्थ जीवनशैली और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना समझदारी भरा कदम है।
नाइट शिफ्ट और ब्रेस्ट कैंसर: महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के खतरे पर चिंता, जानें क्या कहती है स्टडी https://zindagijindabaad.com/special-secretary-issues-directives-on/
