झारखंड में हायर एजुकेशन में बड़ा बदलाव। आर्ट्स-साइंस-कॉमर्स का ढर्रा खत्म, अब 19 नए ब्रॉड डिसिप्लिन में मिलेगा एडमिशन रांची : झारखंड के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा का पुराना ढर्रा अब इतिहास बनने जा रहा है। पारंपरिक ‘आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स’ की बंदिशों को तोड़कर सूबे की शिक्षा व्यवस्था अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ चुकी है। नए सत्र से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में यूजी (UG), पीजी (PG) और वोकेशनल कोर्सों के पूरे पाठ्यक्रम को पुनर्गठित कर 19 ब्रॉड डिसिप्लिन (Broad Disciplines) में बांट दिया गया है।

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Jun 2, 2026

न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP)-2020 के तहत किए गए इस बड़े बदलाव का सीधा मकसद पढ़ाई को सिर्फ डिग्री तक सीमित न रखकर उसे सीधे स्किल, रिसर्च और रोजगार से जोड़ना है।

ये हैं वो 19 नए ‘ब्रॉड डिसिप्लिन’ जिनमें होंगे एडमिशन:
अब छात्र पारंपरिक संकायों के बजाय इन 19 क्षेत्रों में से अपनी पसंद चुन सकेंगे:

फिजिकल साइंसेज, लाइफ साइंसेज, अर्थ साइंसेज

कंप्यूटर साइंसेज, इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी

एनवायरमेंटल साइंस एंड सस्टेनेबिलिटी

मैनेजमेंट स्टडीज, कॉमर्स एंड फाइनेंस, लॉ (लीगल स्टडीज)

ह्यूमैनिटीज, सोशल साइंसेज, एजुकेशन

ट्राइबल एंड रीजनल स्टडीज, लैंग्वेज एंड लिटरेचर (भारतीय भाषाएं), फॉरेन लैंग्वेजेस

जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन

क्रिएटिव एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स

वोकेशनल एंड स्किल डेवलपमेंट स्टडीज

नई व्यवस्था की 3 सबसे बड़ी बातें: जो छात्रों का भविष्य बदल देंगी

1. मल्टीपल एंट्री-एग्जिट और ‘क्रेडिट बैंक’ की आजादी


अब किसी वजह से बीच में पढ़ाई छूटने पर साल बर्बाद नहीं होगा। छात्र पढ़ाई छोड़ने की स्थिति में भी सर्टिफिकेट या डिप्लोमा प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) को लागू किया गया है, जिससे छात्रों के क्रेडिट सुरक्षित रहेंगे और वे जरूरत पड़ने पर इन्हें दूसरे संस्थान में ट्रांसफर भी करा सकेंगे।

2. कंप्यूटर साइंस और टेक एजुकेशन पर सुपर फोकस


नई रूपरेखा में तकनीकी शिक्षा को सबसे आगे रखा गया है। कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग के तहत अब छात्रों को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे फ्यूचर-रेडी कोर्सेज की ओर मोड़ा जाएगा। BCA और MCA जैसे कोर्सेज को भी इसी तरह री-डिजाइन किया गया है ताकि छात्र सीधे इंडस्ट्री की जरूरतों के लिए तैयार हो सकें।

3. ‘एनवायरमेंटल साइंस’ बनेगा रोजगार का नया गढ़


जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन इकोनॉमी की बढ़ती मांग को देखते हुए ‘एनवायरमेंटल साइंस एंड सस्टेनेबिलिटी’ को एक स्वतंत्र ब्रॉड डिसिप्लिन बनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस सेक्टर में रिसर्च और रोजगार की अपार संभावनाएं पैदा होने वाली हैं।

बदलाव का सार: > झारखंड की उच्च शिक्षा अब रट्टाफिकेशन (रटने) की पारंपरिक विभागीय व्यवस्था से आगे बढ़कर एक लचीले, बहुविषयक (Multi-disciplinary) और रोजगार-उन्मुख मॉडल में बदल चुकी है। अब छात्र वही पढ़ेंगे, जिसकी बाजार और भविष्य को जरूरत है।

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