===========================

*मुख्यमंत्री ने चालू वित्तीय वर्ष के कार्य प्रगति एवं वित्तीय वर्ष 2026-27 के कार्य योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कई अहम दिशा-निर्देश दिए।*

===========================

*★ तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था से कार्यों गति प्रदान करें*

*★ शहरी श्रमिकों के लिए जगह चिन्हित कर दाल भात केंद्र स्थापित करें*

          *श्री हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखण्ड।* 

===========================

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में आज खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विभाग द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं में निरंतर प्रगति, खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता और आगामी वित्तीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य सरकार की प्राथमिकता है। राज्य सरकार का ध्येय है कि राज्यवासियों के जीवन स्तर को किस प्रकार उन्नत बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि खाद्य वितरण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और जनसुलभ बनाने के लिए यह आवश्यक है कि आधुनिक तकनीकी एवं नवाचार को योजनाओं के संचालन में शामिल किए जाएं। राज्य सरकार के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा संचालित योजनाएं राज्यवासियों की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ गरीबी उन्मूलन, सामाजिक समानता और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। बैठक में खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ० इरफान अंसारी उपस्थित रहे।

*जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल*

मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.), राशन कार्ड वितरण, खाद्यान्न आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण तथा विभाग की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन, उपलब्धि, आगामी कार्ययोजना तथा निर्धारित लक्ष्यों की विस्तृत समीक्षा के दौरान विभागीय योजनाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए जीवन रेखा के समान है। इसलिए इसमें किसी तरह की शिथिलता नहीं होनी चाहिए। राज्य के पात्र लाभुकों तक खाद्यान्न की समयबद्ध, पारदर्शी एवं निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। राशन कार्ड संबंधित मामलों का शीघ्र निष्पादन, नए पात्र परिवारों को योजनाओं से जोड़ने तथा अपात्र लाभुकों की पहचान कर व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करते हुए  खाद्यान वितरण प्रणाली में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। 

*अर्बन लेबर के लिए जगह चिन्हित कर दाल भात केंद्र स्थापित करें*

मुख्यमंत्री दाल भात योजना के अंतर्गत 370 केंद्र चलाए जा रहे हैं। लोगों से 5 रुपए की राशि लेकर भरपेट भोजन कराया जाता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि दाल भात केंद्रों की संख्या बढ़ाएं। राज्य के भीतर कार्यरत शहरी श्रमिकों  के लिए जगह चिन्हित कर दाल भात केंद्र स्थापित करें। साथ ही मॉडल दाल-भात केन्द्र बनाएं, ताकि जरूरतमंद व्यक्तियों को भरपेट भोजन उपलब्ध हो सके। विशिष्ट जनजाति खाद्यान्न सुरक्षा योजना (पीवीटीजी डाकिया योजना) की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डोर स्टेप के तहत पीवीटीजी परिवारों मिलने वाले खाद्यान्न सभी को मिलता रहे, यह सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री  ने समीक्षा के दौरान पाया कि 60 लाख क्विंटल लक्ष्य के विरुद्ध झारखंड में 49 लाख 25 हजार क्विंटल धान अधिप्राप्ति हुई। मुख्यमंत्री ने सरकार को धान बिक्री करने वाले कारीमाटी के किसान निगम प्रसाद उपाध्याय से ऑनलाइन बातचीत कर धान बिक्री एवं उसके एवज में हुए भुगतान की जानकारी ली। किसान ने बड़े उत्साह के साथ मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने 160 क्विंटल धान पैक्स के माध्यम से बिक्री की थी, जिसका भुगतान एक ही दिन में मिल गया है। 

मुख्यमंत्री ने गोदाम मरम्मती एवं नए गोदाम निर्माण की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए गोदाम में अनाज के बेहतर रखरखाव का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने  2026-27 हेतु प्रस्तावित कार्य योजनाओं की समीक्षा के दौरान योजनाओं को ससमय पूर्ण करने का निर्देश दिया। उन्होंने सोना- सोवरन धोती-साड़ी वितरण योजना, मुख्यमंत्री दाल भात वितरण योजना, मुख्यमंत्री नमक वितरण योजना आदि की विस्तृत समीक्षा की। 

*बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव श्री राजेश कुमार शर्मा सहित अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।*

===========================

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

*दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण, पत्नी श्रीमती रूपी सोरेन ने ग्रहण किया सम्मान*झारखंड की धरती के महान जननायक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा गया। यह सम्मान उनके दीर्घकालिक सामाजिक, राजनीतिक और आदिवासी अधिकारों के संघर्ष को मान्यता देता है। नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन  में आयोजित गरिमामय समारोह में उनकी पत्नी श्रीमती रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया।शिबू सोरेन ने झारखंड आंदोलन के प्रमुख वास्तुकार होने के साथ-साथ आदिवासी समाज के हक, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनके योगदान ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में वंचित समुदायों को सशक्त करने की राह दिखाई।सम्मान ग्रहण करते हुए रूपी सोरेन भावुक दिखीं और उन्होंने इसे पूरे झारखंड एवं आदिवासी समाज के लिए गर्व का क्षण बताया। इस अवसर पर देशभर के राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने दिशोम गुरु को सम्मान अर्पित करते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।सम्मान समारोह में माननीय गन्दे विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। यह सम्मान शिबू सोरेन के संघर्षमय जीवन और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

जीआई के क्षेत्र में झारखंड ने मजबूत की अपनी उपस्थिति; राज्य के 11 नए उत्पादों को मिला जीआई टैग======*झारखंड सरकार राज्य की अनूठी कला, शिल्प, कृषि उत्पादों और पारंपरिक वस्तुओं को पहचान दिलाने, उन्हें सुरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, जीआई रजिस्ट्री ने हाल ही में राज्य के 11 और महत्वपूर्ण उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया है।  इन पहलों का मुख्य उद्देश्य झारखंड के पारंपरिक उत्पादों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना, बाजार में उनकी पहचान बढ़ाना और उन्हें राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर स्थापित करना है।  *ये हैं जीआई क्लब में शामिल**झारखंड के ये उत्पाद हुए जीआई (GI) क्लब में शामिल*हाल ही में जिन उत्पादों को जीआई दर्जा दिया गया है, उनमें कुचाई सिल्क साड़ी और कपड़े, भगैया साड़ी और कपड़े, दुमका चादर बदोनी पुतुल (कठपुतली), झारखंड पंछी परहान पंछी साड़ी और कपड़े, झारखंड की टसर सिल्क साड़ियाँ और कपड़े, झारखंड डोकरा क्राफ्ट (धातु शिल्प)   झारखंड के आदिवासी आभूषण (Tribal Jewellery), झारखंड के बांस शिल्प (Bamboo Crafts), केसरिया कलाकंद, झारखंड बेनाम और झारखंड जादुपटुआ पेंटिंग् शामिल हैं। इन सभी नए जीआई टैगों का आधिकारिक प्रकाशन अगले कुछ दिनों में कर दिया जाएगा। वर्ष 2019 तक झारखंड के पास केवल एक जीआई-टैग उत्पाद (सोहराई और खोवर पेंटिंग) था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जो जीआई परिदृश्य में राज्य की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।*झारक्राफ्ट की बड़ी उपलब्धि*उद्योग विभाग, झारखंड सरकार के तहत कार्यरत झारक्राफ्ट और मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड वर्ष 2019 से ही जीआई पंजीकरण गतिविधियों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं। इसी प्रयास के तहत एक उल्लेखनीय मील का पत्थर तब हासिल हुआ, जब झारक्राफ्ट ने एक साथ तीन उत्पादों झारखंड की टसर सिल्क साड़ियाँ और कपड़े, झारखंड के आदिवासी आभूषण और झारखंड के बांस शिल्प  के लिए जीआई पंजीकरण सुरक्षित किया है। ये पंजीकरण झारखंड के कारीगरों और पारंपरिक समुदायों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की दृश्यता, प्रामाणिकता और बाजार क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएंगे। *अन्य उत्पाद भी हैं कतार में*झारखंड की यह जीआई यात्रा राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर चुकी है। इसके अतिरिक्त, कई अन्य अनूठे उत्पादों के आवेदन भी जीआई रजिस्ट्री में जमा किए गए हैं, इनमें मांदर, प्यतकर पेंटिंग, निमुचा/करनी शॉल, लाह की चूड़ियाँ, देवघर पेड़ा, रागी, रुगड़ा, धुस्का, कुसुमी लाहा, साल के बीज, महुआ का फूल और करंज के बीज शामिल हैं। राज्य में अभी भी कई और स्वदेशी उत्पादों को जीआई ढांचे के तहत लाने और राष्ट्रीय व वैश्विक बाजारों में उन्हें सही पहचान दिलाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।===========================