रांची:झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की बहुप्रतीक्षित संयुक्त स्नातक स्तर प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा (CGL) के विज्ञापन और परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में इस महत्वपूर्ण मामले पर लगातार सुनवाई चली, जिसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस फैसले पर राज्य के हजारों युवाओं और परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हुई हैं।
सरकार ने कोर्ट में रखा अपना पक्षसुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने अदालत के समक्ष अपना जवाबी हलफनामा प्रस्तुत किया। सरकार ने अदालत को बताया कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां और अनियमितताएं सामने आई थीं। सीआईडी (CID) द्वारा इस मामले की गहन जांच की जा रही है और अनुसंधान के दौरान कई पुख्ता तथ्य व ‘मनी ट्रेल’ के प्रमाण मिले हैं। सरकार का तर्क था कि परीक्षा का संचालन करने वाली जिस एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई थी, उसके स्तर पर सिस्टम फेलियर हुआ और प्रश्नपत्र लीक हुए।
राज्य सरकार ने यह भी दलील दी कि लीक हुए प्रश्नपत्र और उनके उत्तर नेपाल तथा अन्य स्थानों तक अभ्यर्थियों को रटवाए जाने की बात जांच में सामने आई है। ऐसी परिस्थितियों में यह पहचान करना बेहद कठिन था कि कौन से अभ्यर्थी सही हैं और कौन दागी। परीक्षा की पवित्रता और जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए ही मंत्रिमंडल ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द करने का नीतिगत निर्णय लिया था।
हस्ताक्षेपकर्ताओं और विरोधियों की दलीलेंदूसरी ओर, मामले में जुड़े हस्तक्षेपकर्ताओं और याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद या अंतिम चरणों के दौरान इस प्रकार अचानक विज्ञापन रद्द करना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। वकीलों ने आरोप लगाया कि यह निर्णय बिना किसी पुख्ता और ठोस आधार के केवल राजनीतिक दबाव और आंदोलनरत छात्रों को संतुष्ट करने के उद्देश्य से लिया गया था।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया कि जिस एजेंसी को परीक्षा कराने का जिम्मा दिया गया था, उसकी पृष्ठभूमि की पूरी जांच आयोग स्तर पर क्यों नहीं की गई। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया में कथित तौर पर सामने आए किंगपिन और अन्य आरोपियों की संलिप्तता का हवाला देते हुए अदालत के समक्ष विभिन्न कानूनी पहलुओं पर चर्चा की गई।
न्यायपालिका के निर्णय पर टिकी उम्मीदेंझारखंड हाईकोर्ट के इस सुरक्षित रखे गए फैसले से यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने का निर्णय कानूनी रूप से कितना सही है। इस कानूनी विवाद के हल होने के बाद ही यह तय होगा कि राज्य में आगामी नियुक्तियों का भविष्य क्या होगा और क्या नए सिरे से परीक्षा आयोजित की जाएगी या पूर्व की प्रक्रिया पर कोई राहत मिलेगी। अदालत के इस संभावित फैसले से राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य की दिशा तय होने की उम्मीद है।
