पेपर लीक रोकने के लिए NTA का बड़ा फैसला: 5,000 से अधिक विशेषज्ञों का पैनल तैयार, परीक्षा से ठीक पहले तैयार होगा प्रश्न पत्रपेपर लीक रोकने के लिए NTA का बड़ा फैसला: 5,000 से अधिक विशेषज्ञों का पैनल तैयार, परीक्षा से ठीक पहले तैयार होगा प्रश्न पत्र

नई दिल्ली:राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने देश में NEET, JEE Main, CUET और UGC NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक जैसी गंभीर घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाने के लिए एक नया ‘मास्टरप्लान’ तैयार किया है। हालिया विवादों और सुधार सिफारिशों के बाद NTA अब एक व्यापक, एन्क्रिप्टेड और स्वचालित ‘क्वेश्चन बैंक’ (Question Bank) प्रणाली लागू करने जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत परीक्षा शुरू होने से महज कुछ मिनट पहले ही फाइनल प्रश्न पत्र तैयार किया जाएगा।

5,000 से अधिक विशेषज्ञों और अनुवादकों का पैनल

NTA ने देशभर से देश के शीर्ष शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, विषय विशेषज्ञों और भाषा विशेषज्ञों को शामिल करते हुए 5,000 से अधिक विशेषज्ञों का एक विशाल पैनल गठित किया है। यह पैनल विभिन्न विषयों के प्रश्नों को तैयार करने, आंसर-की (Answer Key) के सत्यापन, पाठ्यक्रम मैपिंग और AI द्वारा अनूदित (Translated) प्रश्नों की मानवी समीक्षा के लिए काम करेगा।
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एजेंसी ने इस पैनल में शामिल होने की कोई अंतिम तिथि तय नहीं की है; पूरे साल योग्य विशेषज्ञों को इसमें जोड़ा जाता रहेगा ताकि क्वेश्चन बैंक का दायरा लगातार विस्तृत होता रहे।

‘एग्जाम-अग्निओस्टिक’ मॉडल और लास्ट मिनट पेपर जनरेशन

NTA अब एक ऐसे ‘एग्जाम-अग्नोस्टिक’ (Exam-Agnostic) और डिजिटल मॉडल पर काम कर रहा है, जिसमें प्रश्न पत्र तैयार करने वाले या अनुवाद करने वाले किसी भी विशेषज्ञ को यह पता नहीं होगा कि उनका तैयार किया गया सवाल किस परीक्षा में, कब और किस शिफ्ट में पूछा जाएगा।

एनटीए के इस नए ढांचे के तहत:

रैंडम सिलेक्शन: परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले केंद्रीय सिस्टम से ऑटोमेटेड एल्गोरिदम द्वारा प्रश्नों का चुनाव कर अंतिम पेपर तैयार होगा।

डिफिकल्टी बैलेंस (कठिनाई का संतुलन): JEE और CUET जैसी मल्टी-शिफ्ट कंप्यूटर-बेस्ड परीक्षाओं (CBT) में शिफ्ट 1 और शिफ्ट 2 के पेपरों की कठिनाई का स्तर (Psychometric curve) बिल्कुल एकसमान बनाए रखने में यह सिस्टम मदद करेगा।

किसी तीसरे प्लेटफॉर्म पर निर्भरता नहीं: पूरी परीक्षा प्रणाली किसी एक खास वेंडर, तकनीक या बाहरी एजेंसी पर निर्भर नहीं रहेगी।

कोचिंग से जुड़े लोगों पर सख्त नो-एंट्री और 4-स्तरीय जांच

विशेषज्ञों का चयन पारदर्शी और सुरक्षित रहे, इसके लिए 4-स्तरीय (4-Layer Verification) सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जा रही है:

योग्यता व अनुभव की जांच: आवेदकों के शैक्षणिक रिकॉर्ड, रिसर्च पेपर्स और कार्यानुभव का गहन मूल्यांकन।

सब्जेक्ट कमिटी समीक्षा: विशेषज्ञों की विशेष समिति द्वारा अकादमिक कद की परख।

बैकग्राउंड चेक (सबसे अहम कदम): यह सुनिश्चित करना कि चयनित विशेषज्ञ किसी भी निजी कोचिंग संस्थान, स्टडी मटेरियल पब्लिशर या क्वेश्चन बैंक वेंडर से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से न जुड़ा हो। (इसी पुनर्गठन प्रक्रिया के तहत हाल ही में लगभग 600 संदिग्ध या पुराने विशेषज्ञों को हटाया भी गया है।)

सख्त नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट (NDA): चुने गए सभी विशेषज्ञों को हर काम से पहले कानूनी रूप से कड़े गोपनीयता समझौते पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा।

छात्रों का भरोसा वापस जीतने की कोशिश
बीते दिनों NEET-UG और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में सामने आई पेपर लीक एवं अव्यवस्थाओं की खबरों के बाद NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर यह बड़ा सुधार किया जा रहा है।

चाहे कंप्यूटर-बेस्ड (CBT) परीक्षाएं हों या पेन-पेपर मोड वाली परीक्षा, NTA का यह नया एन्क्रिप्टेड क्वेश्चन बैंक और ‘लास्ट मिनट क्वेश्चन पेपर जनरेशन’ सिस्टम देश के करोड़ों परीक्षार्थियों और अभिभावकों के बीच परीक्षा की पवित्रता और विश्वसनीयता को फिर से बहाल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

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