9 अक्टूबर की भाषा यात्रा को लेकर जनजागरण अभियान9 अक्टूबर की भाषा यात्रा को लेकर जनजागरण अभियान

गोस्नर कॉलेज एवं रामलखन सिंह यादव महाविद्यालय में चलाया गया अभियान

झारखंड की अनूठी पहचान, उसकी माटी की खुशबू और सदियों पुरानी लोक-संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने वाली क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाएं आज अपने ही राज्य में अपने अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। इसी कड़ी में, राज्य की नौ प्रमुख भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध ‘जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा’ ने एक बड़ा जनांदोलन छेड़ा है।

आगामी 9 अक्टूबर को प्रस्तावित ऐतिहासिक ‘भाषा यात्रा’ को सफल बनाने के लिए मोर्चा के संयोजकों ने राजधानी रांची के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों—गोस्नर कॉलेज और रामलखन सिंह यादव (आरएलएसवाइ) महाविद्यालय, कोकर—में एक सघन जनजागरण अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कक्षाओं और परिसरों में जाकर विद्यार्थियों और शिक्षकों से सीधे संवाद किया और उन्हें भाषा यात्रा के व्यापक उद्देश्यों तथा सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराया।

मातृभाषा संवाद का माध्यम नहीं, झारखंड की चेतना और पहचान: मोर्चा

संवाद के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मोर्चा के संयोजकों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नागपुरी, कुड़माली, खोरठा, पंचपरगनिया, कुड़ुख, मुंडारी, संताली, हो और खड़िया केवल आम बोलचाल की भाषाएं नहीं हैं। ये नौ भाषाएं झारखंड की समृद्ध लोक-साहित्य, अनूठी परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और यहाँ के मूल समुदाय की अस्मिता का आधार स्तंभ हैं।

मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि भाषा मिटती है, तो उसके साथ पूरी संस्कृति, इतिहास और जीवन-दर्शन भी विलीन हो जाता है। इसलिए इन भाषाओं को केवल बोली तक सीमित न रखकर शिक्षा और शासन की मुख्यधारा में मजबूती से स्थापित करना बेहद जरूरी है।

अभियान की मुख्य मांगें और प्राथमिकताएं

इस जनजागरण अभियान और 9 अक्टूबर की ‘भाषा यात्रा’ के माध्यम से मोर्चा ने सरकार और संबंधित शैक्षणिक तथा प्रशासनिक संस्थानों के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • शैक्षणिक संस्थानों में पठन-पाठन और शोध: प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों तक झारखंड की इन नौ भाषाओं में पढ़ाई, अध्यापन और शोध कार्यों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
  • रोजगार के अवसरों से जुड़ाव: राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं (JPSC, JSSC आदि) में इन भाषाओं को प्राथमिकता दी जाए ताकि स्थानीय युवाओं के लिए भाषा के माध्यम से रोजगार के नए अवसर बन सकें।
  • प्रशासनिक मान्यता: राज्य के प्रशासनिक कार्यों और सरकारी कामकाज में इन क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं को उनका उचित और सम्मानजनक स्थान मिले।

युवाओं से अपील: मातृभाषा के प्रति जगाएं स्वाभिमान

महाविद्यालय परिसरों में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए संयोजकों ने युवाओं से अपनी-अपनी मातृभाषा पर गर्व करने और उसके दैनिक प्रयोग को बढ़ाने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों से कटना नुकसानदेह है। युवाओं को आगे आकर भाषा और संस्कृति के इस संरक्षण आंदोलन का नेतृत्व करना होगा।

मोर्चा के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि 9 अक्टूबर को निकलने वाली ‘भाषा यात्रा’ किसी एक विशेष भाषा, वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है। यह पूरे झारखंड की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान को सहेजने और उसे नई ऊर्जा देने का एक लोकतांत्रिक और सामूहिक प्रयास है। इस यात्रा के माध्यम से भाषा प्रेमियों की जायज मांगों को अनुशासित एवं शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाया जाएगा।

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