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रांची: राजधानी रांची में आवासीय अपार्टमेंट के फ्लैटों को अलग-अलग लोगों को बेड के हिसाब से किराये पर देने या कुछ घंटों अथवा कुछ दिनों के लिए शॉर्ट-स्टे के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर कानूनी और सुरक्षा से जुड़े सवाल उठ रहे हैं। एक स्थानीय समाचार रिपोर्ट में हाईकोर्ट के अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा के हवाले से कहा गया है कि यदि किसी आवासीय अपार्टमेंट में इस तरह की गतिविधि चल रही है और उससे अपार्टमेंट की मूल आवासीय प्रकृति प्रभावित हो रही है, तो संबंधित पुलिस थाना या नगर निगम में शिकायत की जा सकती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केवल फ्लैट को इस तरह इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार मकान मालिक की जिम्मेदारी भी बन सकती है, खासकर तब जब मालिक को इस गतिविधि की जानकारी हो और वह इसे जारी रहने दे। हालांकि किसी खास फ्लैट या व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों, लाइसेंस, भवन के स्वीकृत उपयोग और लागू कानूनों की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 में नगर क्षेत्र में गैर-आवासीय उपयोग के लिए नगरपालिका लाइसेंस का प्रावधान है। अधिनियम की धारा 455 के अनुसार निर्धारित गैर-आवासीय उपयोग के लिए नगरपालिका लाइसेंस जरूरी है और ऐसा लाइसेंस तभी दिया जा सकता है जब उपयोग कानून, नियमों और अन्य लागू प्रावधानों के अनुरूप हो।
वहीं धारा 317 में होटल या लॉजिंग हाउस के रूप में परिसर के इस्तेमाल के लिए लाइसेंस की आवश्यकता का उल्लेख है। इस प्रावधान के तहत बिना निर्धारित लाइसेंस के ऐसे उपयोग पर नगरपालिका कार्रवाई कर सकती है।
आवासीय फ्लैट और शॉर्ट-स्टे के इस्तेमाल का मुद्दा क्या है?
आमतौर पर किसी अपार्टमेंट में खरीदा गया फ्लैट आवासीय उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाता है। परिवार वहां रह सकता है, किरायेदार लंबे समय के लिए रह सकते हैं और मालिक अपनी संपत्ति को निर्धारित नियमों के तहत किराये पर दे सकता है।
लेकिन समस्या उस समय सामने आ सकती है जब आवासीय फ्लैट को नियमित रूप से ऐसी व्यवस्था में बदल दिया जाए, जिसमें अलग-अलग लोगों को कुछ घंटे, एक रात या कुछ दिनों के लिए कमरा या बेड उपलब्ध कराया जाए और यह गतिविधि किसी होटल, लॉज या अन्य आतिथ्य व्यवसाय की तरह संचालित होने लगे।
ऐसे मामलों में केवल किरायेदारी का सवाल नहीं रहता। यहां यह देखना जरूरी हो जाता है कि फ्लैट का वास्तविक उपयोग क्या है, क्या इसके लिए आवश्यक नगरपालिका लाइसेंस लिया गया है, भवन का स्वीकृत उपयोग क्या है, सोसाइटी के नियम क्या कहते हैं और सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
रांची नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट भी बताती है कि उसका मार्केट सेक्शन विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है और हॉस्टल, लॉज, मैरिज/बैंक्वेट हॉल और धर्मशाला के पंजीकरण का काम करता है। निगम के अनुसार लॉज, हॉस्टल, बैंक्वेट/मैरिज हॉल और धर्मशाला का पंजीकरण राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं के आधार पर किया जाता है।
यही वजह है कि किसी आवासीय फ्लैट को होटल या लॉज जैसी व्यावसायिक गतिविधि के लिए इस्तेमाल करने से पहले संबंधित अनुमति और लाइसेंस की स्थिति देखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
क्या हर Short Stay अपने आप गैरकानूनी है?
यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है। किसी व्यक्ति का अपना फ्लैट कुछ समय के लिए किसी दूसरे व्यक्ति को किराये पर देना और उसे नियमित होटल/लॉजिंग व्यवसाय की तरह चलाना एक ही बात नहीं है।
किसी खास मामले में शॉर्ट-स्टे व्यवस्था कानूनी है या नहीं, यह केवल “एक-दो दिन के लिए कमरा दिया गया” देखकर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए कई बातों की जांच करनी होगी।
मसलन:
- फ्लैट का स्वीकृत उपयोग क्या है?
- क्या नगरपालिका का आवश्यक लाइसेंस लिया गया है?
- क्या संबंधित व्यवसाय के लिए अन्य विभागों की अनुमति आवश्यक है?
- क्या सोसाइटी के उपनियम इसकी अनुमति देते हैं?
- क्या आग और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है?
- क्या आने-जाने वाले लोगों का रिकॉर्ड रखा जाता है?
- क्या यह व्यक्तिगत किरायेदारी है या नियमित व्यावसायिक गतिविधि?
- क्या परिसर को होटल/लॉजिंग की तरह संचालित किया जा रहा है?
इन सवालों के जवाब के आधार पर संबंधित प्राधिकरण कार्रवाई तय कर सकते हैं।
इसलिए खबर के शीर्षक में “पूरी तरह अवैध” शब्द को व्यापक कानूनी निष्कर्ष के रूप में नहीं लेना चाहिए। समाचार रिपोर्ट में अधिवक्ता ने आवासीय अपार्टमेंट में बेडवाइज और शॉर्ट-स्टे व्यवस्था को लेकर कानूनी आपत्ति और शिकायत की संभावना बताई है। अंतिम कानूनी स्थिति किसी विशिष्ट संपत्ति के दस्तावेजों और वास्तविक उपयोग पर निर्भर करेगी।
झारखंड नगरपालिका अधिनियम में लाइसेंस का प्रावधान
झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 455 गैर-आवासीय उपयोग के लिए नगरपालिका लाइसेंस से संबंधित है। इसके अनुसार निर्धारित गैर-आवासीय उपयोग के लिए परिसर का इस्तेमाल नगरपालिका लाइसेंस के बिना या लाइसेंस की शर्तों के विपरीत नहीं किया जा सकता।
कानून में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी गतिविधि के लिए राज्य सरकार या किसी अन्य वैधानिक संस्था से लाइसेंस या अनुमति आवश्यक है, तो नगरपालिका लाइसेंस की प्रक्रिया में उस अनुमति को भी ध्यान में रखा जा सकता है। लाइसेंस की शर्तों में जीवन, स्वास्थ्य, संपत्ति की सुरक्षा और किसी प्रकार के उपद्रव को रोकने से संबंधित उपाय शामिल किए जा सकते हैं।
इसका सीधा मतलब यह है कि किसी आवासीय संपत्ति को व्यावसायिक गतिविधि के लिए इस्तेमाल करने का सवाल केवल मालिक और किरायेदार के बीच का निजी मामला नहीं रह जाता। यदि गतिविधि नगरपालिका के लाइसेंस वाले दायरे में आती है तो स्थानीय निकाय की भूमिका भी बन सकती है।
होटल या लॉजिंग हाउस के रूप में इस्तेमाल पर अलग प्रावधान
झारखंड नगरपालिका अधिनियम की धारा 317 में होटल या लॉजिंग हाउस के रूप में परिसर के इस्तेमाल का विशेष उल्लेख है। इसमें कहा गया है कि नगरपालिका क्षेत्र में किसी परिसर का उपयोग होटल या लॉजिंग हाउस के रूप में निर्धारित लाइसेंस की शर्तों के अनुसार ही किया जा सकता है।
इस प्रावधान के तहत नगरपालिका आयुक्त या कार्यपालक पदाधिकारी को परिसर का निरीक्षण करने की शक्ति भी दी गई है। यदि उपयोग कानून के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी उचित उपाय करने या उस उपयोग को बंद करने के लिए नोटिस जारी कर सकते हैं।
यही प्रावधान इस पूरी बहस का महत्वपूर्ण कानूनी आधार बनता है।
नगर निगम की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
रांची नगर निगम शहर की विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। निगम की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार मार्केट सेक्शन ट्रेड लाइसेंस जारी करने के साथ-साथ कई प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों के पंजीकरण से संबंधित कार्य करता है।
निगम के अनुसार लॉज, हॉस्टल, बैंक्वेट हॉल/मैरिज हॉल और धर्मशाला का पंजीकरण किया जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि रहने की सुविधा उपलब्ध कराने वाली हर गतिविधि को एक समान नहीं माना जा सकता। उसके स्वरूप और उपयोग के आधार पर अलग-अलग नियम लागू हो सकते हैं।
यदि कोई आवासीय फ्लैट व्यवहार में नियमित रूप से लॉजिंग सुविधा देने लगे तो संबंधित प्राधिकरण यह जांच सकता है कि उसके पास आवश्यक लाइसेंस या अनुमति है या नहीं।
मालिक की जिम्मेदारी क्यों उठती है?
समाचार रिपोर्ट में हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने यह सवाल भी उठाया है कि केवल फ्लैट का उपयोग करने वाले व्यक्ति के खिलाफ ही कार्रवाई क्यों हो, बल्कि ऐसी स्थिति में मालिक की भूमिका भी देखी जानी चाहिए।
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने अपना फ्लैट किसी एजेंसी या व्यक्ति को किराये पर दिया। बाद में वह फ्लैट नियमित रूप से अलग-अलग लोगों को कुछ घंटे या रात के हिसाब से उपलब्ध कराया जाने लगा। यदि मालिक को इस गतिविधि की जानकारी है और वह इसे रोकने के बजाय जारी रहने देता है, तो संबंधित प्राधिकरण तथ्यों के आधार पर उसकी भूमिका की जांच कर सकता है।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मकान मालिक अपने किरायेदार की हर गतिविधि के लिए स्वतः आपराधिक रूप से जिम्मेदार हो जाता है। जिम्मेदारी तय करने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि मालिक को क्या जानकारी थी, उसने किस उद्देश्य से संपत्ति किराये पर दी, किरायानामा क्या कहता है और क्या वह स्वयं इस गतिविधि में शामिल था।
अपार्टमेंट सोसाइटी की जिम्मेदारी भी अहम
आवासीय अपार्टमेंट में कई परिवार एक ही परिसर में रहते हैं। इसलिए किसी एक फ्लैट के व्यावसायिक उपयोग का असर पूरे परिसर पर पड़ सकता है।
अगर एक फ्लैट में लगातार नए लोग आते-जाते रहें, तो अन्य निवासियों को सुरक्षा और गोपनीयता से संबंधित चिंता हो सकती है। इसके अलावा पार्किंग, लिफ्ट, सुरक्षा गार्ड, कॉमन एरिया और अन्य सुविधाओं पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
कई अपार्टमेंट सोसाइटी अपने उपनियमों में फ्लैट के उपयोग से संबंधित शर्तें निर्धारित करती हैं। इसलिए किसी फ्लैट को शॉर्ट-स्टे या अन्य व्यावसायिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने से पहले सोसाइटी के नियमों को भी देखना जरूरी है।
सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मुद्दे में केवल कानूनी या व्यावसायिक पहलू नहीं है। सुरक्षा भी सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक है।
एक सामान्य आवासीय अपार्टमेंट में सुरक्षा व्यवस्था वहां रहने वाले नियमित परिवारों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। अगर एक फ्लैट में लगातार अलग-अलग लोग आते-जाते हैं, तो सुरक्षा गार्ड के लिए उनकी पहचान और प्रवेश का रिकॉर्ड रखना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
आग लगने की स्थिति में भी भवन का उपयोग और उसमें मौजूद लोगों की संख्या महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी फ्लैट में उसकी सामान्य क्षमता से अधिक लोगों को ठहराया जा रहा है, तो आपात स्थिति में जोखिम बढ़ सकता है।
इसीलिए भवन की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास, विद्युत व्यवस्था और कॉमन एरिया की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मेहमानों का रिकॉर्ड रखना क्यों जरूरी?
समाचार रिपोर्ट में धर्मशाला, गेस्ट हाउस और होटल के साथ पंजीकरण और रिकॉर्ड रखने के सवाल को भी उठाया गया है।
आतिथ्य क्षेत्र में ठहरने वाले लोगों का रिकॉर्ड रखना सुरक्षा व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है। किसी भी व्यावसायिक ठहराव व्यवस्था में यह पता होना जरूरी होता है कि परिसर में कौन ठहरा है और कब आया है।
यदि कोई आवासीय फ्लैट बिना किसी औपचारिक व्यवस्था के लगातार अलग-अलग लोगों को ठहराने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, तो यह सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती पैदा कर सकता है।
इसलिए इस प्रकार की गतिविधियों में पहचान सत्यापन और रिकॉर्ड से जुड़े नियमों की भी जांच जरूरी हो सकती है।
पुलिस में शिकायत कब की जा सकती है?
समाचार रिपोर्ट में अधिवक्ता ने कहा है कि यदि किसी अपार्टमेंट में इस प्रकार की गतिविधि चल रही है तो पुलिस या नगर निगम में शिकायत की जा सकती है।
यहां शिकायत का उद्देश्य किसी व्यक्ति को पहले से दोषी घोषित करना नहीं, बल्कि संबंधित प्राधिकरण से जांच कराने का अनुरोध करना है।
यदि किसी सोसाइटी के निवासियों को लगता है कि किसी फ्लैट का उपयोग निर्धारित नियमों के विपरीत हो रहा है, तो वे उपलब्ध तथ्यों के साथ संबंधित नगर निगम या पुलिस को सूचना दे सकते हैं।
शिकायत में केवल आरोप लगाने के बजाय यदि फ्लैट के व्यावसायिक उपयोग, विज्ञापन, बुकिंग व्यवस्था, बार-बार आने-जाने वाले लोगों या अन्य उपलब्ध जानकारी का विवरण दिया जाए तो जांच एजेंसी के लिए स्थिति समझना आसान हो सकता है।
नगर निगम क्या जांच कर सकता है?
शिकायत मिलने के बाद नगर निगम यह देख सकता है कि संबंधित परिसर का उपयोग किस उद्देश्य से हो रहा है और क्या आवश्यक नगरपालिका लाइसेंस मौजूद है।
धारा 317 के तहत होटल या लॉजिंग हाउस के रूप में उपयोग किए जा रहे परिसर का निरीक्षण करने की शक्ति नगरपालिका अधिकारियों को दी गई है।
इसके अलावा धारा 455 गैर-आवासीय उपयोग के लिए नगरपालिका लाइसेंस की व्यवस्था से संबंधित है।
यदि गतिविधि बिना आवश्यक अनुमति चलती पाई जाती है, तो संबंधित कानून और नियमों के तहत नोटिस, लाइसेंस संबंधी कार्रवाई या अन्य कदम उठाए जा सकते हैं।
भवन के स्वीकृत नक्शे की भी भूमिका
किसी भवन का उपयोग केवल किराये के समझौते से निर्धारित नहीं होता। भवन का स्वीकृत नक्शा और उसकी उपयोग श्रेणी भी महत्वपूर्ण होती है।
झारखंड नगरपालिका अधिनियम में भवनों के उपयोग और occupancy/use-group से संबंधित प्रावधान हैं। कानून में residential buildings के साथ lodging or rooming houses, hostels, dormitories और apartment houses आदि का उल्लेख अलग-अलग उपयोग श्रेणियों के संदर्भ में किया गया है।
इसलिए यदि किसी भवन को स्वीकृत आवासीय उपयोग से अलग तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, तो यह जांच का विषय बन सकता है कि क्या उस बदलाव के लिए आवश्यक अनुमति ली गई है।
केवल ऑनलाइन बुकिंग होना पर्याप्त नहीं
आजकल कमरे और फ्लैट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी बुक किए जाते हैं। लेकिन किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर संपत्ति का उपलब्ध होना अपने आप यह साबित नहीं करता कि स्थानीय कानून के तहत वह संपत्ति उस व्यावसायिक उपयोग के लिए अधिकृत भी है।
मालिक या संचालक को यह देखना होगा कि स्थानीय नगरपालिका, भवन नियम, सोसाइटी के उपनियम और अन्य लागू कानूनों के तहत क्या आवश्यकताएं हैं।
इसी तरह ग्राहक या किरायेदार के लिए भी किसी संपत्ति को बुक करने से पहले उसकी वैधता और सुरक्षा की जांच करना उपयोगी हो सकता है।
हाईकोर्ट के अधिवक्ता की सलाह क्या है?
अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने कहा कि यदि किसी अपार्टमेंट में इस प्रकार की गतिविधि चल रही है तो पुलिस और नगर निगम को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि अपार्टमेंट की सोसाइटी में ऐसी गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में उनके हवाले से यह भी कहा गया है कि कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा का नाम झारखंड हाईकोर्ट से संबंधित अन्य मामलों की रिपोर्टों में भी अधिवक्ता के रूप में सामने आता है।
क्या मालिक को सीधे दोषी माना जा सकता है?
यहां कानून का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत समझना जरूरी है। किसी संपत्ति का मालिक होना और उस संपत्ति में होने वाली हर गतिविधि के लिए स्वतः दोषी होना एक बात नहीं है।
यदि कोई मालिक अपनी संपत्ति सामान्य किरायेदारी के लिए देता है और किरायेदार बाद में बिना जानकारी के कोई नियम-विरुद्ध गतिविधि करता है, तो मालिक की भूमिका अलग तरीके से देखी जाएगी।
लेकिन यदि दस्तावेजों और जांच से यह सामने आता है कि मालिक स्वयं इस गतिविधि में शामिल था, उसने जानबूझकर संपत्ति को उस उद्देश्य से उपलब्ध कराया या जानकारी होने के बावजूद उसे जारी रहने दिया, तो परिस्थितियों के अनुसार उसकी जिम्मेदारी की जांच हो सकती है।
इसलिए कार्रवाई का आधार तथ्य और प्रमाण होना जरूरी है।
किरायेदार और मालिक के बीच स्पष्ट समझौता जरूरी
ऐसे मामलों से बचने के लिए मकान मालिकों को किरायानामा बनाते समय संपत्ति के उपयोग का उद्देश्य स्पष्ट रखना चाहिए।
यदि फ्लैट आवासीय किराये के लिए दिया गया है तो अनुबंध में यह स्पष्ट किया जा सकता है कि किरायेदार इसे होटल, लॉज, बेडवाइज हॉस्टल या अन्य व्यावसायिक गतिविधि के रूप में इस्तेमाल नहीं करेगा, जब तक कि आवश्यक अनुमति न हो।
इसी तरह सोसाइटी को भी अपने नियमों के बारे में निवासियों को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों की चिंता
इस मुद्दे का दूसरा पक्ष उन परिवारों का है जो लंबे समय से किसी अपार्टमेंट में रह रहे हैं।
एक परिवार के लिए घर केवल निजी स्थान नहीं होता। अपार्टमेंट में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं सहित कई लोग रहते हैं। यदि उनके आसपास लगातार नए और अज्ञात लोग आते-जाते रहें तो उन्हें सुरक्षा की चिंता हो सकती है।
इसी वजह से सोसाइटी को किसी भी व्यावसायिक गतिविधि पर निर्णय लेते समय निवासियों की सुरक्षा, भवन की क्षमता और स्थानीय नियमों को ध्यान में रखना चाहिए।
बेडवाइज व्यवस्था और सामान्य किरायेदारी में अंतर
सामान्य किरायेदारी में एक व्यक्ति या परिवार एक फ्लैट को अपेक्षाकृत लंबी अवधि के लिए किराये पर लेता है और वहां रहता है।
इसके विपरीत बेडवाइज व्यवस्था में एक ही फ्लैट के अलग-अलग कमरों या बेड को अलग-अलग लोगों को दिया जा सकता है। इससे फ्लैट का उपयोग हॉस्टल या लॉजिंग जैसी व्यवस्था के करीब पहुंच सकता है।
यही वह बिंदु है जहां नगरपालिका लाइसेंस और भवन उपयोग के नियम महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
शॉर्ट-स्टे मॉडल क्यों बढ़ा है?
शहरी क्षेत्रों में कुछ समय के लिए ठहरने की मांग बढ़ने के साथ शॉर्ट-स्टे मॉडल भी सामने आया है। नौकरी, पढ़ाई, मेडिकल इलाज, यात्रा, परीक्षा, इंटरव्यू या अन्य काम से शहर आने वाले लोग होटल के अलावा दूसरे विकल्प भी तलाशते हैं।
फ्लैट या कमरे का शॉर्ट-स्टे कुछ मामलों में लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकता है। लेकिन इस सुविधा के साथ स्थानीय कानून और सुरक्षा नियमों का पालन भी जरूरी है।
इसलिए मुख्य सवाल शॉर्ट-स्टे शब्द मात्र नहीं, बल्कि संपत्ति का वास्तविक उपयोग और लागू नियमों का पालन है।
नगर निगम की कार्रवाई का आधार क्या हो सकता है?
यदि कोई संपत्ति बिना आवश्यक लाइसेंस के गैर-आवासीय गतिविधि के लिए इस्तेमाल होती पाई जाती है, तो नगरपालिका कानून के तहत कार्रवाई की संभावना हो सकती है।
धारा 455 में गैर-आवासीय उपयोग के लिए लाइसेंस की आवश्यकता और लाइसेंस की शर्तों का प्रावधान है।
धारा 317 में होटल या लॉजिंग हाउस के उपयोग को लाइसेंस से जोड़ा गया है।
रांची नगर निगम स्वयं अपनी वेबसाइट पर लॉज, हॉस्टल और धर्मशाला आदि के पंजीकरण की व्यवस्था का उल्लेख करता है।
इसलिए यदि कोई आवासीय फ्लैट व्यवहार में इसी प्रकार की गतिविधि का केंद्र बन रहा है, तो संबंधित प्राधिकरण द्वारा उसके लाइसेंस और उपयोग की जांच की जा सकती है।
पुलिस की भूमिका
पुलिस की भूमिका तब महत्वपूर्ण हो सकती है जब शिकायत में आपराधिक गतिविधि, सुरक्षा का खतरा, पहचान संबंधी समस्या, विवाद या अन्य कानून-व्यवस्था का मामला सामने आए।
सिर्फ नगरपालिका नियम का उल्लंघन और आपराधिक अपराध एक ही चीज नहीं हैं। इसलिए शिकायत मिलने पर पुलिस और नगर निगम अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।
यह भी जरूरी है कि किसी निर्दोष व्यक्ति या वैध किरायेदार को केवल संदेह के आधार पर परेशान न किया जाए। जांच के बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई होनी चाहिए।
सोसाइटी को क्या करना चाहिए?
अपार्टमेंट की सोसाइटी के लिए कुछ बुनियादी कदम उपयोगी हो सकते हैं:
पहला, सोसाइटी के उपनियमों में फ्लैट के उपयोग की स्पष्ट शर्तें रखी जाएं।
दूसरा, किरायेदारों का आवश्यक सत्यापन कराया जाए।
तीसरा, कॉमन एरिया में आने-जाने की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी जाए।
चौथा, यदि कोई फ्लैट लगातार होटल/लॉजिंग की तरह इस्तेमाल हो रहा है तो सोसाइटी मालिक को लिखित रूप से जानकारी दे सकती है।
पांचवां, गंभीर स्थिति में संबंधित नगर निगम या पुलिस को शिकायत की जा सकती है।
इन कदमों का उद्देश्य किसी व्यक्ति को परेशान करना नहीं बल्कि पूरे परिसर की सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना होना चाहिए।
मालिकों के लिए क्या सावधानी जरूरी?
फ्लैट मालिकों को भी किराये पर देते समय कुछ सावधानियां रखनी चाहिए।
- लिखित किरायानामा बनाएं।
- किरायेदार की पहचान सत्यापित करें।
- संपत्ति किस उद्देश्य से किराये पर दी जा रही है, स्पष्ट करें।
- व्यावसायिक उपयोग की अनुमति है या नहीं, इसकी जानकारी रखें।
- सोसाइटी के नियमों की प्रति किरायेदार को दें।
- यदि किरायेदार फ्लैट को अलग-अलग लोगों को शॉर्ट-स्टे पर देने लगे तो स्थिति की जानकारी लें।
- आवश्यक होने पर नगर निगम से लाइसेंस/अनुमति की स्थिति स्पष्ट करें।
इससे भविष्य में मालिक और किरायेदार के बीच विवाद की संभावना भी कम हो सकती है।
शॉर्ट-स्टे संचालकों के लिए सबसे बड़ा सवाल लाइसेंस
यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से कई लोगों को ठहराकर उससे आय अर्जित कर रहा है, तो उसे यह जांचना चाहिए कि उसकी गतिविधि किस कानूनी श्रेणी में आती है।
किसी व्यवसाय को केवल ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध कर देना नगरपालिका लाइसेंस का विकल्प नहीं है।
रांची नगर निगम की वेबसाइट के अनुसार विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नगर निगम स्तर पर लाइसेंस और पंजीकरण की व्यवस्था है।
इसलिए शॉर्ट-स्टे सुविधा चलाने वाले व्यक्ति को स्थानीय निकाय और अन्य संबंधित विभागों की आवश्यकताओं की जानकारी लेनी चाहिए।
हाईकोर्ट में संपत्ति उपयोग से जुड़े मामले
रांची में संपत्ति के उपयोग और नगरपालिका ट्रेड लाइसेंस से जुड़े मामले अदालतों तक भी पहुंचे हैं। अगस्त 2026 में झारखंड हाईकोर्ट के एक मामले में ट्रेड लाइसेंस रद्द किए जाने और परिसर को सील करने से संबंधित विवाद सामने आया था। अदालत ने उस चरण में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई पर रोक लगाते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट के समक्ष नगरपालिका द्वारा स्वीकृत नक्शे के अनुरूप परिसर के उपयोग और ट्रेड लाइसेंस रद्द करने का विवाद आया।
ये मामले यह दिखाते हैं कि ट्रेड लाइसेंस, भवन का स्वीकृत उपयोग और वास्तविक उपयोग जैसे मुद्दे कानूनी विवाद का विषय बन सकते हैं। हालांकि इन मामलों के तथ्य अलग हैं और इन्हें शॉर्ट-स्टे वाले प्रत्येक मामले पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
आगे क्या हो सकता है?
अब सवाल यह है कि यदि रांची में किसी आवासीय अपार्टमेंट में बेडवाइज या शॉर्ट-स्टे गतिविधि चल रही है तो प्रशासन क्या करेगा।
पहला कदम शिकायत की जांच हो सकता है। नगर निगम यह देख सकता है कि संबंधित संपत्ति के पास आवश्यक लाइसेंस है या नहीं।
दूसरा, भवन के उपयोग और स्वीकृत नक्शे की जांच की जा सकती है।
तीसरा, सोसाइटी के नियमों और संपत्ति के वास्तविक इस्तेमाल की जानकारी ली जा सकती है।
चौथा, यदि मामला कानून-व्यवस्था या आपराधिक गतिविधि से जुड़ा है तो पुलिस अपनी जांच कर सकती है।
यदि उल्लंघन प्रमाणित होता है तो संबंधित कानून और नियमों के अनुसार नोटिस या अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
निष्कर्ष
रांची में आवासीय अपार्टमेंट को बेडवाइज या नियमित शॉर्ट-स्टे व्यवस्था के रूप में इस्तेमाल करने का मुद्दा केवल मकान मालिक और किरायेदार के बीच का निजी विवाद नहीं है। इसमें भवन का स्वीकृत उपयोग, नगरपालिका लाइसेंस, सोसाइटी के उपनियम, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य लागू कानूनों की भूमिका हो सकती है।
झारखंड नगरपालिका अधिनियम की धारा 455 गैर-आवासीय उपयोग के लिए नगरपालिका लाइसेंस की व्यवस्था करती है, जबकि धारा 317 होटल या लॉजिंग हाउस के रूप में परिसर के उपयोग को लाइसेंस से जोड़ती है।
रांची नगर निगम भी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर लॉज, हॉस्टल, बैंक्वेट हॉल/मैरिज हॉल और धर्मशाला के पंजीकरण की व्यवस्था का उल्लेख करता है।
ऐसे में यदि किसी आवासीय फ्लैट में नियमित रूप से अलग-अलग लोगों को बेड या कम अवधि के लिए ठहराने की व्यवस्था की जा रही है, तो संबंधित व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका उपयोग सभी लागू नियमों और आवश्यक लाइसेंस के अनुरूप है।
वहीं अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों को यदि ऐसी गतिविधि से सुरक्षा या अन्य समस्या महसूस होती है, तो वे पहले सोसाइटी प्रबंधन को सूचित कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर नगर निगम या पुलिस के समक्ष शिकायत रख सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी फ्लैट या मालिक को केवल आरोप के आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता। संबंधित संपत्ति का वास्तविक उपयोग, दस्तावेज, लाइसेंस, भवन नियम और उपलब्ध साक्ष्य की जांच के बाद ही प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई का निर्णय होना चाहिए।
इस पूरे मामले ने रांची में तेजी से बदलते शहरी आवास मॉडल के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा किया है—क्या आवासीय अपार्टमेंट को होटल, लॉज या बेडवाइज शॉर्ट-स्टे की तरह चलाया जा रहा है, और यदि हां, तो क्या उसके लिए जरूरी नियमों और लाइसेंस का पालन किया जा रहा है? यही वह सवाल है जिसकी जांच संबंधित प्राधिकरणों को तथ्यों के आधार पर करनी होगी।