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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों, ईआरओ और एईआरओ को दिया गया विशेष प्रशिक्षण, दस्तावेजों के निष्पक्ष सत्यापन और पारदर्शी प्रक्रिया पर दिया गया जोर

रांची, 31 जुलाई 2026। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने निर्वाचन सदन, रांची से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों, निर्वाचन निबंधन पदाधिकारियों (ERO), सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारियों (AERO), अतिरिक्त एईआरओ तथा उप निर्वाचन पदाधिकारियों को दावा-आपत्ति (Claims & Objections) प्रक्रिया के सफल संचालन के लिए विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया।

बैठक में बताया गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के इन्यूमरेशन चरण के पूरा होने के बाद 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक दावा-आपत्ति का चरण संचालित किया जाएगा। इस दौरान प्राप्त होने वाले सभी आवेदन, आपत्तियां और दस्तावेजों का निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से सत्यापन किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि राज्य का कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से वंचित नहीं रहना चाहिए, वहीं कोई भी विदेशी नागरिक मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके, यह सुनिश्चित करना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन करते हुए प्रत्येक आवेदन का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए।

उन्होंने बताया कि दावा-आपत्ति के दौरान मतदाता की पहचान, जन्मतिथि, सामान्य निवास स्थान तथा घोषणा-पत्र का सत्यापन संबंधित दस्तावेजों के आधार पर किया जाएगा। यदि किसी आवेदन में अन-मैप्ड रिकॉर्ड या अन्य प्रकार की तार्किक विसंगति (Logical Discrepancy) पाई जाती है तो संबंधित मतदाता को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद ईआरओ एवं एईआरओ उपलब्ध अभिलेखों और प्रमाणों के आधार पर उचित एवं तार्किक आदेश पारित करेंगे।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि 5 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद नए मतदाताओं के साथ-साथ ऐसे सभी पात्र भारतीय नागरिक, जिनका नाम किसी कारणवश मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है, वे फॉर्म-6 और आवश्यक घोषणा-पत्र के माध्यम से अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

इसके अतिरिक्त ऐसे मतदाता, जो वर्तमान में झारखंड के स्थायी निवासी हैं लेकिन उनका नाम किसी अन्य राज्य की मतदाता सूची में दर्ज है, वे फॉर्म-8 और घोषणा-पत्र भरकर अपना नाम झारखंड की मतदाता सूची में स्थानांतरित करा सकेंगे। इन सभी आवेदनों का भी ईआरओ एवं एईआरओ स्तर पर विधिवत सत्यापन किया जाएगा ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का संवैधानिक अधिकार मिल सके।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में दावा-आपत्ति प्रक्रिया के दौरान स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों की विस्तृत जानकारी भी अधिकारियों को दी गई। इनमें केंद्र एवं राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा जारी पहचान पत्र, पेंशन भुगतान आदेश (PPO), 1 जुलाई 1987 से पूर्व जारी सरकारी पहचान पत्र, जन्म प्रमाण-पत्र, पासपोर्ट, मैट्रिक अथवा अन्य शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, स्थायी निवास प्रमाण-पत्र, वन अधिकार प्रमाण-पत्र, ओबीसी, एससी, एसटी एवं अन्य जाति प्रमाण-पत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां लागू हो), परिवार रजिस्टर, सरकार द्वारा जारी भूमि या आवास आवंटन प्रमाण-पत्र तथा पूर्व विशेष गहन पुनरीक्षण की मतदाता सूची की प्रमाणित प्रति को मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा।

निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित मतदाता सूची के दस्तावेजों को सुपीरियर डॉक्यूमेंट माना जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर सत्यापन के लिए उनका उपयोग किया जा सकेगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि दावा-आपत्ति के प्रत्येक आवेदन का निस्तारण पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जाए। किसी भी पात्र नागरिक को केवल तकनीकी कारणों से मतदाता सूची से वंचित न रखा जाए, वहीं अपात्र अथवा विदेशी नागरिकों का नाम सूची में शामिल होने से भी रोका जाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए शुद्ध एवं त्रुटिरहित मतदाता सूची अत्यंत आवश्यक है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक के दौरान अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी देवदास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी धीरज कुमार ठाकुर, उप निर्वाचन पदाधिकारी (लोहरदगा) संजय कुमार, उप निर्वाचन पदाधिकारी (धनबाद) कालिदास मुंडा, अवर निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार सिंह सहित राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों के ईआरओ, एईआरओ एवं उप निर्वाचन पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

झारखंड में आगामी दिनों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। निर्वाचन आयोग का उद्देश्य है कि प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक को मतदान का अधिकार मिले तथा मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन रहे।

आधिकारिक जानकारी:
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड⁠�
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