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पलामू, झारखंड।
पलामू जिला प्रशासन ने अवैध चिकित्सीय गतिविधियों पर शिकंजा कसते हुए मनातू प्रखंड में संचालित एक अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्र पर बड़ी कार्रवाई की है। सदर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) संजय पांडे के नेतृत्व में गठित प्रशासनिक टीम ने गुरुवार को छापेमारी कर केंद्र को सील कर दिया। निरीक्षण के दौरान केंद्र संचालक मौके से फरार मिला तथा उसका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ पाया गया। प्रशासन ने केंद्र से अल्ट्रासाउंड मशीन, मरीजों से संबंधित रजिस्टर, अभिलेख एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। मामले में PC & PNDT Act, 1994 की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

पलामू में अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
जिला प्रशासन को मनातू क्षेत्र में बिना वैध अनुमति के अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित होने की सूचना मिली थी। शिकायत के सत्यापन के बाद सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय पांडे के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम जब निर्धारित स्थल पर पहुंची तो केंद्र का मुख्य द्वार बंद मिला और उस पर ताला लगा हुआ था। प्रशासन ने संचालक से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उसका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ मिला। भवन मालिक को सूचना देने के बावजूद संचालक मौके पर नहीं पहुंचा।
इसके बाद प्रशासन ने विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए अधिकारियों एवं गवाहों की मौजूदगी में केंद्र का ताला खुलवाया और पूरे परिसर का निरीक्षण किया।
संबंधित उपयोगी लिंक
- PC & PNDT Act, 1994 (भारत सरकार): https://main.mohfw.gov.in/
- झारखंड स्वास्थ्य विभाग: https://jharkhand.gov.in/
- पलामू जिला प्रशासन: https://palamu.nic.in/
पलामू में अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक टीम को केंद्र के भीतर से अल्ट्रासाउंड मशीन, मरीजों के रजिस्टर, जांच से संबंधित रिकॉर्ड तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले। अधिकारियों ने सभी दस्तावेजों और मशीनों को जब्त कर लिया तथा पूरे केंद्र को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया।
कार्रवाई के दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई ताकि जांच के दौरान सभी साक्ष्य सुरक्षित रखे जा सकें। प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि केंद्र बिना वैध पंजीकरण एवं अनुमति के संचालित किया जा रहा था।
रजिस्टरों से कई महीनों से अवैध संचालन के संकेत
जांच के दौरान जब अधिकारियों ने जब्त किए गए रजिस्टरों और अभिलेखों का अवलोकन किया तो प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले कि केंद्र पर पिछले कई महीनों से नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड जांच की जा रही थी। यदि विस्तृत जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।
प्रशासन अब यह भी जांच करेगा कि इस केंद्र पर किए गए अल्ट्रासाउंड पूरी तरह वैध चिकित्सा प्रक्रिया के तहत थे या फिर कानून का उल्लंघन करते हुए किसी अन्य उद्देश्य से संचालित किए जा रहे थे।
PC & PNDT Act के तहत होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संबंधित संचालक के खिलाफ Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques (PC & PNDT) Act, 1994 की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह अधिनियम भ्रूण लिंग जांच एवं उससे संबंधित अवैध गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है। बिना पंजीकरण के अल्ट्रासाउंड केंद्र का संचालन करना कानूनन अपराध माना जाता है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण तथा कारावास जैसी कठोर कार्रवाई का प्रावधान है।
कई विभागों की संयुक्त टीम ने की कार्रवाई
इस छापेमारी अभियान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मनातू के चिकित्सा पदाधिकारी, थाना प्रभारी मनातू, प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-अंचल अधिकारी सहित कई प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
संयुक्त टीम ने मौके पर सभी साक्ष्यों का संग्रह किया और पूरी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप संपन्न कराया। प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन का सख्त संदेश
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में बिना अनुमति संचालित किसी भी चिकित्सा संस्थान, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब या अल्ट्रासाउंड केंद्र को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर अवैध कारोबार करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान जारी रहेगा।
प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई अवैध चिकित्सीय गतिविधि संचालित हो रही हो तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या स्वास्थ्य विभाग को दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।
निष्कर्ष
मनातू में अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्र पर की गई यह कार्रवाई जिला प्रशासन की सख्ती को दर्शाती है। बिना वैध अनुमति चिकित्सा सेवाएं संचालित करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विस्तृत जांच में और कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं तथा दोषियों के विरुद्ध कितनी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है।