एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई में तीन हजार रुपये घूस लेते रंगेहाथ पकड़े गए थे रमेश चंद्र प्रसाद, कोर्ट ने लगाया 45 हजार रुपये जुर्माना
मेदिनीनगर, पलामू: भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में पलामू जिला व्यवहार न्यायालय की विशेष एंटी करप्शन ब्यूरो अदालत ने तत्कालीन विश्रामपुर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी रमेश चंद्र प्रसाद को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। एसीबी के स्पेशल जज राज कुमार मिश्र की अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत अभियुक्त को पांच वर्ष सश्रम कारावास के साथ 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी। अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
वहीं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात के तहत अदालत ने चार वर्ष सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। अदालत ने दोनों सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है।
मामला वर्ष 2014 का है। विश्रामपुर निवासी मोनीर आलम ने तत्कालीन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी रमेश चंद्र प्रसाद के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर निगरानी थाना रांची कांड संख्या 33/2014, दिनांक 15 अक्टूबर 2014 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात एवं 13(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
आरोप था कि खाद्यान्न उठाव के लिए मांगी जाती थी रिश्वत। अभियोजन के अनुसार, रमेश चंद्र प्रसाद विश्रामपुर प्रखंड में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत थे। आरोप था कि उन्होंने खाद्यान्न उठाव की अनुमति देने के एवज में अपने वैध पारिश्रमिक के अतिरिक्त प्रति क्विंटल 10 रुपये की दर से रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार प्रतिदिन तीन से चार क्विंटल खाद्यान्न का उठाव होता था और इसके एवज में कथित तौर पर तीन से चार हजार रुपये की अवैध राशि मांगी जाती थी।शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले का सत्यापन कराया और कार्रवाई की योजना बनाई।
17 अक्टूबर 2014 को तीन हजार रुपये रिश्वत लेते रमेश चंद्र प्रसाद को स्वतंत्र साक्षियों की मौजूदगी में रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के दौरान उनके दोनों हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल से धुलवाया गया, जिसमें धोवन का रंग गुलाबी हो गया। इस साक्ष्य समेत मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया।
करीब 12 वर्ष पुराने इस मामले में अदालत का फैसला भ्रष्टाचार के मामलों में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी पद पर रहते हुए अवैध तरीके से रिश्वत मांगने और लेने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का यह फैसला सरकारी तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत को भी रेखांकित करता है।
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https://www.jhpolice.gov.in/districts-locations/anti-corruption-bureau-acb-1485-1464258235
